valenstein - frederik shilar

सारांश

फ्रेडरिक शिलर की 'वालेंस्टाइन' तीन नाटकों की एक श्रृंखला है: 'वालेंस्टाइन का शिविर', 'पिकोलोमिनी', और 'वालेंस्टाइन की मृत्यु'। यह तीस साल के युद्ध के दौरान पवित्र रोमन साम्राज्य के जनरलिसिमो अल्ब्रेक्ट वॉन वालेंस्टाइन के उत्थान और पतन को दर्शाता है। वालेंस्टाइन, एक करिश्माई और महत्वाकांक्षी नेता, युद्ध से थक चुका है और सम्राट के खिलाफ एक गुप्त गठबंधन करके अपने लिए बोहेमिया का ताज हासिल करने की योजना बनाता है, जिसमें स्वीडन और फ्रांस के साथ समझौता शामिल है।

'वालेंस्टाइन का शिविर' सैनिकों के बीच के जीवन को दर्शाता है, जो वालेंस्टाइन के प्रति उनकी निष्ठा और युद्ध की थकावट को उजागर करता है। 'पिकोलोमिनी' में, वालेंस्टाइन की योजनाएं सामने आने लगती हैं, और उनके करीबी विश्वासपात्रों में से एक, ऑक्टेवियो पिकोलोमिनी, सम्राट के प्रति गुप्त रूप से वफादार रहकर उन्हें बेनकाब करने की कोशिश करते हैं। ऑक्टेवियो का बेटा, मैक्स पिकोलोमिनी, वालेंस्टाइन की बेटी थेक्ला से प्यार करता है और दोनों के बीच वफादारी के संघर्ष में फंस जाता है।

'वालेंस्टाइन की मृत्यु' वालेंस्टाइन के धोखे और उसके बाद के परिणामों पर केंद्रित है। जैसे ही सम्राट को वालेंस्टाइन की राजद्रोह की योजनाओं के बारे में पता चलता है, वह उसे पद से हटा देता है। वालेंस्टाइन अपने शेष वफादार जनरलों, इल्लो और टेर्ज़की की मदद से अपने सैनिकों को एकजुट करने की कोशिश करता है, लेकिन कई लोग उसे छोड़ देते हैं। बटलर, जो पहले वालेंस्टाइन के प्रति वफादार था, को अपमानित किया जाता है और वह बदला लेने के लिए वालेंस्टाइन के खिलाफ हो जाता है। अंत में, वालेंस्टाइन को ईगर में उसके अपने ही अधिकारियों द्वारा बटलर के आदेश पर मार दिया जाता है, जिससे उसकी महत्वाकांक्षाओं और विश्वासघात का दुखद अंत होता है। यह नाटक सत्ता, वफादारी, भाग्य और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के जटिल जाल को दर्शाता है जो एक व्यक्ति को उसके नैतिक पतन की ओर ले जाता है।

किताब के अनुभाग

यह किताब तीन भागों में विभाजित है, जिनमें से प्रत्येक एक अलग नाटक है, लेकिन वे एक साथ मिलकर वालेंस्टाइन की कहानी को पूरा करते हैं।

अनुभाग 1: वालेंस्टाइन का शिविर (Wallensteins Lager)

यह एक छोटा, एक-एक्ट का प्रस्तावना नाटक है जो मुख्य त्रयी के लिए मंच तैयार करता है। यह अल्ब्रेक्ट वॉन वालेंस्टाइन की विशाल सेना के शिविर में सैनिकों के जीवन और मनोदशा को दर्शाता है। नाटक में कोई केंद्रीय पात्र या जटिल कथानक नहीं है, बल्कि यह सेना के भीतर विभिन्न गुटों, उनकी शिकायतें, आशाएं और वालेंस्टाइन के प्रति उनकी मिश्रित भावनाओं को प्रस्तुत करता है।

