orlando - varjiniya vulf

सारांश

वर्जीनिया वुल्फ का 'ऑरलैंडो' एक उपन्यास है जो सदियों तक फैले ऑरलैंडो नामक एक युवा कुलीन व्यक्ति के जीवन का पता लगाता है। यह १६वीं शताब्दी के एलिज़ाबेथन इंग्लैंड में एक धनी युवक के रूप में शुरू होता है, जो प्यार, कविता और रोमांच की तलाश में रहता है। कॉन्स्टेंटिनोपल में एक राजदूत के रूप में सेवा करते हुए, ऑरलैंडो एक महान ठंड के दौरान एक दिन जागता है और खुद को एक महिला पाता है। उसका लिंग परिवर्तन उसे परेशान नहीं करता, और वह स्त्री के रूप में अपना जीवन जारी रखती है। वह १७वीं से २०वीं शताब्दी तक के सामाजिक रीति-रिवाजों और अपेक्षाओं को नेविगेट करती है, कई ऐतिहासिक शख्सियतों से मिलती है, साहित्यिक प्रयासों को जारी रखती है, और प्यार और पहचान की तलाश करती है। पुस्तक समय, लिंग, पहचान और मानवीय अनुभव की परिवर्तनशील प्रकृति पर एक गहरा ध्यान है, जो इन अवधारणाओं की कठोरता को चुनौती देती है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग १ (१६वीं शताब्दी)

यह अनुभाग ऑरलैंडो के १६वीं शताब्दी के एलिज़ाबेथन इंग्लैंड में एक १७ वर्षीय युवक के रूप में जीवन से शुरू होता है। वह एक धनी और कुलीन परिवार से ताल्लुक रखता है, जिसे अपने परिवार के बड़े घर और ज़मीनों का उत्तराधिकार मिलता है। ऑरलैंडो एक कवि बनने का सपना देखता है और अपनी कविता "ओक ट्री" पर काम करना शुरू करता है। उसे महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम का संरक्षण मिलता है, जो उसे अपना दरबारी बनाती हैं। वह शाही दरबार में जीवन का आनंद लेता है, लेकिन प्यार और रोमांच की तलाश करता है। उसे एक युवा रूसी राजकुमारी, साशा से प्यार हो जाता है, जो बर्फ पर स्केटिंग करते हुए एक जाड़े के मेले में मिली थी। साशा उसे धोखा देती है और एक अन्य व्यक्ति के साथ भाग जाती है, जिससे ऑरलैंडो का दिल टूट जाता है और वह अपने कविता के काम में खुद को डुबो लेता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
ऑरलैंडो १७ वर्षीय कुलीन युवक, सुंदर, धनी, कवि बनने की महत्वाकांक्षा, संवेदनशील, आदर्शवादी, प्रेम की तलाश में। सौंदर्य और कला की सराहना, प्रेम और साहसिक कार्यों की तलाश, अपनी पहचान और रचनात्मकता को व्यक्त करना।
महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम इंग्लैंड की शासक, शक्तिशाली, समझदार, ऑरलैंडो की संरक्षक। अपने दरबार में प्रतिभाशाली लोगों को बढ़ावा देना, अपने देश को मजबूत करना।
साशा युवा रूसी राजकुमारी, रहस्यमयी, सुंदर, चंचल, बेवफ़ा। ऑरलैंडो की कंपनी का आनंद लेना, शायद रोमांच और स्वतंत्रता की इच्छा।

अनुभाग २ (१७वीं शताब्दी)

ऑरलैंडो १७वीं शताब्दी में अपना जीवन जारी रखता है। वह अभी भी अपनी कविता पर काम कर रहा है और अपने परिवार की संपत्ति में कई प्रेमियों को रखता है। वह एक उदासी के दौर से गुजरता है और लंदन के उच्च समाज से दूर रहने का फैसला करता है। फिर, किंग चार्ल्स द्वितीय उसे कॉन्स्टेंटिनोपल में इंग्लैंड का राजदूत नियुक्त करता है। वह कई वर्षों तक वहां रहता है और तुर्की संस्कृति से बहुत प्रभावित होता है। एक महान ठंड और दंगे की रात के दौरान, ऑरलैंडो एक गहरी नींद में सो जाता है। जब वह जागता है, तो वह खुद को शारीरिक रूप से एक महिला पाता है। उसका लिंग परिवर्तन उसे परेशान नहीं करता है, और वह इसे आसानी से स्वीकार कर लेता है, अपनी पहचान के निरंतर प्रवाह के रूप में देखता है। वह तुर्की के रईस के साथ भाग जाती है, जिसने उसकी जान बचाई थी, लेकिन बाद में उसका परित्याग कर देती है।

