Saint Joan

सारांश

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का नाटक 'सेंट जोन' फ्रांस की एक साधारण ग्रामीण लड़की जोन ऑफ आर्क की कहानी कहता है, जो दावा करती है कि उसे संत माइकल, संत मार्गरेट और संत कैथरीन ने फ्रांस को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने और चार्ल्स VII को राजा बनाने के लिए दिव्य निर्देश दिए हैं। वह वौकौलेर्स से चिनोन तक यात्रा करती है, जहाँ वह डौफिन को मनाती है और उसे सेना का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करती है। जोन ऑरलीन्स की घेराबंदी उठाती है और चार्ल्स VII का रीम्स में राज्याभिषेक करवाती है। हालांकि, उसकी असाधारण सफलता, सीधी बात और चर्च व सामंती व्यवस्था को चुनौती देने की उसकी प्रवृत्ति उसे शक्तिशाली दुश्मनों का निशाना बनाती है। उसे पकड़ लिया जाता है, अंग्रेजों को सौंप दिया जाता है, और धर्मविरोधी व जादू-टोना के आरोप में मुकदमा चलाया जाता है। उसे अपनी बात से मुड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन अंततः वह अपने विश्वास पर अडिग रहती है और उसे जला दिया जाता है। नाटक उसके 25 साल बाद के भविष्य पर विचार करता है, जहाँ उसे अंततः एक संत के रूप में स्वीकार किया जाता है, लेकिन आधुनिक दुनिया उसकी जीवित उपस्थिति को अभी भी परेशान करने वाली पाती है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: वौकौलेर्स में

1429 में, 17 वर्षीय जोन, फ्रांस के डोम्रेमी गांव की एक साधारण किसान लड़की, वौकौलेर्स के गवर्नर रॉबर्ट डी बॉड्रिकोर्ट से मिलने आती है। वह उससे घोड़े और सैनिक मांगती है ताकि वह डोम्रेमी से चिनोन तक डौफिन चार्ल्स तक पहुँच सके। जोन का दावा है कि उसे संत माइकल, संत मार्गरेट और संत कैथरीन से दिव्य आवाजें आती हैं, जो उसे फ्रांस को अंग्रेजी शासन से मुक्त कराने और डौफिन का राज्याभिषेक कराने का निर्देश देती हैं। रॉबर्ट शुरू में उसे खारिज कर देता है, यह सोचकर कि वह एक मूर्ख है। हालांकि, जोन की दृढ़ता और उसके आत्मविश्वास से भरी भविष्यवाणी (कि फ्रांसीसी रईस की सेना एक लड़ाई हार गई है, जो बाद में सच साबित होती है) रॉबर्ट के सैनिकों और स्वयं रॉबर्ट को आश्वस्त करती है। अंततः रॉबर्ट उसे डोम्रेमी से चिनोन तक जाने की अनुमति देता है, साथ में सैनिक पॉली भी उसके साथ जाता है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
जोन (जोन ऑफ आर्क) 17 वर्षीय ग्रामीण लड़की, दृढ़, उत्साही, दिव्यदर्शी ईश्वर के आदेशों का पालन करना, फ्रांस को मुक्त करना, डौफिन को राजा बनाना, अपनी आवाजों में अटूट विश्वास
रॉबर्ट डी बॉड्रिकोर्ट वौकौलेर्स का गवर्नर, संशयवादी, व्यवहारिक अपनी सत्ता और प्रतिष्ठा बनाए रखना, जोन की अजीबोगरीब हरकतों से निपटना, अंततः उसकी दृढ़ता से प्रभावित होना
स्टीवर्ड रॉबर्ट का नौकर, थोड़ा अंधविश्वासी, आज्ञाकारी अपने मालिक की सेवा करना, जोन की विलक्षणता पर चकित होना
बर्ट्रेंड डी पॉलेंजी (पॉली) सैनिक, जॉन पर विश्वास करने वाला पहला व्यक्ति जोन के दावों में सच्चाई देखना, फ्रांस को बचाने में मदद करना

