yah waisa hi hai jaisa tum socho - luigi pirandello

सारांश

लुइगी पिरान्देल्लो का नाटक 'कोसी ए (से वी पारे)' (जैसा आपको लगे, वैसा ही है) सत्य, भ्रम और वास्तविकता की सापेक्षता की पड़ताल करता है। कहानी एक छोटे इतालवी शहर में एक नई सरकारी कर्मचारी, सिग्नर पोंज़ा और उसकी सास, सिग्नोरा फ़्रोला के आगमन के इर्द-गिर्द घूमती है। शहर के लोग, विशेषकर उत्सुक अगाज़ी परिवार, उनके रहस्यमय और विरोधाभासी व्यवहार से भ्रमित हो जाते हैं। सिग्नर पोंज़ा का दावा है कि सिग्नोरा फ़्रोला उसकी पहली पत्नी की माँ है, और उसकी वर्तमान पत्नी उसकी दूसरी पत्नी है, जबकि उसकी पहली पत्नी का निधन हो गया था। वह अपनी सास को अलग-थलग रखता है, यह कहते हुए कि वह मानसिक रूप से बीमार है और मानती है कि उसकी मृत बेटी अभी भी ज़िंदा है और उससे शादीशुदा है।

इसके विपरीत, सिग्नोरा फ़्रोला का दावा है कि सिग्नर पोंज़ा उसका दामाद है, और उसकी वर्तमान पत्नी उसकी अपनी बेटी है (जो पोंज़ा की पहली पत्नी है)। वह कहती है कि पोंज़ा को एक आघात लगा है और वह अपनी पत्नी को मरा हुआ मानता है और एक नई पत्नी होने का भ्रम पालता है; इसलिए, वह उसकी मानसिक शांति के लिए उसके भ्रम में शामिल होती है। दोनों कहानियाँ एक-दूसरे का खंडन करती हैं, लेकिन दोनों ही विश्वसनीय लगती हैं।

जैसे-जैसे शहर के लोग सच्चाई जानने के लिए हताश हो जाते हैं, वे दोनों को एक साथ लाने की कोशिश करते हैं। अंततः, रहस्यमय सिग्नोरा पोंज़ा खुद उपस्थित होती है और घोषणा करती है कि वह वही है जो वे उसे मानना चाहते हैं - सिग्नोरा फ़्रोला की बेटी और सिग्नर पोंज़ा की दूसरी पत्नी। वह कहती है, "मैं फ्रोला की बेटी हूँ और मैं पोंज़ा की दूसरी पत्नी हूँ। और अपने लिए, मैं कोई नहीं हूँ! नहीं, मैं वही हूँ जो आप मुझे बनना चाहते हैं!" इस प्रकार, नाटक इस विचार पर समाप्त होता है कि वस्तुनिष्ठ सत्य मायावी है, और वास्तविकता व्यक्तिगत धारणा पर निर्भर करती है। नाटक इस बात पर ज़ोर देता है कि पूर्ण सत्य अप्राप्य है और प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वयं का सत्य होता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

नाटक अगाज़ी के घर में शुरू होता है, जहाँ श्री अगाज़ी, उनकी पत्नी अमालिया, और अमालिया के भाई लौदीसी नए सरकारी कर्मचारी सिग्नर पोंज़ा और उनकी रहस्यमय सास सिग्नोरा फ़्रोला के बारे में उत्सुकता से चर्चा कर रहे हैं। शहर के लोग, विशेषकर अगाज़ी परिवार, इस बात से भ्रमित हैं कि पोंज़ा अपनी पत्नी और सास को दो अलग-अलग इमारतों में क्यों रखता है, और वे आपस में क्यों नहीं मिलते। उनकी जिज्ञासा तब और बढ़ जाती है जब सिग्नर पोंज़ा अगाज़ी के घर आता है।

