mathilda - mairi sheli

सारांश

मथिल्डा एक युवा महिला की कहानी है जो अपने दुख और अकेलेपन से त्रस्त है। वह अपनी दुखभरी कहानी को मरने से पहले दर्ज करती है। उसके जन्म के तुरंत बाद उसकी माँ का निधन हो गया, जिसके बाद उसके पिता गहन दुख में डूब गए और उसे सालों तक त्याग दिया। जब वह सोलह साल की हुई, तो उसके पिता लौट आए और उनके बीच एक गहरा, लगभग असाधारण बंधन बन गया। हालाँकि, उसके पिता का स्नेह एक अनैतिक, अनाचारपूर्ण प्रेम में बदल गया, जिसे उन्होंने अंततः मथिल्डा के सामने कबूल किया। इस रहस्योद्घाटन से भयभीत होकर, मथिल्डा ने उन्हें अस्वीकार कर दिया, जिससे उनके पिता ने आत्महत्या कर ली। भयानक अपराधबोध और समाज से बहिष्कार के डर से, मथिल्डा ने खुद को अलग-थलग कर लिया, एकान्त जीवन जीती रही। उसे वुडविले नामक एक कवि में संक्षिप्त सांत्वना मिली, लेकिन उसका दुख कभी कम नहीं हुआ। अंततः, वह बीमारी से मर जाती है, अपने यातनापूर्ण जीवन से मुक्ति पाती है, अपनी कहानी को एक चेतावनी के रूप में छोड़कर।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: एकाकी बचपन और पिता की वापसी

मथिल्डा अपनी कहानी शुरू करती है, खुद को एक ऐसी महिला के रूप में पेश करती है जो पूर्ण रूप से अकेली और निराशा से भरी हुई है। वह महसूस करती है कि वह अपने अस्तित्व को सही ठहराने और अपनी मृत्यु के बाद एक निशान छोड़ने के लिए अपनी कहानी सुना रही है। उसकी माँ का उसके जन्म के तुरंत बाद निधन हो गया था, जिससे उसके पिता असीम दुख में डूब गए थे। वह मथिल्डा को एक रिश्तेदार की देखभाल में छोड़ गए थे, क्योंकि वह उसे देखना भी सहन नहीं कर सकते थे, क्योंकि वह उनकी खोई हुई पत्नी की एक जीवित याद दिलाती थी। मथिल्डा अपने शुरुआती साल अकेलेपन में बिताती है, अपने पिता के स्नेह के लिए तरसती रहती है। जब वह सोलह साल की होती है, तो उसके पिता, अपने दुख से कुछ हद तक उबर चुके होते हैं, उसे वापस लेने के लिए लौटते हैं। वे एक गहरा, लगभग अनन्य बंधन बनाते हैं, अपना सारा समय एक साथ बिताते हैं, साझा बौद्धिक गतिविधियों में लिप्त होते हैं और प्रकृति का आनंद लेते हैं। मथिल्डा अंततः अपने पिता का प्यार पाकर बहुत खुश होती है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मथिल्डा युवा, एकाकी, संवेदनशील, अपने पिता के प्यार की लालसा रखने वाली। अपने अस्तित्व को सही ठहराने और अपने दुखद जीवन का अर्थ खोजने के लिए अपनी कहानी बताती है। अपने पिता का प्यार पाना चाहती है।
मथिल्डा के पिता अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद गहरे दुख में डूबे, अपनी बेटी से दूर रहने वाले। बाद में वापस आकर बेटी के प्रति गहरा लगाव विकसित करते हैं। अपनी पत्नी के जाने के दुख से उबरने की कोशिश करना। मथिल्डा में अपनी मृत पत्नी की छवि देखना और उसमें प्रेम ढूंढना।
मथिल्डा की माँ मथिल्डा के जन्म के तुरंत बाद मर जाती है। उसका अस्तित्व केवल मथिल्डा के पिता के दुख के कारण के रूप में है। - (पात्र प्रत्यक्ष रूप से कहानी में भाग नहीं लेता)

