maikromegas - volteyar

सारांश

'माइक्रोमेगास' (Micromégas) वोल्टेयर द्वारा १७५२ में लिखा गया एक दार्शनिक उपन्यास है, जिसे प्रारंभिक विज्ञान कथा (Science Fiction) भी माना जाता है। कहानी ब्रह्मांड के विशाल पैमाने और मानव जाति के अहंकार के बीच के अंतर को दर्शाती है।

कहानी का मुख्य पात्र 'माइक्रोमेगास' है, जो सीरियस (Sirius) तारे के एक ग्रह का निवासी है। वह १२०,००० फीट लंबा है। अपने वैज्ञानिक विचारों के कारण अपने ग्रह से निर्वासित होने के बाद, वह ब्रह्मांड की यात्रा पर निकलता है। अपनी यात्रा के दौरान वह शनि (Saturn) ग्रह पर पहुँचता है, जहाँ उसकी दोस्ती वहाँ के एक 'बौने' (जो ६,००० फीट लंबा है) से होती है। दोनों मिलकर ब्रह्मांड की सैर पर निकलते हैं और अंततः पृथ्वी पर पहुँचते हैं।

शुरुआत में, अपने विशाल आकार के कारण, उन्हें लगता है कि पृथ्वी निर्जीव है। लेकिन एक टूटे हुए हीरे के हार को लेंस की तरह इस्तेमाल करके, वे समुद्र में एक जहाज (फ्रांसीसी वैज्ञानिकों का दल) खोज लेते हैं। वे इन सूक्ष्म मनुष्यों से बातचीत करने का प्रयास करते हैं। वे यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि ये नन्हें जीव विज्ञान और गणित में निपुण हैं। हालाँकि, जब वे मनुष्यों के युद्धों, आपसी नफरत और धार्मिक अहंकार के बारे में सुनते हैं, तो उन्हें गहरा धक्का लगता है। अंत में, माइक्रोमेगास मनुष्यों को एक ऐसी किताब भेंट करता है जिसमें जीवन का अंतिम रहस्य लिखा है, लेकिन जब मनुष्य उसे खोलते हैं, तो उसके सारे पन्ने कोरे (खाली) मिलते हैं। यह कहानी मानव जाति को अपनी औकात और ब्रह्मांड में अपनी वास्तविक स्थिति को समझने की सीख देती है।


किताब के अनुभाग

अनुभाग १: सीरियस के निवासी की यात्रा

माइक्रोमेगास सीरियस तारे की परिक्रमा करने वाले एक विशाल ग्रह का निवासी है। वह केवल २५० वर्ष का है (जो उसके ग्रह के हिसाब से बचपन है) और उसकी लंबाई १२०,००० फीट है। वह बेहद बुद्धिमान है और उसने विज्ञान की गहरी शिक्षा प्राप्त की है। जब वह कीड़ों पर एक वैज्ञानिक शोध लिखता है, तो वहाँ का मुख्य पादरी (मुफ्ती) उसे नास्तिक घोषित कर देता है और उसे ८०० वर्षों के लिए अदालत से निर्वासित कर दिया जाता है। इस निर्वासन का उपयोग माइक्रोमेगास ब्रह्मांड के अन्य हिस्सों को देखने और अपने ज्ञान को बढ़ाने के लिए करने का निर्णय लेता है। गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश की किरणों का सहारा लेकर वह एक ग्रह से दूसरे ग्रह की यात्रा शुरू करता है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणा
माइक्रोमेगास १२०,००० फीट लंबा, अत्यधिक बुद्धिमान, २५० वर्ष पुराना, जिज्ञासु, वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाला और उदार स्वभाव का। ब्रह्मांड के विभिन्न ग्रहों की यात्रा करना, ज्ञान अर्जित करना और सत्य की खोज करना।

अनुभाग २: सीरियस और शनि के निवासियों के बीच बातचीत

अपनी यात्रा के दौरान, माइक्रोमेगास शनि ग्रह पर पहुँचता है। वहां के निवासी सीरियस की तुलना में बहुत छोटे हैं (केवल ६,००० फीट लंबे)। माइक्रोमेगास शुरुआत में उन्हें बहुत छोटा समझकर मुस्कुराता है, लेकिन जल्द ही वह शनि ग्रह की विज्ञान अकादमी के सचिव के साथ दोस्ती कर लेता है। दोनों अपनी-अपनी दुनिया, जीवनकाल और इंद्रियों के बारे में चर्चा करते हैं। शनि के निवासी के पास केवल ७२ इंद्रियाँ हैं, जबकि माइक्रोमेगास के पास १,००० इंद्रियाँ हैं। वे जीवन की नश्वरता और प्रकृति की विविधता पर गहरा दार्शनिक संवाद करते हैं।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणा
शनि का निवासी (सचिव) ६,००० फीट लंबा (माइक्रोमेगास के लिए बौना), दार्शनिक सोच वाला, थोड़ा संकीर्ण दृष्टिकोण रखने वाला लेकिन सीखने के लिए उत्सुक। अपने अस्तित्व की सीमाओं को समझना और माइक्रोमेगास के विशाल ज्ञान से परिचित होना।

