zaire - volteyar

सारांश

'ज़ैरे' वोल्टेयर का एक पाँच-अभिनय वाला त्रासदी नाटक है, जो प्रेम, कर्तव्य, धार्मिक निष्ठा और ईर्ष्या के जटिल विषयों से संबंधित है। कहानी ओस्मान साम्राज्य के यरूशलेम में घटित होती है, जहाँ सुल्तान ओरोसमान को एक युवा ईसाई बंदी, ज़ैरे से प्रेम हो जाता है, जिसे बचपन से ही हरम में पाला गया है। ज़ैरे भी ओरोसमान से प्यार करती है। उनकी शादी की योजना बन रही होती है, तभी कुछ पुराने ईसाई कैदियों को रिहा किया जाता है, जिनमें से एक फ्रांसीसी राजकुमार, लुसिग्नन, यरूशलेम का पूर्व राजा, और एक शूरवीर, नेरेस्टन शामिल हैं। ज़ैरे को पता चलता है कि लुसिग्नन उसका पिता है और नेरेस्टन उसका भाई। अपने नव-खोजे गए परिवार और ईसाई धर्म के प्रति कर्तव्य की भावना से ग्रस्त होकर, ज़ैरे ओरोसमान से शादी करने और इस्लाम अपनाने के विचार से जूझती है। वह अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए शादी टालने की कोशिश करती है, लेकिन ओरोसमान इसे बेवफाई का संकेत मानता है। नेरेस्टन के साथ ज़ैरे की गुप्त मुलाकातों को ओरोसमान गलत समझता है, यह सोचकर कि वह किसी और से प्यार करती है। ईर्ष्या से अंधा होकर, वह ज़ैरे की हत्या कर देता है। बाद में, जब उसे ज़ैरे की मासूमियत और उसके सच्चे इरादों का पता चलता है, तो वह गहरे पछतावे से भर जाता है और आत्महत्या कर लेता है, जबकि ईसाई कैदियों को रिहा कर दिया जाता है।

किताब के अनुभाग

अनुभाग 1: प्रथम अभिनय

यरूशलेम में, सुल्तान ओरोसमान ने ईसाई कैदियों के एक समूह को रिहा करने का आदेश दिया है। वह अपनी प्यारी ज़ैरे से शादी करने की तैयारी कर रहा है, जो एक युवा ईसाई महिला है जिसे बचपन में पकड़ लिया गया था और हरम में पाला गया था। ज़ैरे भी ओरोसमान से प्यार करती है, लेकिन वह अपने ईसाई मूल और अतीत के बारे में अनजान है। फ्रांसीसी शूरवीर नेरेस्टन उन कैदियों में से एक है जिसे रिहा किया जा रहा है। वह ओरोसमान से प्रार्थना करता है कि वह उन कैदियों में से एक बूढ़े, सम्मानजनक व्यक्ति को रिहा करे, जो उसे उसके अतीत से जुड़े किसी व्यक्ति जैसा लगता है। यह वृद्ध व्यक्ति लुसिग्नन है, यरूशलेम का पूर्व राजा। ओरोसमान, ज़ैरे के लिए अपने प्रेम और उसके लिए कुछ भी करने की इच्छा से प्रेरित होकर, नेरेस्टन की विनती मान लेता है और लुसिग्नन को रिहा करने का आदेश देता है।

कुंजी पात्र विशेषताएँ प्रेरणाएँ
ओरोसमान यरूशलेम का शक्तिशाली और उदार सुल्तान; भावुक और ईर्ष्यालु स्वभाव का। ज़ैरे से सच्चा प्रेम; अपनी सत्ता और सम्मान बनाए रखना; न्यायप्रिय दिखना।
ज़ैरे युवा, सुंदर ईसाई बंदी; हरम में पली-बढ़ी; अपने अतीत से अनजान; मासूम और वफादार। ओरोसमान के प्रति प्रेम और कृतज्ञता; बाद में अपने नए परिवार के प्रति कर्तव्य।
नेरेस्टन बहादुर फ्रांसीसी शूरवीर; बुद्धिमान और दयालु। अपने साथी ईसाई कैदियों की रिहाई सुनिश्चित करना; लुसिग्नन की मदद करना; ईसाई धर्म के प्रति निष्ठा।
लुसिग्नन यरूशलेम का वृद्ध, सम्मानित पूर्व राजा; कई वर्षों से बंदी। अपने परिवार और ईसाई धर्म के प्रति गहरा प्रेम; स्वतंत्रता प्राप्त करना; अपने बच्चों को खोजना।

