koi nahin aur ek laakh - luigi pirandello

सारांश
'नेस्सुनो ए सेंटोमिला' (एक, कोई नहीं, और एक लाख) लुइगी पिरान्देल्लो का अंतिम और सबसे गहन उपन्यास है। कहानी विटांजेलो मोस्कार्डा नाम के एक आदमी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे उसकी पत्नी डिडा एक दिन बताती है कि उसकी नाक थोड़ी टेढ़ी है। यह मामूली टिप्पणी विटांजेलो के लिए एक अस्तित्वगत संकट बन जाती है। उसे अचानक एहसास होता है कि वह खुद को जिस व्यक्ति के रूप में जानता है, वह दूसरों की नज़रों में अलग है। वह पाता है कि उसकी एक नहीं, बल्कि "एक लाख" अलग-अलग छवियाँ हैं जो हर उस व्यक्ति के दिमाग में मौजूद हैं जिसे वह जानता है, और इन छवियों में से कोई भी उस वास्तविक "एक" को पूरी तरह से नहीं पकड़ता जिसे वह मानता है। यह अहसास उसे अपनी पहचान को नष्ट करने के लिए प्रेरित करता है – वह उन सभी छवियों को मिटाना चाहता है जो दूसरों ने उसके बारे में बनाई हैं। वह अपनी पहचान को तोड़ने के लिए, जो दूसरों की अपेक्षाओं और सामाजिक मानदंडों से बनी है, अजीबोगरीब हरकतें करना शुरू कर देता है। वह अपने बैंक और संपत्तियों का प्रबंधन करने के अपने पारंपरिक व्यापारिक पहचान को नष्ट कर देता है, जिससे उसे पागल समझा जाता है। अंततः, वह सभी छवियों, सामाजिक भूमिकाओं और यहां तक कि अपने स्वयं के नाम से भी मुक्त हो जाता है, और एक पागलखाने में शरण लेता है, जहाँ वह प्रकृति के साथ एकाकार होकर वर्तमान क्षण में जीता है, खुद को "कोई नहीं" के रूप में पाता है जो वास्तव में "सब कुछ" है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1
कहानी का नायक विटांजेलो मोस्कार्डा, जिसे उसके दोस्त प्यार से गिगी कहते हैं, अपनी जिंदगी सामान्य ढंग से जी रहा होता है। वह अपने पिता के छोड़े हुए बैंक का प्रबंधन करता है, और एक आरामदायक जीवन शैली का आनंद लेता है। एक दिन सुबह जब वह अपनी पत्नी डिडा के साथ खुद को आईने में देखता है, तो डिडा उसे बताती है कि उसकी नाक थोड़ी टेढ़ी है। यह साधारण सी टिप्पणी विटांजेलो के लिए एक बड़े अस्तित्वगत झटके का कारण बनती है। वह पहली बार अपनी शारीरिक विशेषताओं पर ध्यान देता है और सोचने लगता है कि अगर उसकी नाक ऐसी है, तो लोग उसे कैसे देखते होंगे? उसे यह एहसास होता है कि वह खुद को जिस रूप में जानता है, वह दूसरों के लिए बिल्कुल अलग है। वह खुद को "एक" मानता है, लेकिन दूसरों की नज़रों में वह "एक लाख" अलग-अलग मोस्कार्डा है। यह विचार उसे अपनी पहचान पर सवाल उठाने और अपनी वास्तविक "स्वयं" की खोज करने के लिए प्रेरित करता है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
विटांजेलो मोस्कार्डा (गिगी) एक मध्यमवर्गीय व्यक्ति, अपनी पहचान से अनभिज्ञ, आत्म-विश्लेषण में लीन, धनवान लेकिन निष्क्रिय। उसे 'एक लाख' अलग-अलग छवियों में देखा जाता है। दूसरों की नज़रों में अपनी छवि को समझना और बदलना; अपनी 'वास्तविक' पहचान को खोजना।
डिडा विटांजेलो की पत्नी, सीधी-सादी लेकिन अवलोकनशील, अपनी पहचान में दृढ़, अपने पति की सनक को समझने में असमर्थ। विटांजेलो को 'वह कौन है' यह याद दिलाना और उसके सामान्य जीवन को बनाए रखना।
क्वेंटोर्ज़ो और फ़िरबो विटांजेलो के वकील और व्यापारिक मित्र, उसके पिता के बैंक के सह-प्रबंधक। विटांजेलो की मानसिक स्थिति को समझना और उसे सामान्य बनाए रखने की कोशिश करना, व्यापारिक हितों की रक्षा करना।

