jo kuchh bhee girata hai - samuel beket

सारांश

'ऑल दैट फॉल' सैमुअल बेकेट का एक रेडियो नाटक है जो एक वृद्ध, बीमार महिला मैडी रूनी की यात्रा का वर्णन करता है, जो अपने अंधे पति मिस्टर रूनी को लेने के लिए अपने गाँव के रेलवे स्टेशन जाती है। यह नाटक आयरलैंड के ग्रामीण इलाकों में एक बरसात के रविवार दोपहर को घटित होता है। अपनी यात्रा के दौरान, मैडी कई अजीबोगरीब और सनकी लोगों से मिलती है, जिनमें से प्रत्येक अपने स्वयं के शारीरिक या मानसिक बोझ से ग्रस्त है। वह अपनी यात्रा को भारी शरीर और मन से मुश्किल से पूरा करती है, जो उम्र बढ़ने, क्षय और जीवन की निरर्थकता की भावना से भरा हुआ है। स्टेशन पर, वह अधीरता से अपने पति का इंतजार करती है, जिसकी ट्रेन असामान्य रूप से देर से आती है। जब मिस्टर रूनी अंततः पहुँचते हैं, तो वे दोनों एक-दूसरे पर अपनी निराशा और कटुता निकालते हुए, घर की ओर लौटते हैं। नाटक का अंत एक रहस्यमय घटना के खुलासे के साथ होता है - ट्रेन में एक बच्चे को कथित तौर पर चलती ट्रेन से फेंक दिया गया था। मिस्टर रूनी के जवाब अस्पष्ट और परेशान करने वाले हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वह इस त्रासदी में शामिल थे। यह नाटक वृद्धावस्था, बीमारी, मानवीय पीड़ा और जीवन में अर्थ की अनुपस्थिति के विषयों की पड़ताल करता है, जो बेकेट की विशिष्ट काली हास्य और निराशाजनक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

नाटक की शुरुआत मैडी रूनी के अपनी हवेली से रेलवे स्टेशन तक की धीमी और दर्दनाक यात्रा के साथ होती है। वह अपने अंधे पति, मिस्टर रूनी को लेने जा रही है, जो हर शनिवार की तरह अपनी साप्ताहिक यात्रा से वापस आ रहे हैं। मैडी अपनी उम्र, वजन और बीमारियों के बारे में लगातार शिकायत करती रहती है। उसकी चाल धीमी है और वह अक्सर रुक जाती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मैडी रूनी एक 70 वर्षीय, बहुत भारी, कमजोर और बीमार महिला; वह शिकायत करती रहती है लेकिन उसमें एक दृढ़ इच्छाशक्ति और काली हास्य की भावना भी है। अपने पति को स्टेशन से लेने जाना; जीवन की निराशा और शारीरिक पीड़ा के बावजूद अपने कर्तव्य और रिश्ते को निभाना।
क्रिस्टी मैडी का घोड़ा गाड़ी चालक; एक बूढ़ा, लंगड़ा आदमी। मैडी को स्टेशन तक ले जाना, हालांकि मैडी उसे छोड़ देती है।
मिस्टर टायलर रेसकोर्स में एक रिटायर क्लर्क; मैडी का परिचित। अपनी साइकिल चलाते हुए घर जाना; मैडी से बातचीत में शामिल होना।
मिस्टर स्लोकॉम मैडी के गाँव का सेक्रेटरी; एक कार चालक। अपनी कार में मैडी को लिफ्ट देना।

मैडी पहले अपने घोड़ा गाड़ी चालक क्रिस्टी से मिलती है, जिसके साथ वह हल्की-फुल्की और थोड़ी चिड़चिड़ी बातचीत करती है। वह क्रिस्टी को अपने बोझ के बारे में बताती है और उसे जाने देती है। जैसे ही वह आगे बढ़ती है, वह मिस्टर टायलर से मिलती है, जो साइकिल पर हैं। वे दोनों वृद्धावस्था और अपने शरीर के पतन के बारे में बात करते हैं। मैडी मिस्टर टायलर के साथ कुछ कदम चलती है। फिर, वह मिस्टर स्लोकॉम की कार द्वारा लिफ्ट लेती है, जो अपनी गाड़ी के इंजन को बार-बार बंद करके मैडी को चिढ़ाते हैं। मैडी को मिस्टर स्लोकॉम की गाड़ी से निकलना पड़ता है क्योंकि उसे उस पर चढ़ने में बहुत मुश्किल होती है।

अनुभाग 2

अपनी यात्रा जारी रखते हुए, मैडी को अपनी शारीरिक पीड़ा और संघर्ष के बारे में और भी अधिक पता चलता है। वह रुक-रुक कर आगे बढ़ती है, अपनी सांस फूलने और घुटनों के दर्द के बारे में शिकायत करती है। उसकी मुलाकात कुछ और ग्रामीणों से होती है, जिनके साथ वह संक्षिप्त लेकिन विशिष्ट बातचीत करती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मिस्टर स्पोअर एक स्थानीय पादरी; एक विकलांग पैर वाला व्यक्ति। मैडी से मिलकर उसे चर्च जाने की याद दिलाना; अपनी व्यक्तिगत पीड़ा साझा करना।
श्रीमती कूनी डाकघर में काम करने वाली महिला; एक साधारण ग्रामीण। मैडी से मिलना और छोटी-मोटी बात करना।

