shrimati warren ka pesha - jorj barnard shaw

सारांश

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ का नाटक 'श्रीमती वॉरेन का पेशा' एक युवा, स्वतंत्र महिला विवी वॉरेन के बारे में है, जो कैम्ब्रिज में गणित में स्नातक करने के बाद अपनी सफल मां, श्रीमती वॉरेन से फिर से मिलती है। विवी अपनी मां को एक सामान्य, सम्मानजनक महिला मानती है, लेकिन जल्द ही उसे पता चलता है कि उसकी मां का भाग्येश्मालय वेश्यालयों के एक नेटवर्क से आता है। यह खुलासा विवी को अपनी मां के पेशे की नैतिकता, समाज की पाखंड और महिलाओं के लिए उपलब्ध सीमित विकल्पों पर सवाल उठाने के लिए मजबूर करता है, खासकर जब वे गरीबी से बचने की कोशिश कर रही हों। नाटक वेश्यावृत्ति के पीछे के सामाजिक-आर्थिक कारणों और विवी के अपनी मां और उस समाज से मोहभंग की पड़ताल करता है जिसने उसे ऐसा जीवन जीने के लिए मजबूर किया।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: अंक I

नाटक की शुरुआत विवी वॉरेन के एक ग्रामीण कॉटेज में उसके दोस्त प्रेड के साथ होती है। विवी एक युवा, अत्यधिक शिक्षित और व्यावहारिक महिला है जो कैम्ब्रिज में गणित में स्नातक करने के बाद छुट्टी पर है। वह जल्द ही अपनी मां, श्रीमती वॉरेन से मिलने वाली है, जिससे वह लंबे समय से दूर रही है। श्रीमती वॉरेन के साथ फ्रैंक गार्डनर, एक युवा और लापरवाह व्यक्ति, जो रेवरेंड सैमुअल गार्डनर का बेटा है, और सर जॉर्ज क्रॉफ्ट्स, एक वृद्ध, धनी व्यवसायी भी हैं। विवी अपनी मां के पुनर्मिलन को लेकर थोड़ी असहज है क्योंकि वे एक-दूसरे को अच्छी तरह से नहीं जानती हैं। प्रेड, एक कलात्मक और उदार व्यक्ति, विवी के व्यावहारिक स्वभाव के विपरीत है।

अनुभाग 2: अंक II

अंक II में विवी और उसकी मां के बीच तनावपूर्ण बहस होती है। श्रीमती वॉरेन खुलकर अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के बारे में बताती हैं, यह बताते हुए कि कैसे उन्होंने गरीबी से बचने के लिए वेश्यावृत्ति को एक साधन के रूप में अपनाया। वह तर्क देती है कि यह उन कुछ "सम्मानजनक" व्यवसायों में से एक था जो एक महिला को स्वतंत्र और समृद्ध बना सकता था, जो उन्हें कारखाने की नौकरी या विवाहित गुलामी जैसे विकल्पों से बेहतर लगता था। वह यह भी बताती है कि वह अपनी बेटियों के लिए एक बेहतर जीवन सुनिश्चित करना चाहती थी।

विवी शुरू में इस कबूलनामे से स्तब्ध है, लेकिन फिर अपनी मां की कहानियों के पीछे की तर्कसंगतता को समझने की कोशिश करती है। वह मानती है कि उस समय महिलाओं के लिए सम्मानजनक करियर विकल्प सीमित थे। हालांकि, वह यह भी जानती है कि उसकी मां का व्यवसाय अब केवल जीवित रहने के लिए नहीं बल्कि विलासिता और धन के लिए जारी है। फ्रैंक गार्डनर, सर जॉर्ज क्रॉफ्ट्स और रेवरेंड सैमुअल गार्डनर के साथ उनके व्यक्तिगत और वित्तीय संबंध भी सामने आते हैं, जिससे श्रीमती वॉरेन के अतीत और वर्तमान की जटिलताएँ और बढ़ जाती हैं। यह पता चलता है कि रेवरेंड सैमुअल गार्डनर का भी श्रीमती वॉरेन से एक युवा के रूप में संबंध था, और फ्रैंक उसका बेटा हो सकता है।

