manavdveshi - moliyer

सारांश
मोलियर का नाटक 'ले मिसैन्थ्रोप' (The Misanthrope) पेरिस के कुलीन समाज की पाखंडी दुनिया की कहानी है, जिसे एक आदर्शवादी और ईमानदार व्यक्ति, एल्केस्ट के नज़रिए से दर्शाया गया है। एल्केस्ट सामाजिक शिष्टाचार, चापलूसी और झूठे दिखावे से घृणा करता है, और वह हर किसी से पूर्ण ईमानदारी की उम्मीद करता है। उसकी एकमात्र कमजोरी युवा और आकर्षक सेलिमेन के लिए उसका प्रेम है, जो एक चतुर, इश्कबाज़ महिला है और समाज की उन्हीं सतही प्रवृत्तियों में लिप्त रहती है, जिनसे एल्केस्ट नफरत करता है। नाटक में एल्केस्ट अपने इस विरोधाभासी प्रेम और एक ऐसे समाज में खुद को ढालने या अस्वीकार करने के संघर्ष को दिखाता है, जहाँ उसकी ईमानदारी को सनकीपन माना जाता है। वह कई प्रेम त्रिकोणों, सामाजिक गलतफहमियों और अदालती मुकदमों में फंस जाता है, अंततः समाज से पूरी तरह अलग होने का फैसला करता है, यह साबित करते हुए कि एक सच्चे और ईमानदार व्यक्ति के लिए पाखंडी दुनिया में जीना कितना मुश्किल है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1
नाटक एल्केस्ट के उसके दोस्त फिलिंट के साथ विवाद से शुरू होता है। एल्केस्ट एक कविता के लिए फिलिंट द्वारा एक अजनबी ओरोंटे की अत्यधिक प्रशंसा करने से नाराज है, जिसे वह जानता है कि वह खराब है। एल्केस्ट का तर्क है कि झूठी प्रशंसा सामाजिक पाखंड का सबसे खराब रूप है। फिलिंट एल्केस्ट को समझाने की कोशिश करता है कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए कभी-कभी छोटे-मोटे समझौते करना जरूरी होता है, लेकिन एल्केस्ट अपने विचारों पर अडिग रहता है कि सभी को हर समय पूरी तरह से ईमानदार होना चाहिए, भले ही इससे किसी की भावनाएँ आहत हों। फिर ओरोंटे आता है और एल्केस्ट को अपनी नई कविता सुनाता है, जिससे एल्केस्ट को इसकी आलोचना करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे ओरोंटे नाराज हो जाता है। इस बीच, एल्केस्ट सेलिमेन के प्रति अपने जुनून को भी व्यक्त करता है, जिससे फिलिंट को आश्चर्य होता है कि एक ऐसा व्यक्ति जो पाखंड से घृणा करता है, वह सेलिमेन जैसी चंचल और दिखावा करने वाली महिला से कैसे प्यार कर सकता है।

पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
एल्केस्ट (Alceste) नायक, एक पूर्णतावादी, तीव्र ईमानदारी पसंद करने वाला, सामाजिक पाखंड और सतहीपन से घृणा करने वाला। एक आदर्श समाज की लालसा, जहाँ सभी ईमानदार हों; सेलिमेन के प्रति उसका विरोधाभासी प्रेम।
सेलिमेन (Célimène) एक युवा, सुंदर और चतुर महिला, सामाजिक रूप से लोकप्रिय, इश्कबाज़ और चुगली करने वाली। सामाजिक ध्यान और प्रशंसा प्राप्त करना; अपने कई प्रशंसकों को बनाए रखना; स्वतंत्रता।
फिलिंट (Philinte) एल्केस्ट का दोस्त, व्यवहारिक और समझदार, सामाजिक समझौते में विश्वास रखने वाला। एल्केस्ट को यथार्थवादी बनने में मदद करना; समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखना।
एलियांटे (Éliante) सेलिमेन की चचेरी बहन, समझदार, शांत स्वभाव की, एल्केस्ट की ईमानदारी की प्रशंसा करती है। सच्चा प्यार खोजना; अपने आसपास के लोगों के लिए सहानुभूति।
ओरोंटे (Oronte) एक प्रतिष्ठित सज्जन, खुद को कवि मानता है, सेलिमेन का प्रशंसक। सामाजिक स्वीकृति और प्रशंसा; सेलिमेन के प्रति उसका आकर्षण।
आर्सिनोए (Arsinoé) एक पाखंडी, धार्मिक और नैतिक रूप से पवित्र दिखने वाली महिला, सेलिमेन की प्रतिद्वंद्वी। सामाजिक प्रतिष्ठा; एल्केस्ट का ध्यान आकर्षित करना; सेलिमेन को नीचा दिखाना।
एकास्ट (Acaste) एक युवा मार्क्विस, सेलिमेन के कई प्रशंसकों में से एक, खुद को आकर्षक और योग्य मानता है। सेलिमेन को जीतना; सामाजिक दिखावा और अपनी श्रेष्ठता का प्रदर्शन।
क्लिटैंड्र (Clitandre) एक अन्य युवा मार्क्विस, सेलिमेन का प्रशंसक, एकास्ट की तरह दिखावा करने वाला। सेलिमेन का ध्यान आकर्षित करना; सामाजिक स्थिति और प्रतिस्पर्धा।

