गुलिवर की यात्राएँ - जोनाथन स्विफ्ट
सारांश जॉनाथन स्विफ्ट द्वारा लिखित 'गुलिवर की यात्राएँ' (Gulliver's Travels) एक व्यंग्यात्मक उपन्यास है जो लेमुएल गुलिवर नामक एक सर्जन और न...
सारांश
जॉनाथन स्विफ्ट द्वारा लिखित 'गुलिवर की यात्राएँ' (Gulliver's Travels) एक व्यंग्यात्मक उपन्यास है जो लेमुएल गुलिवर नामक एक सर्जन और नाविक की चार काल्पनिक यात्राओं का वर्णन करता है। अपनी यात्राओं के दौरान, गुलिवर विभिन्न अजीबोगरीब समाजों और प्राणियों से मिलता है, जिनमें लिलिपुट के छोटे लोग, ब्रोबडिंगनाग के विशालकाय, लापुता के अमूर्त वैज्ञानिक, और हुइन्हनम्स के तर्कसंगत घोड़े व बर्बर याहू शामिल हैं। इन अनुभवों के माध्यम से, स्विफ्ट मानव स्वभाव, राजनीति, समाज और दर्शन पर तीखा व्यंग्य करते हैं। यह उपन्यास मानव जाति की मूर्खताओं, घमंड और अज्ञानता को उजागर करता है, और अंततः गुलिवर को अपने ही साथी मनुष्यों के प्रति घृणा से भर देता है। यह बाहरी परिप्रेक्ष्य से मानव समाज की आलोचना प्रस्तुत करता है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1: लिलिपुट की यात्रा
लेमुएल गुलिवर, एक जहाज का सर्जन, एक जहाज दुर्घटना में फंस जाता है और खुद को एक अज्ञात द्वीप पर पाता है। जब वह जागता है, तो पाता है कि उसे छोटे-छोटे लोगों ने बांध रखा है, जिनकी ऊंचाई केवल छह इंच है। ये लोग लिलिपुटियन कहलाते हैं। गुलिवर उन्हें अपने आकार और ताकत से प्रभावित करता है, और धीरे-धीरे उनकी भाषा सीखता है। वह उनके साथ एक मित्रवत संबंध स्थापित करता है और उनके समाज के रीति-रिवाजों और राजनीति को सीखता है।
लिलिपुटियन दो विरोधी गुटों में बंटे हुए हैं: ऊँची एड़ी वाले (ट्रामेकसन) और नीची एड़ी वाले (स्लेमेकसन), जो एक दूसरे के साथ राजनीतिक शक्ति के लिए संघर्ष करते हैं। उनका पड़ोसी देश, ब्लेफस्कु, भी उनसे एक तुच्छ कारण पर युद्ध में है – अंडे के कौन से सिरे को पहले तोड़ना चाहिए (बड़े-एंडर बनाम छोटे-एंडर)। गुलिवर, लिलिपुटियन सम्राट की मदद के लिए, ब्लेफस्कु के बेड़े को अपने नियंत्रण में ले आता है। हालाँकि, उसकी बढ़ती लोकप्रियता और ब्लेफस्कु के साथ शांति स्थापित करने की इच्छा के कारण वह दरबार में दुश्मन बना लेता है। उसे देशद्रोही घोषित कर दिया जाता है और उसे दंडित करने की योजना बनाई जाती है। गुलिवर ब्लेफस्कु भाग जाता है और अंततः एक छोड़ी हुई नाव की मदद से अपने देश वापस लौट जाता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| गुलिवर (Gulliver) | मुख्य पात्र, एक जहाज का सर्जन और बाद में कप्तान। वह उत्सुक, साहसी और विभिन्न समाजों का निरीक्षण करता है। | यात्रा करना और नई जगहों की खोज करना। |
| लिलिपुटियन (Lilliputians) | छोटे लोग (छह इंच लंबे), छोटे विचारों वाले, तुच्छ झगड़ों में लिप्त। | शक्ति बनाए रखना, पड़ोसी देशों को हराना और अपनी परंपराओं का पालन करना। |
| सम्राट लिलिपुट (Emperor of Lilliput) | लिलिपुट का अभिमानी और युद्धप्रिय शासक। | अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा बढ़ाना, और ब्लेफस्कु को हराना। |
| ब्लेफस्कुवासी (Blefuscudians) | लिलिपुट के पड़ोसी, जो लिलिपुट से "अंडे के कौन से सिरे को पहले तोड़ना चाहिए" इस बात पर युद्ध में हैं। | अपनी स्वतंत्रता बनाए रखना और लिलिपुट के वर्चस्व का विरोध करना। |
