daaku - frederik shilar

सारांश

'डी रॉबर' (Die Räuber - डाकू) जर्मन लेखक फ्रीड्रिक शिलर द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध नाटक है। यह कहानी दो भाइयों, कार्ल और फ्रांज मूर के बीच के तीव्र संघर्ष और ईर्ष्या पर आधारित है। कार्ल मूर बड़ा भाई है, जो अत्यधिक भावुक, साहसी और अपने पिता का प्रिय है। दूसरी ओर, छोटा भाई फ्रांज मूर शारीरिक रूप से कुरूप, चालाक और ईर्ष्यालु है।

फ्रांज अपने पिता, काउंट वॉन मूर, को कार्ल के खिलाफ भड़काने के लिए एक साजिश रचता है। वह एक झूठा पत्र तैयार करता है जिसमें कार्ल को एक अपराधी और व्यभिचारी के रूप में चित्रित किया जाता है। पिता इस धोखे में आकर कार्ल को बेदखल कर देते हैं। इस अन्याय और अस्वीकृति से दुखी और क्रोधित होकर, कार्ल स्थापित सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ विद्रोह कर देता है और बोहेमियन जंगलों में डाकुओं के एक गिरोह का नेता बन जाता है। वह एक "रॉबिन हुड" जैसी छवि अपनाने की कोशिश करता है, लेकिन जल्द ही उसके साथी क्रूर और हिंसक कृत्य करने लगते हैं, जिससे कार्ल आंतरिक द्वंद्व में फंस जाता है।

इस बीच, फ्रांज अपने पिता की संपत्ति और कार्ल की मंगेतर, अमेलिया, को हथियाने की कोशिश करता है। वह अपने पिता को यह विश्वास दिलाकर कि कार्ल युद्ध में मारा गया है, उन्हें सदमे से मारने की कोशिश करता है और उन्हें एक पुराने टॉवर में भूखा मरने के लिए कैद कर देता है। अंत में, कार्ल भेष बदलकर वापस लौटता है और सच्चाई का पता लगाता है। वह अपने डाकू साथियों को फ्रांज के महल पर हमला करने का आदेश देता है। डर के मारे फ्रांज आत्महत्या कर लेता है। बूढ़े पिता जब जानते हैं कि उनका प्यारा बेटा कार्ल ही कुख्यात डाकू नेता है, तो वे सदमे से दम तोड़ देते हैं। कार्ल, जो अपने डाकू साथियों से खून की शपथ से बंधा है, अपनी प्रेमिका अमेलिया की प्रार्थना पर उसकी हत्या कर देता है और अंत में खुद को कानून के हवाले करने का फैसला करता है ताकि एक गरीब मजदूर को उसकी गिरफ्तारी का इनाम मिल सके।


किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: अंक 1 (साजिश और विद्रोह)

इस पहले अंक में कहानी की पृष्ठभूमि तैयार होती है। फ्रांज अपने भाई कार्ल को बर्बाद करने की योजना बनाता है। वह अपने पिता को लिपज़िग से आया एक फर्जी पत्र पढ़ाता है, जिसमें कार्ल के बुरे कामों का जिक्र होता है। दुखी पिता कार्ल को पत्र लिखकर उसे परिवार से अलग करने का फैसला करते हैं, जिसे फ्रांज और भी कठोर शब्दों में लिखता है। जब कार्ल को यह पत्र मिलता है, तो वह गहरे सदमे और गुस्से में आ जाता है। वह अपने दोस्तों के उकसाने पर एक डाकू गिरोह बनाने के लिए तैयार हो जाता है और उन्हें अपना नेता चुनता है। उधर महल में, फ्रांज अमेलिया को लुभाने की कोशिश करता है, लेकिन अमेलिया कार्ल के प्रति वफादार रहती है।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
माक्सिमिलियन (काउंट वॉन मूर) बूढ़ा, कमजोर दिल का, बेटों से प्यार करने वाला लेकिन आसानी से बहकावे में आने वाला पिता। अपने बेटों का भला देखना और अपने परिवार की प्रतिष्ठा बचाना।
कार्ल मूर बड़ा बेटा, आदर्शवादी, भावुक, विद्रोही और साहसी। समाज के पाखंड के खिलाफ लड़ना और न्याय पाना।
फ्रांज मूर छोटा बेटा, कुरूप, ठंडी बुद्धि का, ईर्ष्यालु और अत्यधिक चालाक। पिता की संपत्ति हड़पना, कार्ल को नष्ट करना और अमेलिया को पाना।
अमेलिया वॉन एडेलरिच अनाथ भतीजी, सुंदर, दृढ़निश्चयी और वफादार। कार्ल से सच्चा प्यार करना और उसकी याद के प्रति वफादार रहना।
शपिगेलबर्ग (Spiegelberg) कार्ल का दोस्त, धूर्त, स्वार्थी और क्रूर अपराधी। डाकू गिरोह का नेतृत्व करना और लूटपाट मचाना।

