moor ka antim nishvas - salman rushdie

सारांश

सलमान रुश्दी का उपन्यास 'द मूर'्स लास्ट साई' मोरस ज़ोगोयबी (जिसे 'द मूर' कहा जाता है) की कहानी है, जो मुंबई के एक धनी, बहुसांस्कृतिक, और अंततः बदकिस्मत परिवार के अंतिम पुरुष सदस्य हैं। मोरस का जन्म असामान्य रूप से होता है - वह दोगुनी गति से बड़ा होता है और उसके शरीर पर कई दाग होते हैं। वह अपनी माँ, प्रसिद्ध कलाकार ऑरोरा ज़ोगोयबी, और अपने पिता, रहस्यमय व्यापारी अब्राहम ज़ोगोयबी के जीवन को याद करता है। कहानी कोचीन (केरल) के मसाले के व्यापार के शुरुआती दिनों से लेकर मुंबई की राजनीतिक उथल-पुथल तक, और अंततः स्पेन में मोरस के निर्वासन तक फैली हुई है।

यह उपन्यास परिवार के उठने और गिरने, प्यार और विश्वासघात, कला और राजनीति, और भारत के जटिल इतिहास और पहचान पर आधारित है। मोरस का परिवार पुर्तगाली यहूदी, भारतीय और अन्य संस्कृतियों का मिश्रण है, जो भारत की बहुसंस्कृतिवाद का प्रतीक है। उपन्यास में साम्प्रदायिक हिंसा, चरमपंथ और व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना करते हुए भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाया गया है। मोरस का भाई केन, जो एक अपराधी बन जाता है, परिवार के पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंत में, मोरस स्पेन में अपने निर्वासन में अपने अतीत के भूतों का सामना करता है, और अपने परिवार की विरासत के साथ शांति बनाने की कोशिश करता है, जिसका अंत एक दुखद "मूर की अंतिम आह" के साथ होता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: उत्पत्ति और बचपन

यह अनुभाग कोचीन में दा गामा-ज़ोगोयबी परिवार की पीढ़ियों को प्रस्तुत करता है, जिसकी शुरुआत मोरस की दादी, इसाबेला दा गामा से होती है, जो एक शक्तिशाली यहूदी-पुर्तगाली मैट्रिआर्क थीं और मसाले के साम्राज्य की मालिक थीं। मोरस के जन्म और उसके असामान्य शारीरिक विकास का विस्तृत वर्णन किया गया है। कहानी उसकी माँ, ऑरोरा ज़ोगोयबी, एक प्रतिभाशाली कलाकार, और उसके पिता, अब्राहम ज़ोगोयबी, एक रहस्यमय और जटिल व्यापारी के रिश्ते पर केंद्रित है। परिवार की असाधारण और जीवंत प्रकृति को दर्शाया गया है, जिसमें कोचीन के अनूठे यहूदी समुदाय और उनके बहुसांस्कृतिक परिवेश का चित्रण है। ऑरोरा के शुरुआती कलात्मक कार्य, वासको मिरांडा के साथ उसका रिश्ता और उसकी प्रसिद्ध पेंटिंग की रचना भी इसी अनुभाग में होती है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मोरेस ज़ोगोयबी (द मूर) कथावाचक, कहानी का नायक; दोगुनी गति से बड़ा होता है, उसके शरीर पर कई निशान हैं; अवलोकनशील, अंतर्मुखी, अपनी पहचान को समझने की कोशिश करता है। अपने परिवार के इतिहास को समझना, अपनी मां की विरासत को समझना, अपने अस्तित्व के अर्थ को खोजना।
ऑरोरा ज़ोगोयबी मोरेस की मां, एक विश्व प्रसिद्ध कलाकार; मजबूत इच्छाशक्ति वाली, करिश्माई, रचनात्मक, अपने कला के माध्यम से भारत के इतिहास और राजनीति को दर्शाती है। कला के माध्यम से अपनी पहचान व्यक्त करना, भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों को अपनी कला में ढालना, परिवार की matriarchal विरासत को आगे बढ़ाना।
अब्राहम ज़ोगोयबी मोरेस के पिता, ऑरोरा के पति; रहस्यमय, आकर्षक, एक सफल लेकिन अक्सर छायादार व्यापारी; अपने परिवार और अपनी जड़ों से गहरा संबंध रखता है। वित्तीय सफलता प्राप्त करना, अपने परिवार की सुरक्षा करना, अपने पूर्वजों की विरासत को जारी रखना।
इसाबेला दा गामा ऑरोरा की मां, मोरेस की दादी; परिवार की संस्थापक मैट्रिआर्क; शक्तिशाली, दृढ़निश्चयी, व्यवसाय में निपुण, पुर्तगाली-यहूदी विरासत की। अपने परिवार के मसाले के साम्राज्य को बनाना और बनाए रखना, अपने बच्चों और पोते-पोतियों पर नियंत्रण बनाए रखना।
केन ज़ोगोयबी मोरेस का सबसे बड़ा भाई; विद्रोही, ईर्ष्यालु, हिंसक प्रवृत्तियों वाला, अंततः एक अपराधी बन जाता है। अपने माता-पिता के ध्यान के लिए प्रतिस्पर्धा करना, मोरेस से ईर्ष्या, शक्ति और नियंत्रण की इच्छा।
इनान ज़ोगोयबी मोरेस का दूसरा बड़ा भाई; कमज़ोर, अक्सर केन के प्रभाव में। परिवार में अपनी जगह खोजना।
जमील ज़ोगोयबी मोरेस का तीसरा बड़ा भाई; खुशमिजाज़, संगीतकार। जीवन का आनंद लेना, संगीत में अपनी पहचान बनाना।
आयशा ज़ोगोयबी मोरेस की बहन; कम महत्वपूर्ण। परिवार के भीतर अपना जीवन जीना।
वासको मिरांडा एक चित्रकार, ऑरोरा का प्रेमी और कलात्मक साथी; रहस्यमय, ऑरोरा की कला के लिए एक प्रेरणा। कलात्मक प्रेरणा खोजना, ऑरोरा के साथ गहरा संबंध।
रमन ज़ोगोयबी अब्राहम के पिता; ज़ोगोयबी परिवार के मुखिया, जो मसाले के व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। परिवार के व्यवसाय और मान-प्रतिष्ठा को बनाए रखना।

