रिचर्ड द्वितीय - विलियम शेक्सपियर
सारांश विलियम शेक्सपियर का नाटक 'रिचर्ड द्वितीय' इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय के पतन और हेनरी बोलिंगब्रोक (जो बाद में हेनरी चतुर्थ बने) ...
सारांश
विलियम शेक्सपियर का नाटक 'रिचर्ड द्वितीय' इंग्लैंड के राजा रिचर्ड द्वितीय के पतन और हेनरी बोलिंगब्रोक (जो बाद में हेनरी चतुर्थ बने) के सत्ता में आने की कहानी है। नाटक की शुरुआत रिचर्ड द्वारा बोलिंगब्रोक और थॉमस मोब्रे के बीच एक झगड़े को सुलझाने के प्रयास से होती है, जिसमें वह दोनों को देश निकाला दे देता है। जब रिचर्ड के धनी चाचा जॉन ऑफ गौंट की मृत्यु होती है, तो रिचर्ड उसकी सारी संपत्ति जब्त कर लेता है ताकि आयरलैंड में युद्ध के लिए धन जुटा सके, जिससे कई रईस क्रोधित हो जाते हैं। निर्वासित बोलिंगब्रोक, गौंट का पुत्र, इस अन्याय को ठीक करने और अपनी विरासत वापस पाने के लिए इंग्लैंड लौटता है। रिचर्ड की अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए, बोलिंगब्रोक को जनता और अन्य असंतुष्ट रईसों का समर्थन मिलता है। आयरलैंड से लौटने पर, रिचर्ड अपनी सेना को बिखरा हुआ और अपने समर्थकों को भागते हुए पाता है। वह धीरे-धीरे अपनी शक्ति और मुकुट बोलिंगब्रोक को सौंपने के लिए मजबूर हो जाता है। अंत में, रिचर्ड को गिरफ्तार कर पोनटफ्रेक्ट महल में कैद कर दिया जाता है, जहाँ उसकी हत्या कर दी जाती है, जिससे बोलिंगब्रोक को अपराधबोध होता है और वह एक नए युग की शुरुआत करता है। यह नाटक राजा की दैवीय सत्ता और उसकी मानव कमजोरियों के बीच के संघर्ष को दर्शाता है।
किताब के अनुभाग
अनुभाग 1: एक्ट I
इंग्लैंड का राजा रिचर्ड द्वितीय, शाही सत्ता के शिखर पर है, लेकिन उसकी अदूरदर्शिता और चाटुकारों पर निर्भरता के कारण देश में असंतोष पनप रहा है। नाटक की शुरुआत किंग रिचर्ड के कोर्ट में होती है, जहाँ उसका चचेरा भाई, हेनरी बोलिंगब्रोक, नॉरफ़ॉक के ड्यूक, थॉमस मोब्रे पर उच्च राजद्रोह और किंग रिचर्ड के चाचा, ड्यूक ऑफ ग्लूसेस्टर की हत्या का आरोप लगाता है। मोब्रे इन आरोपों से इनकार करता है और बदले में बोलिंगब्रोक पर देशद्रोही होने का आरोप लगाता है। दोनों अपनी निर्दोषता साबित करने के लिए द्वंद्वयुद्ध का आग्रह करते हैं। किंग रिचर्ड द्वंद्वयुद्ध को रोकने की कोशिश करता है, लेकिन जब वे पीछे हटने से इनकार करते हैं, तो वह उन्हें लड़ने की अनुमति देता है। हालाँकि, जैसे ही द्वंद्व शुरू होने वाला होता है, रिचर्ड उसे रोक देता है और दोनों को देश निकाला दे देता है। बोलिंगब्रोक को दस साल के लिए और मोब्रे को जीवन भर के लिए देश से बाहर कर दिया जाता है, जिसे बाद में रिचर्ड बोलिंगब्रोक के लिए घटाकर छह साल कर देता है। रिचर्ड की यह कार्रवाई उसके मनमानी शासन और न्याय के साथ खिलवाड़ को दर्शाती है।
| चरित्र | विशेषताएँ | प्रेरणाएँ |
|---|---|---|