अनुभाग 2: ब्रोबडिंगनाग की यात्रा
अपनी दूसरी यात्रा में, गुलिवर को तूफान के कारण एक अज्ञात भूमि में छोड़ दिया जाता है, जहाँ के निवासी विशालकाय होते हैं। एक किसान उसे ढूंढ लेता है और उसे एक जिज्ञासा के रूप में प्रदर्शित करके पैसे कमाना शुरू कर देता है। गुलिवर को अंततः विशालकाय सम्राट और रानी को बेच दिया जाता है, जो उसे एक पालतू जानवर के रूप में रखते हैं। उसे एक विशेष घर में रखा जाता है और उसकी देखभाल एक नौ वर्षीय लड़की, ग्रुम्डालक्लिच करती है, जो उससे बहुत प्यार करती है।
गुलिवर को ब्रोबडिंगनाग में कई खतरनाक अनुभवों का सामना करना पड़ता है, जैसे कि विशाल चूहों से लड़ना, wasps द्वारा हमला किया जाना, और छोटे होने के कारण अन्य खतरों से निपटना। वह सम्राट के साथ यूरोपीय समाज और राजनीति पर चर्चा करता है। सम्राट, गुलिवर द्वारा वर्णित यूरोपीय युद्धों, भ्रष्टाचार और तुच्छता को सुनकर घृणा महसूस करता है, और मानवता को "पृथ्वी पर रेंगने वाले सबसे घृणित छोटे कीटों का झुंड" बताता है। गुलिवर, ब्रोबडिंगनाग के समाज की सादगी और तर्कसंगतता की प्रशंसा करता है। दो साल बाद, एक बाज उसे उसके पिंजरे में उठा लेता है और समुद्र में छोड़ देता है, जहाँ उसे एक जहाज द्वारा बचाया जाता है और वह घर लौटता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| ग्रुम्डालक्लिच (Glumdalclitch) | एक छोटी बच्ची, जो गुलिवर की देखभाल करती है और उसकी शिक्षिका बन जाती है। | गुलिवर की देखभाल करना और उसे एक खिलौने के रूप में प्यार करना। |
| ब्रोबडिंगनाग के राजा (King of Brobdingnag) | एक बुद्धिमान और न्यायप्रिय शासक। वह यूरोपीय समाजों की आलोचना करता है। | अपने राज्य का न्यायपूर्ण शासन करना और अपने लोगों के कल्याण को सुनिश्चित करना। |
| किसान (Farmer) | वह व्यक्ति जिसने गुलिवर को पहले खोजा और उसे एक तमाशे के रूप में प्रदर्शित करके पैसे कमाए। | वित्तीय लाभ। |
अनुभाग 3: लापुता, बाल्निबारबी, लुग्नग, ग्लुबडूबड्रीब और जापान की यात्रा
गुलिवर की तीसरी यात्रा उसे लापुता नामक एक उड़ते हुए द्वीप पर ले जाती है, जो अमूर्त विचारकों और वैज्ञानिकों द्वारा बसा हुआ है। लापुतियन संगीत, गणित और ज्योतिष में अत्यधिक व्यस्त रहते हैं, लेकिन व्यावहारिक जीवन के प्रति उदासीन होते हैं। वे अपने नीचे के राज्यों पर शासन करने के लिए अपने द्वीप को ऊपर या नीचे करके उन्हें दंडित करते हैं।
गुलिवर लापुता छोड़कर बाल्निबारबी जाता है, जहाँ वह लैगाडो की महान अकादमी का दौरा करता है। यहाँ के वैज्ञानिक अव्यावहारिक और निरर्थक प्रयोगों में लगे हुए हैं, जैसे कि खीरे से सूरज की रोशनी निकालना या मानव मल को उसके मूल भोजन में बदलना। ये प्रयोग देश को बर्बादी की ओर ले जा रहे हैं, जबकि इसका पड़ोसी बाल्निबारबी का शहर सादगी और व्यावहारिकता के कारण समृद्ध है।
फिर गुलिवर ग्लुबडूबड्रीब की यात्रा करता है, जो जादूगरों का एक द्वीप है। यहाँ के गवर्नर के पास मृत लोगों को बुलाने की शक्ति है। गुलिवर सिकंदर महान, होमर और अन्य ऐतिहासिक शख्सियतों से बात करता है, और इतिहास की सच्चाई के बारे में निराशाजनक निष्कर्ष निकालता है।