अनुभाग 2: बंबई की ओर और पारिवारिक कलह

ज़ोगोयबी परिवार कोचीन से बंबई (अब मुंबई) चला जाता है। यह कदम ऑरोरा के कलात्मक करियर के उत्थान के साथ मेल खाता है, क्योंकि वह एक राष्ट्रीय आइकन बन जाती है, जिसकी पेंटिंग भारत के राजनीतिक परिदृश्य और स्वतंत्रता के बाद के इतिहास को दर्शाती हैं। अब्राहम के व्यवसाय भी विकसित होते हैं, लेकिन वे increasingly shady होते जाते हैं। बंबई में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने लगता है, जो परिवार के भीतर भी तनाव को दर्शाता है। मोरेस अपनी किशोरावस्था से गुजरता है, उसे अपनी पहली मोहब्बत (उमा) मिलती है, और वह अपने परिवार की जटिलताओं को समझना शुरू करता है। केन, मोरेस का बड़ा भाई, अधिक से अधिक विद्रोही और हिंसक हो जाता है, जिससे परिवार के भीतर गहरे मतभेद पैदा होते हैं।

अनुभाग 3: अलगाव और पतन

यह अनुभाग ज़ोगोयबी परिवार के पतन की शुरुआत को चिह्नित करता है। इनान और जमील की दुखद मौतें होती हैं, जिससे परिवार में गहरा सदमा पहुंचता है। ऑरोरा की प्रसिद्धि बढ़ती रहती है, लेकिन वह अपने परिवार और अपने देश से अधिक से अधिक अलग महसूस करती है। केन की दुष्टता बढ़ती जाती है, और वह गैंगस्टर एम.एस. (मैंढक) सिंह जैसे आपराधिक तत्वों के साथ जुड़ जाता है। मोरेस, अपने परिवार की त्रासदी और अपने भाई की दुष्टता से निराश होकर, भारत छोड़ने का फैसला करता है। यह अनुभाग ऑरोरा की कला गैलरी और उसके चित्रों को हिंदू चरमपंथियों द्वारा नष्ट किए जाने की भयावह घटना के साथ समाप्त होता है, जो भारत के बढ़ते सांप्रदायिक विभाजन का प्रतीक है।

अनुभाग 4: स्पेन में निर्वासन और अंतिम रहस्योद्घाटन

भारत छोड़ने के बाद, मोरेस बेनेंगेली, स्पेन में निर्वासन में रहता है, जहाँ वह एक नकली पहचान के तहत अपना जीवन जीता है। यहाँ उसकी मुलाकात मारिया/मलाबार याकूब नाम की एक रहस्यमय महिला से होती है, जिसका उसके कोचीन के अतीत से गहरा संबंध है। वह पाता है कि उसका भाई केन भी स्पेन में है, एक विशाल आपराधिक साम्राज्य चला रहा है। मोरेस को अपने अतीत का सामना करना पड़ता है और केन के साथ एक अंतिम, दुखद टकराव में उलझ जाता है। उपन्यास ग्रेनाडा के अंतिम मूरिश राजा, बोअबदिल की कहानी के साथ मोरेस के भाग्य को जोड़ता है, जो "मूर की अंतिम आह" के पीछे के गहरे अर्थ को प्रकट करता है, जो एक युग के अंत और सांस्कृतिक और व्यक्तिगत पहचान के नुकसान का प्रतीक है।