मैडी की मुलाकात मिस्टर स्पोअर से होती है, जो एक पादरी हैं और लंगड़े हैं। वे दोनों शारीरिक पीड़ा और ईश्वर के अस्तित्व के बारे में संक्षिप्त रूप से बात करते हैं। मैडी स्पोअर से पूछती है कि वह ईश्वर को क्यों नहीं छोड़ देते, और स्पोअर जवाब देता है कि ईश्वर ने उन्हें कभी नहीं छोड़ा। थोड़ी देर बाद, मैडी को श्रीमती कूनी मिलती है, जो डाकघर से आ रही है। वे मौसम और रोजमर्रा की चीज़ों के बारे में बात करती हैं। मैडी लगातार अपनी पुरानी यादों और अपने प्यारे बच्चों के बारे में सोचती रहती है जिनकी अब मृत्यु हो चुकी है।

अनुभाग 3

मैडी आखिरकार स्टेशन पहुँचती है, अपनी यात्रा के संघर्ष से थक चुकी है। स्टेशन पर भी उसे कुछ विचित्र लोगों का सामना करना पड़ता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मिस फिट्ट एक युवा, धार्मिक महिला; मैडी की परिचित। अपनी धार्मिक मान्यताओं को साझा करना; मैडी से उसकी स्थिति के बारे में पूछना।

स्टेशन पर मैडी को मिस फिट्ट मिलती है, जो एक युवा, धार्मिक महिला है। मिस फिट्ट मैडी के साथ अपनी धार्मिक मान्यताओं और अपनी आध्यात्मिक यात्रा के बारे में बात करती है, लेकिन मैडी इन बातों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाती। मैडी अपने पति की ट्रेन का इंतजार कर रही है, जो देर से चल रही है। मैडी का मूड चिड़चिड़ा है और वह मिस फिट्ट की बातों से और भी परेशान हो जाती है।

अनुभाग 4

जैसे-जैसे ट्रेन के आने का समय बीतता जाता है और देर होती जाती है, मैडी की चिंता बढ़ती जाती है। वह स्टेशन मास्टर से बात करती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मिस्टर बैरेल रेलवे स्टेशन मास्टर; एक कर्तव्यपरायण लेकिन थोड़ा सनकी व्यक्ति। ट्रेन के आने की जानकारी देना; अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करना।

मैडी स्टेशन मास्टर, मिस्टर बैरेल से बात करती है, जो उसे बताता है कि ट्रेन देर से चल रही है। वह ट्रेन के बारे में कुछ अजीबोगरीब और अप्रासंगिक विवरण बताता है, जिससे मैडी की बेचैनी और भी बढ़ जाती है। मैडी मिस्टर बैरेल की बातों को समझने में संघर्ष करती है और चिंतित है कि उसके पति को कुछ हो गया होगा।

अनुभाग 5

अंततः, मिस्टर रूनी की ट्रेन बहुत देर से आती है। मैडी उन्हें लेने के लिए प्लेटफॉर्म पर जाती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मिस्टर रूनी मैडी के अंधे पति; एक कटु, असभ्य और कठोर व्यक्ति। अपनी साप्ताहिक यात्रा से घर लौटना; अपनी पत्नी के प्रति अपनी निराशा व्यक्त करना।

मिस्टर रूनी ट्रेन से उतरते हैं, और वे दोनों तुरंत बहस में पड़ जाते हैं। मिस्टर रूनी अपनी पत्नी के बारे में कटु टिप्पणियाँ करते हैं और अपनी अंधीपन और अपने जीवन की निराशा के बारे में शिकायत करते हैं। मैडी भी पलटवार करती है। वे दोनों एक-दूसरे पर अपनी निराशा और कटुता निकालते हैं। वे धीरे-धीरे घर की ओर वापस चलना शुरू करते हैं, उनकी वापसी यात्रा भी उतनी ही धीमी और बोझिल होती है जितनी मैडी की स्टेशन तक की यात्रा थी। उनकी बातचीत कड़वाहट, निराशा और अजीबोगरीब हास्य से भरी होती है।

अनुभाग 6

जैसे ही मिस्टर और मिसेज रूनी घर की ओर बढ़ते हैं, एक रहस्यमय घटना का खुलासा होता है। उनका ड्राइवर, जेरी, उनके पास पहुँचता है और उन्हें एक खबर देता है।

