आइडलर - सैमुअल जॉनसन
सारांश
सैमुअल जॉनसन की 'द आइडलर' एक उपन्यास नहीं है, बल्कि 1758 से 1760 के बीच 'द यूनिवर्सल क्रॉनिकल, ऑर वीकली गैज़ेट' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र में प्रकाशित निबंधों की एक श्रृंखला है। इसमें कुल 103 निबंध हैं, जिनमें से अधिकांश जॉनसन द्वारा लिखे गए हैं। इन निबंधों में जॉनसन 'द आइडलर' के रूप में एक ऐसे व्यक्ति का रूप धारण करते हैं जो दुनिया का अवलोकन करता है लेकिन सीधे तौर पर कार्यों में संलग्न नहीं होता है। वह आलस्य, शिथिलता, समय के दुरुपयोग, और मानव स्वभाव की विभिन्न मूर्खताओं और विडंबनाओं पर विचार प्रस्तुत करते हैं।
इन निबंधों में कोई केंद्रीय कथानक या निरंतर कहानी नहीं है। इसके बजाय, प्रत्येक निबंध एक विशिष्ट विषय, चरित्र या सामाजिक व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करता है। जॉनसन मानव मनोविज्ञान, नैतिकता, साहित्य और तत्कालीन समाज के विभिन्न पहलुओं पर अपनी टिप्पणियों, चिंतन और कभी-कभी छोटे-छोटे किस्सों का उपयोग करते हैं। वे अक्सर हास्य, व्यंग्य और गहन नैतिक विचारों का मिश्रण करते हैं ताकि पाठकों को आत्म-चिंतन और बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया जा सके। यह श्रृंखला आलस्य की निरर्थकता और उद्यमी जीवन के महत्व को उजागर करने का एक प्रयास है।
किताब के अनुभाग
यह पुस्तक निबंधों का एक संग्रह है, जिसमें प्रत्येक 'अनुभाग' एक स्वतंत्र निबंध है न कि किसी बड़ी कहानी का हिस्सा। यहाँ कुछ प्रतिनिधि निबंधों का विवरण दिया गया है:
अनुभाग 1: द आइडलर का परिचय (The Idler's Introduction)
पहले कुछ निबंधों में जॉनसन 'द आइडलर' के अपने व्यक्तित्व का परिचय देते हैं, जो एक ऐसा व्यक्ति है जो अवलोकन करता है लेकिन काम नहीं करता। वह अपने आलस्य के बहाने बताता है और यह समझाने की कोशिश करता है कि वह कैसे अपने आलस्य के माध्यम से दुनिया का बेहतर तरीके से अध्ययन कर सकता है। वह खुद को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में चित्रित करता है जो हमेशा काम शुरू करने वाला होता है लेकिन कभी शुरू नहीं करता। वह अपने पाठकों को यह भी बताता है कि उसके निबंध उनकी निष्क्रियता की पुष्टि कर सकते हैं या उन्हें आत्म-सुधार के लिए प्रेरित कर सकते हैं। यह अनुभाग जॉनसन की व्यंग्यात्मक शैली और मानव स्वभाव की सूक्ष्म समझ को दर्शाता है, विशेषकर आलस्य की सार्वभौमिक प्रवृत्ति को।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| द आइडलर | निष्क्रिय पर्यवेक्षक, विचारशील, आत्म-व्यंग्यात्मक, बहाने बनाने में कुशल, लेखक। | मानव स्वभाव का अध्ययन करना, अपने आलस्य को न्यायसंगत ठहराना, पाठकों का मनोरंजन और शिक्षा देना। |
अनुभाग 2: मिस मेपोल की कहानी (The Story of Miss Maypole - निबंध संख्या 20)