कथानक:
शिविर में, विभिन्न रेजिमेंटों के सैनिक (जैसे क्रोएशियाई, हुसैर, ड्रागून) अपने रोजमर्रा के जीवन, शराब पीने, जुआ खेलने और युद्ध के बारे में बात करते हुए दिखाए गए हैं। वे वालेंस्टाइन के नेतृत्व की प्रशंसा करते हैं, जो उन्हें नियमित वेतन देता है और उनकी जरूरतों का ख्याल रखता है, लेकिन वे युद्ध की अंतहीन प्रकृति और सम्राट से मिली अनियमितताओं से भी थके हुए हैं। एक किसान, जिसकी संपत्ति सैनिकों ने लूट ली है, अपनी शिकायत लेकर आता है लेकिन उसकी उपेक्षा की जाती है। एक कैपुचिन भिक्षु आता है और सैनिकों को उनके पापी जीवन और युद्ध के अत्याचारों के लिए फटकार लगाता है, लेकिन सैनिक उसकी बातों का मजाक उड़ाते हैं। नाटक एक खुशी के माहौल में समाप्त होता है, जहां सैनिक अपने नेता वालेंस्टाइन के लिए जयकार करते हैं, जो अभी भी उनके लिए एक रहस्यमय और पूजनीय व्यक्ति है। यह खंड वालेंस्टाइन के करिश्मे और उसके सैनिकों पर उसकी पकड़ की एक झलक प्रदान करता है, साथ ही उस अस्थिर और अराजक माहौल को भी दर्शाता है जिसमें वह काम करता है।

शामिल पात्र:

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
विभिन्न सैनिक अलग-अलग रेजिमेंटों (क्रोएशियाई, ड्रागून, हुसैर) के सदस्य। सीधे-सादे, जुझारू, वालेंस्टाइन के प्रति वफादार लेकिन युद्ध से थके हुए। जीविकोपार्जन, लूटपाट, वालेंस्टाइन की प्रतिष्ठा और नेतृत्व का सम्मान।
किसान युद्ध से पीड़ित, अपनी संपत्ति गंवा चुका। न्याय और मुआवजे की तलाश।
कैपुचिन भिक्षु धार्मिक, नैतिकतावादी। सैनिकों को उनके पापी तरीकों के लिए फटकार लगाना, आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना।

अनुभाग 2: पिकोलोमिनी (Die Piccolomini)

यह त्रयी का दूसरा भाग और पहला पूर्ण त्रासदी है, जो मुख्य पात्रों और उनके संघर्षों को सामने लाता है। यह वालेंस्टाइन के महत्वाकांक्षी और देशद्रोही योजनाओं को उजागर करना शुरू करता है, और वफादारी, कर्तव्य और प्रेम के बीच जटिल संबंधों को दर्शाता है।

कथानक:
एक्ट I: सम्राट के दूत, क्वेस्टेनबर्ग, वालेंस्टाइन के मुख्यालय में आते हैं ताकि उसे सम्राट द्वारा इतालवी सीमा पर अपनी सेना भेजने के आदेश का पालन करने के लिए मजबूर कर सकें। वालेंस्टाइन इस आदेश से असहमत है, क्योंकि वह अपनी शक्ति को कम करने के रूप में देखता है। उसके करीबी जनरल, इल्लो और टेर्ज़की, वालेंस्टाइन को विश्वास दिलाते हैं कि सेना उसके प्रति वफादार है और वह सम्राट की इच्छा के खिलाफ जा सकता है। वालेंस्टाइन ने सम्राट के प्रति अपनी निष्ठा के औपचारिक शपथ को रद्द करने के लिए एक दस्तावेज तैयार किया है, और जनरलों को उस पर हस्ताक्षर करने के लिए कहता है, हालांकि इसे गुप्त रखा जाता है।

एक्ट II: ऑक्टेवियो पिकोलोमिनी, वालेंस्टाइन का लंबे समय से दोस्त और सहकर्मी, शुरू में वालेंस्टाइन के प्रति वफादार प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में वह सम्राट का एक गुप्त एजेंट है। क्वेस्टेनबर्ग के साथ बातचीत में, ऑक्टेवियो वालेंस्टाइन की गुप्त महत्वाकांक्षाओं और सम्राट के खिलाफ उसकी संभावित साजिशों का खुलासा करता है। वह वालेंस्टाइन की बढ़ती शक्ति से चिंतित है और सम्राट को उसकी योजनाओं के बारे में चेतावनी देना चाहता है। वह जानता है कि वालेंस्टाइन स्वीडन और फ्रांस के साथ एक गठबंधन पर बातचीत कर रहा है।