अनुभाग 2
यह अनुभाग सेलिमेन और एल्केस्ट के बीच संबंधों पर केंद्रित है। एल्केस्ट सेलिमेन को उसके कई प्रशंसकों को अस्वीकार करने और अपने दोस्तों और परिचितों की बुराई करना बंद करने के लिए कहता है, लेकिन सेलिमेन यह कहते हुए इनकार कर देती है कि यह सिर्फ सामाजिक मज़ा है। एल्केस्ट उसकी चंचलता से क्रोधित है और उसे अपने कई प्रशंसकों, विशेष रूप से एकास्ट और क्लिटैंड्र से दूर रहने के लिए कहता है। सेलिमेन एल्केस्ट के ईर्ष्यालु स्वभाव और सामाजिक आलोचना के प्रति उसकी प्रतिक्रिया से चिंतित है, लेकिन वह एल्केस्ट को पूरी तरह से त्यागने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह उसकी ईमानदारी और दृढ़ता की प्रशंसा करती है। इस अनुभाग में यह भी दिखाया गया है कि एल्केस्ट के अपने दोस्तों के प्रति उसका असहिष्णु रवैया किस तरह उसे सामाजिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।

अनुभाग 3
एक और पाखंडी महिला, आर्सिनोए, सेलिमेन के घर आती है। वह सेलिमेन को उसके चाल-चलन के बारे में "अच्छी सलाह" देने का दिखावा करती है, लेकिन उसका असली मकसद सेलिमेन को नीचा दिखाना और एल्केस्ट को अपनी ओर आकर्षित करना है। सेलिमेन उसकी पाखंडी सलाह को चतुराई से पलट देती है। बाद में, आर्सिनोए एल्केस्ट को अलग से मिलती है और उसे बताती है कि सेलिमेन उसके बारे में बुरा-भला कहती है और वह उसके लिए सही नहीं है, खुद को एक बेहतर विकल्प के रूप में पेश करती है। हालांकि, एल्केस्ट आर्सिनोए के इरादों को समझ जाता है और उसकी पाखंडी सद्भावना को अस्वीकार कर देता है। इस बीच, एल्केस्ट को एक पत्र मिलता है जो ओरोंटे और उसके बीच हुए झगड़े के कारण एक मुकदमे की सूचना देता है।

अनुभाग 4
एल्केस्ट को उसके मुकदमे में हारने की खबर मिलती है। वह इससे अत्यधिक क्रोधित हो जाता है, यह देखते हुए कि न्याय और ईमानदारी को पैसे और प्रभाव से कैसे तोड़ा जा सकता है। एलियांटे और फिलिंट एल्केस्ट को शांत करने की कोशिश करते हैं, और एलियांटे यह स्वीकार करती है कि वह एल्केस्ट की ईमानदारी की प्रशंसा करती है, भले ही वह उसके अतिवाद से सहमत न हो। एल्केस्ट, हताशा में, एलियांटे के प्रति अपने कुछ विचार व्यक्त करता है, और उसे फिलिंट के साथ शादी करने के बजाय उससे शादी करने का सुझाव देता है, यह मानते हुए कि एलियांटे एक अधिक स्थिर और ईमानदार साथी होगी। इस बीच, एकास्ट और क्लिटैंड्र के पास सेलिमेन द्वारा लिखे गए पत्र आते हैं, जिसमें वह उन दोनों का मज़ाक उड़ाती है।

