rasselas - saimual johnson

सारांश

सैमुअल जॉनसन का उपन्यास 'रासेलास' एक दार्शनिक कथा है जो राजकुमार रासेलास की शाश्वत सुख की तलाश की कहानी कहता है। रासेलास, इथियोपिया के राजकुमार, को हैप्पी वैली नामक एक संरक्षित, सुंदर घाटी में रखा गया है, जहाँ हर इच्छा पूरी होती है, लेकिन फिर भी वह ऊब और असंतुष्टि महसूस करता है। वह दुनिया को अनुभव करने और सच्चा सुख खोजने के लिए घाटी से बाहर निकलने का फैसला करता है। अपने गुरु और मार्गदर्शक, कवि इम्लाक, अपनी बहन नेकाया और उसकी दासी पेकुआ के साथ, वे घाटी से भाग जाते हैं और काहिरा पहुँचते हैं।

काहिरा में, वे विभिन्न प्रकार के जीवन और व्यक्तियों का अवलोकन करते हैं: चरवाहे, संत, अमीर, विद्वान और दार्शनिक। रासेलास और उसके साथी पाते हैं कि कोई भी वर्ग या जीवनशैली पूर्ण सुख प्रदान नहीं करती है। हर कोई किसी न किसी रूप में दुखी या असंतुष्ट है - चाहे वह आकांक्षाओं की पूर्ति न हो, भाग्य का अभाव हो, या दुख से मुक्ति न हो। वे एक ऐसे दार्शनिक से मिलते हैं जो दावा करता है कि तर्क ही सुख का मार्ग है, लेकिन उसकी बेटी की मृत्यु के बाद वह गहरे दुःख में डूब जाता है। एक वैज्ञानिक उड़ान भरने का असफल प्रयास करता है, और पेकुआ का अपहरण हो जाता है, जिससे दुख का एक और अनुभव होता है।

अपनी खोज के अंत में, समूह इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि इस दुनिया में स्थायी या पूर्ण सुख पाना असंभव है। मनुष्य का जीवन अनिवार्य रूप से अनिश्चितता, इच्छाओं और दुखों से भरा है। वे हैप्पी वैली लौटने का फैसला नहीं करते हैं, बल्कि एक ऐसी जीवनशैली चुनने का निर्णय लेते हैं जो 'सबसे कम दुख' प्रदान करे, क्योंकि 'पूर्ण सुख' एक माया मात्र है। वे अपने लिए ज्ञान और विवेक से भरी एक शांत और चिंतनशील जीवनशैली का चयन करते हैं।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: हैप्पी वैली में जीवन

कहानी की शुरुआत हैप्पी वैली से होती है, जो इथियोपिया (एबिसिनिया) के राजकुमारों के लिए एक स्वर्ग जैसी घाटी है। इस घाटी को राजकुमारों को दुनिया के कष्टों से बचाने और उन्हें खुश रखने के लिए बनाया गया था। राजकुमार रासेलास, जो इसमें रहने वाला सबसे युवा राजकुमार है, हर ऐशो-आराम और इच्छा की पूर्ति के बावजूद बेचैन और असंतुष्ट महसूस करता है। उसे लगता है कि उसके जीवन में कुछ कमी है और वह केवल सतही सुखों से ऊब गया है। वह सच्चे सुख की तलाश में है और दुनिया को जानना चाहता है। उसकी यह बेचैनी उसे घाटी से बाहर निकलने के तरीकों की तलाश करने पर मजबूर करती है।

नाम विशेषताएँ प्रेरणाएँ
रासेलास इथियोपिया का राजकुमार, युवा, जिज्ञासु, चिंतनशील, आसानी से ऊबने वाला और असंतुष्ट। सच्चा सुख और जीवन का अर्थ खोजना; दुनिया के अनुभवों को जानना।
इम्लाक रासेलास का गुरु, कवि, दार्शनिक, अनुभवी और ज्ञानी व्यक्ति जिसने दुनिया की यात्रा की है। रासेलास को मार्गदर्शन देना और उसे अपनी खोज में सहायता करना।