अनुभाग 2: चिनोन में

जोन चिनोन में डौफिन चार्ल्स के महल में पहुँचती है। डौफिन, अपनी कमजोरी और अनिर्णायकता के कारण, जोन से बचने के लिए खुद को एक दरबारी के रूप में भेष बदलकर भीड़ में छिपा लेता है। लेकिन जोन उसे तुरंत पहचान लेती है, जो दरबारियों को अचंभित करता है। जोन चार्ल्स को अपने दिव्य मिशन के बारे में बताती है और उसे विश्वास दिलाती है कि ईश्वर चाहता है कि वह राजा बने और फ्रांस को एकजुट करे। दरबार के आर्कबिशप, चैंबरलेन ला ट्रेमोइल और डचेस डी ला ट्रेमोइल सहित कई लोग जोन पर संदेह करते हैं और उसे एक सनकी मानते हैं। चार्ल्स खुद अपनी स्थिति और क्षमताओं पर संदेह करता है। जोन अपनी ईमानदारी, जुनून और सरल आस्था से चार्ल्स को प्रभावित करती है, और अंततः उसे सेना का नेतृत्व करने और ऑरलीन्स की घेराबंदी उठाने की अनुमति मिलती है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
चार्ल्स VII (डौफिन) फ्रांस का नाममात्र का उत्तराधिकारी, कमजोर, डरपोक, अनिर्णायक अपनी सत्ता पर संदेह, आराम और सुरक्षा की इच्छा, जोन में मुक्ति की उम्मीद देखना, खुद को राजा के रूप में स्थापित करना
आर्कबिशप ऑफ रीम्स चर्च का उच्च पदस्थ सदस्य, संशयवादी, रूढ़िवादी चर्च के अधिकार को बनाए रखना, जोन के दावों की धार्मिक वैधता का मूल्यांकन करना, किसी भी विधर्म से बचना
ला ट्रेमोइल (चैंबरलेन) चार्ल्स का शक्तिशाली दरबारी, चालाक, स्वार्थी अपनी शक्ति और प्रभाव बनाए रखना, जोन को एक खतरे के रूप में देखना, अपनी स्थिति को सुरक्षित रखना
डचेस डी ला ट्रेमोइल चैंबरलेन की पत्नी, व्यंग्यात्मक, दरबारी दरबारी साज़िशों में शामिल होना, जोन की ग्रामीण पृष्ठभूमि का मज़ाक उड़ाना

अनुभाग 3: ऑरलीन्स के पास

जोन, बास्टर्ड ऑफ ऑरलीन्स (बाद में डुनोइस के नाम से जाना जाता है) और कैप्टन ला हायर के साथ ऑरलीन्स के पास है, जो अंग्रेजों द्वारा घेरा हुआ है। डुनोइस पहले तो जोन की सैन्य रणनीतियों पर संदेह करता है, खासकर जब वह सीधे हमला करने की योजना बनाती है जबकि हवा उनके खिलाफ है। हालांकि, जोन अपनी आवाजों का दावा करती है कि हवा की दिशा बदल जाएगी, जो घेराबंदी करने वाले फ्रांसीसी सैनिकों के लिए फायदेमंद होगी, और ऐसा ही होता है। जोन सैनिकों का मनोबल बढ़ाती है और उन्हें युद्ध में प्रेरित करती है। वह अपनी नेतृत्व क्षमता और अटूट विश्वास से घेराबंदी उठा लेती है, जो एक चमत्कार माना जाता है। डुनोइस और ला हायर जोन की क्षमता को पहचानते हैं और स्वीकार करते हैं कि वह दिव्य रूप से प्रेरित है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
डुनोइस (ऑरलीन्स का नाजायज) एक अनुभवी फ्रांसीसी कमांडर, व्यावहारिक, बुद्धिमान फ्रांस के लिए युद्ध जीतना, जोन की अप्रत्याशित रणनीतियों को समझना, अंततः उसकी नेतृत्व क्षमता को स्वीकार करना
कैप्टन ला हायर एक क्रूर लेकिन वफादार फ्रांसीसी कमांडर, बहादुर जोन के आदेशों का पालन करना, युद्ध में वीरता दिखाना

अनुभाग 4: रीम्स में

ऑरलीन्स की जीत के बाद, जोन चार्ल्स VII को रीम्स में राज्याभिषेक के लिए मनाने में सफल होती है, जो फ्रांस के राजा के रूप में उसकी वैधता स्थापित करता है। राज्याभिषेक समारोह के बाद, जोन, आर्कबिशप और प्रमुख दरबारियों के बीच तनाव बढ़ता है। जोन को लगता है कि उसका मिशन पूरा हो गया है, लेकिन चार्ल्स और उसके सलाहकार जोन की बढ़ती लोकप्रियता, चर्च के पारंपरिक पदानुक्रम को दरकिनार करने की उसकी प्रवृत्ति और सामंती व्यवस्था को चुनौती देने की उसकी इच्छा से चिंतित हैं। वे जोन को घर वापस भेजने या उसे किसी तरह नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। जोन अंग्रेजों पर आगे हमला करने और पेरिस को मुक्त करने के लिए उत्सुक है, लेकिन उसके सलाहकार अब उससे सहमत नहीं हैं। वह अकेले युद्ध जारी रखने का फैसला करती है, भले ही इसका मतलब उसे अपने ही लोगों से अलग होना पड़े।

