liola - luigi pirandello

सारांश

'लिओला' लुइगी पिरानदेल्लो द्वारा लिखित एक तीन-अंकीय हास्य नाटक है। यह सिसिली के ग्रामीण इलाकों में स्थापित है और लिओला नामक एक मुक्त-आत्मा वाले, आकर्षक युवा व्यक्ति की कहानी बताता है, जो कई नाजायज बच्चों का पिता है और अपने सहज जीवन जीने के तरीके के लिए जाना जाता है। नाटक बुजुर्ग, धनी, लेकिन निस्संतान ज़मींदार सिमोन टुज़्ज़ू और उसकी युवा पत्नी मीता के इर्द-गिर्द घूमता है, जो लिओला की पूर्व प्रेमिका है। सिमोन को एक वारिस की सख्त जरूरत है, जो उसे समाज में सम्मान दिलाएगा और उसकी संपत्ति को सुरक्षित रखेगा। सिमोन की महत्वाकांक्षी भतीजी, टुज़्ज़ा, इस स्थिति का फायदा उठाना चाहती है। वह गुप्त रूप से लिओला के साथ सोती है और गर्भावस्था का दावा करती है, जिससे सिमोन को विश्वास हो जाता है कि बच्चा उसका है, ताकि वह संपत्ति की वारिस बन सके। मीता, इस धोखे से तबाह होकर, अपनी प्रतिष्ठा और स्थिति को बचाने के लिए लिओला की मदद लेती है। लिओला, अपनी चंचल और अन conventional तरीके से, मीता को भी गर्भवती होने में मदद करता है, जिससे वह भी सिमोन के बच्चे का दावा कर सके। नाटक सामाजिक पाखंड, पितृत्व की अनिश्चितता और प्राकृतिक जीवन शक्ति बनाम सामाजिक सम्मेलनों के संघर्ष का पता लगाता है, जिसमें लिओला अपनी सहज बुद्धि और जीवन के प्रति प्रेम से जीतता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1 (पहला अंक)

नाटक की शुरुआत लिओला के परिचय से होती है, जो अपनी तीन नाजायज संतानों के साथ खुले मैदान में नाचता और गाता है। वह एक करिश्माई और मुक्त-आत्मा वाला व्यक्ति है जिसे जीवन की खुशियों से प्यार है और वह सामाजिक प्रतिबंधों की परवाह नहीं करता। वह अपनी सहज प्रकृति के लिए जाना जाता है और ग्रामीण महिलाओं के बीच लोकप्रिय है। इस बीच, सिमोन टुज़्ज़ू, एक बूढ़ा, धनी, लेकिन निस्संतान ज़मींदार, अपने भाग्य और विरासत को लेकर चिंतित है। उसकी पत्नी मीता, जो लिओला की पूर्व प्रेमिका है, भी निस्संतान है और इस बात से दुखी है। समाज में बच्चा न होने के कारण उस पर दबाव है। सिमोन को एक वारिस की सख्त जरूरत है, लेकिन वह इतना बूढ़ा हो चुका है कि उसे उम्मीद कम लगती है।

सिमोन की महत्वाकांक्षी भतीजी, टुज़्ज़ा, अपनी चालाकी से सिमोन की संपत्ति पर कब्जा करने की योजना बनाती है। वह अपनी निस्संतानता को एक कमजोरी के बजाय अवसर के रूप में देखती है। मीता की माँ, लुसिया, अपनी बेटी की स्थिति से चिंतित है और उसे कठोर वास्तविकता का सामना करने के लिए प्रेरित करती है। वह मीता को अपनी शादी बचाने और वारिस पाने के लिए हर संभव प्रयास करने की सलाह देती है, भले ही इसके लिए अपरंपरागत रास्ते अपनाने पड़ें। लिओला अपने बच्चों के साथ खेलते हुए इन सभी स्थितियों को दूर से देखता है, उसकी उपस्थिति सिमोन और मीता के जीवन में एक संभावित समाधान या जटिलता के रूप में उभरती है।

