kretsar sonata - liyo tolstoy

सारांश

'क्रेत्ज़र सोनाटा' लियो टॉल्स्टॉय की एक विवादास्पद लघु उपन्यासिका है जो विवाह, वासना और ईर्ष्या के विषयों की पड़ताल करती है। यह एक रेलगाड़ी में हुई बातचीत के इर्द-गिर्द घूमती है, जहाँ मुख्य पात्र, वासिली पॉज़्निशेव, एक अजनबी सह-यात्री (कथावाचक) को अपनी पत्नी की हत्या की कहानी सुनाता है। पॉज़्निशेव शुरू में महिलाओं और यौन प्रेम के बारे में अपने गहरे निराशावादी विचार व्यक्त करता है, यह तर्क देते हुए कि विवाह अक्सर शारीरिक आकर्षण पर आधारित होता है जो अनिवार्य रूप से घृणा और ईर्ष्या में बदल जाता है। वह अपनी खुद की शादी का वर्णन करता है, जो शुरुआत में जुनून और फिर निराशा से भरी थी, जिसके कारण लगातार झगड़े हुए और उसे अपनी पत्नी से घृणा होने लगी। उसकी पत्नी और एक वायलिन वादक, ट्रुखाचेव्स्की, के बीच एक कथित प्रेम संबंध, विशेष रूप से बीथोवेन के 'क्रेत्ज़र सोनाटा' के प्रदर्शन के बाद, उसकी ईर्ष्या को चरम पर पहुँचा देता है। अंततः, यह पॉज़्निशेव को अपनी पत्नी की हत्या करने के लिए प्रेरित करता है, जिसके लिए उसे बरी कर दिया जाता है। कहानी पॉज़्निशेव के अनुभवों के माध्यम से टॉल्स्टॉय के विवाह और यौन शुद्धता पर कट्टरपंथी विचारों की पड़ताल करती है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

कहानी एक रेलगाड़ी की यात्रा से शुरू होती है जहाँ यात्री विभिन्न विषयों पर चर्चा कर रहे होते हैं, जिनमें प्रेम, विवाह और तलाक शामिल हैं। एक तलाकशुदा वकील एक महिला के यौन अधिकार का बचाव करता है, जबकि एक वृद्ध व्यापारी विवाह की पवित्रता पर जोर देता है। चर्चा के दौरान, एक अजीबोगरीब व्यक्ति जिसका नाम वासिली पॉज़्निशेव है, बहस में शामिल हो जाता है, और विवाह की संस्था पर अपनी अत्यधिक निराशावादी और निंदक राय व्यक्त करना शुरू कर देता है। वह बताता है कि कैसे समाज में महिलाओं को केवल वासना की वस्तु के रूप में देखा जाता है और विवाह अक्सर एक पाखंडी व्यवस्था है जो केवल शारीरिक आकर्षण पर आधारित होती है, जो अंततः दुख की ओर ले जाती है। उसके तीव्र विचार यात्रियों को चौंका देते हैं, लेकिन वह दृढ़ रहता है, और अंततः एक अनाम कथावाचक के साथ अपनी पूरी कहानी साझा करने का प्रस्ताव रखता है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
अनाम कथावाचक एक तटस्थ, चौकस यात्री; पॉज़्निशेव का सह-यात्री और श्रोता। पॉज़्निशेव की असामान्य कहानी में गहरी दिलचस्पी, उसकी विचारों को समझने की इच्छा।
वासिली पॉज़्निशेव उदास, तीव्र, संदेहास्पद, दार्शनिक; अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में बरी हुआ व्यक्ति। विवाह और यौन प्रेम के बारे में अपने कड़वे अनुभवों और कट्टरपंथी विचारों को दुनिया के साथ साझा करना, अपनी कार्रवाई को सही ठहराना।

अनुभाग 2

पॉज़्निशेव अपनी कहानी को बचपन से शुरू करता है, अपने युवावस्था की दुराचारों और समाज के दोहरे मानदंडों का वर्णन करता है। वह बताता है कि कैसे पुरुषों को युवावस्था में यौन अनुभवों के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, लेकिन महिलाओं से शुद्धता की उम्मीद की जाती है। वह अपने स्वयं के यौन अनुभवों को अनैतिक और खाली मानता है, और बताता है कि कैसे ये अनुभव उसे महिलाओं के प्रति सम्मान खोने और उन्हें केवल वासना की वस्तुओं के रूप में देखने के लिए प्रेरित करते हैं। वह मानता है कि इसी पृष्ठभूमि ने उसके विवाह को भी प्रभावित किया। वह तर्क देता है कि यदि कोई पुरुष अपनी युवावस्था में वासना में लिप्त रहा है, तो वह विवाह में सच्चा प्रेम या सम्मान नहीं पा सकता।