साहित्यिक शैली: जादुई यथार्थवाद (Magical Realism), ऐतिहासिक कथा (Historical Fiction), परिवार गाथा (Family Saga), उत्तर-औपनिवेशिक साहित्य (Postcolonial Literature), व्यंग्य (Satire)।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:
सलमान रुश्दी का जन्म 1947 में मुंबई, भारत में हुआ था। वह एक ब्रिटिश-भारतीय उपन्यासकार हैं, जो अपनी शानदार और अलौकिक कल्पना से भरपूर कहानियों के लिए जाने जाते हैं। उनकी रचनाएँ अक्सर प्रवासन, पहचान, इतिहास और धर्म के विषयों पर केंद्रित होती हैं। उन्होंने अपने उपन्यास 'मिडनाइट्स चिल्ड्रन' (1981) के लिए बुकर पुरस्कार जीता, जिसे बाद में "बुकर ऑफ बुकर" पुरस्कार भी मिला। उनका उपन्यास 'द सैटानिक वर्सेज' (1988) दुनिया भर में विवादों और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी द्वारा जारी फतवे का कारण बना।

नैतिक शिक्षा:
'द मूर'्स लास्ट साई' कई गहरी नैतिक शिक्षाएँ प्रदान करता है:

  • इतिहास का चक्र और पहचान की तरलता: उपन्यास दिखाता है कि कैसे व्यक्तिगत जीवन और राष्ट्रीय इतिहास intertwined हैं, और कैसे पहचान स्थिर नहीं बल्कि निरंतर बदलती रहती है।
  • कट्टरता का विनाशकारी प्रभाव: उपन्यास धार्मिक और राजनीतिक कट्टरता के खतरों को उजागर करता है, और यह कैसे समाज और व्यक्तियों को नष्ट कर सकता है।
  • प्रेम, विश्वासघात और मोक्ष: यह मानवीय रिश्तों की जटिलताओं को दर्शाता है, जिसमें प्रेम की शक्ति और विश्वासघात की कड़वाहट दोनों शामिल हैं।
  • कला की शक्ति: ऑरोरा की कला के माध्यम से, उपन्यास कला की शक्ति को इतिहास को दर्ज करने, टिप्पणी करने और यहां तक ​​कि आकार देने के साधन के रूप में दर्शाता है।
  • घर की अवधारणा: यह दिखाता है कि घर केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं है, बल्कि यादों, लोगों और कहानियों का एक जटिल ताना-बाना है, जिसे नष्ट किया जा सकता है लेकिन पूरी तरह से मिटाया नहीं जा सकता।

जिज्ञासु तथ्य:

  • शीर्षक और संदर्भ: उपन्यास का शीर्षक और मुख्य पात्र मोरस का नाम ग्रेनाडा के अंतिम मूरिश शासक बोअबदिल (Abu 'Abd Allah Muhammad XII) को संदर्भित करता है, जिसने 1492 में स्पेन से निष्कासित होने पर "मूर की अंतिम आह" भरी थी। यह एक संस्कृति के अंत और निर्वासन के दर्द का प्रतीक है।
  • असामान्य विकास: मोरस का दोगुनी गति से बड़ा होना जादुई यथार्थवाद का एक क्लासिक उदाहरण है, जो उसे एक रूपक और एक व्यक्ति दोनों बनाता है।
  • कला और राजनीति: ऑरोरा ज़ोगोयबी की पेंटिंग अक्सर वास्तविक भारतीय इतिहास और राजनीति को दर्शाती हैं, जिससे उसकी कला भारत पर एक टिप्पणी बन जाती है।
  • बेनेंगेली का स्थान: स्पेन में मोरस के निर्वासन का स्थान, बेनेंगेली, मिगुएल डी सर्वेंटेस के 'डॉन क्विक्सोट' के काल्पनिक लेखक, सीडे हामेटे बेनेंगेली का एक संकेत है। रुश्दी अक्सर मेटा-कथात्मक तत्वों के साथ खेलते हैं।
  • पारिवारिक विरासत: ज़ोगोयबी परिवार भारत के समृद्ध और विविध इतिहास का प्रतीक है, जिसमें पुर्तगाली, यहूदी, मुस्लिम और भारतीय संस्कृतियों का मिश्रण है, जो भारतीय पहचान की जटिलता को दर्शाता है।