द प्रोफेसर ऑफ डिजायर - फ़िलिप रोथ
सारांश
फिलिप रॉथ का उपन्यास 'द प्रोफेसर ऑफ डिजायर' डेविड केपेश के जीवन की कहानी है, जो एक साहित्य का प्रोफेसर है, जो अपनी कामुक इच्छाओं और बौद्धिक आकांक्षाओं के बीच संतुलन खोजने के लिए संघर्ष कर रहा है। उपन्यास उसके बचपन के शुरुआती यौन अनुभवों से शुरू होता है, फिर यूरोप में छात्र के रूप में उसके गहन यौन संबंधों और बौद्धिक जागृति की पड़ताल करता है, विशेष रूप से एक स्वीडिश महिला, बिरगिटा के साथ। यह उसके लंदन में युद्ध से बचे चेक शरणार्थियों के साथ रहने के अनुभव को भी दर्शाता है, जिससे इतिहास के दुखद बोझ की गहरी समझ आती है। अंततः, डेविड अमेरिका लौट आता है, एक प्रोफेसर बन जाता है, और हेलेन नामक एक अमेरिकी महिला के साथ अधिक स्थिर संबंध बनाता है, लेकिन वह अभी भी अपनी पुरानी इच्छाओं और पहचान के संकटों से जूझ रहा है। यह उपन्यास इच्छा की प्रकृति, आत्म-खोज की जटिलताओं और हमारे अतीत के हमारे वर्तमान को आकार देने के तरीके पर एक गहरा चिंतन है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1
यह अनुभाग डेविड केपेश के बचपन और युवावस्था पर केंद्रित है, जो न्यूयॉर्क के एक ग्रामीण इलाके में अपने माता-पिता के होटल में बड़ा हुआ है। डेविड एक संवेदनशील और जिज्ञासु बच्चा है, जो दुनिया और अपनी खुद की कामुकता के बारे में सवालों से भरा है। वह अपने आसपास के वयस्कों के व्यवहार का अवलोकन करता है और अपनी शुरुआती यौन कल्पनाओं और अनुभवों में लिप्त होता है, जो अक्सर शर्म और आकर्षण के मिश्रण के साथ होते हैं। उसके माता-पिता व्यावहारिक, मेहनती लोग हैं, जो उसके बौद्धिक झुकाव को पूरी तरह से नहीं समझते हैं, जिससे डेविड को अपनी पहचान और आकांक्षाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| डेविड केपेश | मुख्य पात्र, संवेदनशील, बौद्धिक रूप से उत्सुक, कामुक इच्छाओं से प्रेरित, अपनी पहचान और उद्देश्य के लिए संघर्षरत। | बौद्धिक ज्ञान प्राप्त करना, अपनी यौन इच्छाओं को समझना और खोजना, अपने माता-पिता की व्यावहारिक दुनिया से परे एक अर्थपूर्ण अस्तित्व खोजना, अपनी आंतरिक बेचैनी को शांत करना। |
| केपेश के माता-पिता | होटल चलाने वाले, व्यावहारिक, मेहनती, अपने बेटे के बौद्धिक जुनून को समझने में असमर्थ, पारंपरिक मूल्यों का पालन करने वाले। | अपने होटल को सफलतापूर्वक चलाना, अपने बेटे को एक स्थिर और पारंपरिक जीवन प्रदान करना, यह सुनिश्चित करना कि वह एक जिम्मेदार और स्थापित व्यक्ति बने, भले ही वे उसकी गहरी इच्छाओं को पूरी तरह से न समझें। |
अनुभाग 2
युवा डेविड केपेश यूरोप में अध्ययन करने के लिए निकल पड़ता है, शुरू में लंदन, फिर कोपेनहेगन जाता है। यहीं पर उसका जीवन एक स्वीडिश महिला, बिरगिटा के साथ एक तीव्र और कामुक संबंध से हमेशा के लिए बदल जाता है। बिरगिटा एक स्वतंत्र और यौन रूप से मुक्त आत्मा है जो डेविड को पहले कभी अनुभव न की गई कामुकता और मनोवैज्ञानिक जटिलता की दुनिया में धकेल देती है। उनका संबंध डेविड के लिए एक बौद्धिक और यौन जागृति दोनों है, जो उसे उसकी अपनी इच्छाओं और वर्जनाओं की गहराई की पड़ताल करने के लिए मजबूर करता है। बिरगिटा उसके जीवन में एक केंद्रीय व्यक्ति बन जाती है, जो उसे पारंपरिक नैतिकताओं को चुनौती देती है और उसे एक नई तरह की स्वतंत्रता का अनुभव कराती है, जो उसे पहले अज्ञात थी। यह संबंध जुनून, स्वतंत्रता और बाद में, दर्दनाक अलगाव का एक जटिल मिश्रण है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| बिरगिटा | स्वीडिश, यौन रूप से मुक्त, परिष्कृत, तीव्र, बुद्धिमान, डेविड के कामुक शिक्षा में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति। | जीवन और प्यार को पूरी तरह से अनुभव करना, सामाजिक मानदंडों से मुक्त होना, अपनी कामुकता और इच्छाओं को पूरी तरह से जीना, डेविड के साथ एक गहरा, अर्थपूर्ण और जुनून भरा संबंध बनाना, भले ही इसका मतलब अंततः उसे छोड़ना पड़े। |
