drepier ke patra - jonathan swift

सारांश

'ड्रेपियर के पत्र' आयरिश लेखक जोनाथन स्विफ्ट द्वारा एम. बी. ड्रेपियर के छद्म नाम से लिखे गए पत्रों की एक श्रृंखला है। ये पत्र 1724 और 1725 में प्रकाशित हुए थे, जो आयरलैंड के लिए तांबे के सिक्के बनाने के लिए विलियम वुड नामक एक अंग्रेजी व्यवसायी को ब्रिटिश सरकार द्वारा दिए गए पेटेंट के खिलाफ आयरिश जनता को जागरूक करने और लामबंद करने के उद्देश्य से लिखे गए थे। स्विफ्ट ने तर्क दिया कि वुड द्वारा ढाले गए सिक्के घटिया थे, आयरिश अर्थव्यवस्था को कमजोर करेंगे, और आयरिश संसद की सहमति के बिना आयरलैंड पर थोपे गए थे, इस प्रकार आयरिश स्वायत्तता का उल्लंघन करते थे। पत्रों ने आयरिश लोगों के बीच व्यापक विरोध जगाया, जिससे अंततः ब्रिटिश सरकार को वुड का पेटेंट वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा और स्विफ्ट को आयरलैंड में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में स्थापित किया।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: आयरलैंड के व्यापारियों, दुकानदारों, किसानों और आम लोगों को, मिस्टर वुड द्वारा ढाले गए पीतल के आधे पैसे के संबंध में

यह पहला पत्र एक विनम्र और समझदार डबलिन के ड्रेपियर, एम. बी. ड्रेपियर के रूप में सामने आता है, जो आयरलैंड के आम लोगों को संबोधित करता है। वह वुड के नए तांबे के सिक्कों के खतरे के बारे में चेतावनी देता है। ड्रेपियर सरल भाषा में समझाता है कि ये सिक्के घटिया सामग्री से बने हैं और इनका अंकित मूल्य इनके वास्तविक मूल्य से कहीं अधिक है। वह चेतावनी देता है कि यदि ये सिक्के प्रचलन में आते हैं, तो ये आयरलैंड की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर देंगे, जिससे लोगों को भारी नुकसान होगा। वह तर्क देता है कि इन सिक्कों को स्वीकार करना लोगों के पैसे और उनके भविष्य को खतरे में डालने जैसा होगा, और जोर देता है कि उन्हें इन सिक्कों को स्वीकार करने से इनकार करना चाहिए।

पात्र का नाम विशेषताएँ प्रेरणाएँ
एम. बी. ड्रेपियर जोनाथन स्विफ्ट का छद्म नाम। एक डबलिन का ड्रेपियर, आम आदमी के रूप में प्रतीत होता है, लेकिन अत्यधिक बुद्धिमान, वाकपटु और देशभक्त। आयरिश लोगों को वुड के सिक्कों के खतरे से आगाह करना, आयरलैंड की आर्थिक और राजनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करना।
विलियम वुड एक अंग्रेजी लौहकर्मी (ironmonger) जिसे ब्रिटिश क्राउन द्वारा आयरलैंड के लिए तांबे के सिक्के बनाने का पेटेंट दिया गया। घटिया सिक्के चलाकर भारी लाभ कमाना।
आयरलैंड के सामान्य लोग पहला पत्र का मुख्य दर्शक वर्ग। आर्थिक शोषण के प्रति संवेदनशील और नए सिक्कों के पूर्ण निहितार्थों से अनजान। अपनी आजीविका और संपत्ति की रक्षा करना।

अनुभाग 2: मिस्टर हार्डिंग, प्रिंटर को, 27 अप्रैल, 1724 के उनके न्यूज़-लेटर में मिस्टर वुड के आयरिश तांबे के सिक्के के संबंध में एक पैराग्राफ के अवसर पर

इस पत्र में, ड्रेपियर अपने तर्कों को प्रत्यक्ष अपील से कानूनी और संवैधानिक मुद्दों की ओर मोड़ता है। वह प्रिंटर हार्डिंग को संबोधित करता है, जो वुड के सिक्कों के पक्ष में कुछ तर्क प्रकाशित कर चुका था। ड्रेपियर उन तर्कों का खंडन करता है जो यह सुझाव देते हैं कि वुड के सिक्के स्वीकार्य हैं। वह वुड के पेटेंट की वैधता और ब्रिटिश सरकार के अधिकार पर सवाल उठाता है कि वह आयरिश लोगों की सहमति के बिना आयरलैंड पर ऐसे सिक्के थोपे। वह धीरे-धीरे इस बिंदु की ओर बढ़ता है कि यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि आयरिश संप्रभुता का मुद्दा है।

