महिला विद्यालय की आलोचना - मोलियर
सारांश मोलिएर का नाटक 'लेस फेमेस' (स्त्रियों का विद्यालय) की आलोचना', मोलिएर द्वारा अपने ही पिछले नाटक 'लेस फेमेस' के आलोचकों को जवाब देने ...
सारांश
मोलिएर का नाटक 'लेस फेमेस' (स्त्रियों का विद्यालय) की आलोचना', मोलिएर द्वारा अपने ही पिछले नाटक 'लेस फेमेस' के आलोचकों को जवाब देने के लिए लिखा गया एक लघु, एक-अंकीय नाटक है। यह नाटक उरानी के सैलून में होता है, जहाँ कुछ मित्र और परिचित 'लेस फेमेस' के गुणों और दोषों पर बहस करने के लिए इकट्ठा होते हैं। डोरेंट और उरानी मुख्य रूप से नाटक का बचाव करते हैं, जबकि एलिस और क्लिमेन इसकी वास्तविकता की कमी, अशिष्टता और अनुचितता के लिए आलोचना करती हैं। लिसीदास नामक एक पांडित्यपूर्ण आलोचक शास्त्रीय नियमों और तकनीकीताओं के आधार पर नाटक की आलोचना करता है। यह नाटक हास्यपूर्ण ढंग से उन खोखली और सतही आलोचनाओं का खंडन करता है जिनका मोलिएर को सामना करना पड़ा था, और कलात्मक स्वतंत्रता, सामान्य ज्ञान तथा मानवीय प्रकृति के चित्रण के महत्व पर जोर देता है। यह नाटक दर्शाता है कि कला का उद्देश्य दर्शकों का मनोरंजन करना और उन्हें सोचने पर मजबूर करना है, न कि केवल कठोर नियमों का पालन करना।
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अनुभाग
यह नाटक उरानी के सैलून में शुरू होता है, जहाँ उसके मित्र और संबंधी 'लेस फेमेस' नाटक के बारे में अपनी राय व्यक्त करने के लिए एकत्रित होते हैं। यह पूरा नाटक एक ही दृश्य और एक ही वाद-विवाद के इर्द-गिर्द घूमता है, जिसमें विभिन्न पात्र नाटक के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं और एक-दूसरे के तर्कों का खंडन करते हैं।
| नाम | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| डोरेंट | एक समझदार, सुशिक्षित और उदारवादी व्यक्ति, जो मोलिएर के स्वयं के विचारों का प्रतिनिधित्व करता है। वह सामान्य ज्ञान और वास्तविक मानवीय प्रकृति के चित्रण का पक्षधर है। | 'लेस फेमेस' का बचाव करना, कलात्मक स्वतंत्रता और हास्य के मूल्य को स्थापित करना, पाखंडपूर्ण आलोचनाओं का खंडन करना। |
| गरानी | एक बुद्धिमान, संवेदनशील और निष्पक्ष महिला, जो बहस में मध्यस्थ की भूमिका निभाती है और तार्किक तर्कों के लिए खुली रहती है। वह भी नाटक के गुणों को मानती है। | एक निष्पक्ष चर्चा को बढ़ावा देना, विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना, अंततः मोलिएर के नाटक का समर्थन करना क्योंकि वह इसमें सच्चाई और मनोरंजन पाती है। |
| एलिस | उरानी की चचेरी बहन, जो कुछ हद तक संकीर्ण विचारों वाली है और नाटक को अस्वाभाविक, अविश्वसनीय और कुछ हद तक अनुचित पाती है। वह सामाजिक शिष्टाचार और रूढ़िवादी मूल्यों से प्रभावित है। | नाटक की 'अविश्वसनीयता' और 'अनुचितता' पर प्रकाश डालना, सामान्य सामाजिक धारणाओं को व्यक्त करना। |
| क्लिमेन | एक दिखावा करने वाली, सतही और अहंकारी महिला, जो नाटक को अशिष्ट, भद्दा और "अच्छी तरह से लिखे गए" नाटक के मानदंडों के अनुरूप नहीं मानती। वह फैशन और सतही आलोचनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। | अपनी खुद की परिष्कृत साहित्यिक समझ का प्रदर्शन करना, उच्च समाज के मानदंडों के अनुसार नाटक को खारिज करना। |