अनुभाग ३ (१८वीं शताब्दी)

एक महिला के रूप में, ऑरलैंडो १८वीं शताब्दी के सामाजिक रीति-रिवाजों और अपेक्षाओं को नेविगेट करती है। वह समाज में एक महिला की सीमित भूमिकाओं का अनुभव करती है, जिसे अब विरासत और कानूनी अधिकारों के मुद्दों का सामना करना पड़ता है। वह अपने कविताओं को प्रकाशित करने की कोशिश करती है, लेकिन एक महिला लेखक के रूप में उपहास का सामना करती है। वह एक आर्कडचेस हैरिएट नामक एक महिला से मिलती है, जो ऑरलैंडो को मोहित करती है, लेकिन बाद में पता चलता है कि वह आर्कड्यूक हैरी नामक एक आदमी है, जो ऑरलैंडो का पीछा करता रहा है। ऑरलैंडो पुरुषों के प्रस्तावों को अस्वीकार करती है और अपने बौद्धिक और रचनात्मक जीवन पर ध्यान केंद्रित करती है। वह विभिन्न बुद्धिजीवियों और लेखकों से मिलती है, जैसे कि अलेक्जेंडर पोप, और अपनी पहचान और साहित्य के बारे में सोचती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
आर्कडचेस हैरिएट / आर्कड्यूक हैरी शुरुआत में एक आकर्षक, मर्दाना महिला के रूप में प्रकट होता है; बाद में एक पुरुष, आर्कड्यूक हैरी, जो भेस में है, के रूप में प्रकट होता है। ऑरलैंडो को मोहित करना और उसका पीछा करना, शायद उसके धन या उसकी अनोखी प्रकृति से आकर्षित।

अनुभाग ४ (१९वीं शताब्दी)

१९वीं शताब्दी में, विक्टोरियन युग की शुरुआत होती है, और ऑरलैंडो सामाजिक अपेक्षाओं और परंपराओं के भारी बोझ का अनुभव करती है। वह शादी के विचार के प्रति प्रतिरोधी बनी रहती है, लेकिन एक तूफानी रात में, वह मार्मड्यूक बोन्थ्रॉप शेल्मरडाइन नामक एक नाविक से मिलती है। वे दोनों एक-दूसरे में एक आत्मा साथी पाते हैं, जो पहचान और लिंग के बारे में अपनी सहज समझ साझा करते हैं। वे शादी कर लेते हैं, और ऑरलैंडो एक बेटे को जन्म देती है। इस अवधि के दौरान, ऑरलैंडो अपनी कविता "ओक ट्री" को फिर से देखती है और उसे लिखने के लिए एक नई प्रेरणा पाती है, अपने पिछले सभी अनुभवों और लिंगों को उसमें शामिल करती है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मार्मड्यूक बोन्थ्रॉप शेल्मरडाइन एक नाविक, साहसी, रहस्यमयी, स्त्री गुणों वाला पुरुष। ऑरलैंडो में एक आत्मा साथी खोजना, उसकी अनोखी पहचान और दृष्टिकोण से आकर्षित होना।

अनुभाग ५ (२०वीं शताब्दी)

उपन्यास २०वीं शताब्दी के "वर्तमान" में समाप्त होता है, १९२८ में, जब पुस्तक पहली बार प्रकाशित हुई थी। ऑरलैंडो अब लगभग ३६ वर्ष की है, भले ही वह सदियों से जीती आ रही हो। वह अपनी पहचान पर विचार करती है, जिसने समय, लिंग और विभिन्न सामाजिक भूमिकाओं के माध्यम से यात्रा की है। वह अपनी यात्रा को समझने और एक व्यक्ति के रूप में अपने निरंतर विकास को स्वीकार करने की कोशिश करती है। उसकी कविता "ओक ट्री" आखिरकार पूरी हो जाती है और उसे एक प्रकाशन गृह को भेज दिया जाता है। उपन्यास ऑरलैंडो के अपनी पहचान को पूरी तरह से गले लगाने के साथ समाप्त होता है, समय और स्थान की सीमाओं से परे, जबकि एक हवाई जहाज की पृष्ठभूमि के खिलाफ एक उल्लू उसके साथ उड़ता है, उसके जीवन की परिवर्तनशीलता और निरंतरता का प्रतीक है।

