sardanapalas - lord bayaran

सारांश

'सार्दनपालस' लॉर्ड बायरन द्वारा लिखा गया एक ऐतिहासिक नाटक है, जो प्राचीन असीरिया के अंतिम राजा सार्दनपालस के पतन की कहानी को नाटकीय रूप से प्रस्तुत करता है। नाटक राजा सार्दनपालस को एक सुखवादी, कला-प्रेमी और युद्ध से विमुख शासक के रूप में चित्रित करता है, जो राज्य के मामलों की उपेक्षा करता है और अपनी आयोनियन दासी मायरा के साथ प्रेम व विलासिता में लीन रहता है। उसके बहनोई सालेमेनिस और अन्य असंतुष्ट सामंत, जैसे बेलेसिस (एक चालडियन भविष्यवक्ता) और अर्बेसेस (एक मेडियन योद्धा), राजा के आलस्य और कर्तव्यहीनता से परेशान हैं। ये असंतुष्ट सामंत सार्दनपालस के खिलाफ एक विद्रोह की योजना बनाते हैं।

जैसे-जैसे विद्रोह जोर पकड़ता है और उसकी राजधानी नीनवे खतरे में पड़ जाती है, सार्दनपालस को अपनी आरामदायक जीवनशैली छोड़कर अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए लड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। मायरा, जो उससे सच्चा प्यार करती है, उसे अपनी गरिमा और सम्मान के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करती है। सार्दनपालस, जो पहले युद्ध से घृणा करता था, असाधारण साहस और नेतृत्व दिखाता है। हालाँकि, उसकी सेना अंततः हार जाती है, और शहर पर विद्रोहियों का कब्जा लगभग तय हो जाता है। अपमानित होने या दुश्मनों के हाथों पड़ने के बजाय, सार्दनपालस मायरा के साथ मिलकर खुद को एक विशाल चिता में जलाकर आत्महत्या करने का फैसला करता है। यह नाटक सत्ता, कर्तव्य, प्रेम और एक व्यक्ति के आत्म-बोध के गहरे विषयों को उजागर करता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: सुखवादी राजा और विद्रोह के बीज

नाटक असीरिया के राजा सार्दनपालस के महल में खुलता है, जहाँ राजा अपने सुखवादी जीवन में लीन है। वह युद्ध और राज्य की चिंताओं से दूर, अपनी पसंदीदा दासी मायरा के साथ समय बिताता है। मायरा एक बुद्धिमान और वफादार आयोनियन दासी है, जो सार्दनपालस से सच्चा प्रेम करती है। राजा का बहनोई और सेना का सेनापति, सालेमेनिस, जो एक वफादार लेकिन गंभीर योद्धा है, राजा को उसके आलस्य के लिए चेतावनी देता है और उसे राज्य के बढ़ते खतरे तथा रईसों के असंतोष से अवगत कराता है। सार्दनपालस इन चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लेता और शांति व आनंद को युद्ध से बेहतर बताता है।

