नग्न लोगों को वस्त्र पहनाना - लुइगी पिरान्देल्लो
सारांश
'वेस्टिरे ग्लि इग्नूडी' (नग्न को कपड़े पहनाना) लुइगी पिरान्देल्लो का एक मार्मिक नाटक है जो एर्सिलिया ड्रेई नामक एक युवा महिला की त्रासदी को बयान करता है। एर्सिलिया ने आत्महत्या का प्रयास किया क्योंकि वह अपने जीवन के दुर्भाग्यपूर्ण और अपमानजनक अनुभवों से थक चुकी थी। एक पत्रकार द्वारा उसकी कहानी को सनसनीखेज बनाने के बाद, उसे जनता की सहानुभूति मिलती है। एक उपन्यासकार, लुडोविको नोटा, उसके प्रति आसक्त हो जाता है और उसे अपने साथ रहने के लिए राजी करता है ताकि वह अपनी कहानी को "साफ" कर सके और एक काल्पनिक, अधिक सम्मानजनक छवि बना सके।
हालांकि, उसके अतीत के लोग - उसका पूर्व प्रेमी, फ्रांको लास्पिगा, और उसका पूर्व नियोक्ता, कौंसल ग्रोट्टी - उसके कथित "निर्दोष" बचाव से चुनौती महसूस करते हैं और सच्चाई को उजागर करने के लिए आते हैं। नाटक सच्चाई और दिखावे के बीच के संघर्ष, व्यक्तिपरक वास्तविकता की प्रकृति और समाज द्वारा व्यक्तियों पर थोपी गई भूमिकाओं की पड़ताल करता है। जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता है, एर्सिलिया की वास्तविक कहानी, उसकी त्रासदी और समाज द्वारा उस पर लगाए गए निर्णयों की परतें उजागर होती हैं, जिससे उसकी नाजुकता और उसकी बनाई गई छवि दोनों बिखर जाती हैं। अंततः, वह जीवन की जटिलताओं और लोगों के निर्णयों का सामना करने में असमर्थ महसूस करती है और एक बार फिर आत्महत्या का प्रयास करती है, इस बार सफल होती है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1: पहला अंक
- कहानी: नाटक उपन्यासकार लुडोविको नोटा के घर में खुलता है, जहाँ एर्सिलिया ड्रेई रहती है। उसने हाल ही में आत्महत्या का प्रयास किया था और एक पत्रकार ने उसकी कहानी को सनसनीखेज बना दिया था, जिससे उसे जनता की सहानुभूति मिली। एर्सिलिया ने दावा किया था कि उसने एक बच्चे को खोने और उसके मंगेतर, नौसेना अधिकारी फ्रांको लास्पिगा द्वारा उसे छोड़ दिए जाने के बाद खुद को मारने का प्रयास किया था। नोटा, उसकी कहानी से मोहित होकर, उसे अपने उपन्यास में एक चरित्र के रूप में उपयोग करने के लिए अपने साथ रहने के लिए मनाता है और उसे एक नई, साफ-सुथरी छवि बनाने में मदद करता है। वह उसके अतीत को "कपड़े पहनाने" की कोशिश करता है, उसे एक आदर्शवादी और पीड़ित व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता है। नोटा, एर्सिलिया के बचाव और उसकी नई "सच्चाई" को लेकर उत्साहित है। हालांकि, उसके पत्रकार मित्र, अल्फ्रेडो, कुछ संशयवादी है। धीरे-धीरे, एर्सिलिया की नई बनाई गई छवि टूटने लगती है जब उसके अतीत के लोग उसके साथ रहने के लिए आते हैं।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| एर्सिलिया ड्रेई | एक युवा महिला, पूर्व शासनिका (governess), जिसे दुर्भाग्य और अपमान का सामना करना पड़ा है। उसने आत्महत्या का प्रयास किया। वह नाजुक, भावनात्मक और समाज के निर्णयों से प्रभावित है। वह एक आदर्श छवि बनाने की कोशिश करती है लेकिन सच्चाई उसे परेशान करती है। | वह अपने जीवन की त्रासदियों और सामाजिक अपमान से भागना चाहती है। वह जनता की सहानुभूति और एक "साफ" पहचान प्राप्त करना चाहती है। वह एक ऐसी कहानी बनाना चाहती है जो उसे सम्मानजनक दिखाए, भले ही वह पूरी तरह सच न हो। |