अनुभाग 2: घाटी से पलायन

रासेलास अपनी बेचैनी को इम्लाक के साथ साझा करता है। इम्लाक, जिसने खुद युवावस्था में दुनिया की यात्रा की थी और कवि के रूप में विभिन्न जीवनशैलियों का अनुभव किया था, रासेलास की भावनाओं को समझता है। इम्लाक बताता है कि दुनिया में कोई भी स्थिति पूर्ण सुख प्रदान नहीं करती और मनुष्य का जीवन हमेशा इच्छाओं और निराशाओं के बीच झूलता रहता है। फिर भी, रासेलास बाहर निकलने के लिए दृढ़ है। वे दोनों मिलकर घाटी से भागने की योजना बनाते हैं। उनके साथ रासेलास की बुद्धिमान बहन, राजकुमारी नेकाया, और उसकी वफादार दासी पेकुआ भी शामिल हो जाती हैं। वे एक गुप्त सुरंग खोदकर हैप्पी वैली से सफलतापूर्वक भाग निकलते हैं और काहिरा की ओर बढ़ते हैं।

नाम विशेषताएँ प्रेरणाएँ
नेकाया रासेलास की बहन, बुद्धिमान, व्यावहारिक और सहानुभूतिपूर्ण। अपने भाई के साथ दुनिया की खोज करना और जीवन के अनुभवों को समझना।
पेकुआ नेकाया की दासी, सुंदर, भोली और वफादार। अपनी राजकुमारी का साथ देना।

अनुभाग 3: काहिरा में विभिन्न जीवनशैलियों का अवलोकन

काहिरा पहुंचने के बाद, रासेलास और उसके साथी विभिन्न सामाजिक वर्गों और व्यवसायों के लोगों के जीवन का बारीकी से अध्ययन करते हैं। वे चरवाहों, संतों, धनी व्यापारियों, विद्वानों और अन्य लोगों से मिलते हैं, यह देखने के लिए कि क्या किसी विशेष जीवनशैली में सच्चा और स्थायी सुख पाया जा सकता है।

  • चरवाहे: वे चरवाहों के सरल जीवन को देखते हैं और सोचते हैं कि क्या ग्रामीण सादगी सुख ला सकती है। लेकिन उन्हें पता चलता है कि चरवाहे भी अपनी दैनिक समस्याओं, जैसे मौसम की मार और चोरी, से जूझते हैं और उनके जीवन में भी संघर्ष है।
  • संत/संन्यासी: वे एक गुफा में रहने वाले संन्यासी से मिलते हैं, जो दुनिया की बुराइयों से दूर शांति पाता है। लेकिन जल्द ही वे देखते हैं कि एकांत भी एक प्रकार का दुख लाता है – उदासी और अकेलेपन से कोई बच नहीं सकता। संन्यासी भी अपनी मानसिक शांति को बनाए रखने के लिए संघर्ष करता है।
  • धनी और शक्तिशाली: वे अमीरों और शक्तिशाली लोगों के बीच घुलते-मिलते हैं। उन्हें लगता है कि धन और शक्ति सुख दे सकती है, लेकिन वे देखते हैं कि ये लोग भी ईर्ष्या, भय और असुरक्षा से घिरे हुए हैं। उन्हें लगातार अपने धन की रक्षा करनी होती है और शक्ति बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
  • शिक्षित और विद्वान: वे अकादमिक दुनिया में भी जाते हैं, यह देखने के लिए कि क्या ज्ञान और बौद्धिकpursuit सुख ला सकता है। लेकिन वे देखते हैं कि विद्वान भी आपस में झगड़ते हैं, ईर्ष्या करते हैं और अक्सर अपने शोध में असफल होने पर निराश हो जाते हैं।

प्रत्येक अवलोकन उन्हें इस निष्कर्ष पर पहुंचाता है कि कोई भी बाहरी स्थिति या जीवनशैली अपने आप में पूर्ण सुख का स्रोत नहीं है।