अनुभाग 2: अंक 2 (झूठ और सत्ता का हस्तांतरण)

फ्रांज अपनी योजना के दूसरे चरण में कदम रखता है। वह हर्मन नाम के एक व्यक्ति को भेष बदलकर काउंट के पास भेजता है। हर्मन बताता है कि कार्ल प्राग की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हो गया है और उसकी अंतिम इच्छा थी कि अमेलिया फ्रांज से शादी कर ले। यह सुनकर बूढ़े काउंट सदमे में चले जाते हैं और बेहोश हो जाते हैं (उन्हें मृत मान लिया जाता है)। फ्रांज खुद को महल का नया स्वामी घोषित कर देता है। दूसरी तरफ, बोहेमिया के जंगलों में, कार्ल का डाकू गिरोह अपने एक साथी रोलर को फांसी से बचाने के लिए एक पूरे शहर में आग लगा देता है। निर्दोष लोगों की मौत से कार्ल को गहरा दुख होता है और वह अपने चुने हुए रास्ते की भयावहता को महसूस करने लगता है।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
हर्मन (Hermann) एक रईस का नाजायज बेटा, कमजोर इच्छाशक्ति वाला और लालची। फ्रांज की मदद करके बदला लेना और धन कमाना।
श्वाइत्ज़र (Schweizer) निर्भीक, वफादार डाकू, कार्ल का दाहिना हाथ। कार्ल के प्रति अपनी निष्ठा निभाना और लड़ना।
रोलर (Roller) कार्ल का एक और वफादार डाकू साथी। गिरोह के साथ मिलकर समाज को चुनौती देना।

अनुभाग 3: अंक 3 (प्रेम और अस्वीकार)

फ्रांज अब पूरी तरह से निरंकुश शासक बन चुका है। वह अमेलिया पर शादी करने के लिए दबाव डालता है और उसे अपनी दासी बनाने की धमकी देता है। अमेलिया बहादुरी से उसका विरोध करती है और उसे थप्पड़ मार देती है। इसी बीच, पछतावे से भरा हर्मन गुप्त रूप से अमेलिया से मिलता है और उसे बताता है कि कार्ल और बूढ़े काउंट दोनों अभी भी जीवित हैं। जंगलों में, कार्ल की सेना को सरकारी सैनिकों द्वारा घेर लिया जाता है। एक पादरी कार्ल को आत्मसमर्पण करने के बदले माफी का प्रस्ताव देता है, लेकिन डाकू इसे ठुकरा देते हैं और बहादुरी से लड़ते हुए जीत हासिल करते हैं। यहीं पर कोसिन्स्की नाम का एक नया युवक गिरोह में शामिल होता है, जिसकी कहानी कार्ल को अपनी अमेलिया की याद दिलाती है, और वह भेष बदलकर वापस अपने घर जाने का फैसला करता है।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
कोसिन्स्की (Kosinsky) युवा, अपनी किस्मत का मारा, भावुक प्रेमी। अन्याय का बदला लेने के लिए डाकुओं में शामिल होना।

अनुभाग 4: अंक 4 (रहस्योद्घाटन और पुनर्मिलन)

कार्ल 'काउंट वॉन ब्रांड' के रूप में भेष बदलकर अपने पुश्तैनी महल में आता है। अमेलिया उसे पहचान नहीं पाती लेकिन अजनबी के प्रति एक अजीब सा आकर्षण महसूस करती है। फ्रांज को संदेह हो जाता है कि यह अजनबी और कोई नहीं बल्कि कार्ल है। वह अपने पुराने वफादार नौकर डैनियल को मेहमान को जहर देने का आदेश देता है। डैनियल कार्ल के हाथ के एक पुराने निशान से उसे पहचान लेता है। कार्ल डैनियल को शांत करता है लेकिन वहां से तुरंत जाने का फैसला करता है। महल से भागते समय, रात में कार्ल जंगल में बने एक पुराने खंडहर टॉवर के पास पहुंचता है। वहां उसे अपने पिता माक्सिमिलियन मिलते हैं, जो भूखे-प्यासे कैद हैं। कार्ल को पता चलता है कि यह उसके भाई फ्रांज की करतूत है। क्रोध में आकर वह अपने डाकुओं को महल पर हमला करने और फ्रांज को जिंदा पकड़ने का आदेश देता है।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
डैनियल (Daniel) बूढ़ा, वफादार, धार्मिक और ईमानदार नौकर। अपने स्वामियों की सेवा करना और पाप से बचना।