अनुभाग 5: युद्ध और कैद

जोन अपनी इच्छा के विरुद्ध लड़ना जारी रखती है, लेकिन अब उसके पास पहले जैसा संस्थागत समर्थन नहीं है। वह कॉम्पीन में बरगंडियन सैनिकों द्वारा पकड़ ली जाती है, जो अंग्रेजों के सहयोगी थे। फ्रांसीसी दरबार, जिसमें चार्ल्स भी शामिल है, जोन को बचाने के लिए कुछ नहीं करता, क्योंकि वह अब उनके लिए एक राजनीतिक बोझ बन गई है। बरगंडियन जोन को अंग्रेजों को बेच देते हैं। अंग्रेजों ने उसे चर्च के न्यायक्षेत्र में सौंप दिया, जहाँ बिशप कॉशोन के नेतृत्व में उसे धर्मविरोधी और जादू-टोना के आरोप में मुकदमा चलाया जाना है। कॉशोन जोन को बचाने की इच्छा रखता है, लेकिन चर्च के सिद्धांतों के भीतर।

अनुभाग 6: मुकदमा

जोन पर बिशप कॉशोन और पूछताछकर्ता जॉन लेमेत्रे के नेतृत्व में एक सनकी अदालत द्वारा मुकदमा चलाया जाता है। उसे कई आरोपों का सामना करना पड़ता है, जिसमें पुरुष के कपड़े पहनना (जो चर्च के कानून के खिलाफ था), ईशनिंदा करना और ईश्वर के बजाय अपनी निजी आवाजों का पालन करना शामिल है। जोन अपनी बात से दृढ़ता से खड़ी रहती है, अपने विश्वास और अपनी आवाजों के दिव्य मूल का बचाव करती है। हालांकि, लंबे समय तक कारावास, धमकी और अकेलेपन से थककर, वह अंततः अपने विश्वासों को त्यागने वाले एक स्वीकारोक्ति पर हस्ताक्षर करती है ताकि मृत्युदंड से बचा जा सके। उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है। लेकिन जब उसे फिर से पुरुष के कपड़े पहनने के लिए उकसाया जाता है (उसके महिला के कपड़े छीन लिए जाते हैं), तो वह यह घोषणा करते हुए अपनी स्वीकारोक्ति से मुकर जाती है कि उसकी आवाज़ें उसे वादा तोड़कर शैतान के सामने झुकने का आरोप लगा रही हैं। यह उसे पुनरावर्ती विधर्मी के रूप में चिह्नित करता है, और उसे जलाकर मारने की सजा सुनाई जाती है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
वार्विक (अर्ल ऑफ वार्विक) अंग्रेज कमांडर, राजनीतिक रूप से चतुर, व्यावहारिक जोन को एक राजनीतिक और सैन्य खतरे के रूप में हटाना, अंग्रेजी शासन को मजबूत करना
कॉशोन (बिशप ऑफ बेवॉइस) फ्रांसीसी बिशप, जोन के मुकदमे का नेतृत्वकर्ता, रूढ़िवादी चर्च के अधिकार को बनाए रखना, विधर्म को दबाना, जोन को चर्च के सिद्धांतों का उल्लंघन करने के लिए दंडित करना
पूछताछकर्ता (जॉन लेमेत्रे) डोमिनिकन पूछताछकर्ता, सख्त, धार्मिक रूप से कट्टर विधर्म को जड़ से खत्म करना, जोन के अपराध को साबित करना, चर्च के सिद्धांतों की रक्षा करना
ब्रदर जॉन कर्ल एक भिक्षु, जोन के प्रति कुछ सहानुभूति रखता है धार्मिक कर्तव्य का पालन करना, जोन को स्वीकारोक्ति के लिए प्रेरित करना
जल्लाद अधिकारी, अपने कर्तव्य का पालन करता है आदेशों का पालन करना
सैनिक अंग्रेज सैनिक, जोन को परेशान करने वाला अपने श्रेष्ठों के आदेशों का पालन करना, जोन का उपहास करना

अनुभाग 7: उपसंहार (एपिलॉग)