साहित्यिक शैली

  • जीवनी उपन्यास (Biographical Novel): एक व्यक्ति के जीवन की शैली में लिखा गया है, लेकिन कल्पनाशील और व्यंग्यात्मक तरीके से।
  • ऐतिहासिक कल्पना (Historical Fiction): विभिन्न ऐतिहासिक अवधियों और शख्सियतों को शामिल करता है।
  • पेंटास्टिक फिक्शन (Fantasy Fiction): नायक की अमरता और लिंग परिवर्तन जैसे अलौकिक तत्व।
  • आधुनिकतावादी उपन्यास (Modernist Novel): समय, पहचान और चेतना की स्ट्रीम के साथ प्रयोग करता है।
  • व्यंग्य (Satire): लिंग भूमिकाओं, सामाजिक अपेक्षाओं और जीवनी की शैली का व्यंग्य करता है।

लेखक के बारे में

वर्जीनिया वुल्फ (१८८२-१९४१) २०वीं शताब्दी की सबसे प्रभावशाली आधुनिकतावादी लेखकों में से एक थीं। वह लंदन में जन्मी थीं और ब्लूम्सबरी ग्रुप की एक प्रमुख सदस्य थीं, जो बुद्धिजीवियों और कलाकारों का एक समूह था। उनकी रचनाएँ अक्सर चेतना की स्ट्रीम, नारीवादी विषयों और मानव मनोविज्ञान की जटिलताओं का पता लगाती हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में 'मिसेज डैलवे', 'टू द लाइटहाउस', 'अ रूम ऑफ वन ओन' और 'ऑरलैंडो' शामिल हैं। वुल्फ ने अपनी निजी लड़ाई मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ी और १९४१ में उन्होंने खुदकुशी कर ली।

किताब की नैतिक शिक्षा (Morale)

'ऑरलैंडो' की कोई एक सरल नैतिक शिक्षा नहीं है, बल्कि यह पहचान, लिंग और समय की अवधारणाओं पर गहराई से विचार करती है। यह बताती है कि:

  • पहचान तरल और बहुमुखी है: ऑरलैंडो की यात्रा दिखाती है कि पहचान स्थिर नहीं होती, बल्कि अनुभवों, समय और सामाजिक भूमिकाओं के माध्यम से लगातार विकसित होती है। लिंग एक सामाजिक निर्माण है जो किसी व्यक्ति के आंतरिक सार को परिभाषित नहीं करता है।
  • समय एक व्यक्तिपरक अनुभव है: पुस्तक समय की रैखिक प्रकृति को चुनौती देती है, यह दर्शाती है कि अतीत और वर्तमान आपस में जुड़े हुए हैं और व्यक्तिगत चेतना में सह-अस्तित्व में हैं।
  • स्वयं की खोज एक निरंतर यात्रा है: ऑरलैंडो सदियों से स्वयं की तलाश करती है, यह सुझाव देती है कि आत्म-बोध एक आजीवन प्रक्रिया है, जो बाहरी वर्गीकरण से परे है।
  • कला और रचनात्मकता शाश्वत हैं: ऑरलैंडो की कविता, "ओक ट्री", उसके परिवर्तनकारी जीवन के माध्यम से एक निरंतर धागे के रूप में कार्य करती है, जो कला की स्थायी शक्ति को दर्शाता है।

किताब की दिलचस्प बातें (Curiosities)

  • प्रेरणा: 'ऑरलैंडो' वुल्फ की करीबी दोस्त और प्रेमी, विटा सैकविले-वेस्ट के जीवन से प्रेरित थी, जो एक कुलीन परिवार से ताल्लुक रखती थीं और जिनमें द्विलिंगी झुकाव थे। यह पुस्तक उनके लिए एक प्रेम पत्र के रूप में देखी जाती है।
  • समय का प्रयोग: उपन्यास चार शताब्दियों से अधिक फैला हुआ है, लेकिन ऑरलैंडो केवल ३६ साल की उम्र में समाप्त होती है, जो समय के बारे में एक चंचल और जटिल दृष्टिकोण को दर्शाता है।
  • लिंग परिवर्तन: ऑरलैंडो का मध्य-उपन्यास लिंग परिवर्तन उस समय के लिए एक क्रांतिकारी साहित्यिक उपकरण था, जो लिंग की सामाजिक रूप से निर्मित प्रकृति और व्यक्तिगत पहचान की तरलता की खोज करता था।
  • शैली का प्रयोग: वुल्फ ने खुद इसे "छद्म-जीवनी" के रूप में वर्णित किया, जो जीवनी की पारंपरिक शैली पर व्यंग्य करती है और उसे फिर से परिभाषित करती है।
  • फिल्म रूपांतरण: १९९२ में, सैली पॉटर ने उपन्यास पर आधारित एक प्रशंसित फिल्म का निर्देशन किया, जिसमें टिल्डा स्विंटन ने ऑरलैंडो की भूमिका निभाई, जो उनकी लिंग-प्रवाह वाली भूमिका के लिए प्रसिद्ध हुई।