एक्ट III: वालेंस्टाइन के भतीजे, मैक्स पिकोलोमिनी (ऑक्टेवियो का बेटा), वालेंस्टाइन की बेटी थेक्ला से प्यार करता है। उनका प्रेम कहानी एक दुखद पृष्ठभूमि प्रदान करती है, क्योंकि मैक्स को अपने गुरु (वालेंस्टाइन) और अपने पिता (ऑक्टेवियो) के बीच अपनी वफादारी को विभाजित करना पड़ता है। मैक्स वालेंस्टाइन के गौरव और करिश्मे से प्रभावित है, जबकि थेक्ला अपने पिता की योजनाओं के बारे में अनिश्चितता महसूस करती है।

एक्ट IV: वालेंस्टाइन जनरलों की एक बैठक बुलाता है और उनसे सम्राट के खिलाफ अपनी योजनाओं में उसका समर्थन करने के लिए कहता है। इल्लो, टेर्ज़की और आइसोलेनी जैसे कुछ जनरल उसका समर्थन करते हैं, लेकिन सभी नहीं। वालेंस्टाइन उन्हें एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित करता है, जिसमें वे शपथ लेते हैं कि वे उसके साथ खड़े रहेंगे। यह दस्तावेज मूल रूप से इस शर्त के साथ था कि वालेंस्टाइन स्वयं भी सम्राट के प्रति वफादार रहे, लेकिन इल्लो ने इसे धोखाधड़ी से संशोधित किया ताकि वालेंस्टाइन को सम्राट के खिलाफ जाने की अनुमति मिल सके। ऑक्टेवियो जनरलों को विभाजित करने के लिए चुपचाप काम करता है, और उनमें से कुछ, विशेष रूप से बटलर, वालेंस्टाइन के प्रति अपनी वफादारी पर सवाल उठाना शुरू कर देते हैं।

एक्ट V: तनाव बढ़ता है क्योंकि ऑक्टेवियो अपनी चालें चलता रहता है। मैक्स, जिसे अपने पिता द्वारा वालेंस्टाइन के खिलाफ जाने के लिए मना किया जाता है, अपनी वफादारी को लेकर आंतरिक रूप से संघर्ष करता है। उसे पता चलता है कि वालेंस्टाइन ने सम्राट के खिलाफ विद्रोह करने की योजना बनाई है, और इससे वह गहरे संकट में पड़ जाता है। थेक्ला भी इस स्थिति से परेशान है, क्योंकि वह अपने पिता की महत्वाकांक्षाओं के परिणामों से डरती है और मैक्स को खोने की संभावना से चिंतित है। नाटक इस बिंदु पर समाप्त होता है जब वालेंस्टाइन के विद्रोह की योजना सार्वजनिक होने लगती है और प्रमुख पात्रों के बीच वफादारी का विभाजन स्पष्ट हो जाता है।

शामिल पात्र:

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
अल्ब्रेक्ट वॉन वालेंस्टाइन साम्राज्य का जनरलिसिमो, करिश्माई, महत्वाकांक्षी, रहस्यमय, भाग्य में विश्वास रखने वाला। सत्ता की प्यास, बोहेमिया का ताज प्राप्त करना, सम्राट से स्वतंत्रता।
ऑक्टेवियो पिकोलोमिनी साम्राज्य का जनरल, वालेंस्टाइन का पुराना दोस्त, गुप्त रूप से सम्राट के प्रति वफादार। सम्राट के प्रति कर्तव्य, वालेंस्टाइन की बढ़ती शक्ति से खतरा महसूस करना, साम्राज्य की सुरक्षा।
मैक्स पिकोलोमिनी ऑक्टेवियो का बेटा, वालेंस्टाइन का आश्रित और शिष्य, आदर्शवादी, सम्माननीय, थेक्ला से प्यार करता है। वालेंस्टाइन और अपने पिता दोनों के प्रति वफादारी, प्रेम, सम्मान और कर्तव्य के बीच संघर्ष।
थेक्ला वालेंस्टाइन की बेटी, मैक्स से प्यार करती है। मैक्स के प्रति प्रेम, अपने पिता की सुरक्षा और प्रतिष्ठा की चिंता।
टेर्ज़की की काउंटेस वालेंस्टाइन की भाभी, उसकी योजनाओं की एक प्रबल समर्थक। अपने परिवार के उत्थान की इच्छा, वालेंस्टाइन के प्रति निष्ठा।
इल्लो वालेंस्टाइन का जनरल, निष्ठावान समर्थक, उत्तेजित। वालेंस्टाइन के प्रति अटूट वफादारी, सत्ता की साझेदारी की इच्छा।
क्वेस्टेनबर्ग साम्राज्य का दूत, वालेंस्टाइन की गतिविधियों की जांच करने के लिए भेजा गया। सम्राट के आदेशों का पालन करना, वालेंस्टाइन की निष्ठा सुनिश्चित करना।
आइसोलेनी क्रोएशियाई सेनापति, वालेंस्टाइन के प्रति वफादार। वालेंस्टाइन के प्रति वफादारी, अपनी सेना का नेतृत्व करना।
बटलर आयरिश कर्नल (बाद में जनरल), पहले वालेंस्टाइन के प्रति वफादार, फिर उससे अपमानित होकर विरोधी बन जाता है। पहले कर्तव्य और वफादारी, बाद में अपमान का बदला।