अनुभाग 5
अंतिम अनुभाग में नाटक का चरमोत्कर्ष होता है। एकास्ट और क्लिटैंड्र के पास सेलिमेन के पत्र होते हैं, जिसमें वह उन दोनों और एल्केस्ट सहित अपने सभी प्रेमियों का उपहास करती है। वे इन पत्रों को एल्केस्ट और अन्य प्रशंसकों के सामने पढ़ते हैं। एल्केस्ट को इस धोखे से बहुत गहरा आघात पहुँचता है, और सेलिमेन का सच्चा पाखंड सामने आ जाता है। वह सेलिमेन से पूछता है कि क्या वह समाज से दूर, एक ग्रामीण एकांत में उसके साथ रहने को तैयार है, जहाँ वे ईमानदारी से जीवन जी सकें। सेलिमेन इनकार कर देती है, यह कहते हुए कि वह सामाजिक जीवन और अपने प्रशंसकों को नहीं छोड़ सकती। एल्केस्ट उसे अस्वीकार कर देता है और अकेले ही समाज से पूरी तरह अलग होने का फैसला करता है। फिलिंट और एलियांटे, जो एक दूसरे के लिए प्यार महसूस करते हैं, एल्केस्ट का पीछा करने और उसे वापस लाने की योजना बनाते हैं, लेकिन एल्केस्ट अपने मार्ग पर दृढ़ रहता है, पाखंड से भरी दुनिया से खुद को अलग कर लेता है।

साहित्यिक शैली:
व्यंग्यपूर्ण कॉमेडी (Satirical Comedy), चरित्र कॉमेडी (Comedy of Manners)

लेखक के बारे में:
जीन-बैप्टिस्ट पोक्वेलिन, जिन्हें मोलियर के नाम से जाना जाता है, 17वीं शताब्दी के सबसे महान फ्रांसीसी नाटककार और अभिनेता थे। उनका जन्म 1622 में पेरिस में हुआ था और 1673 में उनका निधन हो गया। वह फ्रांसीसी कॉमेडी के स्वामी माने जाते हैं, और उनके काम अक्सर मानव स्वभाव, समाज के पाखंड और कुलीन वर्ग की सनकीपन का मज़ाक उड़ाते थे। उन्होंने अपने नाटकों में समकालीन फ्रांसीसी समाज की कमज़ोरियों और त्रुटियों को उजागर किया, जिससे उनके काम आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं। उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध नाटकों में 'टार्टुफ', 'द इमेजिनरी इनवेलिड' और 'द मिसर' शामिल हैं।

नैतिक शिक्षा:
'ले मिसैन्थ्रोप' की नैतिक शिक्षा यह है कि एक आदर्शवादी व्यक्ति के लिए एक पाखंडी और समझौतावादी समाज में जीवित रहना या सामंजस्य स्थापित करना कितना मुश्किल है। नाटक दिखाता है कि अत्यधिक ईमानदारी और समझौता न करने का रवैया व्यक्ति को सामाजिक रूप से अलग-थलग कर सकता है, जबकि पूरी तरह से चापलूसी और दिखावे में लिप्त रहना किसी को भी अंदर से खोखला कर सकता है। यह नैतिकता और सामाजिक व्यवहार के बीच एक संतुलन खोजने की आवश्यकता पर ज़ोर देता है, यह सुझाव देता है कि पूर्ण ईमानदारी वांछनीय होते हुए भी, सामाजिक जीवन के लिए कुछ हद तक व्यवहारिक सहिष्णुता आवश्यक है।

रोचक तथ्य:

  • 'ले मिसैन्थ्रोप' को मोलियर का सबसे गंभीर कॉमेडी नाटक माना जाता है, क्योंकि इसमें नायक की हताशा और दुख का भाव हास्य के साथ-साथ चलता है।
  • यह नाटक 1666 में लिखा और पहली बार प्रस्तुत किया गया था।
  • एल्केस्ट का चरित्र मोलियर के अपने व्यक्तिगत अनुभवों और स्वभाव से प्रेरित माना जाता है, जिससे यह उनके सबसे आत्मचरित्रात्मक नाटकों में से एक बन जाता है।
  • नाटक को अक्सर "पात्रों की कॉमेडी" (comedy of characters) कहा जाता है क्योंकि यह मानव स्वभाव और व्यक्तित्व की बारीकियाँ दिखाता है, खासकर एल्केस्ट और सेलिमेन के विरोधाभासी चरित्रों के माध्यम से।
  • मोलियर ने खुद एल्केस्ट की भूमिका निभाई थी जब नाटक पहली बार प्रस्तुत किया गया था।
  • यह नाटक इस बहस को जन्म देता है कि क्या समाज में शांति से रहने के लिए हमें हमेशा सच बोलना चाहिए या कभी-कभी झूठ और चापलूसी को स्वीकार करना चाहिए।