बैक टू मेथुसेलह - जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
सारांश
'बैक टू मेथुसेलह' जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का एक पाँच-भाग वाला नाटक है, जो मानव जाति के विकासवादी भविष्य का एक दार्शनिक अन्वेषण है। यह नाटक मानव जीवन की वर्तमान अवधि को अपर्याप्त मानता है और यह प्रस्तावित करता है कि यदि मनुष्य सैकड़ों वर्षों तक जीवित रह सके, तो वे बुद्धिमान और परिपक्व निर्णय लेने के लिए आवश्यक अनुभव और ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। नाटक की शुरुआत एडम और ईव की कहानी से होती है और यह २०वीं शताब्दी की राजनीति, फिर ३००० ईस्वी तक और अंततः ३१००० ईस्वी तक जाता है, जहाँ मनुष्य एक निराकार अस्तित्व में विकसित हो जाते हैं। नाटक विभिन्न युगों में मानव स्वभाव, राजनीतिक लालच, वैज्ञानिक प्रगति और अस्तित्वगत उद्देश्य पर व्यंग्य करता है, यह तर्क देते हुए कि अमरता ही मानव की सच्ची क्षमता को प्राप्त करने का एकमात्र मार्ग है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1: आदि में (In the Beginning)
यह अनुभाग ईडन गार्डन में स्थापित है और एडम, ईव और सर्प की कहानी कहता है, लेकिन इसमें एक दार्शनिक मोड़ है। वे अमरता के बोझ और प्रजनन की इच्छा के बीच संघर्ष करते हैं। सर्प उन्हें मौत की अवधारणा और उस पर काबू पाने की इच्छा से परिचित कराता है, जिससे जीवन के लिए एक नया अर्थ पैदा होता है। ईव को प्रजनन करने की तीव्र इच्छा महसूस होती है, जबकि एडम जीवन के कष्टों से मुक्ति के रूप में मृत्यु की तलाश करता है। अंततः, ईव प्रजनन का चुनाव करती है, जिससे मानव जाति का वंश आगे बढ़ता है, लेकिन इस प्रक्रिया में वह मृत्यु और दुःख का भी परिचय देती है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| एडम | उदास, मृत्यु से मुक्ति चाहता है | जीवन के निरर्थक परिश्रम से मुक्ति की इच्छा |
| ईव | जिज्ञासु, जीवन देने की इच्छा रखती है | प्रजनन की तीव्र इच्छा, जीवन का विस्तार |
| सर्प | ज्ञानी, रहस्यमय, प्रेरक | मानव मन को ज्ञान और पसंद का परिचय देना |
| केन | हिंसक, स्वार्थी, हत्यारा | ईर्ष्या और प्रभुत्व की इच्छा |
अनुभाग 2: बरनबास बंधुओं का सुसमाचार (The Gospel of the Brothers Barnabas)
यह अनुभाग २०वीं शताब्दी की शुरुआत में स्थापित है और दो वैज्ञानिक भाइयों, कॉनराड और फ्रैंकलिन बरनबास को प्रस्तुत करता है। वे एक शोध प्रकाशित करते हैं जिसमें दावा किया गया है कि मानव जीवन की अवधि को मन की शक्ति और इच्छा के माध्यम से ३०० साल तक बढ़ाया जा सकता है। उनका सिद्धांत शुरू में उपहास का पात्र बनता है, लेकिन इसका राजनीतिक निहितार्थ गहरा है। नेता, जैसे कि राष्ट्रपति बर्ज और लुबिन, इस विचार को शक्ति बनाए रखने के एक साधन के रूप में देखते हैं, जबकि सामान्य लोग संदेह में रहते हैं। यह अनुभाग राजनीतिक अवसरवाद और मानव जाति की वर्तमान बुद्धि की अपर्याप्तता पर व्यंग्य करता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| कॉनराड बरनबास | जीवविज्ञानी, शांत, गंभीर | वैज्ञानिक सच्चाई की खोज, मानव क्षमता को बढ़ाना |
