ek dantkatha - wiliyam faukner

सारांश

विलियम फॉकनर की 'ए फेबल' प्रथम विश्व युद्ध के अंतिम दिनों में सेट की गई एक जटिल, प्रतीकात्मक उपन्यास है। यह एक रूपकात्मक कहानी है जो यीशु मसीह के जुनून (Passion of Christ) को फिर से कहती है। कहानी कॉर्पोरल स्टीफन (जो एक मसीह-समान व्यक्ति है) और उसके बारह अनुयायियों के एक रेजिमेंट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक खाई में तैनात हैं। वे युद्ध के बीच में हथियार डालने से इनकार करते हुए विद्रोह कर देते हैं। कॉर्पोरल और उसके अनुयायियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता है और एक सैन्य मुख्यालय में ले जाया जाता है।

कहानी का मुख्य केंद्र कॉर्पोरल और अस्सी साल के फ्रांसीसी जनरलिसिमो के बीच का संवाद है, जो मित्र देशों की सेनाओं का सर्वोपरि कमांडर है। जनरलिसिमो कॉर्पोरल को अपना नाजायज बेटा मानता है और उसे युद्ध को समाप्त करने के लिए अपने विद्रोह को त्यागने का प्रस्ताव देता है। वह उसे महिमा और शक्ति का प्रलोभन देता है, जैसा कि शैतान ने मसीह को दिया था। कॉर्पोरल इनकार कर देता है, यह विश्वास करते हुए कि मनुष्य को अपने नैतिक विकल्प चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अंततः, कॉर्पोरल को अपने दो अनुयायियों के साथ मार दिया जाता है, जैसा कि यीशु को दो चोरों के साथ सूली पर चढ़ाया गया था।

उपन्यास युद्ध की निरर्थकता, मानव दृढ़ता, स्वतंत्रता की खोज और करुणा बनाम सत्ता के संघर्ष के विषयों की पड़ताल करता है। यह कई जटिल पात्रों और उपकथाओं के माध्यम से अपने केंद्रीय रूपक का पता लगाता है, जिसमें एक अंग्रेज दूल्हा, एक अमेरिकी पादरी (टोबे सटरफ़ील्ड), और एक फ्रांसीसी मार्शल शामिल हैं। फॉकनर ने इस काम में अपनी विशिष्ट गैर-रेखीय कथा शैली का उपयोग किया है, जिसमें फ्लैशबैक और विभिन्न दृष्टिकोणों का मिश्रण है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: विद्रोह और गिरफ़्तारी

कहानी 1918 के एक शुरुआती वसंत के दिन, प्रथम विश्व युद्ध के अंतिम चरण के दौरान, फ्रांस के वेस्टर्न फ्रंट पर शुरू होती है। एक फ्रांसीसी इन्फैंट्री रेजिमेंट, जिसमें बारह सैनिक और उनके नेता, कॉर्पोरल स्टीफन शामिल हैं, ने एक खाई में तैनात रहते हुए हथियार डालने से इनकार कर दिया। यह विद्रोह, जो बिना किसी गोली चलाए, सिर्फ निष्क्रिय अवज्ञा के रूप में होता है, पूरे मोर्चे पर फैल जाता है, जिससे जर्मन और मित्र देशों की दोनों सेनाओं में खलबली मच जाती है। इससे दोनों पक्षों में एक दिन के लिए अनौपचारिक युद्धविराम हो जाता है, क्योंकि सैनिक इस अप्रत्याशित शांति का अनुभव करते हैं। सैन्य अधिकारियों को तुरंत हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कॉर्पोरल स्टीफन और उसके अनुयायियों को पकड़ लिया जाता है और उन्हें मित्र देशों के सैन्य मुख्यालय में ले जाया जाता है, जो शहर के एक गढ़वाले महल में स्थापित है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
कॉर्पोरल स्टीफन लगभग 33 साल का एक व्यक्ति; शांत, पवित्र, और करिश्माई; उसमें एक मसीह-समान आभा है। मानवता की नैतिक स्वतंत्रता और सम्मान को स्थापित करना; युद्ध की निरर्थकता और हिंसा को अस्वीकार करना।
कॉर्पोरल के 12 अनुयायी विभिन्न राष्ट्रीयताओं और पृष्ठभूमि के सैनिक; कॉर्पोरल के प्रति वफादार और उसके विश्वासों से प्रेरित। अपने नेता का अनुसरण करना; युद्ध की क्रूरता से थके हुए और शांति की उम्मीद।
क्वार्टरमास्टर जनरल मित्र देशों की सेनाओं का एक उच्च पदस्थ अधिकारी; व्यावहारिक, सैन्य प्रोटोकॉल का पालन करने वाला। आदेश बनाए रखना; विद्रोह को दबाना और सैन्य अनुशासन को बहाल करना।
तीन महिलाएँ (मार्था, मैरी, मैरी मैगडलीन की प्रतिनिधि) कॉर्पोरल के बचपन से जुड़ी तीन स्त्रियाँ, जिनमें से एक उसकी बहन है। वे कॉर्पोरल के लिए चिंता और प्रेम दर्शाती हैं। कॉर्पोरल को ढूंढना और उसकी रक्षा करना; उसका समर्थन करना।

