igitur ya elbehnon ka paagalpan - steefan mallarme

सारांश

स्टीफन मल्लार्मे का 'इगितुर या एल्बेहनन का पागलपन' (Igitur ou la Folie d'Elbehnon) एक जटिल और प्रतीकात्मक गद्य कविता है जो अस्तित्व, शून्य, भाषा और निरपेक्ष की खोज के विषयों की पड़ताल करती है। कहानी इगितुर नामक एक युवा व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने वंश का अंतिम सदस्य है। वह आधी रात में एक कब्र जैसे कमरे में प्रवेश करता है, जिसका उद्देश्य एक रहस्यमय अनुष्ठान के माध्यम से समय, मौका और स्वयं को पार करना है। इगितुर अपनी पहचान, अपने पूर्वजों की विरासत और पूर्ण सत्य के विचार का सामना करता है। वह प्रतीकात्मक रूप से "शून्यता के प्याले" से पीता है और एक मोमबत्ती बुझाता है, जो व्यक्तिगत अस्तित्व के विघटन और निरपेक्ष अंधेरे और चुप्पी को गले लगाने का प्रतीक है। यह कार्य एक कवि के भाषा के साथ संघर्ष को दर्शाता है, एक सार्वभौमिक "पुस्तक" के विचार को, और शून्यता की जीत के माध्यम से एक प्रकार के अतिक्रमण को, जहाँ व्यक्तिगत 'मैं' एक शुद्ध विचार या अवधारणा में विलीन हो जाता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: प्रस्तावना

यह अनुभाग इगितुर की दुनिया को स्थापित करता है: एक कमरा, आधी रात, और इगितुर स्वयं, जो अपने वंश का अंतिम सदस्य है। वह एक गंभीर और रहस्यमय अनुष्ठान की तैयारी कर रहा है। वह अपने पूर्वजों की स्मृति और समय तथा स्मृति की अवधारणा पर विचार करता है। "एल्बेहनन" शब्द पेश किया गया है, जो अक्सर घड़ी की टिक-टिक और निरपेक्ष के आगमन के प्रतीक के रूप में व्याख्या किया जाता है। इगितुर अपने परिवार के इतिहास और अपने ऊपर पड़ने वाले उसके वजन को महसूस करता है, मानो वह अतीत और भविष्य के बीच एक सेतु हो।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
इगितुर (Igitur) युवा, अपने वंश का अंतिम सदस्य, अत्यधिक आत्म-विश्लेषी, दार्शनिक, पूर्ण सत्य और निरपेक्ष की खोज में। अपने वंश की स्मृति को बनाए रखना, मौका (chance) पर विजय पाना, स्वयं को मिटाकर एक शुद्ध विचार या पुस्तक का निर्माण करना।
वंशज (Ancestors) अतीत की परछाइयाँ, इगितुर की पहचान का हिस्सा, उसकी विरासत का प्रतीक। इगितुर के कार्यों को प्रभावित करना, उसके अस्तित्व को एक ऐतिहासिक संदर्भ देना।

अनुभाग 2: मध्यरात्रि और एकांत

इगितुर आधी रात में अपने कमरे में है, जो एक कब्र जैसे स्थान के रूप में वर्णित है। वह अकेला है, चुप्पी से घिरा हुआ है, शून्य और दूसरों की अनुपस्थिति का सामना कर रहा है। वह अपने स्वयं के अस्तित्व और अपने परिवार के इतिहास के वजन पर चिंतन करता है। कमरा ही उसके मन के लिए एक रूपक बन जाता है, एक ऐसी जगह जहाँ वह ब्रह्मांडीय और व्यक्तिगत सत्यों के साथ जूझता है। उसका एकांत उसे अपनी चेतना की गहराई में जाने की अनुमति देता है।