चरित्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
लिओला (निकसियो लिओला) स्वतंत्र, करिश्माई, कवि, गायक, लापरवाह, प्राकृतिक जीवन शक्ति से भरपूर। वह सामाजिक मानदंडों की परवाह नहीं करता और कई नाजायज बच्चों का पिता है। जीवन का आनंद लेना, सहज रहना, सामाजिक पाखंड को चुनौती देना, ज़रूरतमंदों की मदद करना (अपने तरीके से)।
मीता सिमोन की युवा पत्नी, लिओला की पूर्व प्रेमिका, निस्संतान, दुखी और सामाजिक दबाव में। एक बच्चा पैदा करना, अपनी शादी और सामाजिक स्थिति बचाना, गरिमा बनाए रखना।
सिमोन टुज़्ज़ू बूढ़ा, धनी, कंजूस ज़मींदार, निस्संतान, मीता का पति। एक वारिस प्राप्त करना (मुख्य रूप से अपनी संपत्ति और नाम के लिए), सामाजिक सम्मान बनाए रखना।
टुज़्ज़ा सिमोन की भतीजी, चालाक, महत्वाकांक्षी, निस्संतान। सिमोन की संपत्ति और विरासत पर कब्ज़ा करना, अपनी सामाजिक स्थिति को बढ़ाना।
लुसिया मीता की माँ, बुद्धिमान, थोड़ी सनकी, व्यावहारिक। अपनी बेटी की भलाई सुनिश्चित करना, उसे जीवन की कठोर सच्चाइयों का सामना करने के लिए तैयार करना।

अनुभाग 2 (दूसरा अंक)

दूसरे अंक की शुरुआत में एक बड़ा खुलासा होता है: टुज़्ज़ा ने घोषणा की है कि वह गर्भवती है और दावा करती है कि बच्चा सिमोन का है। यह एक बड़ा झूठ है; उसने चुपके से लिओला के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, अपनी योजना को अंजाम देने के लिए कि वह बच्चे को सिमोन का बताकर संपत्ति पर अपना दावा मजबूत कर सके। सिमोन इस खबर से बेहद खुश होता है और इस धोखे को आसानी से मान लेता है। वह सार्वजनिक रूप से टुज़्ज़ा के बच्चे को अपना वारिस घोषित करता है, जिससे पूरे गांव में खुशी फैल जाती है (हालांकि कुछ को संदेह भी होता है)।

मीता इस खबर से तबाह हो जाती है। उसे लगता है कि उसके साथ विश्वासघात हुआ है और उसे बदल दिया गया है, उसकी पहले से ही कमजोर स्थिति अब और भी दयनीय हो गई है। वह सिमोन के सामने अपना दुःख व्यक्त करती है, लेकिन सिमोन उसे यह कहकर खारिज कर देता है कि भाग्य ने उसके लिए कुछ और तय किया है। लिओला, मीता की पीड़ा को देखता है और टुज़्ज़ा के धोखे को समझ जाता है (क्योंकि वह जानता है कि बच्चा वास्तव में उसका है)। वह मीता के प्रति सहानुभूति महसूस करता है और उसकी मदद करने का फैसला करता है।

लिओला टुज़्ज़ा का सामना करता है, उसे बताता है कि वह उसकी चाल जानता है। टुज़्ज़ा निर्भीक बनी रहती है, अपनी योजना की सफलता को लेकर आश्वस्त। लेकिन लिओला, मीता के लिए अपनी दया और सामाजिक पाखंड के प्रति अपने उपहास के कारण, एक और अपरंपरागत योजना बनाता है। वह मीता को बहकाता है और उसे भी गर्भवती होने में मदद करता है, यह सुझाव देते हुए कि वह भी अपने बच्चे को सिमोन का बच्चा बता सकती है। यह टुज़्ज़ा की योजना को चुनौती देगा और मीता की गरिमा को बहाल करेगा।

अनुभाग 3 (तीसरा अंक)

कई महीने बीत चुके हैं, और अब स्थिति और भी जटिल हो गई है। टुज़्ज़ा और मीता दोनों गर्भवती हैं। सिमोन अब एक दुविधा में फंस गया है। उसने खुशी-खुशी टुज़्ज़ा के बच्चे को अपना मान लिया था, लेकिन अब मीता भी गर्भवती हो गई है, और वह भी दावा करती है कि बच्चा सिमोन का है। यह खबर पूरे समुदाय में फैल जाती है, जिससे गपशप और अटकलों का बाजार गर्म हो जाता है। लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि कौन सच बोल रहा है और कौन नहीं।

