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सारांश
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का नाटक 'द डेविल्स डिसिपल' 1777 में अमेरिकी क्रांतिकारी युद्ध के दौरान न्यू हैम्पशायर में सेट है। यह रिचर्ड डजियन की कहानी बताता है, जो खुद को "शैतान का शिष्य" कहने वाला एक समाज का बहिष्कृत और अप्रिय व्यक्ति है, जिसे उसका कट्टरपंथी धार्मिक परिवार नापसंद करता है। जब उसके चाचा पीटर डजियन की मृत्यु हो जाती है, तो वसीयत से सभी को आश्चर्य होता है कि रिचर्ड को ही उनकी संपत्ति का वारिस बनाया गया है। जल्द ही, ब्रिटिश सैनिक रिचर्ड को स्थानीय पादरी एंथोनी एंडरसन समझकर गिरफ्तार कर लेते हैं, जिसका इरादा उसे विद्रोहियों को समर्थन देने के लिए फांसी देने का है। रिचर्ड, सम्मान और विद्रोही भावना के एक अप्रत्याशित कार्य में, अपनी वास्तविक पहचान बताए बिना, गिरफ्तारी को स्वीकार कर लेता है, यह जानते हुए कि उसे फांसी दी जाएगी। जबकि पादरी एंडरसन शुरू में भाग जाता है, वह बाद में एक सैन्य नेता के रूप में लौटता है। अंत में, अमेरिकी सेना के आने और एंडरसन के हस्तक्षेप से रिचर्ड को बचा लिया जाता है। यह नाटक पारंपरिक नैतिकता बनाम सच्ची वीरता, आत्म-बलिदान और अच्छे व बुरे की प्रकृति के विषयों की पड़ताल करता है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1
कहानी: नाटक की शुरुआत 1777 में न्यू हैम्पशायर के वेबस्टरब्रिज में डजियन परिवार के घर से होती है। परिवार के मुखिया, पीटर डजियन की मृत्यु हो गई है, और उनकी अंतिम संस्कार सेवा अभी-अभी हुई है। उनकी कठोर, धार्मिक रूप से कट्टरपंथी विधवा, मिसेज डजियन, अपने छोटे बेटे क्रिस्टी के साथ घर पर हैं। स्थानीय पादरी, एंथोनी एंडरसन, और उनकी युवा, नैतिक पत्नी, जुडिथ एंडरसन, सहानुभूति व्यक्त करने के लिए आते हैं। परिवार के सबसे बड़े बेटे, रिचर्ड डजियन, जिसे "शैतान का शिष्य" कहा जाता है और परिवार द्वारा अस्वीकार कर दिया गया है, देर से आता है। उसकी उपस्थिति परिवार के बीच तनाव पैदा करती है। जब पीटर डजियन की वसीयत पढ़ी जाती है, तो सबको चौंकाते हुए, रिचर्ड को ही अधिकांश संपत्ति का वारिस घोषित किया जाता है। रिचर्ड अपनी माँ के पाखंड को चुनौती देता है और अपनी नई विरासत को स्वीकार करता है, जिससे परिवार में और कड़वाहट पैदा होती है।
| पात्र का नाम | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| मिसेज डजियन | धार्मिक कट्टरपंथी, कठोर, अपने बड़े बेटे रिचर्ड से नफरत करती है। सामाजिक और धार्मिक दिखावे पर बहुत जोर देती है। | धार्मिक कर्तव्य, सामाजिक प्रतिष्ठा बनाए रखना, अपने परिवार पर नियंत्रण। |
| क्रिस्टी डजियन | रिचर्ड का छोटा भाई, डरपोक, अपनी माँ के अधीन। उसकी अपनी कोई मजबूत इच्छाशक्ति नहीं है। | सुरक्षा, माँ का अनुमोदन, टकराव से बचना। |
| एंथनी एंडरसन | स्थानीय पादरी, व्यवहारवादी, अपने विश्वासों में सच्चा। वह सिद्धांतवादी से अधिक व्यावहारिक है, लेकिन अंततः वह सही काम करने की कोशिश करता है। | अपने समुदाय की सेवा करना, नैतिक सिद्धांतों का पालन करना, पादरी के रूप में अपनी भूमिका निभाना। |