अनुभाग 5: अंक 5 (न्याय और त्रासदी का अंत)

फ्रांज बुरे सपनों और अपने पापों के डर से पागल होने लगता है। जब डाकू महल पर धावा बोलते हैं, तो वह पादरी से प्रार्थना करने के लिए कहता है, लेकिन उसे अपनी आत्मा के लिए कोई राहत नहीं मिलती। पकड़े जाने के डर से फ्रांज अपनी टोपी की डोरी से खुद को फांसी लगा लेता है। डाकू कार्ल के पिता को उसके पास लाते हैं। जब बूढ़े पिता को पता चलता है कि उनका रक्षक और यह डाकू नेता कोई और नहीं बल्कि उनका प्यारा बेटा कार्ल ही है, तो वे सदमे से मर जाते हैं। अमेलिया को भी वहां लाया जाता है। कार्ल डाकुओं के साथ अपनी खून की शपथ के कारण अमेलिया को अपनाने में असमर्थ है। अमेलिया, कार्ल के बिना जीने से बेहतर मरना चुनती है और कार्ल से उसे मारने की भीख मांगती है। कार्ल भारी मन से अमेलिया की हत्या कर देता है। अंत में, कार्ल को अपनी गलती का एहसास होता है कि अन्याय को खत्म करने के लिए खुद अन्याय का रास्ता चुनना गलत था। वह कानून के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए निकल पड़ता है।


अतिरिक्त विवरण

साहित्यिक विधा (Literary Genre)

  • विधा: नाटक (त्रासदी / Tragedy)
  • आंदोलन: यह नाटक जर्मन साहित्य के "स्टर्म अंड ड्रैंग" (Sturm und Drang - तूफान और तनाव) काल की एक उत्कृष्ट रचना है, जो तर्कसंगतता के खिलाफ भावनाओं, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विद्रोह पर जोर देती है।

लेखक के बारे में (Friedrich Schiller)

फ्रीड्रिक शिलर (1759–1805) एक महान जर्मन कवि, दार्शनिक और नाटककार थे। वे योहान वोल्फगांग वॉन गोटे के करीबी मित्र थे। शिलर ने यह नाटक तब लिखा था जब वे एक सैन्य अकादमी में चिकित्सा के छात्र थे। इस नाटक ने उन्हें रातों-रात पूरे जर्मनी में प्रसिद्ध कर दिया था। उनकी रचनाओं में स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और नैतिक जिम्मेदारी के विषय प्रमुखता से दिखाई देते हैं।

नैतिकता (Moral of the Story)

'डी रॉबर' हमें यह सिखाती है कि "बुराई का अंत कभी अच्छा नहीं हो सकता और गलत तरीकों से कभी सच्चे न्याय की स्थापना नहीं की जा सकती।" कार्ल मूर ने सामाजिक पाखंड और अन्याय से लड़कर न्याय पाने के लिए अपराध का रास्ता चुना, लेकिन अंततः वह खुद विनाश और त्रासदी का कारण बना। बदला और क्रोध अंत में व्यक्ति को केवल विनाश की ओर ले जाते हैं।

रोचक तथ्य (Trivia/Curiosities)

  1. गुमनाम प्रकाशन: शिलर ने इस नाटक को पहली बार अपने पैसे से और गुमनाम रूप से (बिना लेखक के नाम के) प्रकाशित करवाया था क्योंकि उन्हें सैन्य अकादमी में रहते हुए नाटक लिखने की अनुमति नहीं थी।
  2. ऐतिहासिक प्रीमियर: 1782 में जब इस नाटक का पहला मंचन मैनहेम में हुआ, तो दर्शक इतने रोमांचित हुए कि थियेटर में चीख-पुकार मच गई, कुछ लोग बेहोश हो गए और लोग अजनबी होकर भी एक-दूसरे के गले लग गए।
  3. गिरफ्तारी की सजा: नाटक के प्रीमियर को देखने के लिए शिलर अपनी अकादमी से बिना अनुमति के भाग गए थे। जब उनके ड्यूक को इसका पता चला, तो शिलर को 14 दिनों की जेल की सजा दी गई और उन पर आगे कोई भी गैर-चिकित्सीय पुस्तक लिखने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इस वजह से उन्हें वहां से भागना पड़ा था।