इसके बाद वह लुग्नग जाता है, जहाँ वह स्टार्लब्रग्स नामक अमर लोगों से मिलता है। शुरू में गुलिवर उनकी अमरता से प्रभावित होता है, लेकिन बाद में पाता है कि स्टार्लब्रग्स को अमर जीवन एक अभिशाप लगता है क्योंकि वे बूढ़े और बीमार रहते हुए भी कभी मरते नहीं हैं, जिससे वे लगातार दुख में रहते हैं। इस यात्रा के बाद, गुलिवर जापान के रास्ते घर लौटता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| लापुतियन (Laputians) | लापुता के निवासी, जो विज्ञान, गणित और संगीत में अत्यधिक व्यस्त रहते हैं, लेकिन व्यावहारिक जीवन के प्रति उदासीन होते हैं। | अमूर्त ज्ञान का पीछा करना और नए आविष्कार करना, भले ही वे अव्यावहारिक हों। |
| लापुता के राजा (King of Laputa) | लापुता का शासक, जो अपनी प्रजा की तरह ही अमूर्त विचारों में खोया रहता है। | अपने लोगों पर नियंत्रण बनाए रखना और अपनी वैज्ञानिक गतिविधियों में लीन रहना। |
| स्टारलब्रग्स (Struldbrugs) | लुग्नग के अजर-अमर लोग, जो शाश्वत जीवन के अभिशाप के कारण बूढ़े और दुखी हो जाते हैं। | बस अस्तित्व में रहना है, लेकिन वे अमरता से दुखी हैं। |
| ग्लुबडूबड्रीब के गवर्नर (Governor of Glubbdubdrib) | एक जादूगर जो गुलिवर को मृत ऐतिहासिक हस्तियों को बुलाने की अनुमति देता है। | अपने जादू का प्रदर्शन करना और ज्ञान प्राप्त करना है। |
अनुभाग 4: हुइन्हनम्स के देश की यात्रा
अपनी चौथी और अंतिम यात्रा में, गुलिवर एक ऐसे द्वीप पर पहुँचता है जहाँ तर्कसंगत, बुद्धिमान घोड़े, जिन्हें हुइन्हनम्स कहा जाता है, शासन करते हैं। इस भूमि पर मनुष्य जैसे बर्बर, घृणित प्राणी भी रहते हैं, जिन्हें याहू कहा जाता है। याहू वासना, लालच और हिंसा से प्रेरित होते हैं, और वे हुइन्हनम्स के नियंत्रण में रहते हैं।
गुलिवर हुइन्हनम्स की सादगी, ईमानदारी और तर्कसंगतता से बहुत प्रभावित होता है। वह उनके समाज में रहना सीखता है और धीरे-धीरे अपने ही मानव समाज से घृणा करने लगता है, क्योंकि उसे लगता है कि मनुष्य याहू की तरह ही भ्रष्ट और तर्कहीन हैं। वह अपने हुइन्हनम्स गुरु से मानवता के दोषों, जैसे युद्ध, कानून, बीमारी और फैशन के बारे में चर्चा करता है।
हालाँकि, हुइन्हनम्स की सभा उसे याहू के साथ रहने की अनुमति नहीं देती है, क्योंकि वे उसे "थोड़ा सभ्य याहू" मानते हैं और उसे अपने देश से निष्कासित कर देते हैं। गुलिवर एक छोटी नाव बनाता है और समुद्र में निकल पड़ता है, जहाँ उसे एक पुर्तगाली जहाज द्वारा बचाया जाता है। घर लौटने पर, वह अपने परिवार और साथी मनुष्यों से इतनी घृणा करता है कि वह उनसे बात करने से भी कतराता है। वह घोड़ों के साथ समय बिताना पसंद करता है और मानवता से अपनी निराशा व्यक्त करता है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| हुइन्हनम्स (Houyhnhnms) | तर्कसंगत, बुद्धिमान घोड़े, जो सच्चाई, ईमानदारी और सादगी को महत्व देते हैं। | तर्कसंगत जीवन जीना, शांति बनाए रखना और याहू के बर्बर व्यवहार को नियंत्रित करना। |
| याहू (Yahoos) | मनुष्य जैसे बर्बर, घृणित प्राणी, जो वासना, लालच और हिंसा से प्रेरित होते हैं। | पशुवत इच्छाओं को पूरा करना और संघर्ष करना। |
| गुलिवर के हुइन्हनम्स गुरु (Gulliver's Houyhnhnm Master) | एक बुद्धिमान हुइन्हनम्स जो गुलिवर को अपने समाज के बारे में सिखाता है और उसकी तुलना याहू से करता है। | गुलिवर को शिक्षित करना और मानवता के दोषों को समझना। |
