ईश्वर का आशीर्वाद - सोलोमन कुर्ट वॉनगुट जूनियर
सारांश
कर्ट वॉननेगट की किताब 'गॉड ब्लेस यू, मिस्टर रोजवॉटर' (God Bless You, Mr. Rosewater) एलिएट रोजवॉटर की कहानी है, जो एक मिलियन डॉलर के वारिस और रोजवॉटर फाउंडेशन के अध्यक्ष हैं। अपने परिवार की उम्मीदों और सामाजिक मानदंडों के विपरीत, एलिएट अपना अधिकांश समय इंडियाना के रोजवॉटर काउंटी के वंचित और बेघर लोगों की मदद करने में बिताते हैं, अक्सर व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलते हैं और छोटे-मोटे दान देते हैं। उन्हें शराब पीने वाला और सनकी माना जाता है, जिससे उनकी पत्नी सिल्विया को काफी मानसिक पीड़ा होती है। एक युवा और महत्वाकांक्षी वकील, नॉर्मन मुशारी, एलिएट को कानूनी रूप से पागल घोषित करने की साजिश रचता है, ताकि रोजवॉटर संपत्ति को एक दूर के चचेरे भाई को हस्तांतरित किया जा सके, जो एक गरीब अप्रेंटिस है। कहानी में एक काल्पनिक विज्ञान कथा लेखक, किलगोर ट्राउट भी शामिल है, जिसे एलिएट अपना नायक मानते हैं। मुशारी का मुकदमा एलिएट की मानवीय भावना और अमेरिकी समाज में धन और करुणा के मूल्य पर एक विचारोत्तेजक बहस का केंद्र बन जाता है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1
किताब की शुरुआत एलिएट रोजवॉटर के परिचय से होती है, जो इंडियाना के रोजवॉटर काउंटी में रहते हैं और रोजवॉटर फाउंडेशन के प्रमुख हैं। उनके पिता, सीनेटर रोजवॉटर, न्यूयॉर्क में एक अमीर और प्रभावशाली व्यक्ति हैं, लेकिन एलिएट ने अपने जीवन का उद्देश्य समाज के सबसे निचले तबके के लोगों की मदद करना चुना है। वह लगातार शराब पीते हैं और अपने काउंटी के किसी भी व्यक्ति को, जो गरीबी या संकट में है, व्यक्तिगत रूप से फ़ोन पर या घर जाकर वित्तीय सहायता और भावनात्मक समर्थन प्रदान करते हैं। यह व्यवहार उनके परिवार और समाज के लिए बहुत ही असामान्य और अविवेकपूर्ण लगता है, खासकर इसलिए क्योंकि एलिएट एक करोड़पति हैं। उनकी पत्नी सिल्विया, जो शुरू में एलिएट के आदर्शों से प्रभावित थी, धीरे-धीरे उनके परोपकारी कार्यों और उनके अजीबोगरीब व्यवहार के कारण मानसिक रूप से परेशान होने लगती है। एलिएट का यह अत्यधिक परोपकार द्वितीय विश्व युद्ध में उनके एक अनुभव से जुड़ा है, जहाँ उन्होंने गलती से एक निर्दोष जर्मन परिवार को मार दिया था, जिसमें एक बच्चा भी शामिल था। इस घटना ने उन्हें गहरी अपराधबोध से भर दिया और उन्हें यह विश्वास दिला दिया कि सभी मनुष्यों को बिना शर्त प्यार और सम्मान का पात्र होना चाहिए।
