kaindida - jorj barnard shaw

सारांश

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का नाटक 'कैंडिडा' एक ईसाई समाजवादी पादरी, रेवरेंड जेम्स मेवर मोरेल और उनकी पत्नी कैंडिडा के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी तब शुरू होती है जब एक सत्रह वर्षीय युवा, संवेदनशील कवि, यूजीन मार्चबैंक, कैंडिडा के प्रति अपने प्यार का इज़हार करता है। वह मानता है कि कैंडिडा का पति मोरेल उसकी पत्नी के सच्चे मूल्य और आंतरिक शक्ति को समझने में विफल रहता है। मार्चबैंक कैंडिडा को मोरेल के कथित अधिपत्य से "मुक्त" करना चाहता है। मोरेल, जो अपनी पत्नी के प्रति अपने प्यार और अपनी शादी की स्थिरता को लेकर आश्वस्त है, शुरू में मार्चबैंक को बच्चा समझकर खारिज कर देता है, लेकिन जल्द ही उसे मार्चबैंक की भावनाओं की गंभीरता का एहसास होता है।

कैंडिडा को अपने पति मोरेल और युवा कवि मार्चबैंक के बीच एक विकल्प चुनने के लिए मजबूर किया जाता है, जो दोनों उसके प्यार का दावा करते हैं। मोरेल तर्क देता है कि उसे कैंडिडा की आवश्यकता है क्योंकि वह उसके जीवन का आधार है और उसके सार्वजनिक कार्य को संभव बनाती है, जबकि मार्चबैंक का दावा है कि वह कैंडिडा को एक ऐसे बंधन से बचा सकता है जो उसे पूरी तरह से समझा और सराहा नहीं गया है। कैंडिडा, अपनी बुद्धिमत्ता और समझदारी के साथ, अंततः एक चौंकाने वाला निर्णय लेती है। वह बताती है कि वह दोनों में से "कमजोर" व्यक्ति को चुनेगी, जिसे उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। इस निर्णय से पता चलता है कि मोरेल, जो बाहरी रूप से इतना मजबूत और आत्मविश्वासी दिखता है, वास्तव में कैंडिडा पर सबसे अधिक निर्भर है। मार्चबैंक, एक नई अंतर्दृष्टि प्राप्त करके, अकेले ही दुनिया का सामना करने के लिए चला जाता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

कहानी:
नाटक मोरेल के लंदन स्थित पादरी के घर में खुलता है, जहाँ रेवरेंड जेम्स मेवर मोरेल अपने सचिव, मिस प्रोसरपाइन गार्नेट, और सहायक पादरी, रेवरेंड अलेक्जेंडर मिल के साथ काम कर रहे हैं। मोरेल एक करिश्माई और लोकप्रिय ईसाई समाजवादी पादरी है, जो अपनी वाक्पटुता और मानवीय विचारों के लिए जाना जाता है। उसका ससुर, बर्गेस, जो एक स्वार्थी और पूंजीवादी व्यापारी है, आता है और मोरेल से अपने एक टेनमेंट के किरायेदार के बारे में बात करता है, जिसे मोरेल ने मदद की है। बर्गेस मोरेल को भ्रष्ट करने की कोशिश करता है, लेकिन मोरेल अपनी ईमानदारी पर कायम रहता है।

फिर यूजीन मार्चबैंक आता है, जो मोरेल को बताता है कि वह कैंडिडा से प्यार करता है। मार्चबैंक एक सत्रह वर्षीय, बेहद संवेदनशील और आदर्शवादी युवा कवि है, जो मोरेल और कैंडिडा के विवाह को सतही मानता है। वह मोरेल पर आरोप लगाता है कि वह कैंडिडा की सच्ची सुंदरता और आंतरिक शक्ति को नहीं देखता, और वह उसे एक ऐसे रिश्ते से मुक्त करना चाहता है जहाँ उसे पूरी तरह से समझा नहीं गया है। मोरेल शुरू में मार्चबैंक को एक बच्चे के रूप में देखता है और उसकी भावनाओं को गंभीरता से नहीं लेता, लेकिन मार्चबैंक की जुनून भरी बातें और कैंडिडा के प्रति उसकी गहरी भक्ति मोरेल को परेशान करना शुरू कर देती है। कैंडिडा घर लौटती है और मार्चबैंक का गर्मजोशी से स्वागत करती है, जिससे मोरेल की चिंता बढ़ जाती है।