अनुभाग 2: द्वितीय अभिनय

लुसिग्नन और ज़ैरे की मुलाकात होती है। लुसिग्नन, अपने परिवार की तलाश में, ज़ैरे के गले में एक क्रॉस देखता है, जिसे उसकी माँ ने उसे दिया था। उसे एहसास होता है कि ज़ैरे उसकी बेटी है, जिसे बचपन में उससे छीन लिया गया था। नेरेस्टन को भी पता चलता है कि वह उसका भाई है। यह रहस्योद्घाटन ज़ैरे को गहरा सदमा पहुँचाता है। उसके लिए ओरोसमान से शादी करना अब केवल एक व्यक्तिगत पसंद नहीं रह जाता, बल्कि अपने परिवार और ईसाई धर्म के प्रति एक विश्वासघात बन जाता है। लुसिग्नन अपनी बेटी से वादा लेता है कि वह ईसाई रहेगी और ओरोसमान से शादी नहीं करेगी, अन्यथा वह उसे त्याग देगा। ज़ैरे अब अपने प्रेम और अपने परिवार और धर्म के प्रति कर्तव्य के बीच फँस जाती है। वह ओरोसमान से शादी टालने की कोशिश करती है।

अनुभाग 3: तृतीय अभिनय

ज़ैरे ओरोसमान से शादी की तारीख आगे बढ़ाने के लिए विनती करती है, जिससे ओरोसमान भ्रमित और चिंतित हो जाता है। वह ज़ैरे के बदल रहे व्यवहार को समझ नहीं पाता है और उसके गुप्त कारणों पर संदेह करने लगता है। ज़ैरे, अपने पिता और भाई के साथ गुप्त रूप से मिलने के लिए, नेरेस्टन को अपने भाई के रूप में ओरोसमान के सामने प्रकट नहीं करती है। इस बीच, नेरेस्टन लुसिग्नन और ज़ैरे के साथ मिलकर एक योजना बनाता है ताकि ज़ैरे को ईसाई रीति-रिवाजों के अनुसार बपतिस्मा दिया जा सके और फिर उसे सुरक्षित रूप से मुक्त कराया जा सके। ज़ैरे, भावनात्मक रूप से फँसी हुई, इस योजना में सहयोग करती है, लेकिन वह अपने प्रिय ओरोसमान के प्रति विश्वासघाती महसूस करती है।

अनुभाग 4: चतुर्थ अभिनय

ओरोसमान, ज़ैरे के रहस्यमय व्यवहार और नेरेस्टन के साथ उसकी गुप्त मुलाकातों को देखकर अत्यधिक ईर्ष्यालु हो जाता है। उसे लगता है कि ज़ैरे उससे प्यार नहीं करती है और किसी और से प्यार करती है, शायद नेरेस्टन से। वह ज़ैरे को चुनौती देता है, लेकिन ज़ैरे अपने परिवार के रहस्य को उजागर किए बिना अपने कार्यों को समझाने में असमर्थ रहती है, क्योंकि उसे डर है कि इससे उसके पिता और भाई को खतरा हो सकता है। ओरोसमान का क्रोध और ईर्ष्या बढ़ती जाती है। वह ज़ैरे के पत्र को पकड़ लेता है, जिसमें नेरेस्टन के साथ उसके मिलने की योजना का उल्लेख है, लेकिन उसमें भाई-बहन के संबंध का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह ओरोसमान को विश्वास दिलाता है कि ज़ैरे ने उसे धोखा दिया है।