पोंज़ा बताते हैं कि सिग्नोरा फ़्रोला उसकी पहली पत्नी की माँ है। उसकी पहली पत्नी की मौत हो गई, और उसने दूसरी शादी कर ली। हालाँकि, सिग्नोरा फ़्रोला को मानसिक आघात लगा है और वह मानती है कि उसकी बेटी (पोंज़ा की पहली पत्नी) अभी भी ज़िंदा है और पोंज़ा की पत्नी है। पोंज़ा, उसकी मानसिक शांति के लिए, उससे अलग रहता है और उसे यह भ्रम बनाए रखने देता है, जबकि उसकी असली, दूसरी पत्नी एक अलग इमारत में रहती है। वह अपनी सास की सुरक्षा के लिए उसे शहर से बाहर एक पुनर्निर्मित इमारत में रखता है और उसे अपनी वर्तमान पत्नी से मिलने से रोकता है ताकि उसके भ्रम को और न बढ़ाया जा सके। इस पर, लौदीसी, जो नाटक में दार्शनिक की भूमिका निभाता है, सत्य की सापेक्षता पर टिप्पणी करता है, यह सुझाव देते हुए कि हर व्यक्ति के लिए अपना सत्य होता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
अगाज़ी एक प्रांतीय पार्षद; प्रतिष्ठित, लेकिन गपशप और दूसरों के मामलों में दखल देने वाला। नए शहरवासियों के रहस्य को सुलझाने और वस्तुनिष्ठ सत्य की खोज करने की इच्छा।
अमालिया अगाज़ी की पत्नी; उत्सुक, गपशपी। अपने पति की तरह, सामाजिक जिज्ञासा और रहस्य को उजागर करने की इच्छा।
दीना अगाज़ी की बहन-इन-लॉ (अमालिया की बहन); छोटी, सीधी-सादी। अपने बड़ों की जिज्ञासा साझा करती है, लेकिन उतनी मुखर नहीं।
सिग्नर लौदीसी अगाज़ी का बहनोई; एक दार्शनिक और संशयवादी, जो अक्सर सत्य की सापेक्षता पर टिप्पणी करता है। सत्य और पहचान की व्यक्तिपरक प्रकृति पर चिंतन करना; पिरान्देल्लो के मुखपत्र के रूप में कार्य करता है।
सिग्नर पोंज़ा शहर में एक नई सरकारी कर्मचारी; गंभीर और रहस्यमय। अपनी सास की मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और अपनी वर्तमान पत्नी की गोपनीयता बनाए रखना।
डॉ. गेनोनी स्थानीय डॉक्टर; स्थिति को समझने की कोशिश करता है। चिकित्सा दृष्टिकोण से स्थिति का विश्लेषण करना और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना।

अनुभाग 2

अगाज़ी परिवार अभी भी सिग्नर पोंज़ा की कहानी को पचाने की कोशिश कर रहा है, जब सिग्नोरा फ़्रोला उनके घर आती है। वह पोंज़ा की कहानी का खंडन करते हुए अपना संस्करण प्रस्तुत करती है। फ़्रोला का दावा है कि पोंज़ा उसका दामाद है, और उसकी वर्तमान पत्नी उसकी अपनी बेटी है, जो पोंज़ा की पहली और एकमात्र पत्नी है। फ़्रोला बताती है कि कुछ साल पहले एक बड़े भूकंप के बाद, पोंज़ा को गहरा सदमा लगा था। इस आघात के कारण, उसने अपनी पत्नी को मृत मान लिया और एक "दूसरी" पत्नी से शादी करने का भ्रम पाल लिया। उसकी मानसिक शांति के लिए, फ़्रोला और उसकी बेटी ने इस भ्रम में शामिल होने का फैसला किया। बेटी खुद को पोंज़ा की "दूसरी पत्नी" के रूप में पेश करती है, और फ़्रोला पोंज़ा को यह विश्वास करने देती है कि उसकी बेटी मर चुकी है और वह उसकी सास है, ताकि वह पागल न हो जाए।