अनुभाग 2: निषिद्ध प्रेम की छाया

मथिल्डा और उसके पिता का बंधन कई सालों तक गहरा होता जाता है। उनकी निकटता असाधारण है, लगभग एक अस्वस्थ जुनून की सीमा तक, हालांकि मथिल्डा, अपनी मासूमियत में, इसे केवल शुद्ध प्रेम के रूप में देखती है। उसके पिता उत्तरोत्तर अधिक विमुख और उदास होते जाते हैं, अक्सर लंबे समय तक गायब रहते हैं, एक अनकहे दुख से ग्रस्त रहते हैं। मथिल्डा उनके दर्द को समझने की कोशिश करती है, यह मानती है कि यह उसकी माँ के लिए एक दुख है जो अभी भी कायम है। एक शिकार यात्रा के दौरान, मथिल्डा के पिता एक चौंकाने वाला कबूलनामा करते हैं। वह बताते हैं कि उनके प्रति उनका तीव्र स्नेह एक अनैतिक, निषिद्ध प्रेम में बदल गया है, जो उनकी माँ के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है। वह कबूल करते हैं कि वह मथिल्डा में अपनी मृत पत्नी की छवि देखते हैं और उसे एक प्रेमिका के रूप में चाहते हैं। मथिल्डा इस रहस्योद्घाटन से भयभीत और घृणित महसूस करती है। उसकी दुनिया बिखर जाती है। वह ऐसे प्रेम को समझ नहीं पाती या स्वीकार नहीं कर पाती, इसे एक राक्षसी अतिक्रमण मानती है।

अनुभाग 3: दुखद परिणाम और एकांतवास

मथिल्डा अपने पिता से विमुख हो जाती है। उनके बंधन की पवित्रता अपरिवर्तनीय रूप से टूट जाती है। मथिल्डा के अस्वीकार और अपने स्वयं के अपराधबोध और निषिद्ध इच्छाओं के बोझ को सहन करने में असमर्थ, उसके पिता गायब हो जाते हैं। मथिल्डा को बाद में पता चलता है कि उन्होंने खुद को डुबोकर आत्महत्या कर ली थी, जिसमें उन्होंने अपनी निराशा और अपने प्रेम की असंभवता को दर्शाते हुए एक नोट छोड़ा था। इस घटना के आघात और अपराधबोध से अभिभूत होकर, मथिल्डा अपने पिता की मृत्यु के लिए खुद को जिम्मेदार महसूस करती है। उसे डर है कि अगर उसका रहस्य उजागर हो गया, तो वह समाज से बहिष्कृत हो जाएगी। वह समाज से खुद को अलग करने का फैसला करती है, एकान्त जीवन अपना लेती है। वह अपना नाम बदल लेती है और सुनसान स्कॉटिश हाइलैंड्स में घूमती है, प्रकृति की जंगली सुंदरता में ही सांत्वना पाती है। वह अपने पुराने स्वरूप की एक छाया बन जाती है, लगातार अपने भीतर के राक्षसों से लड़ती रहती है।

अनुभाग 4: वुडविले और अंतिम समय

मथिल्डा के स्वनिर्धारित निर्वासन में कई साल बीत जाते हैं। एक दिन, वह वुडविले नामक एक युवा, संवेदनशील कवि से मिलती है। वुडविले, उसकी उदासी और बौद्धिक गहराई से आकर्षित होकर, उसका एकमात्र मित्र बन जाता है। मथिल्डा उसे अपने गहरे दुख के बारे में बताती है, हालांकि वह कभी भी अपने पिता के प्रेम के अनाचारपूर्ण स्वभाव का स्पष्ट रूप से खुलासा नहीं करती है। उसे वुडविले के साथ में एक संक्षिप्त, नाजुक सांत्वना मिलती है, उसे एक समान आत्मा के रूप में देखती है जो उसके दर्द को समझती है। इस दोस्ती के बावजूद, मथिल्डा का अपराधबोध और अलगाव कभी पूरी तरह से नहीं मिटता। उसका स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है, जो उसके आंतरिक पीड़ा को दर्शाता है। वह अपनी जीवन कहानी लिखती है, जिसे पाठक पढ़ रहे हैं, इसे अपने दुख की गवाही और निराशा के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में पेश करने का इरादा रखती है। मथिल्डा अंततः अपनी बीमारी से मर जाती है, मृत्यु में ही शांति पाती है, जिसे वह अपने लंबे, यातनापूर्ण अस्तित्व से मुक्ति के रूप में गले लगाती है। वह उम्मीद करती है कि उसकी कहानी, उसकी मृत्यु के बाद, दूसरों के लिए एक मार्गदर्शक या चेतावनी के रूप में काम आ सकती है।

