mahashatru - filip roth

सारांश

फिलिप रोथ का उपन्यास 'नेमेसिस' 1944 की गर्मियों में नेवार्क, न्यू जर्सी में स्थापित है, जब पोलियो महामारी अपने चरम पर थी। बकी कैंटर एक समर्पित, एथलेटिक और सिद्धांतवादी जिम शिक्षक है, जो अपनी खराब दृष्टि के कारण द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ने की अपनी अधूरी इच्छा से जूझ रहा है। वह अपने समुदाय के बच्चों के प्रति गहरी जिम्मेदारी महसूस करता है क्योंकि वे इस भयानक बीमारी का सामना कर रहे हैं। बकी उन्हें बचाने की पूरी कोशिश करता है, लेकिन जैसे-जैसे महामारी उसके करीब आती है, वह खुद को असहाय और दोषी महसूस करता है। कहानी भाग्य, स्वतंत्र इच्छा, जिम्मेदारी, अपराधबोध और पीड़ा की मनमानी प्रकृति के विषयों की पड़ताल करती है। यह इस बात पर विचार करती है कि कैसे लोग त्रासदी में अर्थ या दोष खोजने का प्रयास करते हैं, भले ही कोई न हो, और कैसे अपराधबोध किसी व्यक्ति के जीवन को नष्ट कर सकता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: पोलियो का प्रकोप और बकी कैंटर

1944 की गर्मियों में, नेवार्क, न्यू जर्सी का वीक्वाइक पड़ोस एक भयानक पोलियो महामारी की चपेट में है। बकी कैंटर, एक 23 वर्षीय जिम शिक्षक, अपने छात्रों द्वारा बहुत सम्मानित है। वह शारीरिक रूप से मजबूत और ऊर्जावान है, लेकिन उसकी खराब दृष्टि के कारण उसे सेना में शामिल होने से मना कर दिया गया है, जिससे वह गहरा हताश और दोषी महसूस करता है। वह गर्मियों के खेल गतिविधियों का आयोजन करता है, बच्चों को बेसबॉल और अन्य खेलों में व्यस्त रखता है, और उन्हें महामारी से बचाने की पूरी कोशिश करता है। जैसे-जैसे पड़ोस में पोलियो के मामले बढ़ने लगते हैं, बकी के भीतर चिंता बढ़ती जाती है। वह बच्चों को साफ-सफाई रखने, पानी पीने से पहले हाथ धोने और हर संभव सावधानी बरतने के लिए प्रोत्साहित करता है, लेकिन हवा में मौत का डर स्पष्ट है। वह अपने युवा प्रभारियों के लिए एक संरक्षक और रक्षक के रूप में अपनी भूमिका को बहुत गंभीरता से लेता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
बकी कैंटर 23 वर्षीय, एथलेटिक, शारीरिक रूप से मजबूत, जिम्मेदार, कर्तव्यनिष्ठ, भावुक, आदर्शवादी। शारीरिक रूप से प्रभावशाली, लेकिन अंदर से युद्ध में शामिल न हो पाने के कारण अपराधबोध से ग्रस्त। बच्चों को पोलियो से बचाना; उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना; युद्ध में शामिल न हो पाने के अपने अपराधबोध की भरपाई करना; अपने शारीरिक कौशल का उपयोग अच्छी चीजों के लिए करना।
मिस्टर कैंटर बकी के दादा, एक बुद्धिमान और अनुभवी व्यक्ति। वे बकी को प्यार करते हैं और उसकी चिंता करते हैं। बकी को सलाह और समर्थन देना; उसे सुरक्षित और स्वस्थ रखना।
आर्नी मेसनिक बकी का एक पसंदीदा छात्र, जो सबसे पहले पोलियो से संक्रमित होता है। एक सामान्य बच्चा होने की इच्छा, खेल खेलना और जीवन का आनंद लेना।
अन्य बच्चे वीक्वाइक पड़ोस के बच्चे, बकी के जिम छात्र। खेल खेलना, गर्मियों का आनंद लेना, अपने दोस्तों के साथ समय बिताना, लेकिन साथ ही पोलियो के बढ़ते खतरे से डरना।