फ़्रोला अपनी बेटी से मिलने से क्यों बचती है, इसका कारण यह है कि पोंज़ा को लगता है कि अगर दोनों आमने-सामने आएँगे तो उसका भ्रम टूट जाएगा। वह अपनी बेटी को हर शाम एक काग़ज़ का टुकड़ा लिखती है, यह दिखाने के लिए कि वह अपनी बेटी से प्यार करती है। वह मानती है कि यह सब पोंज़ा की भलाई के लिए है, ताकि वह अपनी ज़िंदगी शांति से जी सके।

शहर के लोग अब और भी भ्रमित हैं। उनके पास अब दो पूरी तरह से विपरीत कहानियाँ हैं, दोनों ही भावनात्मक रूप से विश्वसनीय लगती हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि किस पर विश्वास करें। लौदीसी फिर से हस्तक्षेप करता है, यह बताते हुए कि कैसे सत्य व्यक्तिपरक हो सकता है और कैसे हम दूसरों के सत्य को वास्तव में कभी नहीं जान सकते। जब सिग्नर पोंज़ा फ़्रोला को घर ले जाने के लिए आता है, तो वह अपने संस्करण को दोहराता है और दोनों एक-दूसरे के "पागलपन" के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हैं, जिससे रहस्य और गहरा जाता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
सिग्नोरा फ़्रोला पोंज़ा की सास (या बेटी की माँ); सम्मानजनक और दृढ़। अपने दामाद (पोंज़ा) के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और अपनी बेटी की खुशी सुनिश्चित करना।

अनुभाग 3

शहर के लोग, पूरी तरह से हताश होकर, सच्चाई का पता लगाने के लिए सिग्नर पोंज़ा और सिग्नोरा फ़्रोला को एक साथ लाने का फैसला करते हैं। वे आशा करते हैं कि सीधे टकराव से रहस्य उजागर हो जाएगा। जब दोनों एक-दूसरे का सामना करते हैं, तो वे अपनी कहानियों पर अडिग रहते हैं। प्रत्येक दूसरे के भ्रम के लिए गहरी करुणा व्यक्त करता है, यह दावा करते हुए कि दूसरा पागल है और उसे अपने स्वयं के सत्य में रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। वे एक-दूसरे को "समझने" का प्रयास करते हैं, लेकिन वास्तव में, वे अपने-अपने विश्वासों को और पुष्ट करते हैं।

अधिकारों का सर्वोच्च व्यक्ति, प्रिफेक्ट, भी स्थिति को सुलझाने की कोशिश करता है। वह दोनों को सच्चाई बताने के लिए मजबूर करने का प्रयास करता है, लेकिन कोई फायदा नहीं होता। सिग्नर पोंज़ा जोर देकर कहता है कि उसकी सास मानसिक रूप से बीमार है, और सिग्नोरा फ़्रोला जोर देकर कहती है कि उसका दामाद भ्रम में है। सत्य मायावी बना हुआ है, और कोई भी व्यक्ति निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि कौन सच बोल रहा है।

अंततः, शहर के लोग रहस्यमय सिग्नोरा पोंज़ा को खुद सामने आने के लिए मनाते हैं। वह पर्दाफाश करती है और एक नाटकीय घोषणा करती है। वह कहती है: "मैं फ्रोला की बेटी हूँ और मैं पोंज़ा की दूसरी पत्नी हूँ। और अपने लिए, मैं कोई नहीं हूँ! नहीं, मैं वही हूँ जो आप मुझे बनना चाहते हैं!"

