खुशी के दिन - सैमुअल बेकेट
सारांश
'हैप्पी डेज़' सैमुअल बेकेट का एक नाटक है जिसमें विनी नाम की एक अधेड़ उम्र की महिला को एक टीले में कमर तक दबा हुआ दिखाया गया है। टीला लगातार बढ़ते सूरज की रोशनी में है। वह एक कठोर दिनचर्या के अनुसार अपना जीवन जीती है, अपने बड़े काले बैग से दैनिक अनुष्ठानों को सावधानीपूर्वक करती है, जबकि उसका पति, विली, जो ज्यादातर अदृश्य और अनसुना रहता है, टीले के पीछे रेंगता रहता है। वह अपनी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद एक आशावादी दृष्टिकोण बनाए रखने की कोशिश करती है, लगातार खुद से और विली से बात करती रहती है, जो न्यूनतम प्रतिक्रियाएँ देता है। दूसरे अंक में, विनी अपनी गर्दन तक दफन हो जाती है, और भी अधिक प्रतिबंधित हो जाती है, लेकिन फिर भी अपनी दिनचर्या और सकारात्मक दृष्टिकोण से चिपकी रहती है, हालाँकि उसकी निराशा अधिक स्पष्ट हो जाती है। अंत में विली उस तक पहुँचने का एक दुर्लभ और कठिन प्रयास करता है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1
नाटक की शुरुआत विनी से होती है जो एक टीले में कमर तक दफन है। एक बड़ा काला बैग और एक छाता उसके पास ही हैं। एक घंटी की आवाज़ से वह जागती है। वह अपनी सुबह की दिनचर्या शुरू करती है: अपने दाँत ब्रश करती है, अपने बाल कंघी करती है, अपने चश्मे साफ़ करती है, अपनी रिवॉल्वर (ब्राउनिंग) का निरीक्षण करती है, एक संगीत बॉक्स (पिछली सदी का) देखती है, और एक पोस्टकार्ड (पिछले जीवन का) देखती है। वह लगातार विली से बात करती रहती है, जो टीले के पीछे छिपा रहता है। विली कभी-कभी गुर्राता है या पुराने अख़बारों के अंश पढ़ता है। विनी एक ख़ुशमिज़ाज़ व्यवहार बनाए रखने की कोशिश करती है, "ख़ुशहाल दिनों" पर विचार करती है। वह यादें ताज़ा करती है, गाती है, और समय के बीतने के बारे में बात करती है। वह अपने बैग से सामान निकालने के लिए संघर्ष करती है क्योंकि वह फँसी हुई है। विली एक शीर्षक, "फॉर्मिकेशन," पढ़ने की कोशिश करता है, जिसे विनी "फ़ॉर्निकेशन" में सुधारती है। विनी विली को बोलने और प्रतिक्रिया देने के लिए प्रोत्साहित करती है, बातचीत के लिए बेताब है। यह अनुभाग विनी के सोने की तैयारी के साथ समाप्त होता है, दिन पर विचार करते हुए।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| विनी | आशावादी, लचीली, बातूनी, दिनचर्या-उन्मुख, विली की उपस्थिति पर निर्भर, दार्शनिक, सहन करने को दृढ़। | सामान्यता और दिनचर्या का एक दिखावा बनाए रखने के लिए, अपनी दुर्दशा के बावजूद आशा और खुशी के कारण खोजने के लिए, विली को बातचीत में शामिल करने और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए, निराशा से बचने के लिए। |
| विली | ज़्यादातर अदृश्य, बड़े पैमाने पर अनुत्तरदायी, सुस्त, बातचीत करने के बजाय पढ़ना पसंद करता है, कुछ हद तक अलग लेकिन हमेशा मौजूद (अंत तक)। | अस्तित्व के लिए, न्यूनतम प्रयास, शायद विनी के पास रहने का कर्तव्य या आदत का अस्पष्ट भाव (हालांकि यह अस्पष्ट है), विनी तक पहुँचने का उसका अंतिम हताश प्रयास प्रेरणा का एक दुर्लभ प्रदर्शन है, शायद दया या अंतिम जुड़ाव के लिए। |