| फ्रैंकलिन बरनबास | गणितज्ञ, अधिक व्यावहारिक, अपने भाई का समर्थन करता है | अपने भाई के सिद्धांत को साबित करना, वैज्ञानिक प्रगति |
| रेव. विलियम हैस्लम | देहाती, रूढ़िवादी लेकिन खुले विचारों वाला | धार्मिक दृष्टिकोण से लंबे जीवन की संभावना पर विचार |
| लुबिन | राजनीतिज्ञ, अवसरवादी, चालाक | शक्ति और प्रभाव बनाए रखने के लिए नए विचारों का उपयोग |
| जॉयस बर्ज | राजनीतिज्ञ, वाचाल, जनवादी नेता | जनता का समर्थन प्राप्त करना, अपनी स्थिति मजबूत करना |
| सावी बरनबास | कॉनराड की भतीजी, युवा, बौद्धिक | नए विचारों में रुचि, अपने परिवार के शोध को समझना |
अनुभाग 3: चीज़ होती है (The Thing Happens)
यह अनुभाग २१७० ईस्वी में स्थापित है। बरनबास बंधुओं के सिद्धांत के बावजूद, किसी ने भी जानबूझकर लंबे जीवन की इच्छा नहीं की थी। हालांकि, यह पता चला है कि कुछ लोग अनजाने में दीर्घायु हो गए हैं। आर्कबिशप और उनके पूर्व माली, जो अब १५० वर्ष से अधिक उम्र के हैं, इसका प्रमाण हैं। वे सामान्य आबादी से अलग दिखते हैं और अधिक बुद्धिमान और शांत हैं। समाज इस खोज से परेशान है, क्योंकि यह सामाजिक व्यवस्था को बाधित करता है। राष्ट्रपति बर्ज और पूर्व राष्ट्रपति लुबिन, जो अब बहुत बूढ़े हो चुके हैं, इस घटना से निपटने की कोशिश करते हैं। यह अनुभाग समाज की जड़ता और परिवर्तन के प्रति उसके प्रतिरोध को दर्शाता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| राष्ट्रपति बर्ज | वृद्ध, राजनीतिक रूप से चालाक, शक्ति बनाए रखना चाहता है | सत्ता बनाए रखना, नई स्थिति को अपने लाभ के लिए हेरफेर करना |
| लुबिन | सेवानिवृत्त राष्ट्रपति, लेकिन अभी भी प्रभावशाली | अपनी विरासत को संरक्षित करना, राजनीतिक प्रभाव बनाए रखना |
| आर्कबिशप ऑफ़ यॉर्क | १५० वर्ष से अधिक उम्र का, शांत, बुद्धिमान | ईश्वर की इच्छा के अनुसार मानव विकास को समझना |
| ओरिएंटल डचमैन | एक युवा की आड़ में एक प्राचीन व्यक्ति, रहस्यमय | मानव जाति के विकास का निरीक्षण और मार्गदर्शन करना |
| एश्टाउन | एक हाउसकीपर, १५० वर्ष से अधिक उम्र की, विनम्र | अपने लंबे जीवन के साथ शांति से रहना, सेवा करते रहना |
अनुभाग 4: एक बुजुर्ग सज्जन की त्रासदी (Tragedy of an Elderly Gentleman)