अनुभाग 5: पंचम अभिनय

अपनी ईर्ष्या और धोखे के विश्वास से अंधा होकर, ओरोसमान नेरेस्टन के साथ ज़ैरे की मुलाकात के दौरान उसे घातक रूप से चाकू मार देता है। जब ज़ैरे मर रही होती है, तो वह अपनी सच्चाई बताती है – कि लुसिग्नन उसका पिता है और नेरेस्टन उसका भाई, और वह ओरोसमान से अभी भी प्यार करती है। ओरोसमान को अपनी भयानक गलती का एहसास होता है। उसने जिस महिला से प्यार किया था, उसे उसने गलतफहमी और ईर्ष्या के कारण मार डाला है। अपने अपराध और पछतावे से अभिभूत होकर, ओरोसमान आत्महत्या कर लेता है। नाटक के अंत में, ओरोसमान के वज़ीर, फ़ताक, नेरेस्टन और अन्य सभी ईसाई कैदियों को रिहा करने का आदेश देता है, क्योंकि सुल्तान की अंतिम इच्छा यही थी। यह त्रासदी प्रेम, विश्वास और ईर्ष्या के विनाशकारी परिणामों को दर्शाती है।


साहित्यिक शैली: त्रासदी; पांच-अभिनय वाला वर्स प्ले (verse play)।

लेखक के बारे में:
फ्रैंकोइस-मैरी अरौएट (François-Marie Arouet) (1694-1778), जिसे उसके कलम नाम वोल्टेयर से बेहतर जाना जाता है, एक फ्रांसीसी प्रबुद्धता युग का लेखक, इतिहासकार और दार्शनिक था। वह अपने वाक्पटुता, नागरिक स्वतंत्रता की वकालत, जिसमें धर्म की स्वतंत्रता, मुक्त व्यापार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और चर्च व राज्य के पृथक्करण शामिल हैं, और उनके ईसाई धर्म, यहूदी धर्म और इस्लाम के साथ-साथ फ्रांसीसी राजशाही की आलोचना के लिए प्रसिद्ध थे। वोल्टेयर एक विपुल लेखक थे, जिन्होंने नाटक, कविता, उपन्यास, निबंध, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक कृतियाँ लिखीं। 'ज़ैरे' (1732) उनका एक सफल और प्रभावशाली नाटक था, जो शेक्सपियर के प्रभाव को दर्शाता है।

नैतिक शिक्षा:
'ज़ैरे' की मुख्य नैतिक शिक्षा यह है कि ईर्ष्या और गलतफहमी के कारण होने वाले अंध क्रोध से विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। नाटक यह भी दर्शाता है कि प्रेम, कर्तव्य और धार्मिक निष्ठा के बीच संघर्ष एक व्यक्ति को कैसे तोड़ सकता है। यह धार्मिक सहिष्णुता के महत्व पर भी संकेत करता है, और यह कि पूर्वाग्रह और गुप्त उद्देश्य कितने घातक हो सकते हैं।

जिज्ञासाएँ:

  • शेक्सपियर का प्रभाव: वोल्टेयर ने इस नाटक में विलियम शेक्सपियर के नाटक 'ओथेलो' से प्रेरणा ली थी, विशेष रूप से ईर्ष्या से प्रेरित हत्या के विषय में। वोल्टेयर ने अंग्रेजी नाटककारों की सादगी और शक्ति की प्रशंसा की, जिसे उन्होंने अपने स्वयं के काम में शामिल करने की कोशिश की।
  • सफलता: 'ज़ैरे' वोल्टेयर के सबसे सफल और लोकप्रिय नाटकों में से एक था। इसका प्रीमियर 1732 में हुआ और इसे तुरंत सराहा गया।
  • नामकरण: इस नाटक का नामकरण वोल्टेयर ने एक तुर्की राजकुमारी के नाम पर किया था, जो पश्चिमी दर्शकों के लिए विदेशी और रहस्यमय प्रतीत होती थी।
  • धार्मिक विषय: नाटक ईसाई और मुस्लिम दुनिया के बीच के तनाव को दर्शाता है, लेकिन वोल्टेयर ने दोनों धर्मों में अच्छे और बुरे दोनों पात्रों को चित्रित करके धार्मिक सहिष्णुता के लिए तर्क दिया। नाटक उस समय के लिए काफी प्रगतिशील था क्योंकि इसने एक मुस्लिम चरित्र, ओरोसमान, को एक जटिल और सहानुभूतिपूर्ण तरीके से चित्रित किया था।
  • प्रबुद्धता का संदेश: वोल्टेयर ने अपने नाटकों का उपयोग अक्सर सामाजिक और नैतिक संदेशों को संप्रेषित करने के लिए किया। 'ज़ैरे' में, वह मानवीय जुनून और पूर्वाग्रहों की तर्कहीनता पर टिप्पणी करता है।