| लिसीदास | एक पांडित्यपूर्ण कवि और आलोचक, जो शास्त्रीय नियमों (जैसे अरस्तू के नियम) पर बहुत अधिक जोर देता है। वह हर पंक्ति और दृश्य का व्याकरणिक और अकादमिक रूप से विश्लेषण करता है और छोटी-छोटी तकनीकी खामियों पर ध्यान केंद्रित करता है। | अपनी अकादमिक ज्ञान और पांडित्य का प्रदर्शन करना, शास्त्रीय नियमों के आधार पर नाटक की 'कमियों' को उजागर करना, यह साबित करना कि वह एक 'गंभीर' आलोचक है। |
कहानी:
नाटक का केंद्रीय बिंदु 'लेस फेमेस' के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा है। एलिस और क्लिमेन नाटक के खिलाफ तर्क प्रस्तुत करती हैं। एलिस का कहना है कि नाटक में दिखाए गए पात्र और घटनाएँ अविश्वसनीय हैं। वह अज्ञेय के चरित्र और कहानी की सच्चाई पर सवाल उठाती है, यह दावा करते हुए कि कोई भी व्यक्ति इतना मूर्ख नहीं हो सकता जितना कि अर्नेफ। क्लिमेन नाटक को अशिष्ट और भद्दा बताती है, विशेष रूप से "क्रीम टार्ट" (क्रीम वाली मिठाई) के दृश्य का उल्लेख करते हुए, जिसे वह अशिष्ट मानती है। वह मोलिएर पर आरोप लगाती है कि वह केवल आम लोगों को हँसाने के लिए लिखता है, न कि "उत्कृष्ट स्वाद" वाले दर्शकों के लिए।
तभी लिसीदास प्रवेश करता है, जो एक पांडित्यपूर्ण आलोचक है। वह शास्त्रीय नियमों, विशेष रूप से अरस्तू के सिद्धांतों का हवाला देते हुए नाटक की आलोचना करता है। वह तर्क देता है कि नाटक "एकता के नियमों" (समय, स्थान और कार्य की एकता) का उल्लंघन करता है, और कुछ संवादों को अनुपयुक्त या हास्यहीन बताता है। वह नाटक के 'आख्यान' (कथा) और 'पात्रों' (चरित्रों) की भी आलोचना करता है। लिसीदास अपने तर्कों को अत्यंत गंभीर और अकादमिक लहजे में प्रस्तुत करता है, अक्सर लैटिन वाक्यांशों और शास्त्रीय उद्धरणों का उपयोग करता है।
डोरेंट, उरानी के समर्थन से, इन आलोचनाओं का खंडन करता है। वह एलिस के 'अविश्वसनीयता' के तर्क का जवाब देता है कि नाटक जीवन का एक दर्पण है, और अक्सर वास्तविकता कल्पना से भी अधिक अजीब होती है। वह तर्क देता है कि नाटक का उद्देश्य लोगों को हँसाना और मानव स्वभाव की मूर्खताओं को उजागर करना है, न कि केवल कठोर नियमों का पालन करना। वह क्लिमेन के 'अशिष्टता' के आरोप का खंडन करता है कि कुछ चीजें जो कुछ लोगों को अशिष्ट लग सकती हैं, वे दूसरों को हास्यास्पद लग सकती हैं, और यह कि हास्य अक्सर उन चीजों से आता है जो समाज में वर्जित मानी जाती हैं। वह "क्रीम टार्ट" दृश्य का बचाव करता है, यह बताते हुए कि यह अज्ञेय की मासूमियत को दर्शाता है।
लिसीदास के पांडित्यपूर्ण तर्कों के जवाब में, डोरेंट यह तर्क देता है कि कला का मूल्य नियमों की कठोरता से नहीं, बल्कि दर्शकों पर उसके प्रभाव से मापा जाना चाहिए। वह बताता है कि लिसीदास जैसे आलोचक अक्सर पेड़ देखते हुए जंगल को भूल जाते हैं, और वे एक छोटे से तकनीकी दोष के कारण पूरे नाटक के आनंद को त्याग देते हैं। डोरेंट इस बात पर जोर देता है कि सबसे महत्वपूर्ण नियम दर्शकों को खुश करना और उन्हें सोचने पर मजबूर करना है।
बहस के अंत में, डोरेंट प्रभावी रूप से अपने आलोचकों के तर्कों का खंडन कर देता है। हालाँकि सभी आलोचक पूरी तरह से सहमत नहीं होते हैं, फिर भी डोरेंट यह स्पष्ट कर देता है कि सच्चा कलात्मक मूल्य और सामान्य ज्ञान संकीर्ण पांडित्य और सतही आलोचनाओं पर भारी पड़ते हैं। यह नाटक मोलिएर के आत्मविश्वास और उसकी कलात्मक दृष्टि का प्रदर्शन करता है, जो उसे अपने समकालीन आलोचकों से ऊपर रखता है।
साहित्यिक विधा