जेरी बताता है कि ट्रेन में एक बच्चा था जिसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया गया था। मैडी इस खबर से चौंक जाती है और मिस्टर रूनी से इस बारे में पूछती है। मिस्टर रूनी के जवाब अस्पष्ट, परेशान करने वाले और संदिग्ध होते हैं। वह कुछ ऐसा कहते हैं जिससे पता चलता है कि वह इस घटना में शामिल हो सकते हैं, या कम से कम वह इसके बारे में जानते थे और उन्होंने कुछ नहीं किया। नाटक का अंत एक अनिश्चित और परेशान करने वाले नोट पर होता है, जिसमें मिस्टर रूनी का अंतिम संवाद होता है जो बच्चे की मृत्यु में उनकी संभावित भूमिका के बारे में संदेह पैदा करता है। वे दोनों अपने घर की ओर आगे बढ़ते हैं, उनके बीच का माहौल भारी और असहज है।


साहित्यिक शैली: रेडियो नाटक, एब्सर्ड ड्रामा (निरर्थक नाटक), दुखद-हास्य (Tragicomedy)।

लेखक के बारे में:
सैमुअल बारक्ले बेकेट (1906-1989) एक आयरिश उपन्यासकार, नाटककार, लघु कथा लेखक, थिएटर निर्देशक और कवि थे। उन्हें 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक माना जाता है। बेकेट अपनी गहरी निराशावादी और अस्तित्ववादी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर जीवन के अर्थ की अनुपस्थिति, पीड़ा और मानव अस्तित्व की निरर्थकता पर केंद्रित होती हैं। उनका सबसे प्रसिद्ध काम 'वेटिंग फॉर गोडोट' (Waiting for Godot) है। उन्हें 1969 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। बेकेट फ्रांसीसी भाषा में भी लिखते थे और अपने कई कार्यों का स्वयं अंग्रेजी में अनुवाद करते थे।

नैतिक शिक्षा / मुख्य विचार:
यह नाटक कोई सीधी नैतिक शिक्षा नहीं देता है, बल्कि जीवन के कुछ गहरे और परेशान करने वाले पहलुओं को उजागर करता है:

  • वृद्धावस्था और शारीरिक क्षय: नाटक में पात्रों की शारीरिक अक्षमताएँ और दर्द जीवन के अपरिहार्य पतन को दर्शाते हैं।
  • जीवन की निरर्थकता: पात्रों की बातचीत और उनकी स्थिति अक्सर जीवन में अर्थ की अनुपस्थिति और उद्देश्यहीनता की भावना को दर्शाती है।
  • मानवीय क्रूरता और उदासीनता: बच्चे की घटना और मिस्टर रूनी की अस्पष्ट प्रतिक्रिया मानवीय क्रूरता और दूसरों की पीड़ा के प्रति उदासीनता की एक परेशान करने वाली झलक प्रस्तुत करती है।
  • संचार की विफलता: पात्र अक्सर एक-दूसरे को समझने में असफल रहते हैं, जिससे उनके बीच की दूरियाँ और भी बढ़ जाती हैं।
  • सत्य की अस्पष्टता: नाटक का अंत एक रहस्य और अनिश्चितता के साथ होता है, जिससे दर्शकों को अपने स्वयं के निष्कर्ष निकालने पड़ते हैं और यह दर्शाता है कि सत्य हमेशा स्पष्ट नहीं होता।

जिज्ञासु तथ्य:

  • यह सैमुअल बेकेट का पहला रेडियो नाटक था, जिसे उन्होंने 1956 में बीबीसी थर्ड प्रोग्राम के लिए लिखा था।
  • नाटक पूरी तरह से ध्वनि प्रभावों और संवाद पर निर्भर करता है, जिससे श्रोताओं को अपनी कल्पना का उपयोग करके दृश्यों की कल्पना करनी पड़ती है। ध्वनि प्रभाव (जैसे पैर की आवाज, कार का इंजन, ट्रेन की आवाज) नाटक में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इस नाटक में बेकेट के कई विशिष्ट विषय मौजूद हैं, जैसे निराशावादी हास्य, दोहराव, पीड़ा, और अस्तित्व संबंधी चिंताएँ।
  • नाटक का शीर्षक बाइबिल के भजन 145:14 से लिया गया है: "यहोवा उन सब को संभाले रखता है जो गिर रहे हैं, और उन सब को उठाता है जो झुके हुए हैं।" यह शीर्षक नाटक की विडंबनापूर्ण प्रकृति को उजागर करता है, क्योंकि नाटक में पात्र शारीरिक और मानसिक रूप से "गिरते" हुए दिखाई देते हैं, और कोई उन्हें "उठाने" वाला नहीं होता।
  • नाटक का अंत जानबूझकर अस्पष्ट और खुला छोड़ दिया गया है, जिससे यह सवाल बना रहता है कि क्या मिस्टर रूनी ने वास्तव में बच्चे को ट्रेन से धक्का दिया था या नहीं। बेकेट ने स्वयं इस प्रश्न का कोई सीधा उत्तर नहीं दिया।