यूहन्ना - विलियम शेक्सपियर
सारांश विलियम शेक्सपियर का नाटक 'राजा जॉन' (King John) इंग्लैंड के राजा जॉन के शासनकाल (1199-1216) को दर्शाता एक ऐतिहासिक नाटक है। कहानी रा...
सारांश
विलियम शेक्सपियर का नाटक 'राजा जॉन' (King John) इंग्लैंड के राजा जॉन के शासनकाल (1199-1216) को दर्शाता एक ऐतिहासिक नाटक है। कहानी राजा जॉन के अपने भतीजे आर्थर के सिंहासन के दावे पर विवाद से शुरू होती है, जिसे फ्रांस का राजा फिलिप द्वितीय और कई अंग्रेजी रईस समर्थन देते हैं। जॉन अपने शासन को मजबूत करने और आर्थर को रास्ते से हटाने के लिए संघर्ष करता है। नाटक जॉन के फ्रांस के साथ युद्धों, पोप के साथ उसके संघर्ष (जिसके परिणामस्वरूप उसे बहिष्कृत कर दिया जाता है), और आर्थर की हत्या की उसकी साजिश को दर्शाता है। आर्थर की मौत के बाद, कई अंग्रेजी रईस जॉन के खिलाफ हो जाते हैं और फ्रांसीसी आक्रमणकारियों से जुड़ जाते हैं। जॉन, अपनी स्थिति कमजोर होने पर, पोप के प्रतिनिधि, कार्डिनल पंडुलफ के सामने समर्पण कर देता है। अंततः, जॉन को जहर दे दिया जाता है और वह मर जाता है, जिससे उसका युवा बेटा, प्रिंस हेनरी, सिंहासन पर बैठता है। नाटक सत्ता के लिए संघर्ष, वैधता, राजनीतिक अवसरवाद और राष्ट्रीय एकता के विषयों पर केंद्रित है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1: अधिकार का दावा और नाजायज बेटा
नाटक की शुरुआत राजा जॉन के दरबार से होती है, जहाँ फ्रांस के राजा फिलिप द्वितीय के एक दूत, चाटिल्लों, जॉन से मांग करता है कि वह अपने भतीजे आर्थर को इंग्लैंड का वैध राजा माने, क्योंकि आर्थर जॉन के बड़े भाई जेफ्री का बेटा है। जॉन इस मांग को अस्वीकार कर देता है और अपने अधिकार पर जोर देता है, जिससे युद्ध की धमकी पैदा होती है।
उसी समय, सर रॉबर्ट फॉल्कनब्रिज के बेटों, रॉबर्ट और फिलिप, के बीच संपत्ति के उत्तराधिकार का विवाद सामने आता है। फिलिप की माँ, लेडी फॉल्कनब्रिज, स्वीकार करती है कि फिलिप दिवंगत राजा रिचर्ड प्रथम (जॉन का बड़ा भाई) का नाजायज बेटा है। जॉन, रिचर्ड के बेटे के रूप में फिलिप की पहचान पर चकित होकर, उसे अपने दल में शामिल होने का अवसर प्रदान करता है, बशर्ते वह अपने पैतृक नाम को त्याग दे और रिचर्ड की विरासत को स्वीकार करे। फिलिप खुशी-खुशी 'द बास्टर्ड' का नाम अपना लेता है और राजा के प्रति अपनी वफादारी की शपथ लेता है, क्योंकि वह साहसिक जीवन और युद्ध की तलाश में है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| राजा जॉन | इंग्लैंड का राजा; महत्वाकांक्षी, अपने सिंहासन को बनाए रखने के लिए दृढ़ संकल्पित; कुछ हद तक कायर और अवसरवादी। | अपने भतीजे आर्थर को सिंहासन से दूर रखना; इंग्लैंड पर अपनी सत्ता मजबूत करना; फ्रांस के आक्रमण को रोकना। |
| आर्थर | ब्रिटेन का युवा ड्यूक; जॉन का भतीजा; इंग्लैंड के सिंहासन का वैध उत्तराधिकारी माना जाता है। | सिंहासन पर अपने जन्मसिद्ध अधिकार को प्राप्त करना। |
