amphitryon - moliyer

सारांश

मोलियर का नाटक 'एम्फीट्रियोन' एक पौराणिक कॉमेडी है जो ग्रीक पौराणिक कथाओं पर आधारित है। इसमें देवताओं के राजा बृहस्पति (ज्यूपिटर) को थेबन जनरल एम्फीट्रियोन की पत्नी, अल्कमेने से प्रेम हो जाता है। जब एम्फीट्रियोन युद्ध में होते हैं, तो बृहस्पति उनका रूप धारण कर लेते हैं ताकि अल्कमेने के साथ रात बिता सकें। अपने इस धोखे को सफल बनाने के लिए, बृहस्पति का पुत्र और संदेशवाहक बुध (मर्करी) एम्फीट्रियोन के सेवक सोसिया का रूप धारण कर लेता है, ताकि घर की रखवाली कर सके और वास्तविक सोसिया को दूर रख सके।

नाटक में वास्तविक एम्फीट्रियोन और सोसिया के लौटने पर उत्पन्न हुई भ्रमित करने वाली और हास्यास्पद घटनाओं का वर्णन किया गया है। वे अपने ही हमशक्ल देवताओं से मिलते हैं जो उन्हें अपनी पहचान पर सवाल उठाने पर मजबूर कर देते हैं। हर कोई भ्रमित हो जाता है कि असली कौन है और नकली कौन। अंततः, बृहस्पति अपने दिव्य रूप में प्रकट होते हैं, धोखे का खुलासा करते हैं, और एम्फीट्रियोन को एक देवता (हरक्यूलिस) के पिता होने का सम्मान प्रदान करते हैं, जबकि अल्कमेने को अपना दिव्य पुत्र प्राप्त होता है। नाटक पहचान, धोखे और देवताओं की शक्ति के सामने नश्वरता की लाचारी की पड़ताल करता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: एक्ट I - सोसिया की वापसी और बुध का उपद्रव

यह अनुभाग एम्फीट्रियोन के घर के बाहर रात में शुरू होता है। वास्तविक सोसिया, एम्फीट्रियोन का सेवक, युद्ध से वापस लौट रहा है। उसे अपने स्वामी की जीत की खबर सुनाने और उनके आसन्न आगमन की सूचना देने के लिए भेजा गया है। वह थोड़ा डरपोक है लेकिन अपने कर्तव्य को पूरा करने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, घर पहुंचने से पहले ही उसकी मुलाकात बुध से होती है, जिसने सोसिया का रूप धारण कर रखा है। बुध, बृहस्पति की ओर से पहरा दे रहा है, ताकि बृहस्पति और अल्कमेने के बीच रात के समय कोई बाधा न आए। बुध, सोसिया को पीटता है, उसे भ्रमित करता है, और उसे यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता है कि वह खुद (बुध) असली सोसिया है, और यह कि मानव सोसिया एक धोखेबाज है। बेचारा सोसिया अपनी ही पहचान को लेकर गहरे संकट में पड़ जाता है। वह हैरान और भयभीत होकर अंततः भाग जाता है, अपने स्वामी का संदेश देने में असमर्थ रहता है।

किरदार विशेषताएँ प्रेरणाएँ
बृहस्पति देवताओं के राजा, सर्वोच्च शक्ति। कामुक, धोखेबाज, आकर्षक, हेरफेर करने वाला। इस नाटक में एम्फीट्रियोन का रूप धारण करता है। अल्कमेने के साथ प्रेम संबंध बनाने की तीव्र इच्छा, एक दिव्य संतान (हरक्यूलिस) पैदा करना।
बुध बृहस्पति का पुत्र और देवताओं का संदेशवाहक। शरारती, अपने पिता के प्रति वफादार, मजाकिया, वास्तविक सोसिया के प्रति क्रूर। इस नाटक में सोसिया का रूप धारण करता है। बृहस्पति के धोखे में सहायता करना, वास्तविक सोसिया की कीमत पर मनोरंजन करना।
एम्फीट्रियोन थेबन जनरल, अल्कमेने का पति। बहादुर, सम्मानित, बाद में भ्रमित, ईर्ष्यालु और अंत में विस्मयकारी और भाग्यवादी। युद्ध में विजय प्राप्त कर घर लौटना, अपनी पत्नी और घर पर अपने अधिकार का पुनः दावा करना, अजीबोगरीब घटनाओं को समझना।
अल्कमेने एम्फीट्रियोन की पत्नी। पवित्र, प्रेम करने वाली, अनजाने में वफादार, भ्रमित, व्यथित। एक अच्छी पत्नी बनना, अपने पति के अजीब व्यवहार को समझना।
सोसिया एम्फीट्रियोन का सेवक। वफादार, डरपोक, सरल-दिमाग, भ्रमित, हास्यप्रद। अपने स्वामी का संदेश पहुंचाना, परेशानी से बचना, अपनी पहचान के संकट को समझना।