यह घोषणा दर्शकों और मंच पर मौजूद पात्रों दोनों को आश्चर्यचकित कर देती है। सिग्नोरा पोंज़ा की पहचान द्रव बनी हुई है, जो दर्शकों की धारणा पर निर्भर करती है। नाटक इस निष्कर्ष के साथ समाप्त होता है कि वस्तुनिष्ठ सत्य अप्राप्य है, और वास्तविकता व्यक्तिगत व्याख्याओं का एक जटिल जाल है। लौदीसी के अंतिम शब्द इस विषय को पुष्ट करते हैं, यह दर्शाते हुए कि हम दूसरों के सत्य को कभी नहीं जान सकते।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
सिग्नोरा पोंज़ा पोंज़ा की रहस्यमय पत्नी और फ़्रोला की बेटी; शांत और इस्तीफा देने वाली। अपने पति और माँ दोनों की मानसिक शांति बनाए रखना, अपनी खुद की पहचान को त्याग देना।
प्रिफेक्ट शहर का सर्वोच्च अधिकारी; तर्कसंगत, व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करता है। समुदाय में व्यवस्था बहाल करना और "सच्चाई" का पता लगाना।

साहित्यिक शैली: दार्शनिक नाटक, त्रासदी-कॉमेडी, यथार्थवाद, आधुनिकतावादी नाटक।

लेखक के बारे में कुछ तथ्य:

  • लुइगी पिरान्देल्लो (1867-1936) एक इतालवी नाटककार, उपन्यासकार और लघु-कथा लेखक थे।
  • उन्हें 1934 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, "उनके साहसी और सरल मंच लेखन के लिए और नाटक और रंगमंच की कला में उनकी फिर से जान फूंकने के लिए।"
  • पिरान्देल्लो को अक्सर उन नाटकों के लिए जाना जाता है जो सत्य, भ्रम, पहचान और वास्तविकता के विषयों की पड़ताल करते हैं। उनके पात्र अक्सर विभिन्न सामाजिक भूमिकाओं और "मुखौटों" को अपनाते हैं।
  • उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में 'सिक्स कैरेक्टर्स इन सर्च ऑफ एन ऑथर' (Six Characters in Search of an Author) और 'हेनरी IV' (Henry IV) शामिल हैं।

नैतिक शिक्षा:

  • सत्य की सापेक्षता: नाटक की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि सत्य वस्तुनिष्ठ नहीं होता बल्कि व्यक्तिपरक होता है। जो एक व्यक्ति के लिए सत्य है, वह दूसरे के लिए भिन्न हो सकता है। कोई एक, निश्चित सत्य नहीं होता जिसे हर कोई स्वीकार कर सके।
  • पहचान का भ्रम: नाटक यह भी दिखाता है कि हमारी पहचान दूसरों की धारणाओं और सामाजिक भूमिकाओं से कैसे आकार लेती है। व्यक्ति अक्सर वही बन जाता है जो दूसरे उसे देखना चाहते हैं।
  • मानवीय निर्णय की सीमाएँ: नाटक यह उजागर करता है कि हम दूसरों के जीवन में क्या हो रहा है, इसकी पूरी सच्चाई को कभी नहीं जान सकते। यह दूसरों के बारे में जल्दबाज़ी में निर्णय लेने के खतरों की चेतावनी देता है।

कुछ दिलचस्प बातें:

  • नाटक मूल रूप से 1917 में लिखा गया था।
  • पिरान्देल्लो ने अक्सर अपने कार्यों में भ्रम और वास्तविकता की केंद्रीयता का पता लगाया, और 'कोसी ए (से वी पारे)' इस विषय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • नाटक का अंत जानबूझकर अस्पष्ट है, जिससे दर्शकों को अपने निष्कर्ष निकालने पड़ते हैं, जो नाटक के केंद्रीय विषय - सत्य की व्यक्तिपरक प्रकृति - को पुष्ट करता है।
  • यह नाटक पिरान्देल्लो के "मुखौटे" के विचार को प्रदर्शित करता है, जहाँ व्यक्ति समाज में विभिन्न भूमिकाएँ निभाते हैं, जिससे उनकी सच्ची पहचान अस्पष्ट हो जाती है।