rosmersholm - henrik ibsen

सारांश

'रोसमरहोल्म' हेनरिक इबसेन द्वारा लिखित एक मनोवैज्ञानिक नाटक है जो नॉर्वे के पश्चिमी तट पर एक प्रतिष्ठित पुरानी जागीर, रोसमरहोल्म में स्थापित है। यह नाटक भूतपूर्व पादरी जोहान्स रोसमर के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अपनी मृत पत्नी बीट की आत्महत्या के बाद एक गंभीर मानसिक और आध्यात्मिक संकट से जूझ रहा है। बीट ने एक साल पहले मिल की धारा में कूदकर अपनी जान दे दी थी। रेबेका वेस्ट, जो बीट की साथी और परिवार की दोस्त थी, अब रोसमर के साथ रहती है और उसके उदारवादी विचारों में उसका समर्थन करती है।

नाटक में रोसमर, रेबेका और उनके रूढ़िवादी बहनोई डॉ. क्रॉल के बीच विचारधाराओं का टकराव दिखाया गया है। रोसमर अपने परिवार के पारंपरिक, रूढ़िवादी अतीत से खुद को अलग करने और एक नए, अधिक प्रगतिशील भविष्य को अपनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें रेबेका उसकी मार्गदर्शक है। हालाँकि, जैसे-जैसे नाटक आगे बढ़ता है, रेबेका के अतीत और बीट की मौत में उसकी भूमिका से जुड़े गहरे रहस्य उजागर होते हैं। यह पता चलता है कि रेबेका ने जानबूझकर बीट को आत्महत्या के लिए उकसाया था ताकि वह रोसमर के साथ हो सके। अपराध बोध और नैतिक पवित्रता की भावनाएँ रोसमर और रेबेका दोनों को जकड़ लेती हैं, जिससे वे एक दुखद और अपरिहार्य अंत की ओर बढ़ जाते हैं। नाटक आदर्शवाद के क्षरण, दमित इच्छाओं और अतीत के पापों के सताए जाने की पड़ताल करता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

कथानक: नाटक की शुरुआत रोसमरहोल्म की जागीर में होती है, जहाँ जोहान्स रोसमर अपनी पत्नी बीट की मृत्यु के बाद उदास और एकांत जीवन जी रहा है। रेबेका वेस्ट उसके साथ रहती है, घर की देखभाल करती है और रोसमर की मानसिक और भावनात्मक रूप से मदद करती है। रोसमर ने अपनी पादरी की भूमिका छोड़ दी है और अब उदारवादी विचारों की ओर झुक रहा है। उसके रूढ़िवादी बहनोई डॉ. क्रॉल, जो एक हेडमास्टर भी हैं, रोसमर के नए विचारों से चिंतित हैं और उसे वापस परंपरा की ओर लाने की कोशिश करते हैं। डॉ. क्रॉल रेबेका पर संदेह करते हैं और मानते हैं कि वह रोसमर को गलत दिशा में ले जा रही है। नाटक में यह भी सामने आता है कि रोसमर, डॉ. क्रॉल और मॉर्टेंसगार्ड (एक रेडिकल संपादक) सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, और मॉर्टेंसगार्ड रोसमर के सार्वजनिक समर्थन को प्राप्त करने की कोशिश कर रहा है। बीट की आत्मा का साया पूरे घर पर छाया हुआ है, और मिसेज हेल्सेथ (गृहणी) बीट के भूत की कहानियों पर विश्वास करती है। पीटर ब्रेन्डेल, एक पुराना, असफल शिक्षक और आदर्शवादी, रोसमरहोल्म आता है, रोसमर से पैसे मांगता है और अपने भव्य लेकिन खोखले आदर्शों के बारे में बात करता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
जोहान्स रोसमर (Johannes Rosmer) भूतपूर्व पादरी, कुलीन परिवार का आखिरी सदस्य, आदर्शवादी, संकोची, नैतिकतावादी, परिवर्तन की ओर अग्रसर, लेकिन अतीत के बोझ से दबा हुआ। अपनी मृत पत्नी बीट की यादों से मुक्ति पाना, एक नया आदर्शवादी जीवन जीना, समाज को बेहतर बनाना, अपनी उदारवादी सोच को व्यक्त करना।
रेबेका वेस्ट (Rebecca West) तेज-तर्रार, बुद्धिमान, महत्वाकांक्षी, स्वतंत्र विचारों वाली, रहस्यमयी, भावनात्मक रूप से जटिल। रोसमर से प्रेम, रोसमरहोल्म में अपनी स्थिति मजबूत करना, सामाजिक मानदंडों को तोड़ना, रोसमर को उदारवादी विचारों की ओर धकेलना, अपना अतीत छुपाना।
डॉ. क्रॉल (Dr. Kroll) रोसमर का बहनोई, रूढ़िवादी हेडमास्टर, नैतिक रूप से कठोर, रोसमर के परिवार के सम्मान को महत्व देता है। रोसमर को उदारवादी विचारों से बचाना, परिवार की परंपरा और सम्मान बनाए रखना, रेबेका की नीयत पर शक करना।
उल्लिक ग्रेगोरी मॉर्टेंसगार्ड (Ullrik Gregory Mortensgaard) एक रेडिकल अख़बार का संपादक, अवसरवादी, सामाजिक सुधार का समर्थक। अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना, समाज में परिवर्तन लाना, रोसमर के समर्थन का लाभ उठाना।
पीटर ब्रेन्डेल (Peder Brendel) एक घूमता हुआ पूर्व-शिक्षक, आदर्शवादी, व्यावहारिक नहीं, अपनी असफलताओं के बावजूद दार्शनिक। वित्तीय सहायता प्राप्त करना, अपने विचारों को व्यक्त करना।
मिसेज हेल्सेथ (Mrs. Helseth) रोसमरहोल्म की गृहणी, पारंपरिक, अंधविश्वासी। घर की व्यवस्था बनाए रखना, रोसमरहोल्म की परंपराओं का पालन करना।