इसी बीच, दो महत्वाकांक्षी सामंत, बेलेसिस और अर्बेसेस, राजा के खिलाफ एक गुप्त विद्रोह की योजना बना रहे हैं। बेलेसिस, जो एक चालडियन भविष्यवक्ता है, अपनी भविष्यवाणियों का उपयोग करके लोगों को राजा के खिलाफ भड़काता है, जबकि अर्बेसेस, जो एक मेडियन सेनापति है, अपनी सैन्य शक्ति पर भरोसा करता है। वे सार्दनपालस के विलासितापूर्ण जीवन और कर्तव्यहीनता को उसके पतन का कारण बताते हैं और सिंहासन पर कब्ज़ा करने की आकांक्षा रखते हैं।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
सार्दनपालस असीरिया का राजा, सुखवादी, कलाप्रेमी, शांतिप्रिय, अपनी जिम्मेदारियों से विमुख, लेकिन अंततः साहसी और गरिमापूर्ण। सत्ता के कर्तव्यों से बचना, आनंद और विलासिता में जीना, मायरा के साथ गहरा प्रेम। शुरू में संघर्ष से दूर रहना, लेकिन अंततः अपनी गरिमा, प्रेम और सम्मान के लिए लड़ना।
मायरा आयोनियन दासी, सार्दनपालस की प्रिय, बुद्धिमान, वफादार, दृढ़-इच्छाशक्ति वाली। सार्दनपालस के प्रति गहरा प्रेम और वफादारी। उसे अपने कर्तव्यों के प्रति जगाना, उसकी गरिमा और साम्राज्य को बचाने के लिए प्रेरित करना। उसके साथ मरना पसंद करती है।
सालेमेनिस सार्दनपालस का बहनोई, सेना का सेनापति, वफादार, गंभीर, कर्तव्यनिष्ठ। अपने साम्राज्य और राजा के प्रति वफादारी। असीरिया की गरिमा और सुरक्षा को बनाए रखना। सार्दनपालस को अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करना।
बेलेसिस चालडियन भविष्यवक्ता, बेबीलोन का सूबेदार, महत्वाकांक्षी, धूर्त। सत्ता और प्रभाव की लालसा। सार्दनपालस को हटाने और खुद को स्थापित करने के लिए भविष्यवाणियों और धोखे का उपयोग करना।
अर्बेसेस मेडियन योद्धा, मेडिया का सूबेदार, महत्वाकांक्षी, मजबूत, साहसी। सैन्य गौरव और सत्ता की लालसा। सार्दनपालस को उसके विलासितापूर्ण जीवन के लिए तिरस्कृत करना। अपनी शक्ति से सिंहासन पर कब्जा करना।

अनुभाग 2: विद्रोह का उदय और राजा का जागरण

विद्रोह भड़क उठता है, और महल में अराजकता फैल जाती है। सालेमेनिस, जो सार्दनपालस के प्रति वफादार है, राजा को अपने आलस्य को त्यागकर अपनी सेना का नेतृत्व करने और विद्रोहियों का सामना करने के लिए मनाता है। सार्दनपालस शुरू में हिचकिचाता है, क्योंकि उसे युद्ध का कोई अनुभव नहीं है और वह हिंसा से घृणा करता है। वह सोचता है कि एक राजा का जीवन केवल दावतों और आनंद के लिए है।

हालांकि, मायरा उसे अपनी आत्मा और सम्मान के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करती है। वह उसे याद दिलाती है कि एक राजा का कर्तव्य अपने लोगों की रक्षा करना है, और उसे अपने डर पर काबू पाकर तलवार उठानी चाहिए। मायरा की प्रेरणा और उसके प्रति अपने प्रेम के कारण, सार्दनपालस अंततः अपने शानदार वस्त्रों को त्यागकर एक योद्धा की पोशाक पहनता है। वह अपने सैनिकों का नेतृत्व करने के लिए युद्ध के मैदान में उतरता है। उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति और अप्रत्याशित साहस उसके लोगों और विद्रोहियों दोनों को आश्चर्यचकित करता है। वह कई लड़ाइयों में असाधारण वीरता दिखाता है, जिससे विद्रोहियों को अस्थायी रूप से पीछे हटना पड़ता है।

अनुभाग 3: प्रारंभिक जीत और फिर हार की शुरुआत

सार्दनपालस और उसकी वफादार सेना को कुछ शुरुआती जीत मिलती हैं, जिससे उम्मीद जगती है कि विद्रोह को कुचला जा सकता है। सार्दनपालस स्वयं युद्ध में सबसे आगे रहता है, अपने सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ता है। इस दौरान, मायरा भी उसके साथ रहती है, उसे भावनात्मक सहारा देती है और घायल सैनिकों की देखभाल करती है। युद्ध के इस अनुभव से सार्दनपालस का चरित्र नाटकीय रूप से बदल जाता है; वह अपने आलस्य को त्यागकर एक सच्चा योद्धा और नेता बन जाता है।

लेकिन विद्रोहियों की संख्या अधिक है, और वे लगातार नए हमले करते रहते हैं। सालेमेनिस, जो एक अनुभवी सेनापति है और सार्दनपालस का विश्वसनीय सलाहकार है, युद्ध में गंभीर रूप से घायल हो जाता है। उसकी मृत्यु सार्दनपालस के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और सैन्य झटका है, और उसकी सेना का मनोबल टूट जाता है। विद्रोहियों को फिर से फायदा होने लगता है, और वे धीरे-धीरे राजधानी नीनवे की ओर बढ़ने लगते हैं, शहर को घेरने की तैयारी में।

