merope - volteyar

सारांश

वोल्टेयर का नाटक 'मेरोपे' प्राचीन मेसेनिया की पृष्ठभूमि पर आधारित एक त्रासदी है। कहानी मेरोपे, मेसेनिया की विधवा रानी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका बेटा, एगिस्थे (डोरिलास), कई साल पहले अपने चाचा, अत्याचारी पोलिफोंटे द्वारा कथित तौर पर मार दिया गया था। नाटक की शुरुआत पोलिफोंटे की रहस्यमय हत्या से होती है। एक युवा अजनबी को हत्यारा घोषित किया जाता है, और मेरोपे प्रतिशोध की आग में जल रही है, क्योंकि वह मानती है कि यह अजनबी वही व्यक्ति है जिसने उसके बेटे की हत्या की थी (जो उसे मृत मानता है)। हालाँकि, एक वफादार बूढ़ा नौकर, नारबस, उस युवा व्यक्ति को पहचान लेता है जिसे उसने गुप्त रूप से बड़ा किया था - वह वास्तव में मेरोपे का अपना बेटा, एगिस्थे है। नाटक मेरोपे की अपने बेटे के लिए प्रतिशोध और अपने मातृ प्रेम के बीच आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है, क्योंकि वह सच्चाई जानने के करीब आती है। सच्चाई सामने आने पर, माँ और बेटे का पुनर्मिलन होता है, और एगिस्थे को सिंहासन के वैध उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता मिलती है, जिससे मेसेनिया में न्याय और शांति बहाल होती है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1

नाटक की शुरुआत मेरोपे के गहरे दुःख और प्रतिशोध की इच्छा से होती है। वह अपने पति की मृत्यु और अपने बेटे एगिस्थे के बचपन में मारे जाने के बाद से दुःख में डूबी हुई है, जिसके लिए वह अपने अत्याचारी बहनोई पोलिफोंटे को दोषी ठहराती है। अब, पोलिफोंटे को मार दिया गया है, और मेरोपे पहले तो खुश है। हालाँकि, एक युवा अजनबी को हत्यारा माना जाता है, और मेरोपे गलती से मानती है कि यह वही व्यक्ति है जिसने उसके बेटे को मार डाला था। वह इस अजनबी को तुरंत फाँसी देने का आदेश देती है। इस बीच, नारबस, मेरोपे का वफादार बूढ़ा नौकर, उस युवा व्यक्ति को पहचान लेता है जिसे उसने सालों पहले रानी के आदेश पर गुप्त रूप से पाला था, और वह जानता है कि यह अजनबी वास्तव में मेरोपे का खोया हुआ बेटा, एगिस्थे है। नारबस, सच्चाई बताए बिना मेरोपे को उस युवा व्यक्ति को माफ करने के लिए समझाने की कोशिश करता है, जिससे मेरोपे और भी उलझन में पड़ जाती है।

चरित्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
मेरोपे मेसेनिया की विधवा रानी, एगिस्थे की माँ। दुःखी, प्रतिशोधी, अपनी गलती के बावजूद न्याय चाहती है। अपने मृत पति और कथित मृत बेटे का प्रतिशोध लेना; राज्य में न्याय बहाल करना।
एगिस्थे (डोरिलास) मेरोपे का बेटा, एक चरवाहे के रूप में पाला गया। बहादुर, नेक, अपनी वास्तविक पहचान से अनभिज्ञ। आत्मरक्षा (पोलिफोंटे को मारने के लिए); अपनी महान उत्पत्ति के बारे में सच्चाई जानना।
नारबस मेरोपे का वफादार बूढ़ा सेवक। बुद्धिमान, वफादार, एगिस्थे के रहस्य का संरक्षक। मेरोपे के बेटे एगिस्थे की रक्षा करना; सच्चाई को उजागर करना और माँ-बेटे को फिर से मिलाना।
पोलिफोंटे मेरोपे के पति का भाई, अत्याचारी राजा। धोखेबाज, सत्ता का भूखा। सिंहासन पर कब्जा करना; एगिस्थे को खत्म करना (हालांकि नाटक की शुरुआत में ही उसकी हत्या हो चुकी है, वह कहानी के लिए एक उत्प्रेरक है)।

अनुभाग 2

मेरोपे उस युवा अजनबी का सामना करती है। वह अपनी महान उत्पत्ति का दावा करता है और बताता है कि उसने पोलिफोंटे को आत्मरक्षा में क्यों मारा, जब पोलिफोंटे ने उस पर हमला किया था। युवा व्यक्ति की समानता मेरोपे के मृत पति से उसे बेचैन करती है। वह उसकी निर्दोषता के दावों और उसके नेक व्यवहार से प्रभावित होने लगती है, लेकिन फिर भी प्रतिशोध की अपनी इच्छा को नहीं छोड़ पाती है। नारबस मेरोपे को धीरे-धीरे सच्चाई की ओर धकेलता है, जिससे उसे संदेह होने लगता है कि क्या यह युवा व्यक्ति वास्तव में उसका बेटा हो सकता है। मेरोपे के मन में आंतरिक संघर्ष तीव्र होता जाता है – एक तरफ प्रतिशोध की इच्छा है, दूसरी तरफ उसकी माँ की सहज वृत्ति।

