landan - saimual johnson

लंदन (London)

सारांश

सैमुअल जॉनसन की कविता 'लंदन' 1738 में प्रकाशित हुई थी और यह रोमन व्यंग्यकार जुवेनाल की तीसरी व्यंग्य का एक अनुकरण है। कविता में एक वक्ता अपने मित्र थेल्स को लंदन छोड़ते हुए देखता है। थेल्स लंदन की नैतिक गिरावट, भ्रष्टाचार, अपराध, गरीबी और विदेशी (विशेषकर फ्रांसीसी) प्रभाव से बहुत निराश है। वह शहर के पतन पर गहरा दुख व्यक्त करता है और एक सरल, ग्रामीण जीवन के लिए निकल जाता है, जहाँ उसे लगता है कि पुण्य और ईमानदारी को अधिक महत्व दिया जाता है। वक्ता थेल्स के विचारों से सहमत है और शहर की बुराइयों पर अपनी स्वयं की निराशा को प्रतिध्वनित करता है। यह कविता ब्रिटिश देशभक्ति की भावना और तत्कालीन राजनीति (विशेषकर रॉबर्ट वालपोल के प्रशासन) की आलोचना को दर्शाती है, जबकि शहरी जीवन की जटिलताओं और खतरों के विपरीत ग्रामीण सादगी की प्रशंसा करती है। यह एक सामाजिक आलोचना है जो उस समय के लंदन के नैतिक और सामाजिक ताने-बाने पर प्रकाश डालती है।

किताब के अनुभाग

यह कविता अलग-अलग खंडों या अध्यायों में संरचित नहीं है, बल्कि एक लंबी कथात्मक कविता है। इसे समझने के लिए, हम इसे प्रमुख विषयगत वर्गों में विभाजित करेंगे।

अनुभाग 1: थेल्स का प्रस्थान और लंदन की दुर्दशा

कविता एक सुबह से शुरू होती है जब वक्ता अपने मित्र थेल्स को लंदन छोड़ते हुए देखता है। थेल्स टेम्स नदी पर नाव में सवार होकर वेल्स की ओर जा रहा है। वक्ता उसे अलविदा कहने के लिए मौजूद है। थेल्स लंदन छोड़ने के अपने कारणों को बताते हुए एक लंबा भाषण शुरू करता है। वह कहता है कि अब लंदन में एक ईमानदार और गुणी व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं है। शहर भ्रष्टाचार, लालच, अपराध और दिखावे से भर गया है। उसके लिए अब लंदन में रहना असंभव है जहाँ उसकी ईमानदारी का कोई मूल्य नहीं।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
थेल्स ईमानदार, पुण्यात्मा, देशभक्त, आदर्शवादी, सामाजिक आलोचक। लंदन के नैतिक पतन, भ्रष्टाचार, अपराध, विदेशी प्रभाव, गरीबी और न्याय की कमी से घृणा। ग्रामीण सादगी और पुण्य की ओर लौटना चाहते हैं, जहाँ उन्हें लगता है कि वे एक सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं।
वक्ता (कवि का मुखौटा) थेल्स का मित्र, लंदन में रहता है, थेल्स की चिंताओं से सहमत है, शहर के पतन पर दुखी है, सामाजिक आलोचक। थेल्स के विचारों से सहानुभूति, लंदन की समस्याओं को उजागर करना, समाज में नैतिकता और पुण्य को पुनः स्थापित करने की इच्छा। अपने मित्र को अलविदा कहना और उसकी प्रस्थान के कारणों को सुनना।

अनुभाग 2: विदेशी प्रभाव और भ्रष्टाचार की आलोचना

थेल्स अपनी शिकायत जारी रखता है, विशेष रूप से लंदन में बढ़ते फ्रांसीसी प्रभाव की निंदा करता है। वह फ्रांसीसी फैशन, शिष्टाचार और भाषा की नकल करने वाले अंग्रेजों से घृणा करता है, इसे ब्रिटिश पहचान का क्षरण मानता है। वह शहर में व्याप्त भ्रष्टाचार और उन लोगों को निशाना बनाता है जो पैसा और शक्ति हासिल करने के लिए अपनी नैतिकता से समझौता करते हैं। वह कहता है कि लंदन अब ऐसे लोगों का शहर बन गया है जो झूठ और धोखे के माध्यम से सफल होते हैं, जबकि ईमानदार लोग संघर्ष करते हैं और उपेक्षित रहते हैं। थेल्स ऐसे समाज में रहने से इनकार करता है जहाँ योग्यता और परिश्रम का कोई सम्मान नहीं है।

अनुभाग 3: अपराध, गरीबी और न्याय की विफलता

थेल्स लंदन में बढ़ते अपराध दर और असुरक्षा पर चिंता व्यक्त करता है। वह बताता है कि कैसे सड़कें चोरों और लुटेरों से भरी हुई हैं, और कैसे गरीब लोग भूख और बेघर होने से पीड़ित हैं, जबकि अमीर लोग अपनी विलासिता में डूबे हुए हैं। वह न्याय प्रणाली की विफलता की भी आलोचना करता है, जहाँ अपराधियों को अक्सर छोड़ दिया जाता है और निर्दोषों को दंडित किया जाता है। वह कहता है कि शहर के अधिकारी इन समस्याओं का समाधान करने में विफल रहे हैं, या शायद वे स्वयं भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। वह एक ऐसे समाज की कल्पना करता है जहाँ अमीर और गरीब सभी को समान न्याय मिले।