अनुभाग 2
इस अनुभाग में, विनी अब टीले में अपनी गर्दन तक दफन है। उसका बैग अभी भी पहुँच के भीतर है, लेकिन वह ज़्यादातर सामान तक नहीं पहुँच सकती। उसका छाता जला हुआ और बेकार है। वह अभी भी घंटी की आवाज़ से जागती है। उसकी दिनचर्या बुरी तरह प्रतिबंधित है। वह केवल अपना सिर हिला सकती है और बात कर सकती है। वह अभी भी विली से बात करती है, हालाँकि उसकी उपस्थिति और भी कम परिभाषित है। वह सोचती है कि क्या वह अभी भी जीवित है। वह शब्दों और वाक्यांशों को याद करने की कोशिश करती है, स्मृति के साथ संघर्ष करती है। वह अभी भी खुश होने के लिए चीज़ें खोजने की कोशिश करती है, लेकिन उसका आशावाद स्पष्ट रूप से तनावपूर्ण है। वह "मैरी विडो वॉल्ट्ज" गाती है। एक लंबी खामोशी के बाद, विली अंततः प्रकट होता है, औपचारिक पोशाक में संघर्ष करता हुआ, विनी की ओर टीले पर चढ़ने की कोशिश करता हुआ। विनी उसे प्रोत्साहित करती है, यह सोचकर कि वह उसे चूमने की कोशिश कर रहा होगा, या शायद उसे गोली मारने की भीख मांग रहा होगा। विली उस तक पहुँचने से ठीक पहले गिर जाता है। विनी कहती है, "ओह, यह एक ख़ुशहाल दिन है।" नाटक समाप्त हो जाता है।
साहित्यिक शैली: एब्सर्ड नाटक (थिएटर ऑफ द एब्सर्ड), ट्रेजिकोमेडी (दुखद कॉमेडी)।
लेखक के बारे में:
सैमुअल बेकेट (1906-1989) एक आयरिश उपन्यासकार, नाटककार, लघु कथाकार, थिएटर निर्देशक और कवि थे। वे एब्सर्ड थिएटर के एक प्रमुख व्यक्ति थे। उन्हें 1969 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके प्रसिद्ध कार्यों में "वेटिंग फॉर गोडोट" और "एंडगेम" शामिल हैं।
नैतिक शिक्षा:
यह नाटक मानवीय लचीलेपन, एक अर्थहीन अस्तित्व में अर्थ खोजने के संघर्ष, साहचर्य और निर्भरता की प्रकृति, और निराशा का सामना करने में आदत और दिनचर्या की दृढ़ता जैसे विषयों की पड़ताल करता है। यह बताता है कि मनुष्य जीवन की अंतर्निहित बेतुकीपन और पीड़ा को सहन करने के लिए दिनचर्या और छोटे सुखों से चिपके रहते हैं।
पुस्तक से जुड़ी दिलचस्प बातें:
- बेकेट ने 'हैप्पी डेज़' अंग्रेजी में लिखा था, न कि फ्रेंच में (जैसा कि उन्होंने 1940 के दशक के बाद नाटकों के लिए अक्सर किया था)।
- नाटक का शीर्षक विडंबनापूर्ण है, जो विनी की घोषित खुशी और उसकी भयानक स्थिति के बीच विरोधाभास को उजागर करता है।
- मंच के निर्देश अविश्वसनीय रूप से सटीक हैं, जो नाटक के लिए बेकेट की सावधानीपूर्वक दृष्टि को दर्शाते हैं।
- यह अभिनेत्रियों के लिए एक चुनौतीपूर्ण नाटक है क्योंकि इसमें मोनोलॉग-प्रधान प्रकृति और शारीरिक प्रतिबंध हैं।
- विनी को दफनाने वाला टीला जीवन के बोझ, अस्तित्व के भार और मृत्यु की ओर क्रमिक क्षय का प्रतीक है।
- इस नाटक का प्रीमियर 1961 में हुआ था।