अनुभाग 3: वालेंस्टाइन की मृत्यु (Wallensteins Tod)

यह त्रयी का अंतिम और सबसे दुखद भाग है, जो वालेंस्टाइन के पतन और उसकी मृत्यु को दर्शाता है। यह विश्वासघात, बदला और भाग्य की अनिवार्यता के विषयों की पड़ताल करता है।

कथानक:
एक्ट I: सम्राट को अब वालेंस्टाइन के विश्वासघात की पूरी जानकारी है। ऑक्टेवियो पिकोलोमिनी के माध्यम से, सम्राट वालेंस्टाइन को पद से हटाने का आदेश जारी करता है और उसकी सेना को तितर-बितर करने का निर्देश देता है। सेना के जनरलों को आदेश दिया जाता है कि वे वालेंस्टाइन को छोड़ दें और ऑक्टेवियो के नेतृत्व में सम्राट के प्रति अपनी वफादारी की पुष्टि करें। वालेंस्टाइन अपने महल में है, अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ने का संकल्प लेता है। वह अब खुद को सम्राट से स्वतंत्र मानता है और स्वीडन के साथ अपने गठबंधन को अंतिम रूप देने की कोशिश करता है।

एक्ट II: वालेंस्टाइन के प्रति वफादारी तेजी से कम होने लगती है। कई जनरल, विशेष रूप से बटलर, जो पहले वालेंस्टाइन के सबसे भरोसेमंद व्यक्तियों में से एक था, अब उसे छोड़ देते हैं। बटलर को वालेंस्टाइन ने पहले एक छोटी सी गलती के लिए सार्वजनिक रूप से अपमानित किया था, और वह इस अपमान का बदला लेने का अवसर देखता है। ऑक्टेवियो बटलर के असंतोष का लाभ उठाता है और उसे वालेंस्टाइन के खिलाफ भड़काता है, उसे एक उच्च पद और पुरस्कार का वादा करता है। इल्लो और टेर्ज़की की काउंटेस अभी भी वालेंस्टाइन के प्रति वफादार हैं और उसे प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन स्थिति तेजी से बिगड़ रही है।

एक्ट III: मैक्स पिकोलोमिनी, अपने पिता ऑक्टेवियो और थेक्ला के बीच अपनी वफादारी के संघर्ष से तबाह हो गया है। वह वालेंस्टाइन के विश्वासघात से निराश है, क्योंकि उसने अपने गुरु के आदर्शवादी पक्ष को देखा था। जब उसे सच्चाई का पता चलता है, तो वह वालेंस्टाइन को छोड़ देता है और थेक्ला से अंतिम अलविदा कहता है। वह युद्ध में एक सम्मानजनक मौत की तलाश में स्वीडिश सेना के खिलाफ एक हताश हमले में शामिल होता है, जहाँ वह मारा जाता है। थेक्ला मैक्स की मृत्यु से टूट जाती है।