अनुभाग 2: एक्ट II - पति की वापसी और अलकमेने का भ्रम

यह अनुभाग सुबह शुरू होता है। बृहस्पति (जो एम्फीट्रियोन का वेश धारण किए हुए हैं) अल्कमेने के साथ होते हैं। वे प्रेमपूर्वक बातें करते हैं, और बृहस्पति युद्ध से अपनी वापसी का नाटक करते हैं। अल्कमेने उन्हें गले लगाती है और उनसे स्नेह से बात करती है, पूरी तरह से अनजान कि यह उसका असली पति नहीं है।

इसी बीच, वास्तविक एम्फीट्रियोन आता है। वह भ्रमित हो जाता है जब अल्कमेने उसका अभिवादन करती है जैसे कि वे पहले ही रात एक साथ बिता चुके हों। वह अपनी 'रात' के बारे में बातें करती है, और एम्फीट्रियोन को कुछ भी याद नहीं होता है। वह उस भव्य रात्रिभोज का भी उल्लेख करती है जिसे उन्होंने 'एक साथ' किया था। एम्फीट्रियोन के गुस्से और अल्कमेने के भ्रम के कारण एक झगड़ा होता है। एम्फीट्रियोन को लगता है कि उसकी पत्नी बेवफा है या उसे धोखा देने की कोशिश कर रही है, जबकि अल्कमेने सोचती है कि उसका पति उसे पागल समझ रहा है या खुद ही अजीब व्यवहार कर रहा है।

वास्तविक सोसिया भी एम्फीट्रियोन को बुध (जो सोसिया का वेश धारण किए हुए था) के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बताने की कोशिश करता है, लेकिन एम्फीट्रियोन उसे पागल समझकर उसकी बात को खारिज कर देता है। तभी, बृहस्पति (अभी भी एम्फीट्रियोन के वेश में) फिर से प्रकट होते हैं, जिससे और अधिक भ्रम पैदा होता है। दोनों एम्फीट्रियोन मिलते हैं, जिससे एक हास्यास्पद दृश्य बनता है जहाँ वास्तविक एम्फीट्रियोन पर धोखेबाज होने का आरोप लगाया जाता है। न्यायिक रूप से स्थिति और उलझ जाती है, और कोई भी नहीं समझ पाता कि सच क्या है।

अनुभाग 3: एक्ट III - पहचान का संकट और दिव्य हस्तक्षेप

पहचान का संकट और गहरा हो जाता है। कोई भी यह नहीं समझ पा रहा है कि दो एम्फीट्रियोन और दो सोसिया कैसे मौजूद हो सकते हैं। अदालत के अधिकारी भी यह तय करने में असमर्थ हैं कि असली एम्फीट्रियोन कौन है। वास्तविक एम्फीट्रियोन अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष करता है, लेकिन बृहस्पति (अपने छद्म रूप में) हर तर्क को बेअसर कर देते हैं और परिस्थितियाँ वास्तविक एम्फीट्रियोन के खिलाफ हो जाती हैं।

अंत में, बृहस्पति एक भव्य तरीके से अपने असली रूप में प्रकट होते हैं। वह अपने दिव्य रूप में आसमान से उतरते हैं और इस धोखे की पूरी कहानी बताते हैं। वह एम्फीट्रियोन को समझाते हैं कि उसे गुस्सा नहीं होना चाहिए, बल्कि सम्मानित महसूस करना चाहिए कि उसने अपनी पत्नी को एक देवता के साथ साझा किया है। बृहस्पति अल्कमेने को एक दिव्य पुत्र (जो हरक्यूलिस होगा) प्रदान करते हैं और एम्फीट्रियोन को भविष्य में महान गौरव और प्रसिद्धि का वादा करते हैं।