अनुभाग 2

कहानी:
कैंडिडा और मोरेल के बीच तनाव बढ़ जाता है, खासकर जब मार्चबैंक स्पष्ट रूप से कैंडिडा के प्रति अपने प्यार का इजहार करता रहता है और मोरेल के दावों को चुनौती देता है। मोरेल, जो अपनी शादी को आदर्श मानता था, अब मार्चबैंक की बातों से अपनी असुरक्षाओं का सामना करने के लिए मजबूर होता है। वह कैंडिडा से पूछता है कि क्या मार्चबैंक की बातें सही हैं, क्या वह वास्तव में उसे कम आंकता है। कैंडिडा मोरेल को शांत करने की कोशिश करती है और उसे आश्वस्त करती है कि वह उससे प्यार करती है, लेकिन मार्चबैंक उस पर लगातार दबाव डालता रहता है कि वह अपने मन की बात कहे।

इस बीच, मोरेल एक रात एक व्याख्यान देने जाता है, जहाँ वह अपनी सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त रहता है। वह कैंडिडा से उम्मीद करता है कि वह उसे सार्वजनिक मंच पर समर्थन देगी, जैसा कि वह हमेशा करती आई है। हालांकि, मार्चबैंक कैंडिडा को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि वह केवल मोरेल की प्रसिद्धि का एक सहायक हिस्सा है, न कि उसकी अपनी पहचान वाला व्यक्ति। कैंडिडा इन विचारों पर विचार करती है। प्रोसरपाइन, मोरेल की सचिव, जो शायद मोरेल के प्रति कुछ हद तक आकर्षित है, मार्चबैंक से ईर्ष्या करती है और उसे तुच्छ समझती है। वह नाटक के गंभीर क्षणों में हास्य पैदा करती है। मोरेल लौटता है और कैंडिडा तथा मार्चबैंक के बीच बढ़ते भावनात्मक तनाव को महसूस करता है।

अनुभाग 3

कहानी:
यह नाटक का चरमोत्कर्ष है, जहाँ कैंडिडा को अंततः मोरेल और मार्चबैंक के बीच एक विकल्प चुनने के लिए मजबूर किया जाता है। मोरेल और मार्चबैंक दोनों अपनी-अपनी तरह से कैंडिडा के सामने अपने प्यार और उसकी आवश्यकता का दावा करते हैं। मोरेल अपनी सार्वजनिक सफलता और आत्मविश्वास के बावजूद, स्वीकार करता है कि वह कैंडिडा के बिना खोया हुआ महसूस करेगा; वह उसके जीवन का आधार, उसकी माँ और उसका घर है। मार्चबैंक, अपनी संवेदनशील और काव्यात्मक प्रकृति के साथ, कैंडिडा को एक ऐसी दुनिया की पेशकश करता है जहाँ उसे उसकी आत्मा के लिए सराहा जाएगा, न कि उसकी घरेलू भूमिका के लिए। वह उसे मोरेल के सार्वजनिक जीवन के "बर्बर" प्रभावों से बचाने की पेशकश करता है।