| लुडोविको नोटा | एक सफल उपन्यासकार, बौद्धिक, जो मानवीय मनोविज्ञान और "सत्य" की प्रकृति में रुचि रखता है। वह दूसरों की कहानियों से मोहित हो जाता है और उन्हें अपनी कला के लिए उपयोग करता है। वह एर्सिलिया को "बचाना" और उसकी कहानी को फिर से गढ़ना चाहता है। | वह एक साहित्यिक कृति के लिए प्रेरणा की तलाश में है। वह एर्सिलिया की कहानी को एक उपन्यास के रूप में "सही" करना चाहता है, उसे एक कलात्मक और आदर्शवादी रूप देना चाहता है। वह मानवीय नाटक और व्यक्तिपरक वास्तविकता की पड़ताल करना चाहता है। |
| अल्फ्रेडो कांटावले | एक पत्रकार, नोटा का मित्र। वह यथार्थवादी और कुछ हद तक संशयवादी है। वह कहानियों के पीछे की सच्ची प्रेरणाओं को उजागर करने में रुचि रखता है, अक्सर नोटा के कलात्मक आदर्शवाद के विपरीत। | वह एक अच्छी कहानी, विशेष रूप से एक सनसनीखेज कहानी की तलाश में है। वह सच्चाई को उजागर करने में रुचि रखता है, भले ही वह कड़वी हो। वह नोटा के आदर्शवादी विचारों का खंडन करके अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता साबित करना चाहता है। |
अनुभाग 2: दूसरा अंक
- कहानी: इस अंक में, एर्सिलिया का अतीत उसके दरवाजे पर आ जाता है। फ्रांको लास्पिगा, नौसेना अधिकारी जिसे एर्सिलिया ने अपने मंगेतर के रूप में उल्लेख किया था, नोटा के घर आता है। वह एर्सिलिया के दावों से नाराज है कि उसने उसे छोड़ दिया और उस पर बेवफाई का आरोप लगाया। फ्रांको का मानना है कि एर्सिलिया ने उसके साथ धोखा किया और उसे एक बच्चे के साथ छोड़ दिया, जो वास्तव में उसका नहीं था। फ्रांको की उपस्थिति एर्सिलिया की बनाई गई कहानी को हिला देती है। इसके तुरंत बाद, कौंसल ग्रोट्टी भी आता है। ग्रोट्टी वह व्यक्ति था जिसके लिए एर्सिलिया शासनिका के रूप में काम करती थी, और उसकी पत्नी ओब्रिया पर एर्सिलिया के बच्चे को खोने के बाद मृत्यु का आरोप लगाया गया था। कौंसल ग्रोट्टी एर्सिलिया के दावे से भी नाराज है कि वह अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद अपने घर से भाग गई थी। वह खुलासा करता है कि एर्सिलिया का उसकी पत्नी के साथ नहीं बल्कि ग्रोट्टी के साथ संबंध था। इन खुलासों से एर्सिलिया की "नई" पहचान बिखरने लगती है। नोटा, जो पहले उसे एक आदर्श व्यक्ति के रूप में देखता था, अब सच्चाई की जटिलताओं का सामना करता है। एर्सिलिया सच्चाई और दिखावे के बीच फंस जाती है, और अतीत के भूत उसे सताते हैं।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| फ्रांको लास्पिगा | एक नौसेना अधिकारी, एर्सिलिया का पूर्व प्रेमी। वह आत्म-सम्मान वाला, क्रोधित और उस अपमान को दूर करने के लिए उत्सुक है जो उसे एर्सिलिया के सार्वजनिक दावों के कारण महसूस हुआ। वह अपनी प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित है। | वह एर्सिलिया द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए दावों से अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान को पुनः प्राप्त करना चाहता है। वह यह साबित करना चाहता है कि एर्सिलिया ने उसे धोखा दिया और वह स्वयं पीड़ित है। वह सच्चाई का अपना संस्करण प्रस्तुत करना चाहता है। |