अनुभाग 3: पुस्तक का विचार

यह अनुभाग इगितुर के "पुस्तक" के प्रति जुनून में गहराई से उतरता है। यह कोई भौतिक पुस्तक नहीं है, बल्कि एक आदर्श, परिपूर्ण, निरपेक्ष पुस्तक है जो सभी सत्य को समाहित करती है और मौका को नकारती है। वह खुद को एक मुंशी के रूप में देखता है, या बल्कि, लेखन की क्रिया के अवतार के रूप में देखता है जो इस अंतिम पुस्तक की ओर ले जाती है। वह शब्दों, चुप्पी और शून्य के बीच के संबंध पर विचार करता है, यह सुझाव देते हुए कि सच्ची पुस्तक मौन और अनुपस्थिति में निहित है।

अनुभाग 4: पासा फेंकना और मौका

इगितुर एक प्रतीकात्मक कार्य करता है, जिसे अक्सर पासा फेंकने के रूप में व्याख्या किया जाता है। यह कार्य मल्लार्मे के दर्शन के लिए केंद्रीय है (जैसा कि उनके "अन कूप डे डेस जैमे ने'अबोलिरा ले हसार्ड" में देखा गया है)। वह मौका को खत्म करने का लक्ष्य रखता है, न कि जीतकर, बल्कि उसके अंतिम अर्थहीनता को स्वीकार करके और इसे एक पूर्वनिर्धारित, निरपेक्ष संरचना – पुस्तक – में एकीकृत करके। यह अनुभाग मानवीय इच्छा और अस्तित्व की यादृच्छिकता के बीच तनाव की पड़ताल करता है।

अनुभाग 5: स्वयं का विलोपन

इगितुर एक प्याले से पीता है, जिसे अक्सर "शून्यता के प्याले" या "विघटन के प्याले" के रूप में व्याख्या किया जाता है। यह आत्म-विलोपन का एक प्रतीकात्मक कार्य है, उसकी व्यक्तिगत अहं को सार्वभौमिक शून्य में घोलने का। वह एक मोमबत्ती बुझाता है, जो उसकी व्यक्तिगत रोशनी के अंत और निरपेक्ष अंधेरे और चुप्पी को गले लगाने का प्रतीक है। यह कोई शाब्दिक मृत्यु नहीं है, बल्कि एक प्रतीकात्मक है, निरपेक्ष के प्रति एक समर्पण है जो एक नए, शुद्ध अस्तित्व का मार्ग खोल सकता है।

अनुभाग 6: अंतिम निष्कर्ष और शून्य

मोमबत्ती बुझाने के बाद, इगितुर चुप्पी और शून्य को गले लगाता है। कार्य इस विचार के साथ समाप्त होता है कि इस आत्म-विलोपन और शून्यता की स्वीकृति के माध्यम से, अस्तित्व या विचार का एक नया, शुद्ध रूप उभर सकता है। यह एक चुनौतीपूर्ण निष्कर्ष है, जो सुझाव देता है कि सच्चा अर्थ या निरपेक्ष केवल व्यक्तिगत अस्तित्व और भाषा की सीमाओं से परे, शुद्ध विचार या नकारात्मकता के दायरे में पाया जा सकता है। "कब्र" निरपेक्ष के लिए एक पालना बन जाती है।

साहित्यिक विधा

गद्य कविता (Prose Poem), प्रतीकवाद (Symbolism), आधुनिकतावाद का अग्रदूत (Precursor to Modernism), दार्शनिक गद्य (Philosophical Prose).

