angrejee ke sabse prasiddh kaviyon ki jeevaniyaan - saimual johnson

सारांश

सैमुअल जॉनसन द्वारा लिखित 'द लाइव्स ऑफ द मोस्ट एमिनेंट इंग्लिश पोएट्स' (The Lives of the Most Eminent English Poets) (जिसे आमतौर पर 'लाइव्स ऑफ द पोएट्स' के रूप में जाना जाता है) अंग्रेजी साहित्य के इतिहास में जीवनी और साहित्यिक आलोचना का एक मील का पत्थर है। यह पुस्तक मूल रूप से सत्रहवीं और अठारहवीं शताब्दी के 52 महत्वपूर्ण अंग्रेजी कवियों के जीवन और उनके कार्यों का एक संग्रह है।

जॉनसन ने इस पुस्तक को केवल एक जीवनी के रूप में नहीं लिखा, बल्कि उन्होंने प्रत्येक कवि के जीवन, उनके स्वभाव, उनकी व्यक्तिगत कठिनाइयों और उनकी साहित्यिक शैली का गहन विश्लेषण किया है। इस पुस्तक की शुरुआत अब्राहम काउली से होती है और अंत थॉमस ग्रे पर होता है। जॉनसन का मुख्य उद्देश्य कवियों के मानवीय स्वरूप को उजागर करना था, जिसमें उनकी कमियां, उनकी ताकत और उनके युग का प्रभाव शामिल था। जॉनसन ने यह स्थापित किया कि जीवनी केवल प्रशंसा के लिए नहीं, बल्कि मानव स्वभाव को समझने और नैतिक शिक्षा देने का एक साधन होनी चाहिए।


किताब के अनुभाग

किताब की विशालता और इसकी संरचना (52 कवियों की जीवनियां) को देखते हुए, नीचे इसके सबसे महत्वपूर्ण और प्रभावशाली अनुभागों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

अनुभाग 1: अब्राहम काउली (Abraham Cowley) और आध्यात्मिक कवि

इस अनुभाग में जॉनसन ने सत्रहवीं शताब्दी के कवि अब्राहम काउली के जीवन पर चर्चा की है। जॉनसन इस अध्याय का उपयोग "आध्यात्मिक कवियों" (Metaphysical Poets) की पूरी शैली का विश्लेषण करने के लिए करते हैं। जॉनसन ने इन कवियों की अत्यधिक बौद्धिक और जटिल उपमाओं की आलोचना की, लेकिन उनके ज्ञान और अनूठे विचारों की सराहना भी की।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
अब्राहम काउली अत्यधिक विद्वान, जटिल कल्पनाओं का उपयोग करने वाले, संवेदनशील और सिद्धांतवादी। कविता में अपनी बौद्धिक श्रेष्ठता प्रदर्शित करना और नए साहित्यिक प्रयोग करना।
सैमुअल जॉनसन (लेखक) निष्पक्ष आलोचक, नैतिक विश्लेषक, भाषाविद। साहित्य में स्पष्टता और स्वाभाविकता की रक्षा करना।

अनुभाग 2: जॉन मिल्टन (John Milton)

जॉनसन ने मिल्टन के महाकाव्य 'पैराडाइज लॉस्ट' (Paradise Lost) की अभूतपूर्व प्रशंसा की है, लेकिन साथ ही मिल्टन के राजनीतिक विचारों और उनके व्यक्तिगत स्वभाव की कड़ी आलोचना की है। जॉनसन, जो एक कट्टर राजतंत्रवादी थे, मिल्टन के गणतंत्र समर्थक और विद्रोही रवैये को पसंद नहीं करते थे। फिर भी, वे मिल्टन की काव्य प्रतिभा के सामने नतमस्तक दिखाई देते हैं।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
जॉन मिल्टन अत्यधिक स्वाभिमानी, राजनीतिक रूप से विद्रोही, गंभीर, दृष्टिहीन और अद्भुत कल्पनाशीलता के धनी। 'पैराडाइज लॉस्ट' के माध्यम से मनुष्यों के सामने ईश्वर के न्याय को सही ठहराना और अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को बनाए रखना।

अनुभाग 3: जॉन ड्राइडन (John Dryden)

जॉनसन ड्राइडन को अंग्रेजी आलोचना का जनक मानते हैं। इस अनुभाग में ड्राइडन के साहित्यिक विकास, उनके नाटकों और उनकी अनुवाद कला का विश्लेषण किया गया है। जॉनसन दर्शाते हैं कि कैसे ड्राइडन ने अंग्रेजी भाषा को एक नया लचीलापन और परिष्कार दिया, हालांकि उन्हें अपनी आजीविका के लिए अक्सर समझौता करना पड़ा।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
जॉन ड्राइडन बहुमुखी प्रतिभा के धनी, गद्य और पद्य दोनों में माहिर, परिस्थितियों के अनुसार ढलने वाले। अंग्रेजी काव्य भाषा को परिष्कृत करना और साहित्यिक लेखन के माध्यम से जीविकोपार्जन करना।

अनुभाग 4: अलेक्जेंडर पोप (Alexander Pope)