| कौंसल ग्रोट्टी | एर्सिलिया का पूर्व नियोक्ता, जिसकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। वह शक्तिशाली, अभिमानी और अपनी सार्वजनिक छवि के बारे में चिंतित है। वह एर्सिलिया के दावों से अपनी प्रतिष्ठा को खतरे में महसूस करता है। | वह अपनी प्रतिष्ठा और सम्मान को बचाना चाहता है। एर्सिलिया के आत्महत्या के प्रयास और उसकी कहानी ने उसके परिवार और उसके स्वयं के सम्मान को खतरे में डाल दिया है। वह यह साबित करना चाहता है कि एर्सिलिया ने झूठ बोला और उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया। वह सच्चाई का अपना संस्करण प्रस्तुत करना चाहता है और एर्सिलिया पर उसके साथ संबंध रखने का आरोप लगाता है। |
| ओनोरिया ग्रोट्टी | कौंसल ग्रोट्टी की पत्नी। वह नाटक में सीधे तौर पर मौजूद नहीं है (मृत है), लेकिन उसके चरित्र और एर्सिलिया के साथ उसके कथित संबंध नाटक के कथानक के लिए महत्वपूर्ण हैं। वह एर्सिलिया के बच्चे की कथित माता थी। (एर्सिलिया ने यह कहानी बनाई थी) | (ओनोरिया नाटक में सीधे तौर पर उपस्थित नहीं है, बल्कि उसके संदर्भ में उसके पति और एर्सिलिया के माध्यम से उसके चरित्र को गढ़ा जाता है। उसकी प्रेरणाएँ उसके पति के खुलासे और एर्सिलिया की झूठी कहानी के माध्यम से सामने आती हैं, यानी वह एक निष्पाप पीड़ित के रूप में प्रस्तुत की जाती है जिसे एर्सिलिया ने धोखा दिया।) |
अनुभाग 3: तीसरा अंक
- कहानी: तीसरे अंक में, एर्सिलिया की झूठी और सच्ची कहानियों का पूरा खुलासा हो जाता है। यह पता चलता है कि एर्सिलिया ने फ्रांको को छोड़ दिया था क्योंकि उसे कौंसल ग्रोट्टी के साथ एक रिश्ता शुरू करने के लिए मजबूर किया गया था ताकि उसे एक स्थिर जीवन मिल सके। ओब्रिया ग्रोट्टी (कौंसल की पत्नी) की मृत्यु का कारण उसकी अपनी निराशा और अपने पति के बेवफाई के बारे में जानने के बाद जहर खाकर आत्महत्या करना था, न कि एर्सिलिया के बच्चे को खोना। एर्सिलिया ने बच्चे को खोने की कहानी गढ़ी थी ताकि उसे सहानुभूति मिल सके। इस रहस्योद्घाटन से हर किसी की धारणाएं बिखर जाती हैं। नोटा, जो पहले एर्सिलिया को "बचाना" चाहता था, अब उसे और अधिक बोझिल महसूस करता है क्योंकि उसकी कहानी बहुत जटिल और दर्दनाक हो जाती है। एर्सिलिया, जिसकी पूरी सच्चाई सामने आ गई है और जिसके सभी दिखावे नष्ट हो गए हैं, समाज और अपने निजी जीवन में कोई जगह नहीं पाती है। वह महसूस करती है कि उसे किसी भी कहानी के "कपड़े" नहीं पहनाए जा सकते - न ही उसने जो बनाई थी और न ही जो समाज ने उस पर थोपी थी। अपने सभी झूठ उजागर होने और सभी को सच्चाई का सामना करने के बाद, एर्सिलिया एक बार फिर जहर पीकर आत्महत्या का प्रयास करती है। इस बार, वह सफल हो जाती है। नाटक व्यक्तिपरक सत्य की प्रकृति और इस बात की पड़ताल करता है कि कैसे लोग खुद को और दूसरों को देखते हैं, अक्सर अपने स्वयं के आराम के लिए सच को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। एर्सिलिया की मृत्यु इस बात पर जोर देती है कि कैसे समाज किसी व्यक्ति को उसकी जटिलताओं और विरोधाभासों के साथ स्वीकार करने में विफल रहता है।