अनुभाग 3: अंक III

इस अंक में सर जॉर्ज क्रॉफ्ट्स विवी को शादी का प्रस्ताव देते हैं, जिससे विवी को पता चलता है कि वह श्रीमती वॉरेन के व्यवसाय में एक सक्रिय भागीदार है और अब वे बड़े पैमाने पर वेश्यालय चला रहे हैं। क्रॉफ्ट्स बेशर्मी से अपने व्यापार की नैतिकता का बचाव करते हैं, यह तर्क देते हुए कि यह केवल एक अन्य व्यवसाय है, जैसे कोई अन्य सेवा उद्योग। वह विवी को यह भी बताता है कि वह उसकी मां के व्यवसाय में भागीदार है, और वह इसे पूरी तरह से कानूनी और आर्थिक रूप से समझदार मानता है।

यह खुलासा विवी के लिए एक बड़ा झटका है। वह अपनी मां के पिछले आर्थिक तर्कों को स्वीकार कर सकती थी, लेकिन उसकी मां का निरंतर और लाभदायक सहभागिता, खासकर जब अब कोई गरीबी की मजबूरी नहीं है, विवी को अंदर तक झकझोर देती है। वह अपनी मां के फैसले की पाखंड और उसके व्यवसाय की अनैतिक प्रकृति को देखती है, जो अब उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए नहीं, बल्कि केवल धन संचय के लिए है। विवी क्रॉफ्ट्स के प्रस्ताव को अस्वीकार करती है और अपनी मां के व्यवसाय के बारे में सच्चाई से पूरी तरह से अवगत हो जाती है। वह अपने आसपास के लोगों, विशेषकर पुरुषों के पाखंड और लालच से भी मोहभंग महसूस करती है।

अनुभाग 4: अंक IV

अंतिम अंक में, विवी अपनी मां के साथ अंतिम टकराव करती है। विवी ने फैसला किया है कि वह अपनी मां के पैसों पर नहीं जी सकती और एक स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन जीना चाहती है। वह एक कार्यालय में एक क्लर्क के रूप में काम करने का फैसला करती है, जहाँ वह अपनी मेहनत से ईमानदारी से कमा सके। श्रीमती वॉरेन अपनी बेटी के इस निर्णय से निराश होती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उन्होंने विवी के लिए एक बेहतर जीवन बनाने के लिए इतना कुछ किया है, और अब विवी इसे अस्वीकार कर रही है।

उनके बीच की बहस इस सवाल पर समाप्त होती है कि क्या श्रीमती वॉरेन अपने व्यवसाय को छोड़ देंगी। श्रीमती वॉरेन दृढ़ता से इनकार करती हैं, यह तर्क देते हुए कि उन्होंने इसमें बहुत निवेश किया है और अब यह उनके लिए एक आरामदायक जीवन का स्रोत है। वह यह भी कहती हैं कि वह अपनी वित्तीय स्वतंत्रता को नहीं छोड़ सकतीं, जो उन्होंने इतने संघर्ष से हासिल की है। विवी अपनी मां के पैसे और उनके पेशे से पूरी तरह से नाता तोड़ लेती है। नाटक का अंत विवी के अपनी मां को छोड़कर अपने दम पर जीवन शुरू करने के साथ होता है, जो सामाजिक सम्मेलनों और अपनी मां की दुनिया दोनों से अपनी स्वतंत्रता को दर्शाता है। नाटक किसी आसान समाधान या खुशहाल अंत के बिना समाप्त होता है, जो सामाजिक समस्याओं की जटिलता को उजागर करता है।