| लेडी फॉल्कनब्रिज | फिलिप द बास्टर्ड और रॉबर्ट फॉल्कनब्रिज की माँ। | अपने बच्चों के लिए सच्चाई बताना; अपनी अतीत की गलती को स्वीकार करना। |
| फिलिप द बास्टर्ड (फाल्कनब्रिज) | सर रॉबर्ट फॉल्कनब्रिज का नाजायज बेटा (रिचर्ड प्रथम का नाजायज बेटा होने का दावा करता है); बहादुर, वफादार, मजाकिया, देशभक्त और तेज-तर्रार। | अपनी माँ की स्वीकारोक्ति के बाद, राजा रिचर्ड की विरासत को स्वीकार करके एक महान नाम और साहसिक जीवन प्राप्त करना; राजा जॉन के प्रति वफादारी दिखाना। |
| रॉबर्ट फॉल्कनब्रिज | फिलिप द बास्टर्ड का वैध भाई। | अपने पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार के अधिकार को बनाए रखना। |
| चाटिल्लों | फ्रांस के राजा फिलिप का दूत। | फ्रांस के राजा का संदेश पहुंचाना और आर्थर के दावे को प्रस्तुत करना। |
अनुभाग 2: एंगियर्स की घेराबंदी और गठबंधन
अंग्रेजी और फ्रांसीसी सेनाएं फ्रांस के एंगियर्स शहर के बाहर मिलती हैं। फ्रांसीसी राजा फिलिप द्वितीय, अपने बेटे डॉफिन लुईस, ड्यूक ऑफ ऑस्ट्रिया और आर्थर की माँ कॉन्स्टेंस के साथ, आर्थर के सिंहासन के दावे का समर्थन करते हुए एंगियर्स से जॉन के प्रति निष्ठा की शपथ लेने की मांग करते हैं। जॉन एंगियर्स के नागरिकों से खुद को राजा घोषित करने की मांग करता है। शहर के नागरिक किसी भी पक्ष को राजा के रूप में मान्यता देने से इनकार करते हैं जब तक कि एक दावेदार स्पष्ट रूप से विजेता न हो।
इसके बाद एक अनिर्णायक लड़ाई होती है। बास्टर्ड एक योजना का प्रस्ताव करता है: दोनों राजा पहले एंगियर्स पर हमला करें, और फिर देखें कि कौन सा पक्ष मजबूत है। इस पर सहमत होकर, वे शहर पर हमला करते हैं, लेकिन नागरिक अभी भी विरोध करते हैं।
स्थिति को हल करने के लिए, पोप के लेगेट, कार्डिनल पंडुलफ, एक विवाह का प्रस्ताव करते हैं: डॉफिन लुईस जॉन की भतीजी, ब्लैंच ऑफ कास्टील से शादी करे। इस राजनीतिक विवाह के माध्यम से, फ्रांस को कुछ फ्रांसीसी क्षेत्र प्राप्त होंगे, और आर्थर के दावे को अस्थायी रूप से दरकिनार कर दिया जाएगा। कॉन्स्टेंस, अपने बेटे के अधिकारों की उपेक्षा से व्यथित होकर, इस गठबंधन का कड़ा विरोध करती है। जॉन और फिलिप सहमत होते हैं, और एक अस्थायी शांति स्थापित होती है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| फ्रांसीसी राजा फिलिप (फिलिप द्वितीय) | फ्रांस का राजा; चतुर, अवसरवादी; इंग्लैंड के मामलों में हस्तक्षेप करने को उत्सुक। | इंग्लैंड पर फ्रांसीसी प्रभाव का विस्तार करना; आर्थर के दावे का समर्थन करके जॉन को कमजोर करना। |
| लुईस द डॉफिन | फ्रांसीसी राजा फिलिप का बेटा; महत्वाकांक्षी, विवाह के माध्यम से शक्ति प्राप्त करने को उत्सुक। | विवाह के माध्यम से इंग्लैंड के सिंहासन पर अप्रत्यक्ष दावा करना; राजनीतिक शक्ति बढ़ाना। |
| ड्यूक ऑफ ऑस्ट्रिया | फ्रांस का सहयोगी; घमंडी, रिचर्ड प्रथम को मारने का दावा करता है (जिसका बास्टर्ड उपहास करता है)। | फ्रांसीसी गठबंधन का समर्थन करना; अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना। |