अनुभाग 2
अपनी पहचान के इस नए अहसास से परेशान होकर, विटांजेलो उन सभी 'एक लाख' मोस्कार्डाओं को नष्ट करने की कोशिश करता है जो दूसरों के दिमाग में हैं। वह अपने 'पहचान' को तोड़ने के लिए ऐसे काम करना शुरू कर देता है जो उसके लिए बिल्कुल असामान्य हैं। वह अपने बैंक के एक गरीब कर्जदार को बिना किसी कारण के उसके कर्ज से मुक्त कर देता है और उसे घर भी दे देता है। यह उदारता उसके दोस्तों, क्वेंटोर्ज़ो और फ़िरबो, और यहाँ तक कि उसकी पत्नी डिडा को भी समझ नहीं आती। वे उसे पागल समझने लगते हैं। विटांजेलो यह दिखाने की कोशिश कर रहा होता है कि वह वह व्यक्ति नहीं है जो दूसरों ने उसे बनाया है – वह केवल एक सूदखोर या व्यवसायी नहीं है। वह अपनी पहचान को उस बिंदु तक ले जाना चाहता है जहाँ कोई भी उसे किसी निश्चित श्रेणी में न रख सके।

अनुभाग 3
विटांजेलो के अजीबोगरीब व्यवहार के कारण उसकी पत्नी डिडा उससे दूर होने लगती है। वह उसे नहीं पहचान पाती और उसे लगता है कि उसका पति अब वह व्यक्ति नहीं रहा जिससे उसने शादी की थी। विटांजेलो यह जानकर खुश होता है कि डिडा उसे नहीं पहचान पा रही है, क्योंकि इसका मतलब है कि वह अपने 'एक लाख' रूपों में से एक को सफलतापूर्वक नष्ट कर रहा है। वह अपनी सामाजिक पहचान को और अधिक तोड़ने के लिए जानबूझकर अजीबोगरीब हरकतें करता है, जैसे कि सार्वजनिक रूप से अकारण शोर मचाना या अजीब तरीके से कपड़े पहनना। उसका लक्ष्य है खुद को किसी भी तय पहचान से मुक्त करना, ताकि वह "कोई नहीं" बन सके, और इस "कोई नहीं" में वह वास्तव में "सब कुछ" बन जाए।

अनुभाग 4
विटांजेलो की हरकतें अब कानूनी और सामाजिक समस्याएँ पैदा करने लगती हैं। उसके वकील मित्र, क्वेंटोर्ज़ो और फ़िरबो, उसे पागल घोषित करने की कोशिश करते हैं ताकि वे बैंक के मामलों को नियंत्रित कर सकें और उसकी संपत्ति को बचा सकें। विटांजेलो इन प्रयासों का विरोध करता है, यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि वह पागल नहीं है, बल्कि वह सिर्फ अपनी पहचान की प्रकृति को समझ रहा है। वह अपने जीवन के हर पहलू को चुनौती देना जारी रखता है, यह दिखाते हुए कि कोई भी व्यक्ति केवल एक निश्चित परिभाषा में फिट नहीं हो सकता। वह महसूस करता है कि उसकी पत्नी और दोस्त भी उसे एक निश्चित छवि में कैद करना चाहते हैं, और वह इस कैद से मुक्त होना चाहता है।

अनुभाग 5
इस दौरान, विटांजेलो की मुलाकात अन्ना रोजा से होती है, जो एक युवा महिला है। अन्ना रोजा विटांजेलो की दार्शनिक सोच को समझने की कोशिश करती है, जबकि बाकी सभी उसे पागल समझते हैं। वह विटांजेलो की आंतरिक दुनिया और उसके अस्तित्वगत संघर्षों को पहचानने वाली पहली व्यक्ति है। यह संबंध विटांजेलो के लिए कुछ हद तक सुकून लाता है, क्योंकि उसे लगता है कि कोई है जो उसे एक निश्चित 'छवि' में कैद करने की कोशिश नहीं कर रहा है। लेकिन यह संबंध भी जटिलताएँ पैदा करता है, क्योंकि यह उसके जीवन को और अधिक सामाजिक रूप से स्वीकार्य बनाने की कोशिशों के विपरीत है।

अनुभाग 6
विटांजेलो और अन्ना रोजा के बीच का रिश्ता गहराता है, लेकिन यह बाहरी दुनिया में उसकी स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है। एक दिन, एक अजीबोगरीब घटना घटती है: अन्ना रोजा, शायद भ्रम या आवेग में, विटांजेलो पर गोली चला देती है। यह गोलीबारी एक दुर्घटना हो सकती है या उसके बढ़ते मानसिक तनाव का परिणाम। यह घटना विटांजेलो के लिए एक और निर्णायक मोड़ साबित होती है। यह उसे अपनी पुरानी पहचान से पूरी तरह से अलग कर देती है और उसे एक नया रास्ता चुनने पर मजबूर करती है।