25 साल बाद, राजा चार्ल्स VII के सपने में, जोन वापस आती है। अन्य पात्र जो उसकी मृत्यु के लिए जिम्मेदार थे या इससे लाभान्वित हुए थे, वे भी प्रकट होते हैं: आर्कबिशप, वार्विक, कॉशोन, पूछताछकर्ता और एक सैनिक। चार्ल्स इस बात पर गर्व करता है कि उसने फ्रांस को एकजुट किया और अपने शासन को मजबूत किया। आर्कबिशप जोन की पवित्रता को स्वीकार करता है। वार्विक, कॉशोन और पूछताछकर्ता सभी जोन के कार्यों के निहितार्थों पर बहस करते हैं, भले ही उन्होंने उसे जला दिया हो। एक 20वीं सदी का अंग्रेज सैनिक भी प्रकट होता है, जो जोन के संत होने की घोषणा करता है। जब एक संदेश आता है कि चर्च जोन को संत घोषित करने वाला है, तो सभी उसे स्वीकार करने और उसका सम्मान करने के लिए सहमत होते हैं। हालांकि, जोन पूछती है कि क्या वे उसे वापस जीवित देखना चाहेंगे। सभी भयभीत हो जाते हैं और मना कर देते हैं, क्योंकि आधुनिक दुनिया अभी भी एक जीवित संत और उसके सीधे, दिव्य निर्देशों को संभालने के लिए तैयार नहीं है। नाटक इस विचार के साथ समाप्त होता है कि संतों को सम्मान तो मिलता है, लेकिन उन्हें जीवित स्वीकार नहीं किया जाता है।

साहित्यिक शैली:

ऐतिहासिक नाटक, त्रासदी, विचार नाटक (Problem Play)

लेखक के बारे में कुछ तथ्य (जॉर्ज बर्नार्ड शॉ):

  • जॉर्ज बर्नार्ड शॉ (1856-1950) एक आयरिश नाटककार, आलोचक, पोलिमिस्ट और राजनीतिक कार्यकर्ता थे।
  • उन्हें 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली नाटककारों में से एक माना जाता है।
  • उन्हें 1925 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • वह फेबियन सोसायटी के सह-संस्थापक थे, जो ब्रिटिश समाजवाद को बढ़ावा देने वाला एक संगठन था।
  • उनके अन्य प्रसिद्ध नाटकों में 'पायग्मेलियन' (जिस पर 'माई फेयर लेडी' आधारित है), 'मेजर बारबरा' और 'मैन एंड सुपरमैन' शामिल हैं।

नैतिकता (Moraleja):

'सेंट जोन' आधुनिक समाज और संस्थागत धर्म के विरोधाभासों को दर्शाता है, खासकर जब वे एक ऐसे व्यक्ति का सामना करते हैं जो सीधे ईश्वर के साथ संवाद करने का दावा करता है। नाटक यह नैतिकता देता है कि जो लोग अपने समय से आगे होते हैं या जो स्थापित सत्ता को चुनौती देते हैं, उन्हें अक्सर पहले तिरस्कृत और सताया जाता है, और उनकी मृत्यु के बाद ही उन्हें स्वीकार या महिमामंडित किया जाता है। यह व्यक्तिगत विश्वास बनाम संस्थागत अधिकार, नायकों की कीमत, और ऐसे समाज की अपरिपक्वता पर भी प्रकाश डालता है जो वास्तव में एक संत की उपस्थिति को सहन नहीं कर सकता।

जिज्ञासाएँ (Curiosities):

  • शॉ ने 'सेंट जोन' 1923 में लिखा था, जोन ऑफ आर्क को कैथोलिक चर्च द्वारा संत घोषित किए जाने के तीन साल बाद (1920 में)।
  • नाटक को जोन ऑफ आर्क की कहानी का एक यथार्थवादी और मनोवैज्ञानिक रूप से सटीक चित्रण माना जाता है, जिसमें शॉ ने उसे एक रहस्यमय या काल्पनिक व्यक्ति के बजाय एक विलक्षण लेकिन वास्तविक व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया है।
  • शॉ ने अपने नाटक में कई ऐतिहासिक आंकड़ों और दस्तावेजों का सावधानीपूर्वक शोध किया, जिसमें जोन के मुकदमे का प्रतिलेख भी शामिल है।
  • यह नाटक शॉ के सबसे प्रसिद्ध और समीक्षकों द्वारा प्रशंसित कार्यों में से एक है, और इसे अक्सर अंग्रेजी भाषा के नाटकों में एक मील का पत्थर माना जाता है।
  • शॉ ने नाटक के अंत में एक उपसंहार जोड़ा, जो आमतौर पर एक नाटक की संरचना में नहीं होता है, ताकि नाटक के विभिन्न पात्रों को जोन के इतिहास और विरासत पर 25 साल बाद विचार करने का मौका मिल सके। यह भविष्य के समाज में एक संत की अनुपयुक्तता पर भी प्रकाश डालता है।