- पात्र: सभी पात्र तीसरे अंक में मौजूद हैं, लेकिन कोई नया पात्र पेश नहीं किया गया है। एर्सिलिया की मृत्यु के साथ उनके चरित्र चाप अपने निष्कर्ष पर पहुँचते हैं।
साहित्यिक शैली: नाटक (Drama)
लेखक के बारे में कुछ तथ्य:
- लुइगी पिरान्देल्लो (Luigi Pirandello) (1867-1936) एक इतालवी नाटककार, उपन्यासकार और लघुकथाकार थे।
- उन्हें 1934 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
- उनके काम अक्सर पहचान, भ्रम, वास्तविकता और दिखावे के बीच के संघर्ष, व्यक्तिपरक सत्य और आधुनिक व्यक्ति की जटिलताओं की पड़ताल करते हैं।
- उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में 'सिक्स कैरेक्टर्स इन सर्च ऑफ एन ऑथर' (Six Characters in Search of an Author) और 'हेनरी IV' (Henry IV) शामिल हैं।
- वह फ़ासीवाद के शुरुआती समर्थक थे, लेकिन बाद में उन्होंने खुद को इससे दूर कर लिया।
नैतिकता और जिज्ञासाएँ:
- नैतिकता: नाटक इस विचार पर प्रकाश डालता है कि "सत्य" अक्सर व्यक्तिपरक होता है और लोगों द्वारा अपनी सुविधा के अनुसार गढ़ा जाता है। यह दिखाता है कि कैसे समाज व्यक्तियों पर भूमिकाएँ थोपता है और कैसे व्यक्ति अपनी प्रतिष्ठा या अस्तित्व के लिए इन भूमिकाओं को अपनाने के लिए मजबूर होते हैं। यह मानव स्वभाव की जटिलताओं, दिखावे की शक्ति और समाज की निंदनीय प्रकृति की पड़ताल करता है, जो अक्सर किसी व्यक्ति के सच्चे आत्म को स्वीकार करने से इनकार कर देता है। अंततः, यह दर्शाता है कि एक व्यक्ति के लिए अपने स्वयं के सच्चे आत्म को व्यक्त करना कितना मुश्किल हो सकता है जब उसके चारों ओर हर कोई एक अलग कहानी पर विश्वास करने पर तुला हो।
- जिज्ञासाएँ:
- पिरान्देल्लो ने अक्सर अपने नाटकों में "चेहरे" (मुखौटे) और "सच्चे आत्म" के बीच के संघर्ष का पता लगाया, और 'वेस्टिरे ग्लि इग्नूडी' इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहाँ एर्सिलिया एक आदर्श छवि बनाने की कोशिश करती है जो उसके वास्तविक आत्म के विपरीत है।
- नाटक का शीर्षक, 'नग्न को कपड़े पहनाना', एक बाइबिल के उद्धरण को संदर्भित करता है जो दान के सात कार्यों में से एक है। पिरान्देल्लो इसे एक विडंबनापूर्ण तरीके से उपयोग करते हैं, यह दर्शाते हुए कि कैसे समाज एर्सिलिया को "कपड़े" पहनाने की कोशिश करता है, यानी उसे एक सम्मानजनक पहचान देता है, लेकिन अंततः उसे भावनात्मक रूप से नग्न छोड़ देता है, उसकी कमजोरियों को उजागर करता है।
- यह नाटक पिरान्देल्लो के विशिष्ट विषयों - वास्तविकता और भ्रम, व्यक्तिपरक बनाम उद्देश्य सत्य, और आत्म की अस्थिरता - को गहराई से दर्शाता है, जो उन्हें 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में से एक बनाता है।
- एर्सिलिया का चरित्र उस समय की इतालवी सामाजिक परिस्थितियों का प्रतिबिंब हो सकता है, जहाँ एक महिला के लिए अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था यदि वह समाज के मानदंडों से भटक जाती थी।
- नाटक एक त्रासदी है जो इस विचार की पड़ताल करती है कि जब किसी व्यक्ति की पहचान पूरी तरह से दूसरों की धारणाओं पर निर्भर करती है, तो वह कितना कमजोर हो जाता है।