| किंग रिचर्ड द्वितीय | युवा, अहंकारी, मनमाना, राजसी अधिकार पर विश्वास करने वाला, अपने चाटुकारों से घिरा हुआ, निर्णय लेने में अस्थिर। | अपनी सत्ता और दैवीय अधिकार को बनाए रखना, अपनी इच्छा के अनुसार शासन करना, विरोधियों को वश में करना। |
| हेनरी बोलिंगब्रोक | किंग रिचर्ड का चचेरा भाई, ड्यूक ऑफ लैंकेस्टर का पुत्र, महत्वाकांक्षी, कुशल, जनता का प्रिय। | अपनी विरासत और प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करना, किंग रिचर्ड के कुशासन को चुनौती देना। |
| थॉमस मोब्रे | नॉरफ़ॉक का ड्यूक, अभिमानी, रहस्यमय। | अपनी निर्दोषता साबित करना, अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखना। |
| जॉन ऑफ गौंट | किंग रिचर्ड का चाचा, ड्यूक ऑफ लैंकेस्टर, अनुभवी, बुद्धिमान, देशभक्त। | इंग्लैंड के भविष्य और किंग रिचर्ड के व्यवहार को लेकर चिंतित, अपनी पारिवारिक विरासत की रक्षा करना। |
| ड्यूक ऑफ यॉर्क | किंग रिचर्ड का चाचा, वृद्ध, वफादार लेकिन अनिच्छुक। | शाही परिवार और देश के प्रति अपनी वफादारी बनाए रखना, शांति बनाए रखना। |
अनुभाग 2: एक्ट II
जॉन ऑफ गौंट मर रहा है। अपनी मृत्युशय्या पर, वह किंग रिचर्ड को सलाह देने की कोशिश करता है, उसे बताता है कि वह इंग्लैंड को बर्बाद कर रहा है और उसके कुशासन से देश पीड़ित है। गौंट की प्रसिद्ध 'यह इंग्लैंड' (This England) भाषण में वह देश के गौरव का बखान करता है और रिचर्ड के अक्षम शासन की आलोचना करता है। रिचर्ड गौंट की सलाह को अस्वीकार कर देता है और उसकी मृत्यु पर, वह आयरलैंड में युद्ध के लिए धन जुटाने के लिए गौंट की सभी संपत्तियों को जब्त कर लेता है, जो बोलिंगब्रोक की कानूनी विरासत थी। यह कार्रवाई कई अन्य रईसों को क्रोधित करती है, जो इसे किंग रिचर्ड द्वारा अपनी इच्छा से कानून तोड़ने के रूप में देखते हैं। इस बीच, बोलिंगब्रोक को पता चलता है कि रिचर्ड आयरलैंड गया है, और वह अपनी विरासत को वापस पाने के बहाने इंग्लैंड लौट आता है। उसे नॉर्थम्बरलैंड, रॉस और विलॉबी जैसे शक्तिशाली रईसों का समर्थन मिलता है, जो किंग रिचर्ड से असंतुष्ट हैं। ड्यूक ऑफ यॉर्क, जिसे रिचर्ड ने अपने रीजेंट के रूप में छोड़ दिया था, किंग रिचर्ड के व्यवहार से व्यथित है, लेकिन अपने भतीजे के प्रति अपनी वफादारी के कारण निष्क्रिय रहने का फैसला करता है।
अनुभाग 3: एक्ट III
किंग रिचर्ड आयरलैंड से लौटता है और पाता है कि उसकी स्थिति बहुत खराब हो गई है। उसकी सेनाएं बिखर गई हैं, और उसके कई वफादार सहयोगी या तो भाग गए हैं या बोलिंगब्रोक के साथ मिल गए हैं। रिचर्ड के करीबी चाटुकार बुशी, बैगोट और ग्रीन को बोलिंगब्रोक ने पकड़ लिया और राजद्रोह के आरोप में फाँसी दे दी। रिचर्ड को एहसास होता है कि उसकी शक्ति कम हो रही है, और वह निराशा और दार्शनिक चिंतन में डूब जाता है। वह प्रसिद्ध पंक्तियाँ बोलता है कि "हम सभी को मरना होगा, किंग्स भी"। बोलिंगब्रोक की बढ़ती शक्ति के बीच, रिचर्ड अंततः फ्लिंट कैसल में उससे मिलने के लिए सहमत होता है। इस मुलाकात में, रिचर्ड अपनी शाही गरिमा को बनाए रखने की कोशिश करता है, लेकिन बोलिंगब्रोक उसे मजबूर करता है कि वह उससे मिलने के लिए नीचे आए। यह रिचर्ड के पतन की शुरुआत का प्रतीक है। बोलिंगब्रोक जोर देकर कहता है कि वह केवल अपनी विरासत वापस पाने आया है, लेकिन उसकी हरकतें कहीं अधिक महत्वाकांक्षा का संकेत देती हैं। रिचर्ड को लंदन ले जाया जाता है, जहाँ उसे भीड़ की उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