हास्य नाटक (कॉमेडी), विशेष रूप से एक "प्रतिक्रियात्मक नाटक" या "एक-अंकीय गद्य हास्य" (one-act prose comedy)। इसे कभी-कभी कॉमेडी-बैले भी कहा जाता है, हालांकि इसमें संगीत या बैले कम है और यह मुख्य रूप से संवादों पर आधारित है।
लेखक के बारे में जानकारी
मोलिएर (वास्तविक नाम जीन-बैप्टिस्ट पोक्वेलिन, 1622-1673) फ्रांसीसी साहित्य के सबसे महान नाटककारों में से एक हैं। वह 17वीं सदी के फ्रांस में एक अभिनेता, थिएटर निर्देशक और नाटककार थे। उन्होंने फ्रांसीसी हास्य को एक नया आयाम दिया, अक्सर मानव स्वभाव की कमजोरियों, सामाजिक पाखंड और मूर्खतापूर्ण व्यवहार का मजाक उड़ाया। उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध नाटक हैं 'लेस फेमेस' (स्त्रियों का विद्यालय), 'ले मिजांथ्रोप' (मनुष्य-द्वेषी), 'ले बोर्जुआ जेंटिलोम' (सभ्रांत बुर्जुआ), और 'टार्टफ' (पाखंडी)। मोलिएर के काम को आज भी व्यापक रूप से पढ़ा और मंचित किया जाता है, और उन्हें पश्चिमी नाटक के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति माना जाता है।
नैतिक शिक्षा / सीख
- कलात्मक स्वतंत्रता का महत्व: नाटक इस बात पर जोर देता है कि कला को कठोर, संकीर्ण नियमों से बंधा नहीं होना चाहिए। सच्ची कला का उद्देश्य मानवीय अनुभव को दर्शाना और दर्शकों का मनोरंजन करना है, भले ही वह हमेशा अकादमिक मानदंडों के अनुरूप न हो।
- सामान्य ज्ञान बनाम पांडित्य: यह नाटक दिखाता है कि अत्यधिक पांडित्यपूर्ण आलोचना और सतही सामाजिक मानकों पर आधारित आलोचना अक्सर खोखली होती है। सामान्य ज्ञान और दर्शकों की सहज प्रतिक्रिया कला के मूल्यांकन में अधिक विश्वसनीय मार्गदर्शक होते हैं।
- आलोचना का हास्यास्पद पहलू: मोलिएर हास्यपूर्ण ढंग से उन आलोचकों की मूर्खता और संकीर्णता को उजागर करते हैं जो छोटी-छोटी तकनीकी खामियों या व्यक्तिगत पसंद के आधार पर एक पूरे कलात्मक कार्य को खारिज कर देते हैं।
- मनुष्य की मूर्खताओं का चित्रण: मोलिएर हमेशा मानव स्वभाव की मूर्खताओं और सामाजिक पाखंड को उजागर करने में विश्वास रखते थे, और यह नाटक इस विचार का बचाव करता है कि हास्य समाज में सुधार का एक शक्तिशाली साधन हो सकता है।
रोचक तथ्य
- प्रतिक्रियात्मक नाटक: 'लेस फेमेस' की आलोचना' मोलिएर द्वारा सीधे तौर पर 'लेस फेमेस' की व्यापक आलोचना का जवाब देने के लिए लिखा गया था। यह मोलिएर की अपने आलोचकों के खिलाफ लड़ने की रणनीति का हिस्सा था।
- आत्मरक्षा का साधन: मोलिएर ने इस नाटक को अपने स्वयं के काम का बचाव करने के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया, विशेष रूप से 'लेस फेमेस' में दिखाए गए कुछ विवादास्पद दृश्यों और संवादों के लिए।
- स्व-परोडी और मेटाथिएटर: यह नाटक एक प्रकार का "मेटाथिएटर" है, जहाँ थिएटर का उपयोग खुद थिएटर पर टिप्पणी करने के लिए किया जाता है। मोलिएर अपने आलोचकों के तर्कों को पात्रों के माध्यम से प्रस्तुत करके उनका मज़ाक उड़ाते हैं।
- आलोचकों का प्रतिबिंब: 'लेस फेमेस' की आलोचना' में दिखाए गए विभिन्न आलोचक मोलिएर के समय के विभिन्न प्रकार के आलोचकों (अकादमिक, संकीर्ण मानसिकता वाले, सतही) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- कम मंचन: 'लेस फेमेस' की आलोचना' को आमतौर पर 'लेस फेमेस' की तुलना में कम बार मंचित किया जाता है, लेकिन यह मोलिएर की रचनात्मक प्रक्रिया और उनके समय के साहित्यिक विवादों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