अनुभाग ३: दोनों यात्रियों की यात्रा

शनि का निवासी माइक्रोमेगास के साथ ब्रह्मांड की सैर पर जाने का फैसला करता है। वे दोनों अंतरिक्ष में छलांग लगाते हैं। वे बृहस्पति (Jupiter) और उसके चंद्रमाओं से होकर गुजरते हैं। इसके बाद वे मंगल (Mars) ग्रह पर जाते हैं, जो उन्हें बहुत छोटा लगता है। अंत में, वे पृथ्वी ग्रह पर पहुँचने का निर्णय लेते हैं। वे ५ जुलाई १७३७ को पृथ्वी पर कदम रखते हैं।


अनुभाग ४: पृथ्वी पर उनका आगमन

पृथ्वी पर पहुँचकर दोनों यात्री पूरे ग्रह का चक्कर लगाते हैं। माइक्रोमेगास भूमध्य सागर को एक छोटे तालाब की तरह पार कर लेता है। वे जहाँ भी देखते हैं, उन्हें जीवन का कोई नामोनिशान नहीं मिलता क्योंकि उनके विशाल आकार के सामने पृथ्वी के पहाड़ और महासागर बहुत छोटे हैं। वे निष्कर्ष निकालते हैं कि यह ग्रह रहने योग्य नहीं है और यहाँ कोई जीव नहीं रहता। तभी, माइक्रोमेगास के हीरे के हार का एक धागा टूट जाता है और एक हीरा नीचे गिर जाता है। शनि का सचिव उस हीरे को एक सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की तरह इस्तेमाल करता है और पानी में कुछ हलचल देखता है।


अनुभाग ५: दो यात्रियों के प्रयोग और विचार

सूक्ष्मदर्शी हीरे की मदद से, वे बाल्टिक सागर के पानी में कुछ तैरता हुआ देखते हैं। वास्तव में, यह एक जहाज था जो ध्रुवीय क्षेत्र के वैज्ञानिक अभियान (मौpertuis के दल) से वापस लौट रहा था। शनि के सचिव को पहले लगता है कि यह कोई समुद्री जीव है। वे बेहद सावधानी से उस सूक्ष्म वस्तु (जहाज) को अपनी उंगली पर उठाते हैं ताकि वह उनके विशाल हाथों से कुचल न जाए।


अनुभाग ६: मनुष्यों के साथ उनकी बातचीत का प्रयास

माइक्रोमेगास अपनी उंगली के नाखून को काटकर एक भोंपू (मेगाफोन) की तरह इस्तेमाल करता है ताकि उसकी तेज आवाज इन सूक्ष्म जीवों को मार न डाले। वे जहाज के ऊपर झुकते हैं और बात करने की कोशिश करते हैं। जहाज पर सवार मानव वैज्ञानिक और दार्शनिक इस विशाल आवाज को सुनकर हैरान रह जाते हैं। दोनों विशालकाय जीव यह देखकर दंग रह जाते हैं कि ये नन्हें जीव न केवल जीवित हैं, बल्कि आपस में बात भी कर रहे हैं और बुद्धिमान भी हैं।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणा
मानव दार्शनिक/वैज्ञानिक शारीरिक रूप से नगण्य (छोटे कीड़े जैसे), लेकिन गणित, भौतिकी और दर्शन के ज्ञाता; अहंकारी और तार्किक। पृथ्वी को मापना, विज्ञान के नियमों को समझना और अपने अस्तित्व को ब्रह्मांड का केंद्र मानना।

अनुभाग ७: मनुष्यों के साथ बातचीत और अंत

यात्री मनुष्यों से कई सवाल पूछते हैं। वे यह देखकर चकित रह जाते हैं कि मनुष्य उनकी सही ऊंचाई और दूरी को गणितीय रूप से माप लेते हैं। लेकिन जैसे ही बातचीत दर्शन और राजनीति की ओर मुड़ती है, मनुष्यों की कमियाँ सामने आने लगती हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि कैसे लाखों इंसान ज़मीन के एक छोटे से टुकड़े के लिए आपस में युद्ध करते हैं और एक-दूसरे को मार डालते हैं।