| जुडिथ एंडरसन | पादरी की युवा पत्नी, नैतिक रूप से कठोर और उच्च सिद्धांतों वाली। शुरुआत में रिचर्ड के प्रति नैतिक रूप से तिरस्कारपूर्ण, लेकिन बाद में उसके कार्यों से प्रभावित होती है। | अपने पति के प्रति वफादारी, नैतिक सही की तलाश, पारंपरिक मूल्यों का पालन करना। |
| रिचर्ड डजियन | आत्म-घोषित "शैतान का शिष्य," समाज का बहिष्कृत, निंदक, लेकिन गहरी नैतिकता और सम्मान का एक अप्रत्याशित भाव रखता है। वह पाखंड को नापसंद करता है और अपनी शर्तों पर जीता है। | अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाए रखना, पाखंड को चुनौती देना, एक अप्रत्याशित सम्मान का कार्य। |
अनुभाग 2
कहानी: पादरी एंडरसन के घर (पार्सेनेज) में, जुडिथ रिचर्ड के साथ अकेले रहने में असहज महसूस करती है, जो उनके घर आया है। एंडरसन को मिसेज डजियन के बीमार होने की खबर मिलती है और वह उनकी देखभाल के लिए निकलता है, जुडिथ और रिचर्ड को अकेला छोड़ जाता है। रिचर्ड अपने जीवन और दर्शन के बारे में बात करके जुडिथ को असहज करता है। अचानक, ब्रिटिश सैनिक, मेजर स्विंडन के नेतृत्व में, पादरी एंडरसन को गिरफ्तार करने के लिए आते हैं। वे एंडरसन को एक विद्रोही के रूप में फांसी देना चाहते हैं। चूंकि एंडरसन ने अपनी टोपी और कोट छोड़कर घर छोड़ दिया था, ब्रिटिश सैनिक रिचर्ड को एंडरसन समझ लेते हैं। रिचर्ड, एक आश्चर्यजनक और निस्वार्थ कार्य में, अपनी वास्तविक पहचान नहीं बताता है और एंडरसन के रूप में गिरफ्तार होने देता है, यह जानते हुए कि उसे फांसी दी जाएगी। जुडिथ यह जानकर व्याकुल हो जाती है और उसे सच बताने के लिए मनाने की कोशिश करती है, लेकिन वह दृढ़ रहता है।
अनुभाग 3
कहानी: रिचर्ड को ब्रिटिश मुख्यालय ले जाया जाता है, जहाँ उसे जनरल बरगोइन और मेजर स्विंडन के सामने पेश किया जाता है। बरगोइन एक बुद्धिमान और दार्शनिक ब्रिटिश कमांडर है जो रिचर्ड के अपरंपरागत स्वभाव की सराहना करता है। बरगोइन रिचर्ड से पूछताछ करता है, लेकिन रिचर्ड एंडरसन के रूप में अपनी पहचान बनाए रखता है। जुडिथ वहाँ पहुँचती है और रिचर्ड के जीवन के लिए भीख माँगती है। अपनी निराशा में, वह बरगोइन को रिचर्ड की वास्तविक पहचान बता देती है। बरगोइन, जो शुरू में इस उलझन से amused था, अब एक उदाहरण स्थापित करने के लिए फांसी को आगे बढ़ाने का फैसला करता है, भले ही उसे रिचर्ड की बहादुरी पसंद आई हो। रिचर्ड को फांसी देने की तैयारी की जाती है। ठीक उसी क्षण, पादरी एंडरसन अमेरिकी सेना के साथ एक मिलिशिया कर्नल के रूप में पहुँचता है, रिचर्ड के लिए एक माफी सुरक्षित कर चुका होता है। एंडरसन ने रिचर्ड को बचाने के लिए हथियार उठा लिए हैं, जिससे वह एक पादरी से एक सैनिक में बदल गया है। वह घोषणा करता है कि रिचर्ड, "शैतान का शिष्य," ने वास्तव में एक "ईसाई" कार्य किया है, जबकि वह, पादरी, ने एक "लौकिक" कार्य किया है। रिचर्ड को रिहा कर दिया जाता है, और भूमिकाओं का यह उलटफेर नाटक के केंद्रीय विषय को उजागर करता है।