अनुभाग 4: अंतिम घेराबंदी और राजा का अंतिम निर्णय

नीनवे की घेराबंदी शुरू हो जाती है। शहर खाद्य सामग्री और सैनिकों की कमी से जूझ रहा है। सार्दनपालस को स्पष्ट रूप से महसूस होता है कि उसकी हार अब निश्चित है। वह अपमानित होने या दुश्मनों के हाथों में पड़ने से बचने के लिए एक अंतिम और सम्मानजनक समाधान का फैसला करता है। वह अपने सभी वफादार अधिकारियों और मायरा के साथ अपनी अंतिम भव्य दावत देता है।

दावत के बाद, वह एक विशाल चिता बनाने का आदेश देता है। वह अपनी सारी संपत्ति, महल और स्वयं को उस चिता में जलाने का इरादा रखता है। मायरा, जो उससे सच्चा प्रेम करती है और जिसके लिए सार्दनपालस ने अपनी नई पहचान पाई है, स्वेच्छा से उसके साथ मरने का फैसला करती है। वह उसे बताती है कि जीवन उसके बिना अर्थहीन है और वह उसके साथ ही रहेगी। सार्दनपालस अपनी रानी जरीना को महल से सुरक्षित बाहर निकलने का प्रबंध करता है, ताकि वह विद्रोहियों के हाथों न पड़े।

अनुभाग 5: चिता और अंतिम अंत

अंतिम और सबसे मार्मिक दृश्य में, सार्दनपालस और मायरा भव्य चिता पर चढ़ते हैं। सार्दनपालस अपने साम्राज्य के पतन और अपनी नियति को स्वीकार करता है, लेकिन उसे इस बात का संतोष है कि उसने अपने प्रेम और अपनी गरिमा को बचाया है। वह अपनी अंतिम इच्छाएं व्यक्त करता है।

मायरा, अपनी अंतिम प्रेमपूर्ण सेवा के रूप में, चिता को आग लगाती है। आग तेजी से भड़क उठती है, और वे दोनों एक साथ जलकर मर जाते हैं। इस प्रकार, असीरिया के अंतिम राजा सार्दनपालस का शासन दुखद रूप से समाप्त होता है। विद्रोहियों को नीनवे पर कब्जा करने के बाद केवल जली हुई राख, एक ध्वस्त महल और एक ऐसे राजा की कहानी मिलती है जिसने अपने अंत को अपनी शर्तों पर चुना।


साहित्यिक शैली

'सार्दनपालस' एक ऐतिहासिक नाटक (Historical Drama) या नाट्य कविता (Dramatic Poem) है, जिसे त्रासदी (Tragedy) की शैली में लिखा गया है। यह क्लासिक यूनानी नाटक के मॉडल का अनुसरण करता है, जिसमें एक महान नायक का पतन और दुखद अंत दिखाया जाता है।

लेखक के बारे में

जॉर्ज गॉर्डन बायरन, जिन्हें लॉर्ड बायरन (Lord Byron) के नाम से जाना जाता है (22 जनवरी 1788 - 19 अप्रैल 1824), एक अंग्रेजी कवि और ब्रिटिश रोमांटिक आंदोलन (Romantic movement) के प्रमुख व्यक्ति थे। उन्हें अंग्रेजी भाषा के सबसे प्रभावशाली और महान कवियों में से एक माना जाता है। उनके सबसे प्रसिद्ध कार्यों में 'चाइल्ड हेरोल्ड्स पिलग्रिमेज' (Childe Harold's Pilgrimage) और महाकाव्य 'डॉन जुआन' (Don Juan) शामिल हैं। बायरन अपनी सुंदरता, अभिजात वर्ग की जीवनशैली, भारी कर्ज, कई प्रेम प्रसंगों और अपनी प्रगतिशील सामाजिक-राजनीतिक विचारों के लिए भी जाने जाते थे। वह यूनानी स्वतंत्रता संग्राम के एक नायक बन गए और मेसोलोंगही, ग्रीस में बीमारी से उनकी मृत्यु हो गई, जहाँ उन्हें राष्ट्रीय नायक का दर्जा दिया गया।