अनुभाग 4: एक्ट IV
किंग रिचर्ड को संसद के सामने लाया जाता है, जहाँ उसे औपचारिक रूप से सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। यह नाटक का सबसे मार्मिक और प्रतीकात्मक दृश्य है। रिचर्ड अपना मुकुट उतारने और उसे बोलिंगब्रोक को सौंपने के लिए अनिच्छुक है, लेकिन उसे कोई विकल्प नहीं दिया जाता है। वह एक दर्पण मंगवाता है और उसमें अपनी परछाई को देखकर अपने पिछले गौरव और वर्तमान निराशा पर विचार करता है। वह पूछता है, "क्या यह वही चेहरा है जिसे राजाओं ने देखा था?" वह अपनी गरिमा और शक्ति के खो जाने पर विलाप करता है। बोलिंगब्रोक, अब किंग हेनरी चतुर्थ, सिंहासन ग्रहण करता है। इस प्रक्रिया में, कार्लिस्ले के बिशप रिचर्ड के दैवीय अधिकार का बचाव करते हैं और बोलिंगब्रोक की usurpation को पाप बताते हैं, लेकिन उन्हें चुप करा दिया जाता है और गिरफ्तार कर लिया जाता है। संसद में रिचर्ड के खिलाफ कई आरोप लगाए जाते हैं, और वह अंततः अपने अपराधों को स्वीकार करने के लिए मजबूर हो जाता है, हालांकि वह कहता है कि उसने कभी अपनी राजगद्दी नहीं छोड़ी बल्कि उसे छीन लिया गया।
अनुभाग 5: एक्ट V
किंग हेनरी चतुर्थ अब राजा है, लेकिन उसे तुरंत ही रिचर्ड के समर्थकों से विद्रोह का सामना करना पड़ता है। यॉर्क का ड्यूक अपने बेटे ऑमरल के हेनरी के खिलाफ साजिश में शामिल होने का खुलासा करता है। हालांकि, यॉर्क की पत्नी, डचेस ऑफ यॉर्क, अपने बेटे को क्षमा करने की विनती करती है, और हेनरी उसे क्षमा कर देता है। इस बीच, रिचर्ड को पोनटफ्रेक्ट महल में कैद कर दिया जाता है। हेनरी चतुर्थ, अपने नए शासन को मजबूत करने के लिए, रिचर्ड की उपस्थिति को खतरा मानता है। वह सार्वजनिक रूप से पूछता है कि क्या कोई है जो उसे रिचर्ड से छुटकारा दिलाएगा। सर पियरर्स एक्सटन इस संकेत को एक आदेश के रूप में लेता है और रिचर्ड को महल में मार डालता है। अपनी मृत्यु से पहले, रिचर्ड अपने भाग्य पर चिंतन करता है और अपनी हत्यारों का बहादुरी से सामना करता है। एक्सटन हेनरी के सामने रिचर्ड के शरीर को लाता है, यह उम्मीद करते हुए कि उसे पुरस्कृत किया जाएगा। हालांकि, हेनरी रिचर्ड की हत्या पर क्रोधित होता है और एक्सटन को देश से बाहर निकाल देता है। वह खुद को रिचर्ड की मृत्यु के लिए दोषी महसूस करता है और अपने अपराधों के प्रायश्चित के लिए एक धर्मयुद्ध पर जाने की कसम खाता है, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं होता है। नाटक एक नई राजनीतिक अस्थिरता के साथ समाप्त होता है, जो भविष्य के नाटकों (जैसे हेनरी चतुर्थ, भाग 1 और 2) के लिए मंच तैयार करता है।