| पात्र का नाम | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| जनरल बरगोइन | ब्रिटिश कमांडर, बुद्धिमान, दार्शनिक, युद्ध-थका हुआ लेकिन अपने कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्ध। वह मानव स्वभाव और विडंबना को समझता है। | ब्रिटिश सेना की ओर से युद्ध जीतना, नियमों और सैन्य अनुशासन को बनाए रखना, लेकिन मानवीय समझ के साथ। |
| मेजर स्विंडन | जनरल बरगोइन का अधिकारी, कठोर, सैन्य नियमों का कड़ाई से पालन करने वाला, कम कल्पनाशील। | सैन्य कर्तव्य, नियमों का अक्षरशः पालन, अनुशासन बनाए रखना। |
साहित्यिक शैली
नाटक, व्यंग्य, विचारों की कॉमेडी, युद्ध नाटक।
लेखक के बारे में
जॉर्ज बर्नार्ड शॉ एक आयरिश नाटककार, आलोचक और राजनीतिक कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 1925 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीता था। वह विक्टोरियन युग के अंत से लेकर आधुनिकतावादी युग तक ब्रिटिश थिएटर में एक प्रमुख व्यक्ति थे। उनकी रचनाएँ अक्सर सामाजिक समस्याओं, वर्ग असमानता, नैतिक पाखंड और राजनीतिक विचारों पर व्यंग्य करती थीं। उनके प्रसिद्ध नाटकों में 'पिग्मेलियन', 'मैन एंड सुपरमैन', 'सीज़र एंड क्लियोपेट्रा' और 'सेंट जोन' शामिल हैं।
नैतिक शिक्षा
यह नाटक सामाजिक मानदंडों और बाहरी दिखावे से परे, व्यक्ति के वास्तविक चरित्र और नैतिकता की खोज पर प्रकाश डालता है। यह दर्शाता है कि सच्ची धार्मिकता और वीरता अक्सर अप्रत्याशित जगहों से आती है, और पाखंड की आलोचना करते हुए वास्तविक निस्वार्थता की प्रशंसा करता है। मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि एक "शैतान का शिष्य" भी सबसे ईसाई कार्य कर सकता है, और एक पादरी भी एक सैनिक बन सकता है। भूमिकाओं का यह उलटफेर वास्तविक गुणों को उजागर करता है।
किताब के बारे में कुछ रोचक बातें
- यह शॉ की "थ्री प्लेज फॉर प्यूरिटन्स" में से एक है, जो पारंपरिक नाटक संरचनाओं और नैतिकताओं को चुनौती देती है।
- अमेरिकी क्रांति के दौरान सेट होने के बावजूद, शॉ इसे एक ऐतिहासिक नाटक के बजाय एक नैतिक नाटक के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिसमें वह अपने विचारों को व्यक्त करते हैं।
- पात्रों का उलटफेर—रिचर्ड एक संत के रूप में कार्य करता है, और एंडरसन एक कार्रवाई करने वाले व्यक्ति के रूप में—नाटक का केंद्रीय विचार है।
- जनरल बरगोइन का चरित्र वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति, ब्रिटिश जनरल जॉन बरगोइन पर आधारित है, जिसे शॉ एक बुद्धिमान और मानवीय आकृति के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
- शॉ ने यह नाटक तब लिखा जब वह खुद को "धार्मिक" मानते थे, लेकिन पारंपरिक चर्च से अलग तरीके से।
- यह अक्सर शॉ के सबसे सुलभ और लोकप्रिय नाटकों में से एक माना जाता है, जिसमें एक्शन और हास्य का मिश्रण है।