अनुभाग 4: ग्रामीण जीवन की प्रशंसा

लंदन की बुराइयों का वर्णन करने के बाद, थेल्स ग्रामीण जीवन की तुलना में उसके गुणों की प्रशंसा करता है। वह कहता है कि ग्रामीण इलाकों में एक व्यक्ति सादगी, ईमानदारी और शांति पा सकता है। वहाँ कम लालच, कम अपराध और अधिक प्राकृतिक सौंदर्य है। वह एक ऐसी जगह पर रहना चाहता है जहाँ उसे अपनी ईमानदारी के लिए पुरस्कृत किया जाए, न कि दंडित। वह वेल्स के पहाड़ी इलाकों की ओर जाने की बात करता है, जहाँ वह एक साधारण कुटीर में शांतिपूर्ण जीवन जीने की उम्मीद करता है, और जहाँ वह प्रकृति और पुण्य के करीब रह सकता है।

अनुभाग 5: वक्ता की सहमति और भविष्य की आशा

थेल्स अपना भाषण समाप्त करता है और नाव में सवार होकर आगे बढ़ता है। वक्ता थेल्स के विचारों से पूरी तरह सहमत है और उसकी भावनाओं को साझा करता है। वह भी लंदन की दुर्दशा पर दुख व्यक्त करता है और थेल्स के जाने पर खेद प्रकट करता है। वक्ता भी एक ऐसे समय की उम्मीद करता है जब लंदन में पुण्य और ईमानदारी फिर से स्थापित हो जाएगी, और जब उसके मित्र थेल्स जैसे लोग वापस लौट सकेंगे। हालांकि, वर्तमान में, वह भी लंदन में रहने के लिए मजबूर है, जबकि उसके मित्र बेहतर जीवन की तलाश में चले गए हैं। कविता का समापन वक्ता की निराशा और एक बेहतर भविष्य की अस्पष्ट आशा के साथ होता है।


साहित्यिक शैली

'लंदन' एक व्यंग्यात्मक कविता है। यह सामाजिक और राजनीतिक आलोचना को व्यक्त करने के लिए व्यंग्य का उपयोग करती है। इसकी शैली नियोक्लासिकल है, जो रोमन साहित्य (विशेष रूप से जुवेनाल) से प्रेरणा लेती है, और यह वीर युग्मों (heroic couplets) में लिखी गई है।

लेखक के बारे में तथ्य

  • सैमुअल जॉनसन (1709-1784) 18वीं सदी के एक प्रमुख अंग्रेजी साहित्यिक व्यक्ति थे।
  • वह एक कवि, निबंधकार, नैतिकतावादी, साहित्यिक आलोचक, जीवनी लेखक और लेक्सिकोग्राफर थे।
  • उनका सबसे प्रसिद्ध कार्य 'अ डिक्शनरी ऑफ द इंग्लिश लैंग्वेज' (1755) है, जिसे अंग्रेजी भाषा के सबसे प्रभावशाली शब्दकोशों में से एक माना जाता है।
  • 'लंदन' जॉनसन की शुरुआती सफलताओं में से एक थी।
  • उनकी जीवनी 'द लाइफ ऑफ सैमुअल जॉनसन', जेम्स बॉसवेल द्वारा लिखी गई, अंग्रेजी साहित्य की सबसे प्रसिद्ध जीवनियों में से एक है।

नैतिक शिक्षा (Moraleja)

इस कविता की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि नैतिक भ्रष्टाचार और सामाजिक पतन व्यक्तिगत पुण्य और ईमानदारी के लिए एक विषाक्त वातावरण बनाते हैं। यह हमें चेतावनी देती है कि यदि समाज अपने नैतिक मूल्यों और न्याय प्रणाली की उपेक्षा करता है, तो सबसे अच्छे और सबसे ईमानदार लोग भी उससे दूर हो जाएंगे। यह ग्रामीण सादगी और पुण्य के महत्व को शहरी जटिलता और अनैतिकता के विपरीत उजागर करती है।

रोचक तथ्य

  • 'लंदन' जॉनसन की पहली बड़ी साहित्यिक सफलता थी। इसे अनाम रूप से प्रकाशित किया गया था, लेकिन इसकी लोकप्रियता ने जल्द ही जॉनसन को साहित्यिक हलकों में पहचान दिलाई।
  • जॉनसन ने इस कविता को मात्र कुछ गिनी (मुद्रा) में बेचा था, लेकिन इसने उन्हें बहुत प्रसिद्धि दिलाई।
  • थेल्स नाम ग्रीक दार्शनिक थेल्स ऑफ मिलेटस से लिया गया है, लेकिन कविता में यह नाम अक्सर जॉनसन के दोस्त और सहयोगी रिचर्ड सैवेज को संदर्भित करने वाला माना जाता है, जो वास्तव में गरीबी और कठिनाई के कारण लंदन छोड़ गए थे।
  • कविता का मुख्य लक्ष्य तत्कालीन ब्रिटिश प्रधान मंत्री रॉबर्ट वालपोल के भ्रष्ट और विवादास्पद प्रशासन की आलोचना करना था, हालांकि इसका सीधे तौर पर नाम नहीं लिया गया था।
  • जुवेनाल की तीसरी व्यंग्य, जिस पर यह आधारित है, रोमन नागरिक उमब्रिकियस के रोम छोड़ने और ग्रामीण इलाकों में जाने के बारे में थी, क्योंकि वह शहर की बुराइयों को सहन नहीं कर सकता था। जॉनसन ने इस विषय को 18वीं सदी के लंदन में सफलतापूर्वक अनुकूलित किया।