यह निबंध एक युवा महिला, मिस मेपोल के चरित्र का विस्तृत चित्रण प्रस्तुत करता है, जिसकी पहचान उसकी अत्यधिक vanity (घमंड) और दिखावे से होती है। मिस मेपोल अपना सारा समय और ऊर्जा अपनी सुंदरता को बनाए रखने और लोगों का ध्यान आकर्षित करने में लगाती है। वह अपने रूप-रंग और बाहरी दिखावे को ही अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य मानती है। जॉनसन विस्तार से बताते हैं कि कैसे वह सुबह से रात तक खुद को तैयार करने, कपड़े चुनने और समाज में अपनी छवि चमकाने में व्यस्त रहती है। वह सामाजिक आयोजनों में जाने के लिए घंटों बिताती है और हर छोटी-से-छोटी टिप्पणी या तारीफ पर अत्यधिक ध्यान देती है। इस निबंध के माध्यम से जॉनसन तत्कालीन समाज में सतहीपन और दिखावे के खोखलेपन पर व्यंग्य करते हैं, यह दिखाते हुए कि कैसे बाहरी सुंदरता पर अत्यधिक ध्यान देने से व्यक्ति अपने आंतरिक गुणों को नजरअंदाज कर देता है और एक खाली जीवन जीता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| मिस मेपोल | सुंदर, अति घमंडी, सतही, दिखावा पसंद, अपना सारा समय अपने रूप-रंग पर खर्च करने वाली। | समाज में प्रशंसा और ध्यान आकर्षित करना, अपनी सुंदरता को बनाए रखना और प्रदर्शित करना, सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करना। |
अनुभाग 3: ओबिदाह और साधु की कहानी (The Story of Obidah and the Hermit - निबंध संख्या 32)
यह एक allegorical (रूपकात्मक) कहानी है जो भाग्य और दैवीय providence (दैवीय कृपा) पर भरोसा करने के महत्व पर प्रकाश डालती है। कहानी ओबिदाह नामक एक अमीर व्यापारी के बारे में है, जो एक दिन बहुत उदास हो जाता है क्योंकि उसे लगता है कि उसका जीवन उद्देश्यहीन है और वह भाग्य का दास है। वह दुनिया को त्यागने और एक साधु बनने का फैसला करता है। अपनी यात्रा के दौरान, वह एक साधु से मिलता है जो उसे अपनी झोपड़ी में आश्रय देता है। साधु ओबिदाह को जीवन के उतार-चढ़ाव और मनुष्य के भाग्य की अनिश्चितता के बारे में सिखाता है, यह बताते हुए कि कैसे मनुष्य को अपने प्रयासों में ईमानदार रहना चाहिए और परिणाम ईश्वर पर छोड़ देने चाहिए। वे एक नदी के किनारे बैठते हैं और साधु उसे भाग्य की अप्रत्याशित प्रकृति का एक उदाहरण दिखाता है: एक नाव पलट जाती है, एक यात्री मर जाता है, और एक अन्य यात्री चमत्कारिक ढंग से बच जाता है। साधु जोर देता है कि मनुष्य को ईश्वर की योजना पर विश्वास रखना चाहिए और जीवन की कठिनाइयों के बावजूद आशा नहीं छोड़नी चाहिए। यह कहानी मानव जीवन में भाग्य और दैवीय हस्तक्षेप की भूमिका पर जॉनसन के विचारों को दर्शाती है और धैर्य, विश्वास तथा आशा के महत्व को सिखाती है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| ओबिदाह | एक अमीर लेकिन जीवन से निराश व्यापारी, आध्यात्मिक शांति की तलाश में। | जीवन के उद्देश्य को समझना, भाग्य की अनिश्चितताओं को समझना, आंतरिक शांति खोजना। |
| साधु | बुद्धिमान, अनुभवी, ईश्वर में गहरा विश्वास रखने वाला, एक मार्गदर्शक और आध्यात्मिक गुरु। | ओबिदाह को जीवन के सत्य और दैवीय providence पर विश्वास सिखाना, ज्ञान और सांत्वना प्रदान करना। |
साहित्यिक शैली
'द आइडलर' की साहित्यिक शैली निबंधों की एक श्रृंखला है। इसे नैतिक निबंध (Moral Essays), सामाजिक टिप्पणी (Social Commentary), व्यंग्य (Satire), और दार्शनिक चिंतन (Philosophical Reflections) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। जॉनसन की भाषा स्पष्ट, सटीक और अक्सर अलंकृत होती है, जिसमें जटिल विचारों को सुलभ तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। वे हास्य और व्यंग्य का प्रयोग करते हुए मानवीय दुर्बलताओं और सामाजिक मूर्खताओं पर प्रहार करते हैं।