साहित्यिक शैली:
गॉथिक उपन्यास, मनोवैज्ञानिक उपन्यास, ट्रेजेडी, ऑटोफिक्शन (आत्मकथात्मक उपन्यास) के तत्व।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:

  • मैरी शेली (Mary Shelley) एक प्रसिद्ध अंग्रेजी उपन्यासकार थीं, जिन्हें उनके गॉथिक उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' (Frankenstein) के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है।
  • वह प्रसिद्ध दार्शनिक विलियम गॉडविन और नारीवादी लेखिका मैरी वोलस्टोनक्राफ्ट की बेटी थीं।
  • उन्होंने रोमांटिक कवि पर्सी बिशे शेली से शादी की थी।
  • 'मथिल्डा' को 1819 में लिखा गया था लेकिन यह 1823 तक प्रकाशित नहीं हो पाया, और मैरी शेली के जीवनकाल में इसकी बहुत कम प्रतियाँ प्रकाशित हुईं, मुख्य रूप से इसके संवेदनशील विषय वस्तु (अनैतिक प्रेम) के कारण।

नैतिक शिक्षा:
'मथिल्डा' कोई स्पष्ट नैतिक शिक्षा नहीं देती, बल्कि यह कुछ गहरे विषयों की पड़ताल करती है:

  • निषिद्ध प्रेम के विनाशकारी परिणाम: कहानी दिखाती है कि कैसे निषिद्ध और अनैतिक प्रेम न केवल उन लोगों को नष्ट कर देता है जो इसे अनुभव करते हैं, बल्कि उनके आस-पास के लोगों को भी प्रभावित करता है।
  • अपराधबोध और एकांतवास की प्रकृति: उपन्यास अपराधबोध और आत्म-अलगाव के मनोवैज्ञानिक प्रभाव की पड़ताल करता है, यह दर्शाता है कि कैसे एक व्यक्ति बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट सकता है।
  • मातृत्व और पितृत्व की जटिलताएँ: यह कहानी माता-पिता और बच्चों के बीच के संबंधों की जटिलता और संभावित विनाशकारी प्रकृति को दर्शाती है, खासकर जब माता-पिता के प्यार की सीमाएँ टूट जाती हैं।

जिज्ञासाएँ:

  • आत्मकथात्मक समानताएँ: 'मथिल्डा' को अक्सर मैरी शेली के अपने जीवन के दुखों, विशेष रूप से उनकी माँ की मृत्यु, उनके पिता के साथ जटिल संबंध और उनकी कई संतानों की हानि के साथ समानांतर के रूप में देखा जाता है। कुछ आलोचक इस उपन्यास को उनके अपने पिता, विलियम गॉडविन के लिए एक गुप्त पत्र मानते हैं।
  • प्रकाशन में देरी: उपन्यास अपनी संवेदनशील विषय वस्तु (अनैतिक पिता-पुत्री प्रेम) के कारण मैरी शेली के जीवनकाल में पूर्ण रूप से प्रकाशित नहीं हो सका। उनके पिता, विलियम गॉडविन, जिन्हें उन्होंने पांडुलिपि भेजी थी, ने इसे "अनैतिक" और "घृणित" पाया और इसे प्रकाशित करने से इनकार कर दिया। यह उनकी मृत्यु के बाद 1823 में 'द परिल ग्रीन' में प्रकाशित हुआ था, लेकिन व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं हुआ।
  • गॉथिक तत्व: उपन्यास में गॉथिक शैली के कई तत्व हैं: एक एकाकी नायिका, एक रहस्यमय और विनाशकारी रहस्य, अलगाव, प्रकृति में उदासी और भयावहता की भावना।
  • स्वप्न और वास्तविकता: मैरी शेली ने स्वयं उल्लेख किया कि उपन्यास के लिए विचार उन्हें एक "जागरण स्वप्न" (waking dream) के रूप में आया था, जैसा कि उनके प्रसिद्ध उपन्यास 'फ्रेंकस्टीन' के साथ हुआ था।