साहित्यिक शैली: व्यंग्य, साहसिक उपन्यास, कल्पना, सामाजिक टिप्पणी, यात्रा साहित्य।
लेखक के बारे में कुछ तथ्य:
- नाम: जोनाथन स्विफ्ट (Jonathan Swift)
- जन्म: 30 नवंबर, 1667, डबलिन, आयरलैंड।
- मृत्यु: 19 अक्टूबर, 1745, डबलिन, आयरलैंड।
- पेशे: एंग्लिकन पादरी, निबंधकार, राजनीतिक पर्चे लिखने वाले और कवि।
- अन्य प्रमुख कार्य: 'ए टेल ऑफ़ ए टब' (A Tale of a Tub) और 'ए मॉडस्ट प्रपोजल' (A Modest Proposal)।
- स्विफ्ट को अंग्रेजी साहित्य के सबसे महान व्यंग्यकारों में से एक माना जाता है। उन्होंने मानव स्वभाव, राजनीति और समाज की आलोचना करने के लिए अक्सर विडंबना और अतिशयोक्ति का इस्तेमाल किया।
नैतिक शिक्षा:
- मानव स्वभाव की आलोचना: यह पुस्तक मानव जाति की मूर्खताओं, घमंड, लालच और क्रूरता पर तीखा व्यंग्य करती है। यह दर्शाती है कि बाहरी दृष्टिकोण से देखने पर मनुष्य कितने तुच्छ और बर्बर लग सकते हैं।
- सापेक्षवाद: 'गुलिवर की यात्राएँ' हमें सिखाती है कि "सामान्य" या "सही" क्या है, यह अक्सर उस संस्कृति और परिप्रेक्ष्य पर निर्भर करता है जिससे इसे देखा जाता है। लिलिपुटियन के लिए गुलिवर एक विशालकाय है, जबकि ब्रोबडिंगनागियन के लिए वह एक बौना है।
- कारण बनाम भावना: हुइन्हनम्स के तर्कसंगत समाज और याहू के पशुवत स्वभाव के माध्यम से, पुस्तक मानव जीवन में कारण और भावना के बीच के संघर्ष पर प्रकाश डालती है। स्विफ्ट इस बात पर सवाल उठाते हैं कि क्या मनुष्य वास्तव में तर्कसंगत प्राणी हैं या केवल अपनी पशुवत इच्छाओं से प्रेरित हैं।
- प्रबुद्धता का व्यंग्य: यह पुस्तक उस समय के प्रबुद्धता के विचारों पर भी व्यंग्य करती है, खासकर विज्ञान और दर्शन के अतिरंजित और अव्यावहारिक पहलुओं पर, जैसा कि लापुता और लैगाडो में दिखाया गया है।
पुस्तक के बारे में कुछ रोचक बातें:
- बच्चों की किताब के रूप में गलत समझा गया: 'गुलिवर की यात्राएँ' को अक्सर एक बच्चों की काल्पनिक किताब के रूप में गलत समझा जाता है, खासकर लिलिपुट और ब्रोबडिंगनाग के हिस्से के कारण। हालाँकि, यह मूल रूप से वयस्कों के लिए एक गहरी और तीखी राजनीतिक और सामाजिक व्यंग्य थी।
- पॉलिटिकल सटायर: स्विफ्ट ने इंग्लैंड और आयरलैंड की तत्कालीन राजनीति, धर्म और समाज की आलोचना करने के लिए इस पुस्तक का उपयोग किया। उदाहरण के लिए, लिलिपुटियन के ऊँची और नीची एड़ी वाले गुट इंग्लैंड की व्हिग्स और टोरीज़ पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- नामकरण: स्विफ्ट ने कई जगहों और लोगों के नाम ऐसे रखे जो व्यंग्यात्मक या अर्थपूर्ण हों। उदाहरण के लिए, "याहू" शब्द आज भी अंग्रेजी भाषा में असभ्य या मूर्ख व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता है।
- चार साल में लिखी गई: यह पुस्तक स्विफ्ट ने 1721 से 1725 के बीच लिखी थी, और पहली बार 1726 में गुमनाम रूप से प्रकाशित हुई थी।
- मानव स्वभाव का निराशावादी दृष्टिकोण: यह पुस्तक मानव स्वभाव का एक निराशावादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है, जो पाठक को मानवता की अंतर्निहित बुराइयों और कमजोरियों पर विचार करने के लिए मजबूर करती है। गुलिवर की अंतिम यात्रा में अपने ही साथियों से घृणा स्विफ्ट की अपनी निराशा को दर्शाती है।
