sartoris - wiliyam faukner

सारांश

विलियम फॉकनर का उपन्यास 'सार्टोरिस' (जो बाद में 'फ्लैग्स इन द डस्ट' के रूप में पूर्णतः प्रकाशित हुआ) सार्टोरिस परिवार की कहानी है, जो मिसीसिपी के योक्नापटाव्फा काउंटी में रहते हैं। यह प्रथम विश्व युद्ध के बाद के दक्षिणी अमेरिका में एक कुलीन परिवार की गिरावट और उसके सदस्यों के जीवन के इर्द-गिर्द घूमता है। कहानी का केंद्र युवा बेयार्ड सार्टोरिस है, जो युद्ध से लौटता है। युद्ध ने उसे मानसिक रूप से आघात पहुँचाया है, और वह अपने भाई जॉन की मौत से पीड़ित है। इस आघात के कारण वह अत्यंत लापरवाह और आत्म-विनाशकारी व्यवहार करता है, जिसमें तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाना और खतरनाक कारनामों में लिप्त होना शामिल है।

परिवार की मुखिया, उनकी कठोर लेकिन प्यार करने वाली चाची जेनी, और उनके दादा, कर्नल बेयार्ड सार्टोरिस (बड़े वाले बेयार्ड), उसे शांत करने की कोशिश करते हैं। युवा बेयार्ड नारसिसा बेनबो से शादी करता है, लेकिन उसका अशांत स्वभाव उसे स्थिर नहीं रहने देता। उसके लापरवाह व्यवहार के कारण अंततः उसके दादा की मृत्यु हो जाती है। नारसिसा एक बेटे को जन्म देती है, जिसका नाम बेनबो रखा जाता है, जिससे सार्टोरिस नाम की अगली पीढ़ी जारी रहती है। हालांकि, युवा बेयार्ड अपने भूतकाल और अपनी अंदरूनी अशांति से भागते हुए घर छोड़ देता है और अंततः एक हवाई जहाज दुर्घटना में मर जाता है, जिससे परिवार के लिए त्रासदी का चक्र पूरा हो जाता है। यह उपन्यास दक्षिणी कुलीनता के गौरवशाली अतीत, युद्ध के आघात और एक परिवार पर परंपराओं के बोझ को दर्शाता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: युद्ध के बाद का आगमन

कहानी योक्नापटाव्फा काउंटी, मिसीसिपी में शुरू होती है, जहाँ सार्टोरिस परिवार रहता है, जो एक समय के दक्षिणी कुलीन वर्ग का प्रतीक है। युवा बेयार्ड सार्टोरिस, अपने जुड़वां भाई जॉन के साथ प्रथम विश्व युद्ध में सेवा देने के बाद लौटता है। हालांकि, जॉन युद्ध में मर चुका है, और बेयार्ड उसकी मौत के बोझ और युद्ध के आघात से बुरी तरह प्रभावित है। वह लापरवाह और आत्म-विनाशकारी व्यवहार करता है, जैसे खतरनाक गति से गाड़ी चलाना, जिससे उसके परिवार और शहर के लोग चिंतित हो जाते हैं। उसकी चाची जेनी, जो परिवार की मजबूत और व्यावहारिक मुखिया हैं, और उसके दादा, कर्नल बेयार्ड सार्टोरिस, उसे जीवन में स्थिरता खोजने के लिए प्रेरित करने की कोशिश करते हैं।

| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |

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युवा बेयार्ड सार्टोरिस (Young Bayard Sartoris) युद्ध से लौटा एक जुझारू व्यक्ति, जोखिम उठाने वाला, अपने भाई के खोने से आघातग्रस्त, जिद्दी और उदास।
कर्नल बेयार्ड सार्टोरिस (बड़े वाले बेयार्ड) परिवार के बुजुर्ग, कठोर और अनुशासित, पारंपरिक मूल्यों को महत्व देते हैं, अपने पोते के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं।
चाची जेनी (Aunt Jenny) परिवार की कुलमुखी, दृढ़, व्यावहारिक, बुद्धिमान और परंपरावादी।
नारसिसा बेनबो (Narcissa Benbow) सुंदर, शिष्ट, सौम्य और शांत स्वभाव की स्त्री। सार्टोरिस परिवार की अराजकता से अलग, एक सामान्य जीवन की स्थिरता की तलाश में है।
चाची जेनी (Aunt Jenny) सार्टोरिस परिवार की दृढ और व्यावहारिक मुखिया। उनमें दक्षिणी कुलीन वर्ग का गौरव है, लेकिन वे वर्तमान वास्तविकताओं से भी अवगत हैं।

अनुभाग 2: अशांत विवाह और बढ़ती लापरवाही

युवा बेयार्ड अपनी पुरानी लापरवाह आदतों को नहीं छोड़ पाता। वह लगातार तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाता है और मौत को चुनौती देता रहता है, जैसे अपने एक नए ड्राइवर, साइपोन को बिना बताए एक खतरनाक दौड़ के लिए राजी करना। इस बीच, वह नारसिसा बेनबो के प्रति आकर्षित होता है, जो उससे बिल्कुल विपरीत है—शांत, सभ्य और स्थिर जीवन की चाह रखने वाली। नारसिसा को बेयार्ड के अंदर की अशांति और दर्द महसूस होता है, और वह उसे बचाने की उम्मीद में उससे प्यार करने लगती है। वे शादी कर लेते हैं, लेकिन बेयार्ड का अशांत स्वभाव उनके रिश्ते में तनाव पैदा करता है। वह अभी भी जॉन की मौत से उबर नहीं पाया है और अपनी लापरवाह हरकतों से इस दर्द से भागने की कोशिश करता है।

नारसिसा, चाची जेनी और कर्नल बेयार्ड (दादा) सभी युवा बेयार्ड को बदलने की कोशिश करते हैं, लेकिन उसकी जड़ें सार्टोरिस परिवार के गौरवशाली और विनाशकारी अतीत में इतनी गहराई से जमी हुई हैं कि वह अपनी विरासत से खुद को अलग नहीं कर पाता। उसकी एक खतरनाक कार दौड़ में, उसके दादा, कर्नल बेयार्ड, जो उसे रोकने की कोशिश करते हैं, उसके साथ जाते हैं और दुर्घटना में मारे जाते हैं। यह घटना युवा बेयार्ड के लिए एक और गहरा आघात है, क्योंकि उसने अनजाने में अपने ही दादा की जान ले ली।

अनुभाग 3: नए जीवन और नियति का अंत

नारसिसा बेयार्ड के बेटे, बेनबो सार्टोरिस को जन्म देती है, जिससे परिवार के नाम की अगली पीढ़ी जारी रहती है। बेयार्ड, अपने दादा की मौत के सदमे और अपनी आंतरिक अशांति से बच निकलने के लिए, घर छोड़कर चला जाता है। वह एक हवाई जहाज उड़ाने का काम स्वीकार करता है, एक ऐसा पेशा जिसमें जोखिम और मौत लगातार साथ रहती है। यह उसके भाई जॉन की मृत्यु को प्रतिध्वनित करता है, जो खुद एक विमान दुर्घटना में मरा था। अंततः, बेयार्ड भी अपने भाई की तरह एक परीक्षण उड़ान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है और मर जाता है, जिससे सार्टोरिस परिवार के लिए दुख और त्रासदी का चक्र पूरा होता है। नारसिसा अपने बेटे के साथ अकेली रह जाती है, जिसे सार्टोरिस परिवार के गौरव और त्रासदी की विरासत को आगे बढ़ाना होगा।

| पात्र | विशेषताएँ |
| साइपोन (Sartoris) | नौजवान ड्राइवर, बेयार्ड की लापरवाही का शिकार। | बेयार्ड के आत्मघाती स्वभाव के शिकार के रूप में दर्शाया गया है। |
| बेनबो (Benbow) | बेयार्ड का बेटा, छोटा और भविष्य के लिए आशा भरा। |
| बेनबो (Benbow) | बेयार्ड के दादा का नाम। | बेयार्ड का नाम परिवार के पूर्वजों से आता है, जो सम्मान और निरंतरता का प्रतीक है। |