अनुभाग 2

कथानक: रोसमर मॉर्टेंसगार्ड के अखबार का समर्थन करने पर विचार करता है, जिससे डॉ. क्रॉल सदमे में आ जाते हैं। डॉ. क्रॉल को लगता है कि यह रोसमरहोल्म परिवार के सम्मान और प्रतिष्ठा का सीधा अपमान है। डॉ. क्रॉल रोसमर को यह कहकर चौंका देते हैं कि बीट वास्तव में पागल नहीं थी, जैसा कि पहले माना जाता था, बल्कि वह अपनी बांझपन और इस डर के कारण गंभीर रूप से पीड़ित थी कि वह रोसमर को कभी खुश नहीं कर पाएगी। डॉ. क्रॉल सुझाव देते हैं कि रेबेका ने जानबूझकर बीट के मन में यह विचार डाला था कि उसे रोसमर के रास्ते से हट जाना चाहिए ताकि वह खुशी पा सके। डॉ. क्रॉल रेबेका पर बीट को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हैं। रोसमर रेबेका का सामना करता है, और रेबेका आंशिक रूप से स्वीकार करती है कि उसने बीट को रोसमर के भले के लिए खुद को दूर करने का सुझाव दिया था। यह खुलासा रोसमर को गहरे अपराध बोध और भ्रम से भर देता है।

अनुभाग 3

कथानक: रेबेका रोसमर के सामने बीट के प्रति अपनी हेरफेर वाली कार्रवाइयों के बारे में और अधिक कबूल करती है। वह स्वीकार करती है कि रोसमर के लिए उसके प्यार और बीट को अपने रास्ते से हटाने की उसकी इच्छा ने उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया था। रोसमर यह सुनकर भयभीत हो जाता है और मानता है कि उनकी साझा "निर्दोषता" अब कलंकित हो गई है। वह रेबेका को शादी का प्रस्ताव देता है, लेकिन वह मना कर देती है, यह कहते हुए कि वह अब उतनी "पवित्र" नहीं है और उसे डर है कि "रोसमरहोल्म के जीने का तरीका" (रोसमर परिवार की जन्मजात कुलीनता और नैतिक शुद्धता) ने उसे संक्रमित कर दिया है। मॉर्टेंसगार्ड रोसमर से उसके सार्वजनिक समर्थन के लिए संपर्क करता है, लेकिन रोसमर अपने व्यक्तिगत संकट में इतना डूबा हुआ है कि वह उसकी मदद नहीं कर पाता। डॉ. क्रॉल रेबेका के अतीत को और उजागर करते हैं, जिसमें उसके पालक पिता डॉ. वेस्ट के साथ उसके संभवतः अनाचारपूर्ण संबंध का रहस्योद्घाटन भी शामिल है, जिससे उसकी नैतिक जटिलताएँ और गहरी हो जाती हैं।

अनुभाग 4

कथानक: रेबेका अपने अतीत और बीट के हेरफेर की सीमा को पूरी तरह से कबूल करती है। वह स्वीकार करती है कि उसने जानबूझकर बीट को आत्महत्या के लिए उकसाया था ताकि वह रोसमर को अपने लिए रख सके। हालाँकि, वह यह भी बताती है कि बीट की मृत्यु के बाद, वह रोसमर के प्यार को स्वीकार करने में असमर्थ थी क्योंकि उसके भीतर एक गहरा बदलाव आया था - "रोसमरहोल्म के जीने का तरीका" ने उसे शुद्ध कर दिया था, जिससे उसे अपने कार्यों की भयावहता का एहसास हुआ। रोसमर, अपराध बोध से ग्रसित और अपनी और रेबेका की नैतिक शुद्धता को बहाल करने की कोशिश में, मांग करता है कि रेबेका बीट के रास्ते का अनुसरण करते हुए मिल की धारा में कूदकर अपने प्यार और प्रतिबद्धता को साबित करे। रेबेका इस शर्त पर सहमत होती है कि रोसमर भी उसके साथ जाए, क्योंकि वह जानती है कि वह उसे अकेला छोड़कर नहीं रह सकता। वे दोनों मिलकर मिल की धारा में कूदकर अपनी जान दे देते हैं, और मिसेज हेल्सेथ उनके दुखद अंत की गवाह बनती है।