| कॉन्स्टेंस | आर्थर की माँ; भावुक, अपने बेटे के अधिकारों के लिए दृढ़ता से लड़ती है; जॉन और फ्रांस के खिलाफ शिकायत करती है। | अपने बेटे आर्थर के लिए सिंहासन पर उसका अधिकार प्राप्त करना। |
| ब्लैंच ऑफ कास्टील | जॉन की भतीजी; राजनीतिक सौदेबाजी में एक मोहरा। | इंग्लैंड और फ्रांस के बीच शांति स्थापित करने में मदद करना। |
| कार्डिनल पंडुलफ | पोप का लेगेट (प्रतिनिधि); पोप के अधिकार को बल देता है; चतुर और प्रभावशाली। | पोप के अधिकार को बनाए रखना; ईसाई देशों के बीच शांति स्थापित करना; अपने प्रभाव का प्रयोग करना। |
| रानी एलिनोर | राजा जॉन की माँ; मजबूत इच्छाशक्ति वाली, राजनीतिक रूप से चतुर; अपने बेटे का समर्थन करती है। | जॉन के शासन का समर्थन करना; अपने पोते आर्थर के दावे को कमजोर करना। |
| ह्यूबर्ट डी बर्ग | जॉन का एक वफादार सेवक और विश्वासपात्र। | राजा जॉन की सेवा करना और उसके आदेशों का पालन करना। |
अनुभाग 3: बहिष्कार और आर्थर का भाग्य
शांति ज्यादा समय तक नहीं टिकती। कार्डिनल पंडुलफ जॉन से कैंटरबरी के आर्कबिशप के पद के लिए अपने खुद के उम्मीदवार को स्वीकार करने की मांग करता है। जॉन मना कर देता है, जिस पर पंडुलफ उसे बहिष्कृत कर देता है (यानी, उसे चर्च से बाहर कर देता है) और फ्रांसीसी राजा फिलिप से जॉन के खिलाफ युद्ध फिर से शुरू करने का आग्रह करता है। फ्रांस का राजा, अनिच्छा से, पोप के आदेश का पालन करता है और इंग्लैंड के खिलाफ युद्ध की घोषणा करता है, जिससे नया संघर्ष छिड़ जाता है।
एक और लड़ाई के बाद, जॉन जीतता है और युवा आर्थर को पकड़ लेता है। जॉन, अपने सिंहासन के लिए आर्थर को खतरा मानते हुए, ह्यूबर्ट डी बर्ग को एक गुप्त आदेश देता है कि वह आर्थर को मार दे। जॉन के इशारे स्पष्ट रूप से यह सुझाव देते हैं कि आर्थर को अंधा कर दिया जाना चाहिए और फिर उसे मार दिया जाना चाहिए। ह्यूबर्ट, राजा के प्रति अपनी वफादारी के बावजूद, इस कार्य की क्रूरता से असहज है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| ह्यूबर्ट डी बर्ग | जॉन का एक भरोसेमंद सेवक; वफादार लेकिन दयालु स्वभाव का; राजा के आदेशों के नैतिक निहितार्थों से जूझता है। | राजा के आदेशों का पालन करना; अपनी अंतरात्मा से संघर्ष करना। |
अनुभाग 4: आर्थर का पतन और बड़प्पन का विद्रोह
ह्यूबर्ट आर्थर को जेल में रखता है और उसे अंधा करने के लिए एक गर्म लोहे की छड़ लाता है। आर्थर, अपनी मासूमियत और डर के साथ, ह्यूबर्ट से दया की भीख मांगता है। आर्थर के दर्दनाक अनुरोधों और मासूमियत से प्रभावित होकर, ह्यूबर्ट उसे अंधा करने का अपना इरादा छोड़ देता है। वह आर्थर को सुरक्षित रूप से छिपाने का फैसला करता है और जॉन को यह बताने का नाटक करता है कि आर्थर मर चुका है।