नैतिक शिक्षा

विलियम फॉकनर का यह उपन्यास युद्ध के आघात, पीढ़ियों के बीच के संघर्ष और दक्षिणी कुलीन वर्ग की गिरावट को गहराई से दर्शाता है। इसमें कई नैतिक शिक्षाएँ निहित हैं:

  1. अतीत का बोझ और पहचान का संकट: यह कहानी दर्शाती है कि कैसे परिवार का इतिहास और गौरवशाली अतीत वर्तमान पीढ़ी के लिए एक बोझ बन सकता है। बेयार्ड अपने पूर्वजों की विरासत, खासकर उनके युद्ध-प्रेमी और लापरवाह स्वभाव, से बंधा हुआ है। वह अपनी पहचान खोजने और अपने भाई की मृत्यु के आघात से उबरने के लिए संघर्ष करता है, जिससे वह आत्म-विनाशकारी पथ पर अग्रसर होता है।
  2. पुरुषत्व और हिंसा की विरासत: उपन्यास में पुरुषत्व की एक विकृत छवि प्रस्तुत की गई है, जहाँ बहादुरी अक्सर लापरवाही और हिंसा से जुड़ी होती है। सार्टोरिस पुरुषों की नियति अक्सर जोखिम और मौत के इर्द-गिर्द घूमती है, और यह दिखाया गया है कि कैसे यह विरासत पीढ़ियों तक चलती रहती है।
  3. युद्ध का मानसिक आघात: प्रथम विश्व युद्ध ने बेयार्ड के मानस पर गहरा प्रभाव डाला है। उसकी लापरवाह हरकतें वास्तव में उसके आंतरिक दर्द, अपराधबोध और ट्रौमा से निपटने का एक तरीका है। उपन्यास युद्ध के अदृश्य घावों और उनके लंबे समय तक चलने वाले प्रभावों को उजागर करता है।
  4. परिवर्तन का प्रतिरोध और गिरावट: सार्टोरिस परिवार दक्षिणी समाज में आ रहे परिवर्तनों के प्रति प्रतिरोधी है। वे अपने पुराने मूल्यों और गौरव को पकड़ कर रखना चाहते हैं, लेकिन यह उन्हें आधुनिक दुनिया में फलने-फूलने से रोकता है, जिससे उनकी अंतिम गिरावट होती है।
  5. जीवन और मृत्यु का चक्र: बेयार्ड की कहानी जीवन और मृत्यु के चक्रीय पैटर्न को दर्शाती है। उसके भाई की मौत, उसके दादा की मौत, और अंत में उसकी अपनी मौत – ये सब एक निरंतर चक्र का हिस्सा हैं, जो इस बात पर जोर देता है कि कैसे व्यक्ति अपनी नियति से नहीं बच सकता।

कुल मिलाकर, उपन्यास एक परिवार और एक संस्कृति पर अतीत के भारी बोझ और आघात के विनाशकारी प्रभावों की चेतावनी देता है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि हम अपनी पहचान और भविष्य को कैसे आकार देते हैं, जब हम अपने अतीत की छाया में जीते हैं।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य