इसके बाद, विभिन्न संप्रदायों के दार्शनिक (अरस्तू, देकार्त, लॉक, लीबनिज के अनुयायी) अपने-अपने सिद्धांत प्रस्तुत करते हैं। अंत में, एक धर्मशास्त्री (Theologian) दावा करता है कि यह पूरा ब्रह्मांड, तारे, ग्रह और स्वयं ये दोनों विशालकाय जीव केवल मनुष्यों की सेवा के लिए ही भगवान ने बनाए हैं। यह सुनकर दोनों दिग्गज ठहाका मारकर हंस पड़ते हैं।

माइक्रोमेगास इन तुच्छ प्राणियों के अहंकार पर तरस खाता है। विदा होने से पहले, वह उन्हें एक अद्भुत दार्शनिक पुस्तक देने का वादा करता है, जिसमें जीवन और चीजों का अंतिम उद्देश्य लिखा है। वह पुस्तक को पेरिस की विज्ञान अकादमी में ले जाने के लिए कहता है। जब अकादमी के सचिव उस पुस्तक को खोलते हैं, तो वे पाते हैं कि उसके सारे पन्ने पूरी तरह से खाली (कोरे) हैं। इसके बाद दोनों विशाल जीव अंतरिक्ष में वापस लौट जाते हैं।


अतिरिक्त जानकारी

साहित्यिक विधा (Literary Genre)

  • दार्शनिक कहानी (Philosophical Tale / Conte Philosophique): यह एक ऐसी विधा है जिसका उपयोग १८वीं शताब्दी के प्रबोधन काल (Enlightenment) के दौरान दार्शनिक विचारों को सरल और मनोरंजक तरीके से समझाने के लिए किया जाता था।
  • प्रारंभिक विज्ञान कथा (Early Science Fiction): अन्य ग्रहों के जीवों, अंतरिक्ष यात्रा और सूक्ष्मदर्शी जैसी तकनीकों के उपयोग के कारण इसे शुरुआती विज्ञान कथाओं में गिना जाता है।

लेखक के बारे में (About the Author)

  • नाम: वोल्टेयर (Voltaire) - इनका वास्तविक नाम फ्रांस्वा-मारी अclockए (François-Marie Arouet) था।
  • समय: २१ नवंबर १६९४ - ३० मई १७७८ (फ्रांस)।
  • योगदान: वे फ्रांसीसी प्रबोधन युग के सबसे महान लेखकों, इतिहासकारों और दार्शनिकों में से एक थे। वे अपनी तीखी व्यंग्य शैली, नागरिक स्वतंत्रता (भाषण और धर्म की स्वतंत्रता) के समर्थन और कैथोलिक चर्च की कट्टरता के विरोध के लिए प्रसिद्ध हैं।

नैतिक शिक्षा (Moral of the Story)

  1. अहंकार का त्याग: ब्रह्मांड अनंत और विशाल है। मनुष्य इसमें एक सूक्ष्म कण के समान है। इसलिए खुद को ब्रह्मांड का केंद्र समझना या श्रेष्ठता का अहंकार पालना मूर्खतापूर्ण है।
  2. दृष्टिकोण का महत्व (Perspective): सच सापेक्ष होता है। जो बात हमारे लिए विशाल है, वह किसी और के लिए अत्यंत सूक्ष्म हो सकती है।
  3. मानवीय मूर्खता और युद्ध: युद्ध और सीमा विवाद अत्यंत व्यर्थ हैं। मनुष्यों को नफरत छोड़कर विज्ञान और समझदारी पर ध्यान देना चाहिए।
  4. जीवन का अर्थ स्वयं खोजना: अंत में कोरी किताब यह दर्शाती है कि जीवन का पहले से लिखा हुआ कोई रहस्य नहीं है; मनुष्य को अपने कर्मों और ज्ञान से खुद अपने जीवन का अर्थ लिखना होता है।

रोचक तथ्य (Curiosities)

  1. असली वैज्ञानिकों पर व्यंग्य: कहानी में जिस वैज्ञानिक अभियान का जिक्र है, वह १७३६-१७३७ में पियरे लुई मौपेर्तुईस (Pierre Louis Maupertuis) द्वारा लैपलैंड में पृथ्वी के आकार को मापने के लिए किए गए वास्तविक अभियान पर आधारित था।
  2. सेंसरी थ्योरी: कहानी में शनि के निवासी की ७२ इंद्रियाँ और सीरियस के निवासी की १,००० इंद्रियाँ दिखाना यह दर्शाता है कि मानव अनुभव केवल हमारी ५ इंद्रियों तक ही सीमित है, जबकि ब्रह्मांड में सच के और भी कई पहलू हो सकते हैं।
  3. अस्तित्ववाद की पूर्व झलक: कहानी के अंत में मिलने वाली खाली किताब २०वीं सदी के 'अस्तित्ववाद' (Existentialism) के विचार की ओर इशारा करती है, जहाँ ब्रह्मांड में जीवन का कोई पूर्व-निर्धारित उद्देश्य नहीं होता।