अनुभाग 3
बिरगिटा के साथ अपने संबंध के बाद, डेविड केपेश लंदन में वापस आ जाता है, जहाँ वह दो वृद्ध चेक महिलाओं, प्रोफेसर जिरी और उनकी बहन के साथ एक घर में कमरा लेता है। ये महिलाएँ होलोकॉस्ट से बची हुई हैं, और उनकी उपस्थिति और कहानियाँ डेविड के लिए एक गंभीर और दुखद प्रतिरूप प्रस्तुत करती हैं, जो उसके पहले के यौन अनुभवों से पूरी तरह विपरीत है। प्रोफेसर जिरी एक शांत और बौद्धिक महिला है, जबकि उसकी बहन नाजुक और भूतिया है, जो भयानक अतीत के बोझ को वहन करती है। उनकी कहानियाँ डेविड को मानव पीड़ा की गहराई और इतिहास के असहनीय भार का एहसास कराती हैं। यह अनुभव उसे उसकी कामुक खोजों से परे जीवन के अधिक गंभीर पहलुओं पर विचार करने के लिए मजबूर करता है, जो उसके व्यक्तिगत संघर्षों को बड़े, ऐतिहासिक संदर्भ में रखता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| प्रोफेसर जिरी | वृद्ध चेक महिला, होलोकॉस्ट से बची हुई, बौद्धिक, शांत, अपनी गरिमा और पिछली जीवन की त्रासदी को बनाए रखने वाली। | अपने दुखद अतीत से बचे रहना, अपनी बौद्धिक पहचान को बनाए रखना, अपनी बहन की देखभाल करना, अपनी कहानियों और अनुभव के माध्यम से इतिहास की याददाश्त को जीवित रखना। |
| प्रोफेसर जिरी की बहन | वृद्ध चेक महिला, होलोकॉस्ट से बची हुई, नाजुक, मानसिक रूप से परेशान, अतीत के दर्द और आघात का मूर्त रूप। | अपने अतीत के आघात से बचे रहना, अपनी बहन और अपने परिवेश में सांत्वना खोजना, जीवन के अंत की ओर शांतिपूर्ण अस्तित्व की इच्छा रखना, भले ही वह अपने गहरे घावों से पूरी तरह से उबर न पाई हो। |
अनुभाग 4
यूरोप से लौटने के बाद, डेविड अमेरिका में एक प्रोफेसर बन जाता है और हेलेन नामक एक अमेरिकी महिला से मिलता है। हेलेन बुद्धिमान, सुंदर और भावनात्मक रूप से स्थिर है, और वे एक दीर्घकालिक संबंध शुरू करते हैं। हेलेन बिरगिटा के यौन मुक्ति और अनिश्चितता के विपरीत स्थिरता और अधिक पारंपरिकता का प्रतिनिधित्व करती है। डेविड खुद को अपनी इच्छाओं को दबाने और एकांगी रिश्ते की उम्मीदों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश करता हुआ पाता है। हालांकि वह हेलेन से प्यार करता है, वह अक्सर अपने अतीत के जुनून और यूरोप में अपने अनुभवों के साथ संघर्ष करता है, खासकर बिरगिटा की याददाश्त और चेक शरणार्थियों के दुखद इतिहास के साथ। यह अनुभाग डेविड के भीतर निरंतर संघर्ष को दर्शाता है - एक ओर एक सामान्य, प्यार भरा जीवन जीने की उसकी इच्छा और दूसरी ओर उसकी गहरी, जंगली इच्छाओं को पूरा करने की उसकी ललक।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| हेलेन | अमेरिकी महिला, बुद्धिमान, सुंदर, दयालु, डेविड की दीर्घकालिक साथी, स्थिरता और पारंपरिक प्रेम का प्रतीक। | डेविड के साथ एक स्थिर और प्यार भरा रिश्ता बनाना, शादी करना, एक सामान्य और पूर्ण जीवन जीना, डेविड को भावनात्मक समर्थन और सुरक्षा प्रदान करना, भले ही वह उसकी गहरी कामुक जटिलताओं को पूरी तरह से समझ या संतुष्ट न कर सके। |
अनुभाग 5