अनुभाग 3

युवा व्यक्ति (जिसे अब डोरिलास के रूप में जाना जाता है) अपने अतीत के बारे में अधिक बताता है, जिससे मेरोपे का संदेह और बढ़ता जाता है। वह बताता है कि उसे एक चरवाहे ने पाला था, लेकिन हमेशा उसे बताया गया था कि उसकी उत्पत्ति महान है। मेरोपे को उसके शब्दों में सच्चाई की गूँज सुनाई देती है। पोलिफोंटे की बेटी, यूरीसाइड, भी उस युवा व्यक्ति के लिए सहानुभूति व्यक्त करती है और आगे रक्तपात के बजाय शांति और न्याय की इच्छा रखती है। मेसेनिया के लोग भी इस स्थिति को लेकर विभाजित हैं, कुछ प्रतिशोध की माँग करते हैं और कुछ उस युवा व्यक्ति की निर्दोषता में विश्वास करते हैं। मेरोपे लगभग स्वीकार करने को तैयार हो जाती है कि वह दोषी नहीं है, लेकिन फिर भी अपने बेटे के कथित हत्यारे को क्षमा करने से हिचकिचाती है।

चरित्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
यूरीसाइड पोलिफोंटे की बेटी। दयालु, न्यायपसंद, शांति की इच्छा रखती है। आगे रक्तपात को रोकना; न्याय और शांति बनाए रखना; संभावित रूप से एगिस्थे के लिए सहानुभूति विकसित करना।

अनुभाग 4

सच्चाई धीरे-धीरे और दर्दनाक रूप से सामने आती है। नारबस अंततः निर्णायक सबूत प्रस्तुत करता है: एगिस्थे के जन्मचिह्न, उसके बचपन के कपड़े, और वह तरीके से जिसे उसने गुप्त रूप से पाला था। मेरोपे गहन पीड़ा में है, यह जानकर कि उसने अपने ही बेटे को मौत के घाट उतारने की कोशिश की थी। माँ और बेटे के पुनर्मिलन का दृश्य मार्मिक है, जिसमें मेरोपे का मातृ प्रेम अंततः प्रतिशोध की उसकी इच्छा पर विजय प्राप्त करता है। वह अपने बेटे को पहचानती है और उसे अपनी बाहों में लेती है।

अनुभाग 5

संकल्प होता है। एगिस्थे को सिंहासन के वैध उत्तराधिकारी के रूप में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया जाता है। लोग अपने वैध राजा की वापसी का जश्न मनाते हैं। न्याय होता है, और मेसेनिया में शांति बहाल होती है। मेरोपे का मातृ प्रेम, जो शुरू में प्रतिशोध से ढका हुआ था, अब स्पष्ट रूप से चमकता है। एगिस्थे अपने राज्य की बागडोर संभालता है, और नाटक न्याय की विजय और पारिवारिक प्रेम की शक्ति पर समाप्त होता है।

साहित्यिक शैली: त्रासदी (Tragedy), पाँच अंकों में।

लेखक के बारे में:
वोल्टेयर (फ्रांकोइस-मैरी अरौएट का पेन नाम) 18वीं सदी के एक फ्रांसीसी प्रबुद्ध लेखक, इतिहासकार और दार्शनिक थे। वे अपनी बुद्धि, अपने दार्शनिक गद्य, विशेष रूप से 'कैंडिड' के लिए, और नागरिक स्वतंत्रता, धर्म सहिष्णुता और चर्च व राज्य के पृथक्करण के अपने समर्थन के लिए प्रसिद्ध थे। वोल्टेयर एक विपुल लेखक थे, जिन्होंने नाटक, कविताएँ, उपन्यास, निबंध और ऐतिहासिक व वैज्ञानिक रचनाएँ लिखीं। उन्होंने उस समय के शाही और कैथोलिक चर्च की हठधर्मिता की तीखी आलोचना की, जिसके कारण उन्हें अक्सर कैद और निर्वासन का सामना करना पड़ा।

नैतिक शिक्षा:
'मेरोपे' की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि प्रतिशोध और अंधाधुंध क्रोध अक्सर किसी व्यक्ति को सच देखने से रोक सकता है और गंभीर गलतियाँ करवा सकता है। यह नाटक तर्कहीन भावनाओं पर कारण और मातृ प्रेम की विजय पर भी जोर देता है, अंततः यह दर्शाता है कि न्याय और क्षमा से ही सच्ची शांति और व्यवस्था बहाल होती है।

जिज्ञासाएँ:

  • समान विषय-वस्तु: वोल्टेयर ने अपनी 'मेरोपे' को इसी नाम के कई अन्य समकालीन नाटकों के जवाब में लिखा था, जिसमें स्केपियन (Scipione) मेफी (Maffei) का एक इतालवी नाटक भी शामिल था। वोल्टेयर का उद्देश्य एक बेहतर और अधिक उत्कृष्ट संस्करण बनाना था।
  • शास्त्रीय ग्रीक प्रभाव: नाटक शास्त्रीय ग्रीक त्रासदी के तत्वों को दर्शाता है, विशेष रूप से माँ और बेटे के बीच पहचान और पुनर्मिलन का विषय। यह यूरिपाइड्स के नाटक 'क्रेस्फोंटे' से प्रेरित था, जिसकी कहानी खो गई थी, लेकिन जिसकी रूपरेखा एरिज़्टोटल ने दी थी।
  • लोकप्रियता: 'मेरोपे' 18वीं शताब्दी में वोल्टेयर के सबसे लोकप्रिय और सफल नाटकों में से एक बन गया, जो उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा को मजबूत करता है।
  • अहिंसक अंत: कई शास्त्रीय त्रासदियों के विपरीत, जहाँ दुःखद अंत होता है, 'मेरोपे' में एक अपेक्षाकृत संतोषजनक और अहिंसक अंत होता है, जहाँ न्याय की जीत होती है और परिवार का पुनर्मिलन होता है।