अनुभाग 7
गोली लगने के बाद, विटांजेलो को अस्पताल ले जाया जाता है। इस घटना के कारण उसे कानूनी और सामाजिक रूप से पूरी तरह से अपनी पहचान खोनी पड़ती है। उसे अपनी संपत्ति से वंचित कर दिया जाता है और उसे एक पागलखाने में भेज दिया जाता है, जिसे पिरान्देल्लो "एक धर्मार्थ संस्थान" के रूप में वर्णित करते हैं। यह वही जगह है जहाँ वह अपने जीवन के अंतिम चरण को बिताता है। वह अब अपनी पिछली सभी भूमिकाओं - पति, बैंकर, व्यापारी - से मुक्त है। वह अब वास्तव में "कोई नहीं" बन गया है, जो उसकी प्रारंभिक खोज थी।

अनुभाग 8
अस्पताल में, विटांजेलो को अंततः शांति मिलती है। वह अब किसी भी सामाजिक भूमिका, किसी भी नाम, या किसी भी निश्चित पहचान से बंधा नहीं है। वह खुद को प्रकृति के साथ एकाकार कर लेता है, पेड़ों, बादलों और जानवरों के साथ एक होकर जीता है। वह अब अतीत या भविष्य के बारे में चिंता नहीं करता, बल्कि वर्तमान क्षण में पूरी तरह से मौजूद रहता है। वह समझता है कि हर क्षण में एक नया "मैं" पैदा होता है और मर जाता है, और यही वास्तविक स्वतंत्रता है। वह अब "एक" नहीं है, "एक लाख" भी नहीं है, बल्कि "कोई नहीं" है जो वास्तव में "सब कुछ" है। वह जीवन की निरंतरता में खुद को विसर्जित कर देता है, अपने पुराने 'स्वयं' को त्याग कर एक नई, मुक्त अवस्था में पहुँच जाता है।

साहित्यिक शैली: अस्तित्ववादी उपन्यास, आधुनिकतावादी उपन्यास, दार्शनिक उपन्यास। यह मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद और विखंडन की भावना को दर्शाता है।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:
लुइगी पिरान्देल्लो (1867-1936) एक इतालवी नाटककार, उपन्यासकार और लघु कथा लेखक थे। उन्हें 1934 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था "उनके साहसिक और सरलतापूर्ण मंचन के लिए और नाट्य कला के इतिहास में उनके पुनरुत्थान के लिए"। उनकी रचनाएँ वास्तविकता और भ्रम, पहचान और मुखौटा, व्यक्तिगत और सामाजिक स्वयं के बीच के विरोधाभासों की खोज के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई नाटक भी लिखे, जिनमें 'सिक्स कैरेक्टर्स इन सर्च ऑफ एन ऑथर' सबसे प्रसिद्ध है।

नैतिक शिक्षा:
इस उपन्यास की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि एक स्थिर, एकल 'पहचान' का होना असंभव है। हर व्यक्ति दूसरों की नज़रों में अनगिनत अलग-अलग रूपों में मौजूद होता है, और हम स्वयं भी लगातार बदलते रहते हैं। अपनी पहचान को किसी एक परिभाषा में बांधने की कोशिश करना व्यर्थ है और केवल पीड़ा की ओर ले जाता है। सच्ची स्वतंत्रता तब मिलती है जब व्यक्ति सभी सामाजिक अपेक्षाओं, भूमिकाओं और यहां तक कि अपने स्वयं के पूर्व-कल्पित 'स्वयं' को त्याग देता है, और वर्तमान क्षण में घुल जाता है, खुद को "कोई नहीं" के रूप में स्वीकार करता है जो इस प्रकार "सब कुछ" बन जाता है। यह व्यक्तिगत पहचान के विघटन में मुक्ति खोजने का विचार प्रस्तुत करता है।

कुछ जिज्ञासाएँ:

  • पिरान्देल्लो की पसंदीदा रचना: पिरान्देल्लो ने खुद 'नेस्सुनो ए सेंटोमिला' को अपनी सबसे महत्वपूर्ण और गहरी रचना माना। यह उनके दार्शनिक विचारों का चरम बिंदु है।
  • शीर्षक का विरोधाभास: शीर्षक "एक, कोई नहीं, और एक लाख" उपन्यास के केंद्रीय विषय को पूरी तरह से पकड़ता है - मानव पहचान की बहुलता, अस्थिरता और अंततः शून्यता।
  • अस्तित्ववाद का अग्रदूत: यह उपन्यास अस्तित्ववादी दर्शन के कई प्रमुख विषयों का अन्वेषण करता है, भले ही इसे उस आंदोलन से पहले लिखा गया था जिसे आमतौर पर अस्तित्ववाद के रूप में जाना जाता है। इसमें व्यक्तिगत पहचान का संकट, जीवन का बेतुकापन और आत्म-ज्ञान की खोज शामिल है।
  • लेखक के जीवन से संबंध: पिरान्देल्लो का जीवन स्वयं कई व्यक्तिगत त्रासदियों से भरा था, जिसमें उनकी पत्नी का मानसिक स्वास्थ्य भी शामिल था, जिससे उन्हें मानवीय पहचान की नाजुकता और मानसिक बीमारी की प्रकृति पर गहराई से विचार करने का मौका मिला।