इस बीच, जॉन को पता चलता है कि आर्थर की मौत की खबर अंग्रेजी रईसों के बीच असंतोष पैदा कर रही है, खासकर अर्ल ऑफ सैलिसबरी और पेम्ब्रोक के बीच। रईस, जो आर्थर के पक्ष में थे, जॉन की क्रूरता से स्तब्ध हैं। ह्यूबर्ट, यह मानते हुए कि आर्थर का छिपा रहना जॉन को नुकसान पहुंचा रहा है, राजा को बताता है कि आर्थर अभी भी जीवित है। जॉन, अब अपनी गलती का एहसास करता है, ह्यूबर्ट को आर्थर को रिहा करने का आदेश देता है।
हालाँकि, यह बहुत देर हो चुकी है। आर्थर, ह्यूबर्ट की देखरेख से बचने और अपनी स्वतंत्रता हासिल करने की कोशिश करते हुए, जेल की दीवार से कूद जाता है। वह गिर जाता है और मर जाता है। उसके शरीर को अंग्रेजी रईस ढूंढते हैं, जो आर्थर की मौत के लिए जॉन को तुरंत दोषी ठहराते हैं। गुस्से में और निराश होकर, सैलिसबरी, पेम्ब्रोक और अन्य रईस फ्रांसीसी डॉफिन लुईस से जुड़ जाते हैं, जिसने इस बीच इंग्लैंड पर आक्रमण किया है।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| अर्ल ऑफ सैलिसबरी | एक प्रमुख अंग्रेजी रईस; जॉन की क्रूरता और कपट से निराश; देशभक्त लेकिन नैतिक सिद्धांतों का पालन करने वाला। | आर्थर के अधिकारों का समर्थन करना; जॉन के कुशासन का विरोध करना; अंततः इंग्लैंड के सर्वोत्तम हित की सेवा करना। |
| अर्ल ऑफ पेम्ब्रोक | एक अन्य अंग्रेजी रईस; सैलिसबरी के समान विचार रखता है। | जॉन के गलत कामों का विरोध करना; देश में व्यवस्था और न्याय बहाल करना। |
अनुभाग 5: जॉन का अंत और इंग्लैंड की रक्षा
जॉन को अब कई मोर्चों पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है: फ्रांस के साथ युद्ध, अपने ही रईसों का विद्रोह, और पोप का बहिष्कार। अपनी स्थिति से अभिभूत होकर, जॉन कार्डिनल पंडुलफ के सामने आत्मसमर्पण कर देता है और इंग्लैंड को पोप की जागीर के रूप में प्रस्तुत करता है। इस अधीनता के बदले में, पंडुलफ लुईस को इंग्लैंड पर आक्रमण बंद करने का आदेश देने के लिए सहमत होता है।
लुईस, जो पहले ही इंग्लैंड में पैर जमा चुका है और कई अंग्रेजी रईसों द्वारा समर्थित है, पंडुलफ के आदेश को मानने से इनकार करता है। वह आक्रमण जारी रखता है, लेकिन उसकी सेनाएं एक तूफान में हार जाती हैं। इस बीच, एक फ्रांसीसी रईस, मेलुन, अंग्रेजी रईसों को चेतावनी देता है कि लुईस उन्हें जीतने के बाद भी मारने की योजना बना रहा है। यह सुनकर, सैलिसबरी और पेम्ब्रोक सहित अंग्रेजी रईस, अपनी वफादारी बदलते हैं और जॉन के पक्ष में लौट आते हैं, अपने देश की एकता के लिए लड़ते हैं।
जॉन, अब अपने सिंहासन को बचाने के लिए लड़ रहा है, एक मठ में पीछे हट जाता है। वहाँ, उसे एक भिक्षु द्वारा जहर दे दिया जाता है, जो जॉन द्वारा मठ के धन को जब्त करने के कार्य से नाराज है। जॉन गंभीर रूप से बीमार हो जाता है और स्विनस्टीड एबे में मर जाता है। अपनी मृत्यु से पहले, वह ह्यूबर्ट से बात करता है और अपने बेटे, प्रिंस हेनरी, को सिंहासन पर बिठाने की इच्छा व्यक्त करता है।
प्रिंस हेनरी, जॉन के युवा बेटे, और वफादार अंग्रेजी रईस, अब अपने देश को एकजुट करने और फ्रांसीसी आक्रमणकारियों को बाहर निकालने का संकल्प लेते हैं। नाटक प्रिंस हेनरी के इंग्लैंड के नए राजा के रूप में राज्याभिषेक के साथ समाप्त होता है, और बास्टर्ड घोषणा करता है कि इंग्लैंड तभी खड़ा रह सकता है जब वह अपने भीतर एकजुट हो और विदेशी हस्तक्षेप को खारिज कर दे।