अनुभाग 2: जिम और आर्नी की मौत

महामारी तेज होती जा रही है, और डर पूरे समुदाय में फैल रहा है। बकी के जिम क्लास के बच्चे बीमार पड़ने लगते हैं। आर्नी मेसनिक, एक जीवंत युवा लड़का जिसे बकी विशेष रूप से पसंद करता है, पोलियो से संक्रमित हो जाता है। आर्नी की हालत तेजी से बिगड़ती है और जल्द ही उसकी मृत्यु हो जाती है। यह घटना बकी पर गहरा प्रभाव डालती है; वह खुद को जिम्मेदार महसूस करता है, यह सोचकर कि क्या उसने आर्नी को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त नहीं किया। उसका अपराधबोध बढ़ जाता है, और वह इस अदृश्य दुश्मन के खिलाफ अपनी शारीरिक ताकत की निरर्थकता से जूझता है। खेल का मैदान और जिम, जो कभी बच्चों के लिए खुशी और सुरक्षा के स्थान थे, बंद कर दिए जाते हैं। बकी खुद को असहाय पाता है, और उसका मन इस सवाल से ग्रस्त है कि अगर भगवान मौजूद हैं, तो वे इतने निर्दोष बच्चों को क्यों पीड़ित होने देते हैं।

अनुभाग 3: मर्शिया और लेक ओगोनट्ज

बकी की मंगेतर, मर्शिया स्टाइनबर्ग, पेन्सिलवेनिया के लेक ओगोनट्ज में एक समर कैंप में काउंसलर के रूप में काम कर रही है, जो नेवार्क की महामारी से एक सुरक्षित आश्रय स्थल है। वह बकी से अपने साथ जुड़ने का आग्रह करती है, उसे खतरे और उसकी जिम्मेदारी के बोझ से बचने का मौका देती है। बकी शुरू में विरोध करता है, यह महसूस करते हुए कि उसे अपने समुदाय के साथ रहना चाहिए और लड़ना चाहिए। लेकिन उसके दादा और मर्शिया उसे समझाते हैं कि उसे खुद को जोखिम में डालने का कोई फायदा नहीं है, और शायद कैंप में उसकी मदद की जरूरत है। अंततः, बकी नेवार्क छोड़ने और लेक ओगोनट्ज कैंप जाने का फैसला करता है, यह उम्मीद करते हुए कि उसे वहां कुछ राहत और एक नया भविष्य मिल सकता है। यह कदम उसके लिए अपनी जिम्मेदारियों से भागने जैसा महसूस होता है, जो उसके अपराधबोध को और बढ़ाता है।

अनुभाग 4: लेक ओगोनट्ज में संक्रमण

बकी लेक ओगोनट्ज पहुँचता है। कैंप का माहौल शांत और सुखद है; बच्चे स्वस्थ और खुश हैं। बकी को मर्शिया के साथ रहने से कुछ समय के लिए शांति और खुशी मिलती है। वह कैंप में बच्चों के लिए गतिविधियों का आयोजन करता है, अपनी शारीरिक शक्ति का उपयोग करके उन्हें खुश रखता है। लेकिन यह शांति अल्पकालिक होती है। कुछ ही समय बाद, कैंप में पोलियो का प्रकोप होता है, और यह सीधे उन बच्चों को प्रभावित करता है जिनके साथ बकी बातचीत करता है। बकी खुद भी संक्रमित हो जाता है। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि वह मानता है कि वह नेवार्क से बीमारी को कैंप में लाया है (हालांकि उपन्यास बताता है कि बीमारी का मूल अज्ञात और मनमाना था)। उसकी शारीरिक ताकत, जिस पर उसे बहुत गर्व था, उसे छोड़ देती है, और वह तेजी से कमजोर होता जाता है।

अनुभाग 5: परिणाम और पश्चाताप

पोलियो बकी को लकवाग्रस्त कर देता है और उसे गंभीर रूप से अक्षम कर देता है। वह मर्शिया से अपनी सगाई तोड़ देता है, यह मानते हुए कि उसे अपनी हालत और उस शाप के बोझ से नहीं लादना चाहिए जो उसे लगता है कि वह उठा रहा है। वह खुद को कैंप में पोलियो लाने के लिए दोषी ठहराता है, यह सोचता है कि अगर वह नेवार्क में रहता तो शायद यह सब नहीं होता। पोलियो के बाद का उसका जीवन अकेलापन भरा होता है: वह छोटे बच्चों को पढ़ाता है, लेकिन अपने मन में गहरे अपराधबोध और इस सवाल से ग्रस्त रहता है कि उसे युद्ध से क्यों बख्शा गया लेकिन इस भयानक बीमारी से क्यों नहीं। वह इस बात से जूझता है कि क्या यह उसका दोष था कि वह नेवार्क छोड़कर आया, या यह सिर्फ शुद्ध संयोग था। उपन्यास पीड़ा की मनमानी प्रकृति पर जोर देता है और इस बात पर कि कैसे मनुष्य त्रासदी के लिए हमेशा एक कारण या अपराधी खोजने की कोशिश करता है।