अनुभाग 4: दार्शनिकों और वैज्ञानिकों से मुलाकात

अपनी खोज जारी रखते हुए, समूह कुछ विलक्षण और दार्शनिक व्यक्तियों से मिलता है:

  • आनंद पर तर्क का दार्शनिक: वे एक दार्शनिक से मिलते हैं जो दावा करता है कि मानव का पूरा जीवन तर्क और बुद्धि द्वारा नियंत्रित होना चाहिए, और जुनून या भावनाओं का कोई स्थान नहीं है। वह खुद को भावनाओं से परे बताता है। हालांकि, कुछ समय बाद, जब उसकी बेटी की मृत्यु हो जाती है, तो वह गहरे शोक में डूब जाता है और उसके सभी दार्शनिक तर्क ढह जाते हैं। यह घटना रासेलास और उसके साथियों को सिखाती है कि मानव भावनाओं से पूरी तरह से बचना असंभव है, और दुःख जीवन का एक अपरिहार्य हिस्सा है।
  • उड़ने वाला वैज्ञानिक: वे एक ऐसे वैज्ञानिक से भी मिलते हैं जो मानव-संचालित उड़ान के विचार से ग्रस्त है और खुद को एक उड़ने वाली मशीन बनाने के लिए समर्पित कर देता है। वह अपनी सारी संपत्ति और समय इस पर खर्च करता है, यह विश्वास करते हुए कि वह उड़कर मानव जाति को मुक्त कर देगा। हालाँकि, उसके सभी प्रयास असफल रहते हैं और वह अपनी सनक में ही फंसा रहता है। यह दिखाता है कि अत्यधिक महत्वाकांक्षा या एक ही विचार पर जुनून किस तरह व्यक्ति को वास्तविकता से दूर कर सकता है और अंततः निराशा का कारण बन सकता है।

ये मुलाक़ातें समूह को यह समझने में मदद करती हैं कि केवल तर्क या वैज्ञानिक खोज भी जीवन में पूर्ण सुख नहीं ला सकती हैं।

अनुभाग 5: पेकुआ का अपहरण और वापसी

उनकी यात्रा में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित होती है जब पेकुआ का कुछ डाकुओं द्वारा अपहरण कर लिया जाता है। नेकाया, जो पेकुआ से बहुत जुड़ी हुई थी, इस घटना से गहरे दुख और सदमे में डूब जाती है। उसे लगता है कि उसे अपनी दासी को सुरक्षित रखना चाहिए था। यह घटना उन्हें सिखाती है कि जीवन अनिश्चितताओं और दुखों से भरा है, और कोई भी व्यक्ति अपने प्रियजनों को हमेशा सुरक्षित नहीं रख सकता।

कुछ समय बाद, पेकुआ वापस लौट आती है, डाकुओं से भागकर। वह अपने अनुभवों को साझा करती है, जिसमें कैद के दौरान उसका डर और फिर उसकी आज़ादी शामिल है। इस अनुभव के बाद, पेकुआ एक मठ में एक संत के रूप में कुछ समय बिताने पर विचार करती है, जहाँ वह शांति की तलाश करती है। हालाँकि, अंततः वह भी मठ के जीवन की सीमाओं को समझती है और इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि किसी भी जगह या स्थिति में पूर्ण शांति नहीं मिल सकती। वह समूह के साथ अपनी यात्रा जारी रखती है।

अनुभाग 6: धार्मिक विचार और अंतिम निर्णय

अपनी यात्रा के अंत में, रासेलास और उसके साथी धर्म और मृत्यु के बाद के जीवन के बारे में चर्चाओं में संलग्न होते हैं। वे एक दरवेश (सूफी फकीर) और अन्य धार्मिक व्यक्तियों से मिलते हैं और विभिन्न विश्वासों और आध्यात्मिक दृष्टिकोणों पर विचार करते हैं। वे आत्मा की अमरता और अनंत काल में सुख की संभावना पर बहस करते हैं, यह समझते हुए कि धार्मिक विश्वास लोगों को जीवन के कष्टों से निपटने में मदद कर सकते हैं।