अनुभाग 3: आयरलैंड साम्राज्य के कुलीन वर्ग और भद्रजनों को

यह पत्र 'ड्रेपियर के पत्रों' में सबसे प्रसिद्ध और राजनीतिक रूप से चार्ज किया गया है। ड्रेपियर आयरिश कुलीन वर्ग और भद्रजनों से अपील करता है, उनसे अपने देश प्रेम और न्याय की भावना का आह्वान करता है। वह तर्क देता है कि वुड का पेटेंट सिर्फ एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि आयरलैंड के अधिकारों, संसदीय संप्रभुता और ब्रिटिश ताज के प्रति सीधे निर्भर राष्ट्र के रूप में इसकी स्थिति का उल्लंघन है, न कि ब्रिटिश संसद के अधीन। ड्रेपियर दृढ़ता से कहता है कि आयरलैंड एक स्वतंत्र राष्ट्र है और उसके लोग अपनी संपत्ति और भविष्य को नियंत्रित करने का अधिकार रखते हैं। यह पत्र आयरिश राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता के लिए एक शक्तिशाली घोषणापत्र है।

अनुभाग 4: आयरलैंड के समस्त लोगों को

यह पत्र राष्ट्रीय पहचान और स्वतंत्रता के विषयों को और विस्तारित करता है। ड्रेपियर आयरलैंड के समस्त लोगों से एकता और प्रतिरोध का आह्वान करता है। वह इस बात पर जोर देता है कि आयरिश लोगों को अपने हितों के लिए हानिकारक लगने वाली किसी भी चीज़ को अस्वीकार करने का अधिकार है। वह जनता की राय को जगाने के लिए मजबूत बयानबाजी का उपयोग करता है, उन्हें अपनी गरिमा बनाए रखने और बाहरी ताकतों द्वारा निर्धारित नियमों के अधीन न होने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पत्र आयरिश जनता के बीच व्यापक समर्थन और दृढ़ संकल्प को मजबूत करने के लिए एक निर्णायक प्रयास था।

अनुभाग 5: लॉर्ड विस्काउंट मोल्सवर्थ को एक पत्र

इस पत्र में, ड्रेपियर (स्विफ्ट) कुछ हद तक अपनी रक्षा करता है और अपने इरादों को स्पष्ट करता है। उसे राजद्रोह के आरोप लग रहे थे, और वह अपनी बात रखता है कि उसके सभी कार्य आयरलैंड के कल्याण के लिए गहरी चिंता से प्रेरित हैं। वह अपने पहले के पत्रों में किए गए तर्कों को दोहराता है, खासकर संवैधानिक स्वतंत्रता के संबंध में, और यह सुनिश्चित करने की कोशिश करता है कि उसके शब्द गलत न समझे जाएं या जानबूझकर सरकार के खिलाफ भड़काऊ न माने जाएं। वह आयरलैंड के अधिकारों और स्वायत्तता पर जोर देता रहता है।


साहित्यिक शैली: राजनीतिक व्यंग्य, पोलमिक (विवादात्मक), पैम्फलेट (गुटिका), निबंध।

लेखक के बारे में:
जोनाथन स्विफ्ट (1667-1745) एक आयरिश व्यंग्यकार, निबंधकार, कवि और एंग्लिकन पादरी थे। उन्हें डबलिन में सेंट पैट्रिक कैथेड्रल के डीन के रूप में जाना जाता है। स्विफ्ट अपनी तीक्ष्ण बुद्धि, कटाक्ष और सशक्त गद्य के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में 'गुलिवर ट्रैवल्स', 'ए मॉडस्ट प्रपोज़ल' और 'ए टेल ऑफ़ ए टब' शामिल हैं। उन्होंने आयरलैंड के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए एक भावुक वकील के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें आयरलैंड में एक राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया गया।

नैतिक शिक्षा:
'ड्रेपियर के पत्र' की नैतिक शिक्षा यह है कि एक सूचित और जागरूक नागरिक बाहरी दमन का सफलतापूर्वक विरोध कर सकता है। यह राष्ट्रीय आत्मनिर्णय, आर्थिक स्वतंत्रता और केंद्रीयकृत सत्ता के खतरों के महत्व को दर्शाता है। यह पुस्तक सार्वजनिक विमर्श में प्रेरक बयानबाजी की शक्ति और प्रभाव को भी उजागर करती है।

कुछ दिलचस्प तथ्य:

  • इन पत्रों ने जनमत को वुड के सिक्कों के खिलाफ इतनी प्रबलता से मोड़ दिया कि ब्रिटिश सरकार को अंततः पेटेंट वापस लेना पड़ा।
  • लेखक की पहचान के लिए £300 का इनाम घोषित किया गया था, लेकिन स्विफ्ट की पहचान कभी आधिकारिक तौर पर नहीं की गई, क्योंकि उन्हें भारी जन समर्थन और सुरक्षा प्राप्त थी।
  • स्विफ्ट 'ड्रेपियर' के रूप में आयरलैंड में एक राष्ट्रीय नायक बन गए।
  • 'ड्रेपियर के पत्र' को राजनीतिक पैम्फलेट साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण और आयरिश राष्ट्रवाद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता है।
  • स्विफ्ट ने इन पत्रों में एक सरल, सीधा शैली का उपयोग किया, जिससे वे व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ हो गए, जो उनके प्रभाव के लिए महत्वपूर्ण था।