अनुभाग 6: कई साल बाद

कहानी कई दशकों बाद तक जाती है। कथावाचक, आर्नी मेसनिक का छोटा भाई (जो हल्के पोलियो प्रभावों के साथ जीवित रहा था), बकी कैंटर के जीवन और 1944 की घटनाओं पर विचार करता है। वह बड़े होने पर बकी से एक मौका मुलाकात का वर्णन करता है, और बकी का दशकों बाद भी जारी उत्पीड़न और अपराधबोध। बकी अभी भी अपने फैसलों और पोलियो के प्रकोप के लिए खुद को दोषी ठहराता है, और उसे लगता है कि उसे नेमेसिस (बदला लेने वाली देवी) ने दंडित किया है। कथावाचक बकी के कार्यों और अपराधबोध की एक अलग व्याख्या प्रदान करता है, यह सुझाव देता है कि बकी की त्रासदी भाग्य और दुर्भाग्य का परिणाम थी, न कि किसी नैतिक विफलता का। यह खंड स्वतंत्र इच्छा, भाग्य, जिम्मेदारी और पीड़ा में अर्थ खोजने की मानव खोज के स्थायी सवालों पर विचार करता है, अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि कुछ चीजें बस होती हैं, और हमेशा एक कारण या दोषी नहीं होता है।


शैली: साहित्यिक कथा, ऐतिहासिक कथा, त्रासदी

लेखक के बारे में कुछ जानकारी:
फिलिप रोथ (1933-2018) एक अमेरिकी उपन्यासकार थे जिन्हें बीसवीं और इक्कीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक माना जाता है। वह यहूदी अमेरिकी पहचान, कामुकता, अमेरिकी संस्कृति और मानव स्थिति की पड़ताल करने के लिए जाने जाते थे। उन्होंने 1997 में 'अमेरिकन पास्टोरल' के लिए पुलित्जर पुरस्कार जीता और अपने उपन्यास 'पोर्टनॉयज़ कंप्लेंट' (1969) और 'द ह्यूमन स्टैन' (2000) के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

नैतिकता:
'नेमेसिस' की मुख्य नैतिकता यह है कि पीड़ा अक्सर मनमानी और क्रूर होती है, और मानव प्रयास, चाहे वे कितने भी नेक हों, कभी-कभी भाग्य या अदृश्य ताकतों के खिलाफ शक्तिहीन होते हैं। यह इस बात पर जोर देता है कि मनुष्य त्रासदी में अर्थ या दोष खोजने के लिए कैसे संघर्ष करता है, भले ही कोई न हो, और कैसे अपराधबोध और जिम्मेदारी का बोझ किसी व्यक्ति के जीवन को नष्ट कर सकता है। उपन्यास यह भी दर्शाता है कि सबसे मजबूत और सबसे अच्छी इरादों वाले व्यक्ति भी कुछ ताकतों के सामने असहाय होते हैं।

कुछ रोचक बातें:

  • रोथ स्वयं नेवार्क, न्यू जर्सी के वीक्वाइक खंड में पले-बढ़े थे और उन्होंने 1940 के दशक में पोलियो महामारी का अनुभव किया था। जबकि बकी कैंटर एक काल्पनिक चरित्र है, सेटिंग और माहौल रोथ के लिए बहुत व्यक्तिगत हैं।
  • शीर्षक 'नेमेसिस' यूनानी देवी को संदर्भित करता है जो उन लोगों के खिलाफ दिव्य प्रतिशोध लेती है जो अभिमान के शिकार होते हैं। पुस्तक में, यह बकी के विश्वास को दर्शाता है कि उसे दंडित किया जा रहा है, या कि भाग्य उसे निशाना बना रहा है, हालांकि उपन्यास पीड़ा के एक अधिक यादृच्छिक, कम दिव्य रूप का सुझाव देता है।
  • यह रोथ के बाद के उपन्यासों में से एक था, जिसे 2010 में प्रकाशित किया गया था, और यह उन विषयों की पड़ताल करता है जिन्हें उन्होंने अपने पूरे करियर में छुआ था, लेकिन विशेष रूप से मानव शरीर की भेद्यता और जीवन की नाजुकता पर ध्यान केंद्रित किया।