अनुभाग 2: जनरलिसिमो की पृष्ठभूमि और योजनाएँ

कॉर्पोरल और उसके अनुयायियों को मित्र देशों के मुख्यालय में लाया जाता है, जहाँ उन्हें कड़े पहरे में रखा जाता है। इस बीच, हम अस्सी वर्षीय फ्रांसीसी जनरलिसिमो से मिलते हैं, जो मित्र देशों की सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर है। वह एक अनुभवी, शक्तिशाली और लगभग देवता-समान आकृति है, जिसका प्रभाव पूरे मोर्चे पर फैला हुआ है। जनरलिसिमो को कॉर्पोरल के विद्रोह के बारे में सूचित किया जाता है, और वह इसे अपनी व्यक्तिगत चुनौती के रूप में देखता है। यह पता चलता है कि कॉर्पोरल जनरलिसिमो का नाजायज बेटा है, हालांकि जनरलिसिमो ने उसे कभी औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। जनरलिसिमो इस विद्रोह को केवल सैन्य अनुशासन का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानव स्वभाव और युद्ध के अपरिवर्तनीय सत्य के खिलाफ एक चुनौती मानता है। वह कॉर्पोरल को अपने पाले में लाने की योजना बनाता है ताकि विद्रोह को एक 'छोटी घटना' के रूप में निपटाया जा सके, और युद्ध के निरंतरता को सुनिश्चित किया जा सके।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
जनरलिसिमो अस्सी साल का फ्रांसीसी, मित्र देशों की सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर; अनुभवी, शक्तिशाली, कूटनीतिक और निंदक; एक पिता-आकृति जो सत्ता और व्यवस्था को सर्वोच्च मानता है। युद्ध को बनाए रखना, जिसे वह मानव स्वभाव का एक अनिवार्य हिस्सा मानता है; अपने अधिकार को बनाए रखना; कॉर्पोरल को अपने दर्शन में आत्मसात करना और विद्रोह को एक 'नियंत्रित घटना' बनाना।
रननर (Peter-figure) कॉर्पोरल के अनुयायियों में से एक; एक समय उसका सबसे वफादार, लेकिन अंततः डर और आत्म-संरक्षण से प्रेरित। कॉर्पोरल का समर्थन करना, लेकिन बाद में अपने जीवन को बचाने के लिए उसे धोखा देना।
अंग्रेज दूल्हा (The English Groom) एक अंग्रेजी सैनिक, जो जनरलिसिमो के घोड़ों की देखभाल करता है; उसके पास एक लंबी और दुखद पृष्ठभूमि है, जिसने उसे युद्ध की निरर्थकता के प्रति अविश्वासी बना दिया है। वह अपनी पत्नी की हत्या करने और बाद में एक घोड़े के साथ भागने की अपनी कहानी बताता है। व्यक्तिगत स्वतंत्रता की तलाश; व्यवस्था और अधिकारियों पर अविश्वास।
पादरी टोबे सटरफ़ील्ड (Reverend Tobe Sutterfield) एक अमेरिकी पादरी, जो शांतिवादी है और कॉर्पोरल के संदेश से प्रभावित है। शांति का प्रचार करना; कॉर्पोरल के आदर्शों का समर्थन करना।