अनुभाग 3

पॉज़्निशेव अपनी शादी के बारे में बताता है। वह अपनी पत्नी से पहली मुलाकात के उत्साह को याद करता है, जो केवल शारीरिक आकर्षण पर आधारित था, जिसे उसने गलती से प्रेम मान लिया था। वे जल्द ही शादी कर लेते हैं, और शुरुआती जुनून के बाद, उनका रिश्ता कड़वाहट और झगड़ों से भर जाता है। पॉज़्निशेव स्वीकार करता है कि वे एक-दूसरे को मानसिक रूप से या भावनात्मक रूप से नहीं जानते थे, और उनकी शादी का आधार केवल यौन था, जो जल्द ही फीका पड़ गया। उनके बच्चे होते हैं, लेकिन हर बच्चे के जन्म के बाद, उनका शारीरिक रिश्ता कमजोर होता जाता है, और उनके बीच की दूरी बढ़ती जाती है। वह अपनी पत्नी को झगड़ालू और चिड़चिड़ी बताता है, जबकि वह खुद को ईर्ष्यालु और कठोर मानता है। उनके बीच की शत्रुता इतनी बढ़ जाती है कि वे एक-दूसरे को घृणा की दृष्टि से देखने लगते हैं।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
लीज़ा पॉज़्निशेव की पत्नी; सुंदर, संगीत प्रेमी, धीरे-धीरे अपने पति से विमुख होती जाती है। शुरू में एक प्रेमपूर्ण और सम्मानजनक विवाह की इच्छा; बाद में अपने पति की क्रूरता और नियंत्रण से स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान की तलाश।

अनुभाग 4

जैसे-जैसे पॉज़्निशेव और उसकी पत्नी के बीच की दूरी बढ़ती है, एक युवा और प्रतिभाशाली वायलिन वादक, ट्रुखाचेव्स्की, उनके जीवन में प्रवेश करता है। वह उनकी पत्नी का पुराना दोस्त और सहपाठी होता है। पॉज़्निशेव की पत्नी ट्रुखाचेव्स्की के साथ वायलिन और पियानो पर संगीत बजाने में खुशी पाती है, और जल्द ही वे एक साथ बीथोवेन की 'क्रेत्ज़र सोनाटा' बजाते हैं। इस संगीत प्रदर्शन का पॉज़्निशेव पर गहरा प्रभाव पड़ता है; उसे लगता है कि संगीत ने उसके और उसकी पत्नी के बीच एक रहस्यमय संबंध बना दिया है और ट्रुखाचेव्स्की ने उसकी पत्नी पर कुछ अधिकार जमा लिया है। यह अनुभव उसकी ईर्ष्या को चरम पर पहुँचा देता है। वह महसूस करता है कि संगीत में कुछ ऐसा है जो लोगों को अनियंत्रित जुनून और खतरनाक भावनाओं की ओर धकेलता है। वह अपनी पत्नी और ट्रुखाचेव्स्की के बीच एक प्रेम संबंध होने का संदेह करने लगता है, हालांकि कोई स्पष्ट सबूत नहीं होता।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
ट्रुखाचेव्स्की युवा, प्रतिभाशाली वायलिन वादक; पॉज़्निशेव की पत्नी का मित्र और संगीत साथी। संगीत के प्रति प्रेम, संगीत के माध्यम से अपनी कला और दूसरों के साथ जुड़ना; संभवतः पॉज़्निशेव की पत्नी के प्रति आकर्षण।

अनुभाग 5

पॉज़्निशेव की ईर्ष्या उसे पागलपन की हद तक पहुँचा देती है। एक बार जब उसकी पत्नी और ट्रुखाचेव्स्की फिर से संगीत बजा रहे होते हैं, तो वह घर लौटता है और उन्हें एक साथ देखकर अपनी ईर्ष्या पर नियंत्रण खो देता है। उसे लगता है कि वे उसके साथ विश्वासघात कर रहे हैं। हालाँकि उसे उनकी बेवफाई का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता, उसकी धारणाएँ और ईर्ष्या इतनी प्रबल हो जाती हैं कि वह अपनी पत्नी को मार डालने का फैसला करता है। वह अपनी पत्नी को रसोई के चाकू से मार डालता है। अपनी पत्नी को मारने के बाद, उसे तुरंत अपनी गलती और अपनी भयानक कार्रवाई का एहसास होता है।