साहित्यिक शैली: ऐतिहासिक नाटक, त्रासदी, पद्य नाटक।
लेखक के बारे में तथ्य:
- विलियम शेक्सपियर (1564-1616) को अंग्रेजी भाषा का सबसे महान लेखक और दुनिया का सबसे बड़ा नाटककार माना जाता है। उन्हें अक्सर इंग्लैंड के राष्ट्रीय कवि और "बार्ड ऑफ एवन" के रूप में जाना जाता है।
- उन्होंने लगभग 39 नाटक, 154 सॉनेट, तीन लंबी कथा कविताएं और कुछ अन्य छंद लिखे। उनके नाटकों का लगभग हर प्रमुख जीवित भाषा में अनुवाद किया गया है और उन्हें किसी भी अन्य नाटककार की तुलना में अधिक बार प्रदर्शित किया जाता है।
- उनके नाटकों को मुख्य रूप से त्रासदी, कॉमेडी और ऐतिहासिक नाटकों में वर्गीकृत किया जाता है। 'रिचर्ड द्वितीय' उनके ऐतिहासिक नाटकों की श्रृंखला का हिस्सा है जो इंग्लैंड के राजाओं के बारे में है।
- शेक्सपियर ने अपने जीवनकाल में काफी सफलता और सम्मान प्राप्त किया, लेकिन उनकी मृत्यु के सदियों बाद ही उन्हें वैश्विक साहित्यिक आइकन के रूप में मान्यता मिली।
नैतिक शिक्षा:
'रिचर्ड द्वितीय' की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि सत्ता एक नाजुक वस्तु है, और भले ही एक राजा को दैवीय अधिकार से शासन करने के लिए माना जाता है, उसे अपने विषयों के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए। अन्यायपूर्ण शासन और अपनी इच्छा से कानून तोड़ने से अंततः राजा का पतन हो सकता है। नाटक यह भी दर्शाता है कि सत्ता का लालच और महत्वाकांक्षा विनाशकारी हो सकती है, और usurption (सत्ता हथियाना) के गंभीर परिणाम होते हैं, जो न केवल usurper को बल्कि पूरे देश को प्रभावित करते हैं, जिससे भविष्य में अस्थिरता और संघर्ष पैदा होता है। यह कर्तव्य, दैवीय अधिकार और मानवीय कमजोरियों के बीच के संघर्ष को उजागर करता है।
दिलचस्प बातें:
- यह नाटक शेक्सपियर के "हेप्टार्ची" या "हेनरीडा" के रूप में जाने जाने वाले ऐतिहासिक नाटकों की श्रृंखला का पहला भाग है, जिसमें रिचर्ड द्वितीय से लेकर हेनरी चतुर्थ और हेनरी पंचम तक के राजाओं की कहानी बताई गई है।
- 'रिचर्ड द्वितीय' पूरी तरह से पद्य में लिखा गया है, जिसमें कोई गद्य नहीं है, जो शेक्सपियर के ऐतिहासिक नाटकों में असामान्य है। यह इसे एक विशेष काव्यात्मक गुणवत्ता देता है।
- नाटक में रिचर्ड के दैवीय अधिकार पर जोर दिया गया है, जो एलिजाबेथ युग के दौरान राजाओं के दैवीय अधिकार की तत्कालीन अवधारणा को दर्शाता है। यह अवधारणा बताती है कि राजा को सीधे ईश्वर द्वारा चुना जाता है और वह केवल ईश्वर के प्रति जवाबदेह होता है, न कि अपने विषयों या संसद के प्रति।
- यह नाटक 1601 में एसेक्स के अर्ल के विद्रोह से जुड़ा था। विद्रोहियों ने विद्रोह के पूर्व संध्या पर ग्लोब थिएटर में 'रिचर्ड द्वितीय' के प्रदर्शन का कमीशन दिया, इस उम्मीद में कि यह लोगों को एलिजाबेथ प्रथम के खिलाफ विद्रोह करने के लिए प्रेरित करेगा (जैसा कि रिचर्ड के खिलाफ हुआ था)। हालाँकि, विद्रोह विफल रहा।