एक्ट IV: वालेंस्टाइन, अब अपने अधिकांश जनरलों और सैनिकों द्वारा छोड़ दिया गया है, इल्लो, टेर्ज़की और मुट्ठी भर वफादार लोगों के साथ ईगर के किले में भाग जाता है। वह अभी भी स्वीडिश सहायता की उम्मीद कर रहा है। बटलर, जो अब सम्राट के पक्ष में है और वालेंस्टाइन से बदला लेने के लिए दृढ़ है, वालेंस्टाइन को खत्म करने की साजिश रचता है। वह ईगर के कमांडर, गॉर्डन को अपनी तरफ मिलाता है।

एक्ट V: ईगर में, बटलर और उसके सहयोगी, जिनमें आयरिश कप्तान डेवेरोक्स शामिल है, वालेंस्टाइन की हत्या की योजना को अंजाम देते हैं। वे पहले इल्लो और टेर्ज़की को एक दावत के दौरान मार डालते हैं। उसके बाद, डेवेरोक्स और उसके आदमी वालेंस्टाइन के कक्ष में घुसते हैं। वालेंस्टाइन, अपनी अंतिम घड़ियों में भी, भाग्य और सितारों में विश्वास रखता है, लेकिन अंततः उसे मार दिया जाता है। थेक्ला, मैक्स की मृत्यु और अपने पिता के पतन के बाद, एक मठ में प्रवेश करने का फैसला करती है, इस दुखद घटना से पूरी तरह टूट जाती है। ऑक्टेवियो को सम्राट द्वारा पुरस्कृत किया जाता है और वह अपने कर्तव्य को पूरा करने की संतुष्टि महसूस करता है, लेकिन वालेंस्टाइन और मैक्स की मृत्यु के प्रति कुछ पछतावा भी महसूस करता है।

शामिल पात्र (पूर्व में वर्णित के अलावा):

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
गॉर्डन ईगर का कमांडर, नैतिक, धार्मिक, बटलर द्वारा वालेंस्टाइन के खिलाफ बदला लेने के लिए हेरफेर किया जाता है। कर्तव्य, वालेंस्टाइन के प्रति प्रारंभिक सम्मान, फिर बटलर के प्रभाव में आना।
डेवेरोक्स आयरिश कप्तान, बटलर का आदमी, वालेंस्टाइन की हत्या में प्रमुख भूमिका निभाता है। बटलर के प्रति वफादारी, पुरस्कार और बदला।

साहित्यिक शैली:
'वालेंस्टाइन' एक ऐतिहासिक नाटक है, विशेष रूप से त्रासदी (Tragedy)। यह तीन भागों वाली एक महाकाव्यीय त्रासदी है जो पद्य (blank verse) में लिखी गई है। इसमें रोमांटिकतावाद और क्लासिकवाद के तत्व शामिल हैं, जिसमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, भाग्य और नैतिक विकल्प जैसे बड़े विषयों की पड़ताल की गई है।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:

  • फ्रेडरिक शिलर (Friedrich Schiller): जॉन क्रिस्टोफ़ फ्रेडरिक वॉन शिलर (1759-1805) एक जर्मन कवि, दार्शनिक, इतिहासकार और नाटककार थे। उन्हें जर्मनी के सबसे महत्वपूर्ण शास्त्रीय नाटककारों में से एक माना जाता है, और गेटे के साथ, वे वेमर क्लासिकवाद के एक प्रमुख व्यक्ति थे।
  • प्रमुख कार्य: 'वालेंस्टाइन' के अलावा, उनके अन्य प्रसिद्ध कार्यों में 'द रॉबर्स' (Die Räuber), 'मैरी स्टुअर्ट' (Maria Stuart), 'विलियम टेल' (Wilhelm Tell), और 'ओड टू जॉय' (An die Freude) कविता शामिल है, जिसे बीथोवेन ने अपनी 9वीं सिम्फनी में संगीतबद्ध किया था।
  • दर्शन और विषय-वस्तु: शिलर के कार्य अक्सर स्वतंत्रता, व्यक्तिगत गरिमा, नैतिक संघर्ष, न्याय और कला की शक्ति के विषयों का पता लगाते हैं। उन्हें ज्ञानोदय युग और रोमांटिकतावाद के बीच एक सेतु माना जाता है।
  • प्रभाव: शिलर का काम जर्मन साहित्य और यूरोपीय विचार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। उनके नाटकों का आज भी मंचन किया जाता है, और उनकी कविताएं शास्त्रीय जर्मन साहित्य का एक अभिन्न अंग हैं।