यह अनुभाग ३००० ईस्वी में स्थापित है। अब लंबे समय तक जीने वाले मनुष्यों का एक नया वर्ग अस्तित्व में है, और वे सामान्य मनुष्यों (जिन्हें "छद्म" कहा जाता है) से अलग रहते हैं। छद्म अल्पकालिक हैं और अभी भी अपने तुच्छ राजनीतिक झगड़ों में लगे हुए हैं। एक बुजुर्ग सज्जन, जो नेपोलियन के पुनर्जन्म जैसा दिखता है, अपने देश के भाग्य को बदलने की कोशिश करता है और लंबे समय तक जीवित रहने वाले लोगों के पास मार्गदर्शन के लिए आता है। वह "ऑरेकल" से परामर्श करता है, जो वास्तव में एक युवा महिला है जो अपने पिछले १०० वर्षों में कई बार पुनर्जन्म ले चुकी है। बुजुर्ग सज्जन उनके शांत और बुद्धिमान जीवन से अभिभूत हो जाते हैं और अपनी मृत्यु की कामना करते हैं, जो एक "अल्पजीवी" के रूप में उनके जीवन की त्रासदी को उजागर करती है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| बुजुर्ग सज्जन | वृद्ध, आदर्शवादी, अपने देश को बचाना चाहता है | अपने देश के लिए बेहतर भविष्य की इच्छा, लंबे जीवन की समझ |
| ओरेकल (ज़ांस) | युवा दिखने वाली, लेकिन वास्तव में प्राचीन, बुद्धिमान | ज्ञान प्रदान करना, अल्पजीवियों को समझना और उनका निरीक्षण करना |
| ज़ू | एक प्राचीन व्यक्ति, शांत, अवलोकनकर्ता | मानव विकास का निरीक्षण करना, कला और ज्ञान की सराहना करना |
| पायगमैलियन | एक युवा कलाकार, मानव की नक्काशी बनाता है | कला के माध्यम से जीवन और रूप को व्यक्त करना |
| जनरल फित्ज़हरबर्ट | एक अल्पजीवी सैन्य नेता, युद्ध की मानसिकता वाला | राजनीतिक शक्ति और सैन्य नियंत्रण बनाए रखना |
अनुभाग 5: जहाँ तक विचार पहुँच सकता है (As Far As Thought Can Reach)
यह अंतिम अनुभाग ३१००० ईस्वी में स्थापित है। मानव जाति ने एक उच्चतर, निराकार और लगभग अमर अस्तित्व में विकसित हो गई है। वे प्रजनन के लिए अंडे का उपयोग करते हैं और अब शारीरिक रूप से बहुत कम करते हैं। युवा प्राणी कुछ वर्षों के लिए शारीरिक रूप धारण करते हैं, फिर शारीरिक जीवन से मुक्त होकर शुद्ध विचार में बदल जाते हैं। वे कला, संगीत और दर्शन पर केंद्रित हैं। वे पुराने, अल्पजीवी मनुष्यों को आदिम और कष्टप्रद मानते हैं। वे अपने भौतिकवादी अस्तित्व से संतुष्ट नहीं हैं और आगे के विकास की इच्छा रखते हैं, अंततः एक ऐसी स्थिति तक पहुँचते हैं जहाँ वे भौतिक शरीर से पूरी तरह मुक्त हो जाते हैं। लिलीथ, मौलिक माँ, इस विकास को देखती है और मानव जाति के लिए एक अनंत भविष्य पर विचार करती है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| प्राचीन व्यक्ति | अत्यंत वृद्ध, निराकार, शुद्ध विचार वाले | ज्ञान और चेतना के अगले स्तर तक पहुँचना, भौतिकता से मुक्ति |
| युवा प्राणी | कुछ वर्षों के लिए शारीरिक रूप धारण करने वाले | जीवन के अनुभव प्राप्त करना, अंततः विचार में परिवर्तित होना |
| बच्चे (नवेले) | अल्पजीवी प्राणी, जो जल्द ही मर जाते हैं या विकसित होते हैं | प्रारंभिक विकास और सीखने की अवस्था |
| कलाकार | मूर्तिकार, संगीतकार, विचारों को मूर्त रूप देने वाले | सौंदर्य, ज्ञान और अस्तित्व को व्यक्त करना |
| लिलीथ | मौलिक सृजनकर्ता, मानव जाति की आदि माँ, अमर | मानव जाति के विकास का निरीक्षण करना, अनंत भविष्य की कामना |