अनुभाग 3: कॉर्पोरल और जनरलिसिमो का संवाद

उपन्यास का एक महत्वपूर्ण भाग कॉर्पोरल और जनरलिसिमो के बीच कई दिनों तक चलने वाले गहन संवाद पर केंद्रित है। जनरलिसिमो कॉर्पोरल को अपने दर्शन का प्रचार करने और युद्ध को समाप्त करने के अपने प्रयासों को छोड़ने के लिए राजी करने की कोशिश करता है। वह उसे पद, शक्ति, महिमा और यहाँ तक कि अपने अधिकार में हिस्सा देने का प्रस्ताव देता है। जनरलिसिमो तर्क देता है कि युद्ध मानव प्रकृति का एक अंतर्निहित और अपरिवर्तनीय हिस्सा है, और मनुष्य को अपनी मुक्ति के लिए कभी भी इतना नहीं संघर्ष करना चाहिए कि वह पूरी तरह से समाप्त हो जाए। वह कॉर्पोरल को बताता है कि उसका विद्रोह मानव जाति के लिए आशा का एक खतरनाक प्रलोभन है, और यह कि मनुष्य को हमेशा अपने पतन और उसके बाद अपनी महिमा के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता होती है। कॉर्पोरल, हालांकि, दृढ़ रहता है। वह अपनी मान्यताओं से डिगने से इनकार करता है कि मनुष्य में अपने नैतिक विकल्प चुनने और युद्ध को अस्वीकार करने की शक्ति है। वह मानता है कि मानव स्वतंत्रता और आशा को बनाए रखना युद्ध की निरंतरता से अधिक महत्वपूर्ण है। यह संवाद मानवीय अस्तित्व के मूल सिद्धांतों, सत्ता और नैतिकता के संघर्ष, और आशा और निराशा के बीच के द्वंद्व का प्रतिनिधित्व करता है।

अनुभाग 4: पुनर्मिलन और दुख

कॉर्पोरल और जनरलिसिमो के बीच की बहस जारी रहती है, जबकि बाहर की दुनिया में कॉर्पोरल के अनुयायियों और उनके भाग्य का विवरण सामने आता है। तीन महिलाएँ (जिनमें से एक कॉर्पोरल की बहन है) कॉर्पोरल तक पहुँचने की कोशिश करती हैं, जो मसीह के जीवन में महिलाओं की भूमिका को दर्शाता है। वे उसे सांत्वना देने और उसका समर्थन करने की कोशिश करती हैं। इस दौरान, कुछ अनुयायी, जिनमें रनर भी शामिल है, को डर और दबाव के कारण अपने नेता को त्यागने के लिए मजबूर किया जाता है। रनर अपने गुरु के सिद्धांतों से विचलित हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पीटर ने यीशु को तीन बार नकारा था। यह अनुभाग उन लोगों की पीड़ा और वफादारी पर केंद्रित है जो कॉर्पोरल के करीब हैं, और उन नैतिक समझौताें पर भी जो युद्ध और भय के दबाव में लोग करते हैं। अंग्रेज दूल्हा भी इन घटनाओं का एक निष्क्रिय लेकिन महत्वपूर्ण गवाह बना रहता है, अपने स्वयं के निराशावादी दर्शन के साथ। पादरी टोबे सटरफ़ील्ड कॉर्पोरल के संदेश का प्रचार करना जारी रखता है, लेकिन उसे जल्द ही अधिकारियों द्वारा नियंत्रित कर लिया जाता है।

अनुभाग 5: अंतिम क्षण और परिणाम

जनरलिसिमो के सभी प्रयासों के बावजूद कॉर्पोरल अपने सिद्धांतों से पीछे हटने से इनकार कर देता है। अंततः, कॉर्पोरल को उसके दो अनुयायियों के साथ मार दिया जाता है - उन्हें एक पेड़ पर लटका दिया जाता है, जो सूली पर चढ़ाने का एक रूप है। ये दो अनुयायी वे हैं जो कॉर्पोरल के प्रति अंत तक वफादार रहते हैं। कॉर्पोरल की मृत्यु के बाद, उसकी बहन उसके शरीर को ले जाने का प्रयास करती है। इस बीच, जनरलिसिमो के अधिकारी कॉर्पोरल के अनुयायियों में से एक, रनर को एक युद्ध नायक के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं, ताकि विद्रोह के प्रभाव को कम किया जा सके और उसे एक नियंत्रित कथा में बदला जा सके। रनर को युद्ध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और उसे क्रॉस पर लटकाए गए कॉर्पोरल की कब्र पर एक सैनिक को मारना पड़ता है। पादरी टोबे सटरफ़ील्ड, जो अभी भी कॉर्पोरल के आदर्शों का प्रचार कर रहा है, को भी सूली पर चढ़ाया जाता है और शहर के एक चौराहे पर दफनाया जाता है, जो कॉर्पोरल के बलिदान के संदेश की निरंतरता का प्रतीक है। जनरलिसिमो अंततः अपनी स्वाभाविक मृत्यु मर जाता है, अपने जीवन के अंत तक युद्ध और मानव स्वभाव के अपने दर्शन पर कायम रहता है। उपन्यास अंततः युद्ध और मानव संघर्ष की निरंतरता पर एक गंभीर नोट पर समाप्त होता है, यह दर्शाता है कि कॉर्पोरल का बलिदान भले ही व्यक्तिगत मुक्ति लाया हो, लेकिन यह मानव जाति के मूल संघर्षों को समाप्त नहीं कर सका।