नैतिक शिक्षा (Morale):
'वालेंस्टाइन' की नैतिक शिक्षा बहुआयामी है। यह दिखाता है कि अत्यधिक महत्वाकांक्षा और सत्ता की प्यास एक व्यक्ति को नैतिक पतन की ओर कैसे ले जा सकती है, भले ही उसके शुरुआती इरादे नेक हों। यह विश्वासघात के विनाशकारी परिणामों को उजागर करता है, और यह भी कि कैसे राजनीतिक चालबाजी और व्यक्तिगत वफादारी का टकराव दुखद अंत की ओर ले जाता है। नाटक भाग्य और स्वतंत्र इच्छा के बीच के संघर्ष को भी दर्शाता है – क्या वालेंस्टाइन का पतन पूर्वनिर्धारित था, या यह उसके अपने विकल्पों और त्रुटियों का परिणाम था? यह नैतिक शिक्षा देता है कि शक्ति के साथ बड़ी जिम्मेदारी आती है, और उसका दुरुपयोग अंततः विनाश की ओर ले जाता है। यह वफादारी की जटिल प्रकृति और व्यक्तिगत सम्मान व कर्तव्य के बीच संघर्ष पर भी प्रकाश डालता है।

जिज्ञासाएँ (Curiosities):

  • ऐतिहासिक आधार: वालेंस्टाइन का चरित्र और कहानी तीस साल के युद्ध (1618-1648) के एक वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति, अल्ब्रेक्ट वॉन वालेंस्टाइन पर आधारित है, जो एक करिश्माई लेकिन विवादास्पद जनरल था जिसे सम्राट फर्डिनेंड द्वितीय ने 1634 में मरवा दिया था। शिलर ने ऐतिहासिक तथ्यों को नाटक के उद्देश्यों के लिए नाटकीय स्वतंत्रता के साथ ढाला।
  • संरचना: यह जर्मन साहित्य में तीन भागों में संरचित होने वाले कुछ बड़े नाटकों में से एक है। 'वालेंस्टाइन का शिविर' एक हास्यमय प्रस्तावना है, जो मुख्य नाटक की गंभीर टोन के विपरीत है, और सैनिकों के दृष्टिकोण से युद्ध का एक अनूठा दृश्य प्रदान करता है।
  • रचना प्रक्रिया: शिलर ने इस नाटक पर लगभग सात साल तक काम किया (1791 से 1798)। यह उनकी सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक थी और उन्होंने इसके लिए व्यापक ऐतिहासिक शोध किया।
  • आधुनिक प्रस्तुति: 'वालेंस्टाइन' अक्सर लंबा होने के कारण पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किया जाता है। कभी-कभी केवल 'पिकोलोमिनी' और 'वालेंस्टाइन की मृत्यु' का ही मंचन किया जाता है, या फिर इसे एक ही नाटक के रूप में अनुकूलित किया जाता है।
  • ज्योतिष का महत्व: नाटक में वालेंस्टाइन का ज्योतिष पर गहरा विश्वास एक महत्वपूर्ण विषय है। वह अपने भाग्य का निर्धारण करने के लिए सितारों का सहारा लेता है, जो उसके चरित्र की एक प्रमुख विशेषता है और उसके पतन में नियति की भूमिका के विचार को पुष्ट करता है।
  • अनुवाद: सैमुअल टेलर कोलेरिज (Samuel Taylor Coleridge) ने 1800 में इस त्रयी का अंग्रेजी में अनुवाद किया था, जो अंग्रेजी बोलने वाले दर्शकों के लिए शिलर के काम को सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण था।
  • राजनीतिक टिप्पणी: नाटक को शिलर के समय की राजनीतिक स्थिति पर एक टिप्पणी के रूप में भी देखा जा सकता है, विशेष रूप से फ्रांसिसी क्रांति के बाद की अस्थिरता और सत्ता के साथ व्यक्तियों के संबंध के बारे में।
  • नायकों की विविधता: शिलर ने जानबूझकर वालेंस्टाइन को एक जटिल और विरोधाभासी नायक के रूप में प्रस्तुत किया है, जो न तो पूरी तरह अच्छा है और न ही पूरी तरह बुरा, बल्कि मानवीय महत्वाकांक्षाओं और कमजोरियों का एक मिश्रण है।