| पात्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| प्रिंस हेनरी | राजा जॉन का बेटा; युवा लेकिन सम्माननीय; बाद में हेनरी तृतीय बनता है। | अपने पिता की विरासत को बनाए रखना; इंग्लैंड को एकजुट करना; फ्रांसीसी आक्रमणकारियों को बाहर निकालना। |
| मेलुन | एक फ्रांसीसी रईस; डॉफिन लुईस के विश्वासघात की चेतावनी देता है। | अपने मरने के बिस्तर पर, लुईस की योजनाओं के बारे में चेतावनी देकर न्याय करना। |
साहित्यिक शैली: ऐतिहासिक नाटक, त्रासदी
लेखक के बारे में कुछ तथ्य:
- विलियम शेक्सपियर (1564-1616) को व्यापक रूप से अंग्रेजी भाषा का सबसे महान लेखक और दुनिया का सबसे महान नाटककार माना जाता है।
- वह 'बार्ड ऑफ एवन' के नाम से भी जाने जाते हैं।
- उनके नाटकों का लगभग हर प्रमुख भाषा में अनुवाद किया गया है और उन्हें किसी भी अन्य नाटककार की तुलना में अधिक बार मंचित किया जाता है।
- 'राजा जॉन' उनके प्रारंभिक ऐतिहासिक नाटकों में से एक है, जो इंग्लैंड के इतिहास के एक अपेक्षाकृत अस्पष्ट काल पर आधारित है।
नैतिक शिक्षा:
'राजा जॉन' की कई नैतिक शिक्षाएं हैं:
- सत्ता की वैधता: नाटक दिखाता है कि कैसे एक कमजोर या अवैध शासक अपने देश को अंदर और बाहर दोनों जगह कमजोर कर सकता है। वैधता और न्यायपूर्ण शासन किसी भी राजा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- अवसरवाद का खतरा: राजा जॉन और फ्रांस के राजा फिलिप दोनों के राजनीतिक अवसरवाद के कारण अस्थिर गठबंधन और अंतहीन संघर्ष होता है, जिससे किसी को भी स्थायी लाभ नहीं होता।
- राष्ट्रीय एकता का महत्व: नाटक के अंत में बास्टर्ड का भाषण इस बात पर जोर देता है कि इंग्लैंड तभी मजबूत रह सकता है जब उसके नागरिक और रईस एकजुट हों और विदेशी हस्तक्षेप का विरोध करें।
- अंतरात्मा और शक्ति: ह्यूबर्ट का आर्थर को मारने से इनकार करना इस बात पर प्रकाश डालता है कि कैसे अंतरात्मा की आवाज सत्ता के आदेशों पर भारी पड़ सकती है, और क्रूरता का विरोध करना एक नैतिक जीत है, भले ही इसके परिणाम कुछ भी हों।
जिज्ञासु तथ्य:
- शेक्सपियर के कई ऐतिहासिक नाटकों के विपरीत, 'राजा जॉन' गद्य में बहुत कम संवादों वाला है; अधिकांश संवाद काव्य में हैं।
- 'राजा जॉन' शेक्सपीयर के ऐतिहासिक नाटकों में से एक है जिसे अपेक्षाकृत कम मंचित किया जाता है।
- नाटक में राजा जॉन के मैग्ना कार्टा (Magna Carta) पर हस्ताक्षर करने का कोई उल्लेख नहीं है, जो उसके शासनकाल की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी। शेक्सपियर ने राजनीतिक अस्थिरता और संघर्ष पर अधिक ध्यान केंद्रित किया।
- बास्टर्ड (फिलिप फाल्कनब्रिज) नाटक में शेक्सपियर के सबसे करिश्माई और मजाकिया पात्रों में से एक है, जो अक्सर सीधे दर्शकों से बात करता है और नाटक के नैतिक केंद्र के रूप में कार्य करता है।