अपनी लंबी और गहन खोज के बाद, समूह अंततः इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि इस दुनिया में "पूर्ण सुख" (choice of life) एक माया मात्र है। हर व्यक्ति, चाहे उसकी परिस्थितियाँ कैसी भी हों, दुख और असंतोष का अनुभव करता है। हैप्पी वैली या किसी अन्य स्थान पर स्थायी सुख खोजना व्यर्थ है। वे अपने लिए एक "सबसे कम दुख भरा" (least miserable) जीवन चुनने का निर्णय लेते हैं। रासेलास, नेकाया, इम्लाक और पेकुआ एबिसिनिया लौटने का फैसला करते हैं, लेकिन अब वे हैप्पी वैली में वापस नहीं जाते। वे एक ऐसा जीवन जीने का फैसला करते हैं जहाँ वे ज्ञान, विवेक और आत्म-चिंतन के माध्यम से अपनी भावनाओं और परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझ सकें। वे अब एक आदर्श दुनिया की तलाश नहीं करते, बल्कि जीवन की वास्तविकताओं को स्वीकार करते हुए एक समझदार और शांतिपूर्ण अस्तित्व की ओर लौटते हैं।


विधा (Literary Genre): दार्शनिक उपन्यास, नैतिकतावादी कथा, यात्रा वृत्तांत।

लेखक के कुछ तथ्य (Author's Details):
सैमुअल जॉनसन (1709-1784) 18वीं सदी के एक प्रमुख अंग्रेजी लेखक थे। वह एक कवि, निबंधकार, नैतिकवादी, साहित्यिक आलोचक, जीवनी लेखक और लेक्सिकोग्राफर (शब्दकोश-निर्माता) थे। उन्हें विशेष रूप से "ए डिक्शनरी ऑफ द इंग्लिश लैंग्वेज" (1755) के संकलन के लिए जाना जाता है, जिसने अंग्रेजी भाषा के मानकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन गरीबी और बीमारी से जूझता रहा, जिसने उनके लेखन में मानवीय पीड़ा और धैर्य की गहरी समझ को प्रतिबिंबित किया।

नैतिक शिक्षा (Moral):
यह उपन्यास इस नैतिक शिक्षा को प्रस्तुत करता है कि मनुष्य को इस दुनिया में पूर्ण और स्थायी सुख नहीं मिल सकता। सुख की अंतहीन तलाश व्यर्थ है, क्योंकि मानवीय इच्छाएँ असीमित होती हैं और जीवन अनिश्चितताओं से भरा है। इसके बजाय, मनुष्य को अपनी परिस्थितियों को स्वीकार करना चाहिए, विवेकपूर्ण ढंग से जीना चाहिए, और ज्ञान व अनुभव के माध्यम से जीवन की वास्तविकताओं को समझना चाहिए। हमें पूर्णता की बजाय संतोष और "सबसे कम दुख" वाले जीवन की ओर प्रयास करना चाहिए।

जिज्ञासाएँ (Curiosities):

  • सैमुअल जॉनसन ने यह उपन्यास अपनी माँ के अंतिम संस्कार का खर्च उठाने और उनके ऋण चुकाने के लिए केवल सात दिनों में लिखा था। उन्होंने इसे 100 पाउंड में बेचा था।
  • किताब का पूरा शीर्षक "द हिस्ट्री ऑफ रासेलास, प्रिंस ऑफ एबिसिनिया" है।
  • 'रासेलास' अक्सर वॉल्टेयर के व्यंग्यात्मक उपन्यास 'कैंडिड' (जो लगभग उसी समय प्रकाशित हुआ था) के समानांतर देखा जाता है, क्योंकि दोनों काम मानवीय सुख की खोज और दुनिया में बुराई की उपस्थिति जैसे समान दार्शनिक विषयों की पड़ताल करते हैं।
  • हैप्पी वैली का विचार, जहाँ राजकुमारों को बाहरी दुनिया के दुखों से बचाने के लिए रखा जाता है, काल्पनिक है लेकिन जॉनसन के समय में इथियोपियाई राजशाही की कुछ किंवदंतियों से प्रेरित हो सकता है।