लेखक के बारे में
सैमुअल जॉनसन (Samuel Johnson) (1709-1784) एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी लेखक, कवि, निबंधकार, नैतिकवादी, साहित्यिक आलोचक, जीवनी लेखक और लेक्सिकोग्राफर थे। उन्हें 18वीं शताब्दी के सबसे महत्वपूर्ण साहित्यिक व्यक्तित्वों में से एक माना जाता है। उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं:
- A Dictionary of the English Language (अंग्रेजी भाषा का एक शब्दकोश) (1755): यह उनके जीवन का सबसे बड़ा उपलब्धि मानी जाती है, जिसने अंग्रेजी भाषा के मानकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- The Rambler (द रैम्बलर) (1750-1752) और The Idler (द आइडलर) (1758-1760): नैतिक और साहित्यिक निबंधों की श्रृंखला।
- Rasselas (रासेलस) (1759): एक दार्शनिक उपन्यास।
- Lives of the Most Eminent English Poets (सर्वाधिक प्रतिष्ठित अंग्रेजी कवियों का जीवन) (1779-1781): कवियों की जीवनियाँ और आलोचनात्मक निबंध।
जॉनसन को उनके ज्ञान, बुद्धिमत्ता और तीक्ष्ण हास्य के लिए जाना जाता था।
नैतिक शिक्षा
'द आइडलर' की मुख्य नैतिक शिक्षाएँ इस प्रकार हैं:
- आलस्य और शिथिलता की आलोचना: जॉनसन लगातार आलस्य के नकारात्मक प्रभावों पर जोर देते हैं, इसे न केवल समय की बर्बादी बल्कि मानवीय क्षमता और खुशी के लिए एक बाधा मानते हैं।
- उत्पादकता और परिश्रम का महत्व: पुस्तक अप्रत्यक्ष रूप से पाठकों को सक्रिय, उद्देश्यपूर्ण और मेहनती जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करती है।
- आत्म-चिंतन: यह मानव स्वभाव की मूर्खताओं और विरोधाभासों पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे पाठक अपनी कमियों को पहचान सकें और सुधार कर सकें।
- सतहीपन और दिखावे से बचना: जॉनसन घमंड, सतहीपन और बाहरी दिखावे पर निर्भरता की निंदा करते हैं, आंतरिक गुणों और वास्तविक मूल्यों के महत्व पर जोर देते हैं।
- भाग्य पर विश्वास: कुछ निबंधों के माध्यम से, वे विपरीत परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखने और दैवीय providence पर विश्वास रखने का संदेश देते हैं।
दिलचस्प बातें
- साप्ताहिक प्रकाशन: 'द आइडलर' को एक साप्ताहिक समाचार पत्र के लिए लिखा गया था, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक निबंध पाठकों के लिए एक नई, ताजा खुराक थी।
- सहयोगी लेखक: जॉनसन ने श्रृंखला के अधिकांश निबंध लिखे, लेकिन कुछ निबंध उनके मित्रों जैसे थॉमस वार्टन और बेनेट लैंग्टन ने भी लिखे थे।
- आइडलर का व्यक्तित्व: 'द आइडलर' का व्यक्तित्व जॉनसन के लिए समाज और मानव स्वभाव का आलोचनात्मक रूप से अवलोकन करने का एक चतुर साहित्यिक साधन था। यह उन्हें अपनी टिप्पणियों को सीधे तौर पर कहने के बजाय एक विशेष दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने की अनुमति देता था।
- 18वीं सदी के समाज का दर्पण: ये निबंध 18वीं सदी के लंदन के सामाजिक जीवन, बौद्धिक चिंताओं और आम लोगों की आदतों और मूर्खताओं की एक अनूठी झलक प्रदान करते हैं।
- सरल और सुलभ शैली: जॉनसन ने अक्सर गंभीर नैतिक पाठों को भी एक संवादात्मक, हास्यपूर्ण और सुलभ शैली में प्रस्तुत किया, जिससे ये निबंध आम पाठकों के बीच लोकप्रिय हो सके।