चरित्र इस असाधारण घटना के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए रह जाते हैं। एम्फीट्रियोन को अपनी पत्नी द्वारा एक देवता को जन्म देने के सांत्वना और बृहस्पति द्वारा अपनी जगह लेने के अजीब सम्मान के साथ छोड़ दिया जाता है। नाटक इस निष्कर्ष के साथ समाप्त होता है कि नश्वर देवताओं की इच्छा का विरोध नहीं कर सकते और उन्हें स्वीकार करना ही पड़ता है।


साहित्यिक शैली: कॉमेडी (कॉमेडी), प्रहसन (फ़ार्स), पौराणिक नाटक।

लेखक के बारे में कुछ जानकारी:
मोलियर (वास्तविक नाम जीन-बैप्टिस्ट पोक्विलिन) १७वीं शताब्दी के सबसे महान फ्रांसीसी नाटककार और अभिनेताओं में से एक थे। उनका जन्म १६२२ में पेरिस में हुआ था और उनका निधन १६७३ में हुआ। मोलियर फ्रांसीसी कॉमेडी के उस्ताद थे, जो अपनी रचनाओं में मानव स्वभाव की कमजोरियों, सामाजिक पाखंड और रूढ़ियों का मज़ाक उड़ाते थे। उनके प्रसिद्ध नाटकों में 'टारटफ', 'द मिसांथ्रोप', 'द इमेजिनरी इनवेलिड' और 'द बूर्जुआ जेंटलमैन' शामिल हैं। उनके कार्य आज भी दुनिया भर में मंचित होते हैं और फ्रांसीसी साहित्य में मील का पत्थर माने जाते हैं।

नैतिक शिक्षा:
'एम्फीट्रियोन' की नैतिक शिक्षा यह है कि पहचान, धारणा और वास्तविकता के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो सकती है, खासकर जब देवताओं जैसे शक्तिशाली बाहरी बल इसमें शामिल हों। यह नाटक वैवाहिक निष्ठा और सम्मान पर भी सवाल उठाता है जब एक नश्वर को दैवीय हस्तक्षेप का सामना करना पड़ता है। अंततः, यह सुझाव देता है कि कभी-कभी अस्पष्ट और अलौकिक को स्वीकार करना ही सबसे अच्छा होता है, खासकर जब कोई देवता शामिल हो, क्योंकि नश्वर उनके खिलाफ कुछ भी नहीं कर सकते।

कुछ दिलचस्प बातें:

  • यह नाटक मूल रूप से रोमन नाटककार प्लाटस के एक लैटिन नाटक 'एम्फीट्रियोन' पर आधारित है, जो स्वयं ग्रीक पौराणिक कथाओं से प्रेरित था। मोलियर ने इसमें फ्रांसीसी बुद्धि और सामाजिक टिप्पणी जोड़ी।
  • यह मोलियर के उन कुछ नाटकों में से एक है जो पद्य (एलेक्ज़ेंड्रिन) में लिखा गया है। इसे 'कॉमेडी-बैले' भी माना जाता है, हालांकि आधुनिक प्रस्तुतियों में अक्सर बैले तत्वों को छोड़ दिया जाता है।
  • इस नाटक ने फ्रांसीसी अभिव्यक्ति "अन वेरिटेबल एम्फीट्रियोन" (एक सच्चा एम्फीट्रियोन) को जन्म दिया है, जिसका अर्थ है एक उदार मेजबान। यह आयरनी है क्योंकि मूल एम्फीट्रियोन वह पति था जिसकी पत्नी को देवता ने धोखा दिया था।
  • सोसिया का अपनी पहचान खोने का संकट इस नाटक का केंद्रीय हास्य उपकरण है, जो दर्शकों को गुदगुदाता है और पहचान के दार्शनिक प्रश्न को भी उठाता है।