कैंडिडा उनकी बात सुनती है और फिर अपना निर्णय देती है। वह कहती है कि वह दोनों में से "कमजोर" व्यक्ति को चुनेगी, जिसे उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। वह मोरेल को चुनती है, यह कहकर सबको चौंका देती है कि मोरेल, जो बाहरी रूप से इतना मजबूत, लोकप्रिय और आत्मविश्वासी है, वास्तव में वह है जिसे उसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। वह कहती है कि मोरेल एक ऐसा बच्चा है जिसे उसकी देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है, जबकि मार्चबैंक, अपनी काव्यात्मक दृष्टि और आध्यात्मिक शक्ति के साथ, दुनिया का अकेले सामना करने के लिए पर्याप्त मजबूत है। मार्चबैंक, इस रहस्योद्घाटन से बदल जाता है, एक नई अंतर्दृष्टि के साथ घर से निकल जाता है, एक ऐसा रहस्य सीखकर जिसे कैंडिडा ने उसे बताया है - प्यार की गहरी और अधिक जटिल प्रकृति।


शैली:
सामाजिक नाटक, विचारों की कॉमेडी, घरेलू नाटक, बौद्धिक नाटक।

लेखक के बारे में:
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ (1856-1950) एक आयरिश नाटककार, आलोचक, राजनीतिक कार्यकर्ता और 1925 में साहित्य में नोबेल पुरस्कार विजेता थे। वह 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में से एक थे। शॉ अपने सामाजिक विचारों, तीखे व्यंग्य और अपनी कहानियों के माध्यम से तत्कालीन समाज की रूढ़ियों और पाखंड पर प्रहार करने के लिए जाने जाते थे। वह फेबियन सोसाइटी के एक प्रमुख सदस्य थे और समाजवाद के प्रबल समर्थक थे। उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध नाटकों में 'पायग्मेलियन', 'मैन्स एंड सुपरमैन', 'आर्म्स एंड द मैन' और 'सेंट जोन' शामिल हैं।

नैतिक:
'कैंडिडा' का नैतिक यह है कि प्रेम और शक्ति की पारंपरिक धारणाएँ अक्सर भ्रामक होती हैं। असली ताकत बाहरी दिखावे या सामाजिक भूमिकाओं में नहीं होती, बल्कि आंतरिक निर्भरता और समझ में होती है। नाटक दिखाता है कि एक महिला अक्सर एक रिश्ते में छिपी हुई, आवश्यक शक्ति प्रदान करती है, और यह कि जो पुरुष सबसे मजबूत दिखते हैं, वे वास्तव में भावनात्मक रूप से सबसे अधिक कमजोर और अपनी साथी पर निर्भर हो सकते हैं। यह हमें सिखाता है कि प्यार का चुनाव किसी की कथित ताकत के आधार पर नहीं, बल्कि उस व्यक्ति की सच्ची ज़रूरतों और हमारी अपनी भूमिका की समझ के आधार पर किया जाना चाहिए।

जिज्ञासाएँ:

  • इब्सन का जवाब: शॉ ने 'कैंडिडा' को हेनरिक इब्सन के प्रसिद्ध नाटक 'ए डॉल'्स हाउस' के जवाब के रूप में लिखा था। जहाँ इब्सन का नाटक एक महिला के अपने पति को छोड़कर जाने पर समाप्त होता है, शॉ का नाटक एक महिला के "कमजोर" पति के पास लौटने पर समाप्त होता है, लेकिन एक बिल्कुल अलग समझ और शक्ति के साथ।
  • एंटी-रोमांटिक कॉमेडी: इस नाटक को अक्सर "एंटी-रोमांटिक कॉमेडी" के रूप में वर्णित किया जाता है क्योंकि यह प्यार की आदर्शवादी और रोमांटिक धारणाओं को चुनौती देता है, इसके बजाय रिश्ते की कठोर वास्तविकताओं और भावनात्मक निर्भरता पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • महिला सशक्तिकरण का नया रूप: कैंडिडा को अक्सर शॉ की सबसे मजबूत और सबसे समझदार महिला पात्रों में से एक माना जाता है। वह पारंपरिक नारीवादी विचारों से परे जाकर अपनी शर्तों पर शक्ति और स्वतंत्रता को परिभाषित करती है।
  • "शॉएस्क" संवाद: नाटक शॉ के ट्रेडमार्क "शॉएस्क" संवाद से भरा है - बुद्धिमान, उत्तेजक और अक्सर विरोधाभासी बातचीत जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।