साहित्यिक शैली

सामाजिक नाटक, यथार्थवादी नाटक, समस्या नाटक।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ (1856-1950) एक आयरिश नाटककार, आलोचक, पोलिमिकिस्ट और राजनीतिक कार्यकर्ता थे। उन्होंने 60 से अधिक नाटक लिखे, जिनमें 'पिग्मेलियन' (जिस पर 'माई फेयर लेडी' आधारित है), 'मैन एंड सुपरमैन', और 'सेंट जोन' शामिल हैं। शॉ अपने सामाजिक आलोचना, यथार्थवादी लेखन और तीक्ष्ण बुद्धि के लिए जाने जाते थे। उन्हें 1925 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह फैबियन सोसाइटी के एक प्रमुख सदस्य थे और समाजवाद और महिला अधिकारों जैसे विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक सुधारों के प्रबल समर्थक थे।

नैतिक शिक्षा

'श्रीमती वॉरेन का पेशा' की नैतिक शिक्षा बहुआयामी है। यह दिखाता है कि कैसे आर्थिक मजबूरियाँ महिलाओं को अनैतिक माने जाने वाले व्यवसायों में धकेल सकती हैं, और कैसे समाज की पाखंड सम्मानजनक दिखने वाली महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता के स्रोत को अनदेखा करती है। नाटक इस विचार को भी चुनौती देता है कि गरीबी को केवल व्यक्तिगत असफलता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके बजाय सामाजिक संरचनात्मक मुद्दों पर प्रकाश डालता है। यह दर्शाता है कि "सम्मानजनक" और "अनैतिक" के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है, खासकर जब अस्तित्व दांव पर हो। अंत में, यह एक महिला की अपनी स्वतंत्रता और गरिमा को बनाए रखने के लिए समाज के सम्मेलनों को धता बताने की इच्छा को उजागर करता है।

जिज्ञासाएँ

  1. प्रतिबंधित नाटक: 'श्रीमती वॉरेन का पेशा' अपने समय में अत्यंत विवादास्पद था। 1893 में लिखे जाने के बावजूद, इसे इंग्लैंड में 1902 तक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया जा सका, और संयुक्त राज्य अमेरिका में 1905 में इसके शुरुआती प्रदर्शन पर न्यूयॉर्क में "अनैतिक" होने के कारण पुलिस ने प्रतिबंध लगा दिया था।
  2. विषय वस्तु: नाटक वेश्यावृत्ति के सामाजिक-आर्थिक कारणों पर सीधे बात करता है, जो उस समय के लिए अत्यंत बोल्ड और निषिद्ध विषय था। शॉ ने यह तर्क दिया कि वेश्यावृत्ति गरीबी और महिलाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसरों की कमी का परिणाम है, न कि केवल व्यक्तिगत बुराई का।
  3. शॉ का बचाव: शॉ ने स्वयं नाटक का जोरदार बचाव किया, यह तर्क देते हुए कि यह एक समस्या नाटक था जिसका उद्देश्य समाज की बुराइयों को उजागर करना था ताकि उन्हें ठीक किया जा सके। उन्होंने इस पर लगे प्रतिबंधों को पाखंडी और कलात्मक स्वतंत्रता पर हमला माना।
  4. "कबीली" नाटक: यह नाटक शॉ के "प्लेज अनप्लेजेंट" (Plays Unpleasant) संग्रह का हिस्सा था, जिसमें ऐसे नाटक शामिल थे जो दर्शकों को असहज करते थे और सामाजिक समस्याओं को उजागर करते थे जिन्हें आसानी से हल नहीं किया जा सकता था।
  5. नारीवादी अंतर्दृष्टि: नाटक महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की तलाश और पुरुष-प्रधान समाज में उनकी सीमित भूमिकाओं पर प्रकाश डालता है, इसे एक प्रारंभिक नारीवादी पाठ बनाता है। विवी का अपनी मां के पाखंड को अस्वीकार करना और अपने लिए एक स्वतंत्र, नैतिक जीवन पथ बनाना आधुनिक नारीवादी आदर्शों से मेल खाता है।