साहित्यिक शैली: प्रतीकात्मक उपन्यास (Allegorical Novel), युद्ध उपन्यास (War Novel), आधुनिकतावादी उपन्यास (Modernist Novel)

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:

  • विलियम फॉकनर (William Faulkner) (1897-1962) एक अमेरिकी उपन्यासकार और लघुकथाकार थे जिन्हें बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक माना जाता है।
  • उन्हें 1949 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिसे उन्होंने 1950 में स्वीकार किया।
  • वह अक्सर अमेरिकी दक्षिण, विशेष रूप से अपने काल्पनिक योक्नापाटावफा काउंटी, मिसिसिपी में सेट की गई कहानियों के लिए जाने जाते हैं।
  • उनकी लेखन शैली जटिल वाक्य संरचनाओं, कई कथात्मक दृष्टिकोणों और गैर-रेखीय कथाओं की विशेषता है।
  • उनके सबसे प्रसिद्ध कार्यों में 'द साउंड एंड द फ्यूरी', 'एज़ आई ले डाइंग', 'लाइट इन अगस्त', और 'अब्दालोम, अब्दालोम!' शामिल हैं।

नैतिक शिक्षा (Morale):
'ए फेबल' की नैतिक शिक्षा यह है कि मनुष्य के भीतर आशा, स्वतंत्रता और करुणा की शक्ति है, भले ही वह युद्ध और सत्ता के अंधकारमय वास्तविकता से घिरा हो। उपन्यास मानवीय इच्छाशक्ति और व्यक्तिगत बलिदान की क्षमता पर जोर देता है जो दुनिया को बदल सकती है, भले ही व्यवस्था इसे दबाने की कोशिश करे। यह यह भी बताता है कि मानवजाति युद्ध और हिंसा के चक्र में फंस सकती है, लेकिन व्यक्ति हमेशा अपने नैतिक विकल्प चुन सकता है और न्याय व शांति के लिए खड़े हो सकता है।

उत्सुकताएँ:

  • नोबेल पुरस्कार भाषण: फॉकनर ने 'ए फेबल' पर काम करते हुए अपना प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार भाषण लिखा, जिसमें उन्होंने मानव दृढ़ता और अंतहीन संघर्ष के विषयों को छुआ।
  • पुलित्जर पुरस्कार: उपन्यास ने 1955 में फिक्शन के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता, साथ ही 1955 में राष्ट्रीय पुस्तक पुरस्कार भी।
  • व्यक्तिगत अनुभव: फॉकनर ने खुद प्रथम विश्व युद्ध में सेवा नहीं की थी, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स में शामिल होने की कोशिश की थी। उन्होंने युद्ध के नैतिक और दार्शनिक पहलुओं की गहरी पड़ताल की।
  • प्रतीकात्मकता की गहराई: फॉकनर ने इस उपन्यास को दस साल से अधिक समय तक लिखा, और यह उनके सबसे जटिल और प्रतीकात्मक कार्यों में से एक माना जाता है, जिसमें यीशु मसीह के जुनून का एक विस्तृत रूपक है, जो प्रथम विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में सेट किया गया है।
  • संरचनात्मक जटिलता: यह उपन्यास अपनी जटिल, गैर-रेखीय कथा संरचना और विभिन्न दृष्टिकोणों के लिए जाना जाता है, जो पाठकों के लिए एक चुनौतीपूर्ण लेकिन पुरस्कृत अनुभव प्रदान करता है।