अनुभाग 6

पॉज़्निशेव को अपनी पत्नी की हत्या के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है। वह अदालत में अपनी पूरी कहानी बताता है। समाज के नियमों और जूरी की सहानुभूति के कारण उसे बरी कर दिया जाता है। अपनी सजा पूरी करने और बरी होने के बाद, पॉज़्निशेव समाज में एक बहिष्कृत व्यक्ति बन जाता है, लेकिन वह अपने अनुभवों के माध्यम से एक गहरी दार्शनिक अंतर्दृष्टि प्राप्त करता है। वह अब मानता है कि यौन वासना पर आधारित विवाह पापपूर्ण है, और सच्ची शुद्धता और प्रेम केवल शारीरिक इच्छाओं से ऊपर उठकर ही प्राप्त किया जा सकता है। वह तर्क देता है कि समाज को यौन इच्छाओं पर पूर्ण नियंत्रण रखना चाहिए और आध्यात्मिक प्रेम को प्राथमिकता देनी चाहिए। वह अपनी कहानी सुनाकर लोगों को विवाह और प्रेम की वास्तविक प्रकृति के बारे में जागरूक करना चाहता है।


साहित्यिक विधा:

मनोवैज्ञानिक यथार्थवाद, उपन्यासिका, नैतिक दार्शनिक उपन्यास।

लेखक के बारे में:

लियो टॉल्स्टॉय (1828-1910) रूस के महानतम लेखकों में से एक हैं और उन्हें विश्व साहित्य के सबसे महान उपन्यासकारों में गिना जाता है। उनके सबसे प्रसिद्ध कार्यों में 'युद्ध और शांति' (War and Peace) और 'अन्ना कैरेनिना' (Anna Karenina) शामिल हैं। टॉल्स्टॉय अपनी तीव्र नैतिक और आध्यात्मिक खोजों के लिए जाने जाते थे, जो उनके बाद के कार्यों में, जैसे कि 'क्रेत्ज़र सोनाटा' में, स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती हैं। वे एक ईसाई अराजकतावादी और अहिंसक प्रतिरोध के पक्षधर भी थे, जिनके विचारों ने महात्मा गांधी जैसे नेताओं को प्रभावित किया। उनका मानना था कि समाज को सादगी, प्रेम और गैर-प्रतिरोध के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

नैतिक शिक्षा:

  • ईर्ष्या का विनाशकारी प्रभाव: कहानी का मुख्य संदेश ईर्ष्या के विनाशकारी स्वभाव के बारे में है, जो एक व्यक्ति को पागलपन की हद तक धकेल सकती है और उसे जघन्य अपराध करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
  • विवाह की नींव: यह उपन्यास विवाह के आधार के रूप में केवल शारीरिक आकर्षण की आलोचना करता है, यह सुझाव देता है कि वास्तविक और स्थायी संबंध के लिए गहरी समझ, सम्मान और आध्यात्मिक संबंध आवश्यक हैं।
  • यौन नैतिकता: टॉल्स्टॉय, पॉज़्निशेव के माध्यम से, यौन शुद्धता और वासना के खतरों पर विचार व्यक्त करते हैं, यह सुझाव देते हुए कि यौन इच्छाओं पर नियंत्रण एक नैतिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

जिज्ञासु तथ्य:

  • विवाद और सेंसरशिप: 'क्रेत्ज़र सोनाटा' अपने प्रकाशन के समय (1889) अत्यधिक विवादास्पद थी। टॉल्स्टॉय के विवाह और यौन नैतिकता पर कट्टरपंथी विचारों के कारण, रूस में इसे सेंसर कर दिया गया और अमेरिका में इसके आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। टॉल्स्टॉय की पत्नी, सोफिया टॉल्स्टॉय को भी यह उपन्यास बहुत बुरा लगा, क्योंकि उन्हें लगा कि यह उनके निजी जीवन पर आधारित है।
  • प्रेरणा: बीथोवेन की वायलिन सोनाटा नंबर 9, जिसे 'क्रेत्ज़र सोनाटा' के नाम से जाना जाता है, ने टॉल्स्टॉय को यह कहानी लिखने के लिए प्रेरित किया। उपन्यास में संगीत का उपयोग जुनून, लालसा और त्रासदी को दर्शाने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में किया गया है।
  • टॉल्स्टॉय का 'पश्चाताप': टॉल्स्टॉय ने इस उपन्यास के बाद 'क्रेत्ज़र सोनाटा का उत्तर-लेखन' (Afterword to The Kreutzer Sonata) लिखा, जिसमें उन्होंने अपने विचारों को और स्पष्ट किया और कुछ गलतफहमियों को दूर करने का प्रयास किया, जैसे कि उनकी यह धारणा कि सभी यौन संबंध अनैतिक हैं।
  • कला पर प्रभाव: इस उपन्यास ने लेओस जानचेक के प्रसिद्ध स्ट्रिंग चौकड़ी 'क्रेत्ज़र सोनाटा' सहित कई कला रूपों, नाटकों और फिल्मों को प्रेरित किया है।