लेखक के बारे में कुछ तथ्य

  • नाम: स्टीफन मल्लार्मे (Stéphane Mallarmé)
  • जन्म: 18 मार्च, 1842, पेरिस, फ्रांस में।
  • मृत्यु: 9 सितंबर, 1898, वाल्विन्स, फ्रांस में।
  • पृष्ठभूमि: स्टीफन मल्लार्मे एक प्रभावशाली फ्रांसीसी कवि और आलोचक थे, जिन्हें प्रतीकवाद आंदोलन के प्रमुख आंकड़ों में से एक माना जाता है। उन्हें "शुद्ध कविता" (pure poetry) के विचार के लिए जाना जाता है, जो भाषा की संगीतता, सुझाव और अस्पष्टता पर केंद्रित है, बजाय स्पष्ट अर्थ या कथा के। उनके काम अक्सर कला, भाषा, अस्तित्व और शून्य के दार्शनिक विषयों से संबंधित होते हैं। मल्लार्मे ने अपने समय के कई युवा कवियों और कलाकारों को प्रभावित किया और उनके काम ने 20वीं सदी के साहित्यिक आधुनिकतावाद के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

नैतिक शिक्षा

'इगितुर' कोई पारंपरिक नैतिक शिक्षा प्रदान नहीं करता है। इसके बजाय, यह अस्तित्व, चेतना, भाषा और निरपेक्ष की प्रकृति पर एक गहन दार्शनिक और आध्यात्मिक चिंतन है। यह सुझाव दे सकता है कि पूर्ण सत्य या सौंदर्य को पाने के लिए, व्यक्ति को अहंकार, लौकिक वास्तविकता और यहां तक कि भाषा की सीमाओं को पार करना होगा, शून्य और चुप्पी को गले लगाना होगा। यह मौका पर विजय पाने और एक सार्वभौमिक 'पुस्तक' के माध्यम से पूर्ण ज्ञान प्राप्त करने की कवि की अंतहीन खोज का प्रतीक है, जहाँ स्वयं का विघटन एक उच्चतर, शुद्धतर वास्तविकता की ओर ले जाता है।

किताब की कुछ जिज्ञासाएँ

  • 'इगितुर' को मल्लार्मे ने अपने जीवनकाल में अधूरा और अप्रकाशित छोड़ दिया था। इसे उनकी मृत्यु के बाद 1925 में प्रकाशित किया गया था, उनके शुरुआती लेकिन महत्वपूर्ण कार्यों में से एक के रूप में, जो उनकी बाद की महत्वपूर्ण कृतियों के लिए एक अग्रदूत के रूप में कार्य करता है।
  • यह काम उनके बाद के अधिक प्रसिद्ध गद्य कविता "ए थ्रो ऑफ़ द डाइस विल नेवर अबोलिश चांस" (Un coup de dés jamais n'abolira le hasard) का एक प्रारंभिक अग्रदूत माना जाता है, जिसमें वे मौका और निरपेक्ष के विषयों को और विकसित करते हैं।
  • 'इगितुर' अत्यधिक प्रतीकात्मक और घनघोर पाठ है, जिसमें कई पाठक और आलोचक विभिन्न व्याख्याएँ प्रस्तुत करते हैं। इसमें "एल्बेहनन" जैसे शब्द हैं जिनका कोई सीधा शाब्दिक अर्थ नहीं है बल्कि वे ध्वनि और सुझाव के माध्यम से काम करते हैं, जो मल्लार्मे की भाषा के उपयोग की विशेषता है।
  • यह कविता मल्लार्मे के 'ग्रेट वर्क' या 'यूनिवर्सल बुक' के विचार के लिए महत्वपूर्ण है, एक ऐसी काल्पनिक पुस्तक जो ब्रह्मांड के सभी ज्ञान को समाहित करती है और अपने आप में एक पूर्ण कलाकृति है। यह एक ऐसी पुस्तक है जिसे कभी लिखा नहीं जा सकता, लेकिन जिसका विचार कवि के रचनात्मक संघर्ष को प्रेरित करता है।
  • 'इगितुर' के माध्यम से, मल्लार्मे भाषा की सीमाओं और एक कवि के रूप में अपनी भूमिका के साथ अपनी व्यक्तिगत संघर्षों का भी पता लगाते हैं, जो शब्दों के माध्यम से निरपेक्ष को व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं और अंततः उनकी अपर्याप्तता को स्वीकार कर रहे हैं।