साहित्यिक शैली

  • मनोवैज्ञानिक नाटक (Psychological Drama)
  • सामाजिक यथार्थवाद (Social Realism)
  • आधुनिक त्रासदी (Modern Tragedy)

लेखक के बारे में

हेनरिक इबसेन (Henrik Ibsen) नॉर्वेजियन नाटककार थे, जिन्हें अक्सर "आधुनिक नाटक के जनक" के रूप में जाना जाता है। उनका जन्म 20 मार्च, 1828 को स्किएन, नॉर्वे में हुआ था और 23 मई, 1906 को उनकी मृत्यु हुई। उन्होंने 19वीं सदी के यूरोपीय नाटक में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया, जिसमें उन्होंने पारंपरिक रोमांटिक और ऐतिहासिक नाटकों को छोड़कर यथार्थवादी और गंभीर सामाजिक नाटकों पर ध्यान केंद्रित किया। उनके नाटक अक्सर सामाजिक मानदंडों, नैतिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे विषयों की पड़ताल करते हैं। उनके अन्य प्रसिद्ध नाटकों में 'ए डॉलस हाउस', 'हेडा गैबलर' और 'घोस्ट्स' शामिल हैं। इबसेन ने व्यक्तिगत मनोविज्ञान और आंतरिक संघर्षों को मंच पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे आधुनिक नाटक के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

नैतिक शिक्षा

'रोसमरहोल्म' की केंद्रीय नैतिक शिक्षा यह है कि अतीत के पापों और रहस्यों से कोई बच नहीं सकता। अपराध बोध, भले ही दबा दिया जाए, अंततः व्यक्ति को नष्ट कर देता है। नाटक यह भी दर्शाता है कि कैसे आदर्शवाद को प्राप्त करने का प्रयास, यदि अनैतिक साधनों द्वारा किया जाए, तो वह अपनी पवित्रता खो देता है और विनाश की ओर ले जाता है। यह व्यक्तिगत ईमानदारी और नैतिक शुद्धता के महत्व पर जोर देता है, और दिखाता है कि कैसे सत्ता और प्रभाव की खोज से नैतिक पतन हो सकता है। यह नाटक यह भी दर्शाता है कि एक व्यक्ति दूसरे को कितना गहराई से प्रभावित कर सकता है, और कैसे विचारों या आदर्शों के लिए की गई कार्रवाई अनजाने में विनाशकारी परिणाम दे सकती है।

किताब की कुछ दिलचस्प बातें

  • 'रोसमरहोल्म' को इबसेन के सबसे गहरे और सबसे मनोवैज्ञानिक नाटकों में से एक माना जाता है। इसमें उनके अक्सर आने वाले विषय - अतीत का सताया जाना और सामाजिक परिवर्तन का प्रतिरोध - विशेष रूप से प्रमुख हैं।
  • नाटक का शीर्षक 'रोसमरहोल्म' एक पुराने, प्रतिष्ठित मनोर के नाम पर रखा गया है, जो नाटक में एक केंद्रीय प्रतीक के रूप में कार्य करता है, जो परंपरा, सम्मान और एक विशिष्ट जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करता है जो पात्रों को फंसा लेता है।
  • रेबेका वेस्ट का चरित्र इबसेन के सबसे जटिल और विवादास्पद महिला पात्रों में से एक है। वह एक मजबूत, बुद्धिमान महिला है जो पुरुष प्रधान समाज में अपनी इच्छाओं को प्राप्त करने के लिए हेरफेर करती है, लेकिन अंततः अपने स्वयं के नैतिक पतन का शिकार हो जाती है।
  • इबसेन ने अपने करियर के अंतिम चरण में यह नाटक लिखा था, जब वह अपने कलात्मक चरम पर थे। इस नाटक की भाषा और प्रतीकात्मकता उनके पहले के यथार्थवादी नाटकों की तुलना में अधिक सूक्ष्म और काव्यात्मक है।
  • कई समीक्षकों ने 'रोसमरहोल्म' को इबसेन के 'ए डॉलस हाउस' और 'हेडा गैबलर' के साथ उनके सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक माना है, विशेष रूप से इसके मनोवैज्ञानिक गहराई और चरित्र विकास के लिए।
  • यह नाटक 1886 में लिखा गया था और इसका प्रीमियर 1887 में हुआ था। यह उस समय के नॉर्वे में एक रूढ़िवादी समाज में उदारवादी विचारों के उदय और उसके प्रभावों की पड़ताल करता है।