साहित्यिक शैली: दार्शनिक नाटक, साइंस फिक्शन, व्यंग्य, मेटाफिजिकल ड्रामा।
लेखक के तथ्य (जॉर्ज बर्नार्ड शॉ):
- पूरा नाम: जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
- जन्म: २६ जुलाई १८५६, डबलिन, आयरलैंड
- मृत्यु: २ नवंबर १९५०, हार्टफोर्डशायर, इंग्लैंड
- पुरस्कार: १९२५ में साहित्य का नोबेल पुरस्कार (अपने आदर्शवाद और मानवीयता दोनों से चिह्नित नाटकीय रचना के लिए, जिनकी उत्तेजक कविता अक्सर एक अनोखी काव्य सुंदरता के साथ जुड़ी होती है)।
- वह एक आयरिश नाटककार, आलोचक, पोलिमिकिस्ट और राजनीतिक कार्यकर्ता थे।
- उनके सबसे प्रसिद्ध नाटकों में 'पायगमैलियन' (जिस पर 'माई फेयर लेडी' आधारित है), 'मेजर बारबरा', 'मैन एंड सुपरमैन' और 'सेंट जोन' शामिल हैं।
- वह एक कट्टर समाजवादी थे और फेबियन सोसाइटी के एक प्रमुख सदस्य थे, जिसका उनके लेखन पर गहरा प्रभाव था।
- उन्हें २०वीं सदी के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में से एक माना जाता है।
नैतिक शिक्षा:
इस नाटक की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि मानव जाति को अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त करने के लिए अपनी वर्तमान अल्पकालिक जीवन अवधि को पार करना होगा। शॉ का तर्क है कि ८०-९० वर्षों का जीवन मानवीय बुद्धि और अनुभव को विकसित करने के लिए अपर्याप्त है, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार वही गलतियाँ होती हैं, जैसे युद्ध और राजनीतिक मूर्खता। उनका मानना है कि यदि मनुष्य सैकड़ों वर्षों तक जीवित रह सके, तो वे अंततः सांसारिक लालच से ऊपर उठेंगे, परिपक्व निर्णय लेंगे और एक उच्चतर, अधिक आध्यात्मिक और बौद्धिक अस्तित्व की ओर विकसित होंगे।
किताब की विशेषताएँ:
- यह शॉ का सबसे लंबा नाटक है, जो पाँच अलग-अलग अनुभागों में फैला है, जिनमें से प्रत्येक एक अलग युग में स्थापित है, जो लगभग ३०,००० वर्षों के समय को कवर करता है।
- नाटक एक "मेटामॉर्फोसिस" है, जो मानव जाति के विकास को बाइबिल के आदम और ईव से लेकर दूर के भविष्य के निराकार विचारों तक का पता लगाता है।
- शॉ ने इसे एक "उपदेश" के रूप में वर्णित किया, जहाँ वह मानव जाति के विकासवादी भविष्य के बारे में अपने दार्शनिक विचारों को प्रस्तुत करते हैं।
- नाटक में शॉ के विशिष्ट व्यंग्य और हास्य का उपयोग किया गया है, खासकर २०वीं शताब्दी के राजनेताओं और उनकी तुच्छताओं पर टिप्पणी करते समय।
- इसे अक्सर शॉ के दार्शनिक और आध्यात्मिक विचारों की सबसे पूर्ण अभिव्यक्ति माना जाता है, जो उनकी जीवन शक्ति और विकासवादी इच्छा के सिद्धांतों को दर्शाता है।
- नाटक की अवधारणा को प्रसिद्ध जीवविज्ञानी ऑगस्ट वेइसमैन के सिद्धांत से प्रेरणा मिली थी, जिसमें कहा गया था कि मृत्यु एक विकासवादी आवश्यकता नहीं है, बल्कि एक अनुकूलन है।