यह इस पुस्तक के सबसे शानदार हिस्सों में से एक है। जॉनसन ने पोप के जीवन, उनकी शारीरिक अक्षमताओं, उनके मित्रों और उनके शत्रुओं का विवरण दिया है। जॉनसन ने ड्राइडन और पोप के बीच एक प्रसिद्ध तुलना भी की है, जहां वे ड्राइडन को अधिक प्राकृतिक और प्रतिभाशाली बताते हैं, जबकि पोप को अधिक कलात्मक, सावधान और सटीक मानते हैं।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
अलेक्जेंडर पोप शारीरिक रूप से कमजोर, अत्यधिक संवेदनशील, कलात्मक रूप से सटीक और महत्वाकांक्षी। काव्य में पूर्णता (perfection) प्राप्त करना और अपने शत्रुओं पर व्यंग्य के माध्यम से प्रहार करना।

अनुभाग 5: रिचर्ड सैवेज (Richard Savage)

रिचर्ड सैवेज का जीवन परिचय इस पुस्तक का सबसे लंबा और सबसे व्यक्तिगत अनुभाग है। सैवेज जॉनसन के मित्र थे और उन्होंने अत्यंत गरीबी और संकट में जीवन बिताया था। जॉनसन ने सैवेज के जीवन के उतार-चढ़ाव, उनकी मां द्वारा उन्हें अस्वीकार किए जाने की त्रासदी, और एक हत्या के मामले में उन्हें मिली मौत की सजा (जिससे वे बाद में बच गए) का सजीव चित्रण किया है।

पात्र विशेषताएं प्रेरणा/उद्देश्य
रिचर्ड सैवेज प्रतिभाशाली लेकिन लापरवाह, आत्मघाती प्रवृत्तियों वाला, स्वाभिमानी और अभागा। समाज में अपनी कुलीन पहचान हासिल करना और अपनी मां से मान्यता प्राप्त करना।
लेडी मैक्ल्सफील्ड क्रूर, अपने ही बेटे (सैवेज) को अस्वीकार करने वाली और उसके प्रति घृणा रखने वाली। अपने अतीत के रहस्यों को छुपाना और सैवेज को अपने जीवन से दूर रखना।

साहित्यिक विधा

  • विधा: जीवनी (Biography) / साहित्यिक आलोचना (Literary Criticism) / निबंध (Essays)
  • उप-विधा: ऐतिहासिक और नैतिक जीवनी।

लेखक के बारे में

सैमुअल जॉनसन (Samuel Johnson) (1709–1784), जिन्हें अक्सर "डॉ. जॉनसन" के रूप में जाना जाता है, अंग्रेजी साहित्य के इतिहास में सबसे प्रभावशाली आंकड़ों में से एक हैं। वे एक बहुमुखी लेखक, कवि, निबंधकार, आलोचक और शब्दकोश निर्माता (Lexicographer) थे। उन्होंने 1755 में 'ए डिक्शनरी ऑफ द इंग्लिश लैंग्वेज' (A Dictionary of the English Language) का संकलन किया, जिसने अंग्रेजी भाषा को व्यवस्थित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। जॉनसन अपनी गहरी नैतिक समझ, तीक्ष्ण बुद्धि और गद्य लेखन की अनूठी शैली के लिए जाने जाते हैं।


नैतिक शिक्षा और रोचक तथ्य

नैतिक शिक्षा (Moral of the Book)

यह पुस्तक सिखाती है कि महानतम प्रतिभा भी मानवीय कमजोरियों और नैतिक पतन से अछूती नहीं है। जॉनसन यह संदेश देते हैं कि कला और जीवन को अलग नहीं किया जा सकता; एक लेखक के नैतिक निर्णय उसके साहित्य को प्रभावित करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह पुस्तक हमें सिखाती है कि विपरीत परिस्थितियों (जैसे गरीबी, बीमारी या सामाजिक बहिष्कार) के बावजूद मनुष्य की रचनात्मकता अमर रह सकती है, बशर्ते वह दृढ़ संकल्पी हो।

रोचक तथ्य (Trivia)

  1. प्रकाशकों की मांग: यह पुस्तक मूल रूप से लंदन के पुस्तक विक्रेताओं के एक समूह के अनुरोध पर लिखी गई थी, जो कवियों के कार्यों का एक नया संस्करण प्रकाशित करना चाहते थे और उन्हें केवल संक्षिप्त प्रस्तावनाओं की आवश्यकता थी। जॉनसन ने इसे एक विस्तृत आलोचनात्मक कृति में बदल दिया।
  2. सदाबहार शब्दावली: इसी पुस्तक में जॉनसन ने "मेटाफिजिकल पोएट्स" (Metaphysical Poets) शब्द को लोकप्रिय बनाया, जो आज भी साहित्य में उपयोग किया जाता है।
  3. व्यक्तिगत संबंध: रिचर्ड सैवेज की जीवनी जॉनसन ने सैवेज की मृत्यु के तुरंत बाद (1744 में) ही लिख दी थी। बाद में उन्होंने इसे इस संग्रह में शामिल कर लिया क्योंकि यह उनके दिल के बहुत करीब थी।
  4. पूर्वाग्रह: जॉनसन पर अक्सर मिल्टन और थॉमस ग्रे के प्रति राजनीतिक और व्यक्तिगत पूर्वाग्रह रखने का आरोप लगाया जाता है, जिसके कारण तत्कालीन साहित्यिक जगत में काफी विवाद भी हुआ था।