  • विलियम फॉकनर (William Faulkner): विलियम फॉकनर (1897-1962) एक अमेरिकी लेखक थे, जिन्हें बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली लेखकों में से एक माना जाता है।
  • नोबेल पुरस्कार: उन्हें 1949 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • योक्नापटाव्फा काउंटी: फॉकनर अपने काल्पनिक योक्नापटाव्फा काउंटी के लिए जाने जाते हैं, जो उनके अधिकांश उपन्यासों और लघु कथाओं का सेटिंग है। यह स्थान मिसीसिपी में उनके गृह राज्य की वास्तविकताओं पर आधारित है, और इसके माध्यम से वे दक्षिणी अमेरिका के इतिहास, संस्कृति और जटिलताओं का अन्वेषण करते हैं।
  • लेखन शैली: उनकी लेखन शैली जटिल, प्रायोगिक और अक्सर गैर-रेखीय होती है, जिसमें स्ट्रीम ऑफ़ कॉन्शियसनेस (चेतना की धारा) तकनीक का भरपूर उपयोग किया जाता है। वे लंबे, घुमावदार वाक्यों और कई दृष्टिकोणों का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं।
  • प्रमुख कार्य: उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध कार्यों में 'द साउंड एंड द फ्यूरी' (The Sound and the Fury), 'एज आई ले डाइंग' (As I Lay Dying), 'लाइट इन अगस्त' (Light in August) और 'एब्शालोम, एब्शालोम!' (Absalom, Absalom!) शामिल हैं।
  • विषय-वस्तु: उनके कार्य अक्सर दक्षिणी गौरव, पतन, नस्ल, वर्ग, इतिहास और युद्ध के आघात जैसे विषयों से संबंधित होते हैं।

रोचक तथ्य

  1. शीर्षक का विकास: 'सार्टोरिस' वास्तव में विलियम फॉकनर के पहले के एक लंबे उपन्यास 'फ्लैग्स इन द डस्ट' का एक संक्षिप्त और संपादित संस्करण है। प्रकाशक ने मूल पांडुलिपि को बहुत लंबा और अव्यवस्थित माना था, जिसके बाद फॉकनर ने इसे छोटा किया और 'सार्टोरिस' नाम से प्रकाशित किया गया। बाद में 'फ्लैग्स इन द डस्ट' फॉकनर की मूल पांडुलिपि के रूप में मरणोपरांत प्रकाशित हुई।
  2. आत्मकथात्मक अंश: युवा बेयार्ड सार्टोरिस का चरित्र काफी हद तक फॉकनर के अपने भाई डीन फॉकनर के जीवन से प्रेरित था, जिसकी 1935 में एक हवाई जहाज दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। फॉकनर स्वयं एक पायलट थे और उन्हें जोखिम भरे कारनामों का शौक था, जो बेयार्ड के चरित्र में भी परिलक्षित होता है।
  3. योक्नापटाव्फा काउंटी का परिचय: यह उपन्यास विलियम फॉकनर के काल्पनिक योक्नापटाव्फा काउंटी को प्रमुखता से पेश करने वाला पहला उपन्यास था। यह उनका अपना साहित्यिक ब्रह्मांड बन गया जहाँ उनके कई अन्य प्रसिद्ध कार्य स्थापित हैं।
  4. दक्षिणी गोथिक शैली: 'सार्टोरिस' दक्षिणी गोथिक शैली की कई विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, जिसमें एक पुराने, पतित दक्षिणी परिवार, भूतकाल की प्रेतबाधा, और चरित्रों के मानसिक संघर्षों का अन्वेषण शामिल है।
  5. युद्ध का प्रभाव: 'सार्टोरिस' उन शुरुआती अमेरिकी उपन्यासों में से एक था जो प्रथम विश्व युद्ध के दिग्गजों पर पड़े मनोवैज्ञानिक आघात और उनके समाज में पुन: एकीकरण के संघर्षों को दर्शाता था, खासकर दक्षिणी संदर्भ में। यह दर्शाता है कि कैसे युद्ध के घाव शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे होते हैं।
  6. प्रकाशन कठिनाइयाँ: फॉकनर को 'सार्टोरिस' को प्रकाशित करवाने में काफी कठिनाई हुई। कई प्रकाशकों ने इसे अस्वीकार कर दिया था, और अंततः इसे हॉरेस लिवराइट ने प्रकाशित किया, लेकिन केवल तभी जब फॉकनर इसे एक तिहाई तक छोटा करने के लिए सहमत हुए।