यह अंतिम अनुभाग डेविड केपेश को "प्रोफेसर ऑफ डिजायर" के रूप में प्रस्तुत करता है, जो साहित्य का अध्ययन और अध्यापन करता है, विशेष रूप से काफ्का जैसे लेखकों के कार्यों में इच्छा के विषयों पर ध्यान केंद्रित करता है। वह अपने छात्रों को इच्छा के सिद्धांत और दर्शनशास्त्र सिखाता है, जबकि वह खुद अपने स्वयं के जीवन में इच्छा के कच्चे अनुभव के साथ संघर्ष करता है। वह अपने बौद्धिक विश्लेषण और अपनी अपनी कामुकता की वास्तविकता के बीच एक स्थायी संघर्ष में है। उपन्यास डेविड के मनोवैज्ञानिक राज्य, उसकी चिंता, बिरगिटा और चेक महिलाओं की उसकी यादें और उसकी पहचान के साथ उसके निरंतर संघर्ष में गहराई से उतरता है। वह एक ऐसा व्यक्ति है जो अकादमिक रूप से इच्छा को समझता है लेकिन इसे अपने जीवन के अनुभव और सामाजिक अपेक्षाओं के साथ जोड़ने के लिए संघर्ष करता है। उपन्यास का अंत डेविड को अपनी इच्छाओं और अपने अतीत के निहितार्थों से जूझते हुए छोड़ देता है, कोई आसान समाधान नहीं मिलता है, बल्कि आत्म-ज्ञान और आंतरिक संघर्ष की चल रही प्रक्रिया पर प्रकाश डाला जाता है।
जेनरा (शैली): मनोवैज्ञानिक उपन्यास, बिल्डंग्सरोमन (bildungsroman), कामुक साहित्य, दार्शनिक उपन्यास।
लेखक के बारे में:
फिलिप रॉथ (1933-2018) एक अमेरिकी उपन्यासकार थे जिन्हें 20वीं और 21वीं सदी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक माना जाता है। वह यहूदी-अमेरिकी पहचान, पुरुषत्व, इच्छा और अमेरिकी अनुभव जैसे विषयों की अपनी खोज के लिए जाने जाते थे। उन्हें 1997 में 'अमेरिकन पास्टोरल' के लिए पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके अन्य उल्लेखनीय कार्यों में 'पोर्टनॉयज कंप्लेंट', 'द ह्यूमन स्टैन' और 'सब्बथ्स थिएटर' शामिल हैं। रॉथ अक्सर अपनी आत्मकथात्मक और अर्ध-आत्मकथात्मक शैली, साथ ही अपनी विचारोत्तेजक और अक्सर विवादास्पद विषयों के लिए जाने जाते थे।
नैतिक शिक्षा:
'द प्रोफेसर ऑफ डिजायर' में कोई सीधी नैतिक शिक्षा नहीं है, बल्कि यह मानव स्थिति पर एक गहरा चिंतन है। उपन्यास यह बताता है कि इच्छा एक अंतहीन और जटिल शक्ति है, और बौद्धिक समझ अक्सर व्यक्तिगत अनुभव के कच्चे, विघटनकारी बल के साथ संघर्ष करती है। यह इस बात पर भी जोर देता है कि कैसे हमारे अतीत के अनुभव (विशेषकर युवावस्था और आघात) हमारी पहचान को आकार देते रहते हैं, और आत्म-ज्ञान एक सतत, अक्सर दर्दनाक, प्रक्रिया है। अंततः, यह सुझाव देता है कि व्यक्ति की आंतरिक इच्छाओं और बाहरी दुनिया की मांगों के बीच पूर्ण सामंजस्य शायद एक मायावी लक्ष्य है।
कुछ रोचक तथ्य:
- पुनरावर्ती पात्र: डेविड केपेश फिलिप रॉथ के कार्यों में एक आवर्ती पात्र है, जो 'द ब्रेस्ट' (1972) और 'द डाइनिंग एनिमल' (2001) जैसे उपन्यासों में भी दिखाई देता है। 'द प्रोफेसर ऑफ डिजायर' केपेश के जीवन के शुरुआती वर्षों और उसके बौद्धिक और कामुक विकास की पड़ताल करता है।
- आत्मचरित्रात्मक तत्व: रॉथ के कई उपन्यासों की तरह, इसमें भी मजबूत आत्मचरित्रात्मक तत्व हैं, विशेष रूप से बौद्धिक आकांक्षाओं और कामुक खोजों के संबंध में।
- समय का प्रतिबिंब: 1977 में प्रकाशित, यह उपन्यास उस समय की यौन मुक्ति आंदोलनों को दर्शाता है लेकिन साथ ही उनकी संभावित शून्यता और नैतिक जटिलताओं की भी पड़ताल करता है।
- शीर्षक का व्यंग्य: "द प्रोफेसर ऑफ डिजायर" शीर्षक स्वयं व्यंग्यात्मक है; केपेश इच्छा का प्रोफेसर है, जो अकादमिक रूप से इसे समझता है, लेकिन व्यक्तिगत रूप से इसके परिणामों और जटिलताओं से संघर्ष करता है।
- काफ्का का प्रभाव: उपन्यास में फ्रांज काफ्का का अक्सर उल्लेख किया गया है, और डेविड केपेश काफ्का की इच्छा, अपराधबोध और पहचान के विषयों में समानताएं पाता है, जो उसके अपने संघर्षों को दर्शाता है।