नैतिक शिक्षा

  • कर्तव्य और उत्तरदायित्व: नाटक इस बात पर जोर देता है कि सत्ता और पद के साथ बड़े कर्तव्य और उत्तरदायित्व आते हैं। सार्दनपालस का अपने शाही कर्तव्यों की उपेक्षा करना उसके और उसके साम्राज्य के पतन का एक प्रमुख कारण बनता है।
  • नेतृत्व का महत्व: एक प्रभावी नेता को केवल विलासिता में नहीं जीना चाहिए, बल्कि उसे अपने लोगों की भलाई और सुरक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर साहस दिखाना चाहिए।
  • प्रेम की परिवर्तनकारी शक्ति: मायरा का सार्दनपालस के प्रति निस्वार्थ प्रेम उसे एक आलसी और सुखवादी राजा से एक सम्मानजनक और साहसी योद्धा में बदल देता है, जो अंततः अपनी गरिमा के लिए बलिदान देता है।
  • गरिमा में मृत्यु: सार्दनपालस, अपनी प्रारंभिक कमजोरियों के बावजूद, अंततः अपमानित होने के बजाय अपनी गरिमा और सम्मान को बनाए रखने का विकल्प चुनता है, यह दर्शाता है कि व्यक्ति अपने अंत को कैसे चुनता है।

दिलचस्प बातें

  • ऐतिहासिक प्रेरणा, साहित्यिक स्वतंत्रता: लॉर्ड बायरन ने 'सार्दनपालस' के लिए प्राचीन ग्रीक इतिहासकार डायोडोरस सिकलस के खाते से प्रेरणा ली, जिसने असीरिया के अंतिम राजा सार्दनपालस के जीवन का वर्णन किया था। हालांकि, बायरन ने ऐतिहासिक तथ्यों को अपने नाटकीय और भावनात्मक उद्देश्यों के अनुरूप काफी हद तक बदल दिया।
  • रोमांटिक नायक: यह नाटक बायरन के विशिष्ट 'बायरॉनिक नायक' (Byronic Hero) के कई तत्वों को दर्शाता है - एक रहस्यमय, उदास, मोहक और अक्सर बहिष्कृत व्यक्ति जो समाज के मानदंडों के खिलाफ जाता है। सार्दनपालस अपनी आलस्य, संवेदनशीलता और फिर अचानक साहस से इस साँचे में फिट बैठता है।
  • नैतिक जटिलता: बायरन का सार्दनपालस एक जटिल चरित्र है - वह एक तरफ आलसी और विलासी है, लेकिन दूसरी तरफ संवेदनशील, कलाप्रेमी और अंततः साहसी भी है। यह नैतिक द्वंद्व नाटक को गहरा बनाता है और दर्शकों को उसके प्रति सहानुभूति रखने के लिए मजबूर करता है।
  • कला में प्रभाव: फ्रांसीसी रोमांटिक चित्रकार यूजेन डेलाक्रोइक्स (Eugène Delacroix) ने बायरन के नाटक से प्रेरित होकर अपनी प्रसिद्ध पेंटिंग 'सार्दनपालस की मृत्यु' (The Death of Sardanapalus) बनाई। यह विशाल और नाटकीय पेंटिंग सार्दनपालस की चिता पर मृत्यु के अंतिम क्षणों को दर्शाती है, और यह रोमांटिक कला के सबसे प्रसिद्ध उदाहरणों में से एक है।
  • मायरा का महत्व: मायरा का चरित्र नाटक में सिर्फ एक प्रेमिका से कहीं अधिक है। वह सार्दनपालस की प्रेरणादायक शक्ति है, जो उसे अपनी कमियों से उबरने और अपने सच्चे आत्म को खोजने और सम्मान के साथ लड़ने के लिए प्रेरित करती है। वह बायरन के मजबूत और स्वतंत्र महिला पात्रों में से एक है।