टुज़्ज़ा, यह महसूस करके कि लिओला ने उसकी योजना को विफल कर दिया है, क्रोधित हो उठती है और सार्वजनिक रूप से मीता को बदनाम करने की कोशिश करती है। वह मीता के चरित्र पर सवाल उठाती है और उसकी गर्भावस्था को एक धोखा बताती है। लेकिन लिओला, अपनी चतुरता और आकर्षण का उपयोग करके, घटनाओं को इस तरह से संचालित करता है कि मीता की प्रतिष्ठा सुरक्षित रहे, जबकि टुज़्ज़ा के दावे कमजोर पड़ जाएं। वह इस स्थिति को एक चंचल खेल में बदल देता है, जहाँ सामाजिक नियम और अपेक्षाएँ टूट जाती हैं।

सिमोन पूरी तरह से भ्रमित और अभिभूत हो जाता है। उसके पास अब दो संभावित वारिस हैं, लेकिन दोनों के पितृत्व पर संदेह है। वह अपनी पत्नी और भतीजी के बीच फंसा हुआ है, और उसे समझ नहीं आता कि उसे किसकी बात पर विश्वास करना चाहिए। नाटक का अंत पितृत्व की इस अस्पष्टता और सामाजिक पाखंड पर लिओला की प्राकृतिक भावना की जीत के साथ होता है। मीता को लिओला के अपरंपरागत समाधान के माध्यम से अपनी गरिमा वापस मिल गई है, जबकि टुज़्ज़ा का धोखा सिमोन को पूरी तरह से उजागर न होने के बावजूद कमजोर पड़ गया है। लिओला की जीवन शक्ति और स्वतंत्रता सामाजिक सम्मेलनों पर विजय प्राप्त करती है, जिससे दर्शक पितृत्व, विरासत और सामाजिक मानदंडों की प्रकृति पर सवाल उठाने के लिए मजबूर होते हैं।


साहित्यिक शैली: हास्य नाटक, सिसिलियन बोली का नाटक, वेरिज़्मो (यथार्थवाद) के तत्व।

लेखक के बारे में:
लुइगी पिरानदेल्लो (1867-1936) एक इतालवी नाटककार, उपन्यासकार, कवि और लघु कथा लेखक थे। उन्हें 1934 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पिरानदेल्लो को उनके मनोवैज्ञानिक नाटक के लिए जाना जाता है, जिसमें अक्सर भ्रम बनाम वास्तविकता, पहचान, पागलपन और सामाजिक सम्मेलनों जैसे विषयों की पड़ताल की जाती है। उनके सबसे प्रसिद्ध कार्यों में 'सेई पर्सनग्गी इन चेर्का डी'ऑटोरे' (सिक्स कैरेक्टर्स इन सर्च ऑफ़ एन ऑथर) और 'एनरिको IV' शामिल हैं। उन्होंने अपने कार्यों में मानव मन की जटिलताओं और सामाजिक मुखौटों की पड़ताल की।

नैतिक शिक्षा:
यह नाटक सामाजिक मानदंडों, पाखंड और विरासत में मिली धन/वंशावली के जुनून को चुनौती देता है। यह कृत्रिम सामाजिक संरचनाओं पर प्राकृतिक जीवन शक्ति, स्वतंत्रता और सहज प्रवृत्ति का जश्न मनाता है। यह कुछ सामाजिक नियमों की बेतुकीता और लोग दिखावे और विरासत के लिए किस हद तक जाते हैं, इसे उजागर करता है। "सत्य" (पितृत्व) सामाजिक स्वीकृति और कथित वास्तविकता से कम महत्वपूर्ण है।

जिज्ञासाएँ:

  • यह नाटक मूल रूप से 1916 में सिसिलियन बोली में 'लिओला' शीर्षक से लिखा गया था।
  • बाद में पिरानदेल्लो ने स्वयं इसका मानक इतालवी में अनुवाद किया।
  • इसे अक्सर उनके बाद के, अधिक दार्शनिक नाटकों की तुलना में एक हल्का, अधिक हास्यपूर्ण कार्य माना जाता है।
  • यह एक "धूप भरा" नाटक है, जो उन गहरे मनोवैज्ञानिक विषयों के विपरीत है जिनकी उन्होंने अक्सर पड़ताल की।
  • यह प्रकृति/सहज प्रवृत्ति (लिओला) और समाज/सम्मेलन (सिमोन, टुज़्ज़ा) के बीच संघर्ष को दर्शाता है।